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Tuesday,20-October-2026
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कांग्रेस की मान्यता रद्द कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में डाली गई याचिका

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नई दिल्ली, 22 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को बिहार एसआईआर को लेकर अहम सुनवाई है। इससे ठीक पहले एक अहम जनहित याचिका ने कांग्रेस की मुसीबत बढ़ा दी है। याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल ने चुनाव आयोग के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने वाली कांग्रेस की मान्यता रद्द कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल डाली है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी के आरोप बेहद गंभीर और गैर जिम्मेदाराना हैं। इन दोनों ने एक संवैधानिक संस्था की साख को ठेस पहुंचाने की कोशिश की है और ऐसे में न सिर्फ पार्टी की मान्यता रद्द हो बल्कि इनके दुष्प्रचार की जांच एसआईटी से कराई जाए।

दावा है कि कांग्रेस पार्टी ने संविधान के प्रति वफादारी की शपथ को तोड़ा है। याचिका में कुछ नियमों का हवाला दिया गया है। कहा गया है कि कांग्रेस ने अपनी स्थापना के समय भारत के संविधान के प्रति निष्ठा बनाए रखने की शपथ ली थी। हालांकि, ईसीआई के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान इस शपथ का उल्लंघन करता है और आयोग के कार्यों को गैरकानूनी तरीके से बाधित करने की कोशिश कर रहा है।

नियमों का हवाला देते हुए पीआईएल कहती है- निर्वाचन आयोग को देशभर में मतदाता सूची तैयार करने और संशोधन करने का विशेष अधिकार प्राप्त है, जो प्रतिनिधित्व जनता अधिनियम, 1951 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से इस मामले में त्वरित सुनवाई की मांग उठाई है।

याचिकाकर्ता ने कांग्रेस के कुछ नेताओं के खिलाफ चलाए जा रहे ‘दुष्प्रचार’ की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराई जाए और उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

शुक्रवार को देश की शीर्ष अदालत चुनावी राज्य बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई फिर से शुरू करेगी। यह इस बात की समीक्षा करेगी कि क्या मतदाता सूची के परीक्षण का काम बिहार में सही तरीके से किया जा रहा है।

राष्ट्रीय समाचार

गुजरात : बिजली डिमांड में 36.6 प्रतिशत की उछाल, केंद्र से अतिरिक्त 5,000 मेगावाट की मांग की गई

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गुजरात में 16 अक्टूबर को बिजली की अब तक की सबसे अधिक मांग 29,822 मेगावाट दर्ज की गई। यह पिछले साल अक्टूबर में दर्ज की गई 21,822 मेगावाट की मांग से 36.6 प्रतिशत अधिक है। इसके चलते राज्य सरकार ने कोयले की आपूर्ति बढ़ाने, बैटरी स्टोरेज का विस्तार करने और केंद्र से अतिरिक्त बिजली आवंटित करने की मांग की है।

राज्य में बिजली की दैनिक खपत 16 अक्टूबर को बढ़कर 574 मिलियन यूनिट हो गई, जो पिछले साल अक्टूबर में 457 मिलियन यूनिट थी। यह लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि है।

मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में दी गई प्रस्तुति के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में सितंबर और अक्टूबर के दौरान बिजली की मांग में लगभग 12 प्रतिशत (यानी 4,000 मेगावाट) की वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में किसानों, उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की समीक्षा की गई। साथ ही, गुजरात की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को पूरा करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

इस बैठक में ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल, ऊर्जा राज्य मंत्री कौशिक वेकारिया और मुख्य सचिव मनोज कुमार दास के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

सरकार ने मांग में इस वृद्धि का कारण कमजोर मानसून के बाद लगातार बना हुआ उच्च तापमान और ‘अल नीनो’ के प्रभाव को बताया है, जिसके कारण कूलिंग से जुड़ी बिजली की खपत बढ़ गई है।

कृषि क्षेत्र में भी बिजली की मांग बढ़ी है, क्योंकि सरकार खड़ी फसलों की सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध करा रही है। इससे कृषि क्षेत्र का दैनिक लोड 12,000 मेगावाट के पीक स्तर तक पहुंच गया है।

दीपावली से पहले औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने से भी बिजली की मांग बढ़ी है। प्रस्तुति में बताया गया कि गुजरात और पड़ोसी राज्यों में कम बारिश होने से जलविद्युत उत्पादन कम हो गया है, जबकि हवा की गति कम होने से पवन ऊर्जा के उत्पादन पर भी असर पड़ा है।

सूर्यास्त के बाद सौर ऊर्जा का उत्पादन शून्य हो जाता है, जिससे शाम के पीक आवर्स (शाम 5 बजे से रात 11 बजे के बीच) में बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस दौरान बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए राज्य सरकार कोयले और गैस पर आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भर है।

बैठक में बताया गया कि ‘स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर’ और बिजली वितरण कंपनियां ग्रिड की फ्रीक्वेंसी और संतुलन बनाए रखने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही हैं।

कोयले की उपलब्धता को मजबूत करने के लिए, राज्य सरकार ने दिल्ली में उच्च-स्तरीय चर्चा की, ताकि ‘गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड’ (जीएसईसीएल) के लिए कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने गुजरात को नवंबर तक हर दिन कोयले की 10 से 11 रेलवे रेक (मालगाड़ी के डिब्बे) उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। नवंबर के बाद यह आपूर्ति बढ़कर 13 से 14 रेक प्रतिदिन हो जाएगी।

राज्य के बिजली संयंत्रों में कोयले के इस्तेमाल की कार्यक्षमता सुधारने के लिए भी विशेष कदम उठाए गए हैं। गुजरात ने नवंबर के लिए एनटीपीसी के फरक्का संयंत्र से 329 मेगावाट बिजली और केंद्रीय बिजली उत्पादन में असम के हिस्से से लंबी अवधि के लिए 551 मेगावाट बिजली हासिल की है।

एनटीपीसी के बरौनी-I और दादरी-I थर्मल पावर स्टेशनों के साथ 716 मेगावाट बिजली खरीद के मौजूदा समझौते की अवधि को एक साल बढ़ाकर मार्च 2028 तक कर दिया गया है। राज्य ने केंद्र के ‘अनएलोकेटेड पावर पूल’ (बिना आवंटित बिजली के भंडार) से अतिरिक्त 500 मेगावाट बिजली की भी मांग की है।

इसके साथ ही, सरकार ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज’ क्षमता का भी विस्तार कर रही है, ताकि दिन के समय बनने वाली सौर ऊर्जा को स्टोर किया जा सके और शाम के पीक आवर्स (जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है) में उसका इस्तेमाल किया जा सके।

गुजरात में अभी 192 मेगावाट क्षमता का ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ (बीईएसएस) काम कर रहा है। इसके अलावा, कुल 2,742 मेगावाट क्षमता और 5,517 मेगावाट हॉवर (एमडब्ल्यूएच) स्टोरेज क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए अनुबंध पूरे किए जा चुके हैं।

राज्य में दिन के समय लगभग 12,000 मेगावाट सौर ऊर्जा पैदा होती है। राज्य सरकार इसका अधिकतम उपयोग करने की योजना बना रही है, जिसमें कृषि कार्यों के लिए बिजली की खपत को दिन के उजाले वाले घंटों में तय करना भी शामिल है।

उम्मीद है कि गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड ‘शक्ति’ योजना के तहत 4,000 मेगावाट के लिए टेंडर जारी करेगा, जिससे 2030-31 से बिजली की आपूर्ति शुरू होने की संभावना है।

इसके अलावा, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ 4,200 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस परियोजना की पहली इकाई के 2032 में चालू होने की उम्मीद है।

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राजनीति

नामांकन तिथि विवाद: वाईएसआरसीपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

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विपक्षी उम्मीदवारों के खिलाफ हिंसा और बाधा डालने के आरोपों के मद्देनजर आंध्र प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाने से इनकार करने वाले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली वाईएसआरसीपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगा।

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित मामले की सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ बुधवार को सुबह 10:30 बजे इस मामले की सुनवाई करेगी।

संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें नामांकन प्रक्रिया के दौरान कथित व्यवधानों के मद्देनजर नामांकन प्राप्त करने की तिथि में एक दिन का विस्तार करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।

वाईएसआरसीपी का कहना है कि नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन, 16 अक्टूबर को, पुंगनूर, रायचोटी, कडप्पा और तिरुपति सहित कई क्षेत्रों में उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया था।

याचिका के अनुसार, कडप्पा में पार्टी के एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र कथित तौर पर जब्त कर फाड़ दिए गए, जबकि तिरुपति में कई उम्मीदवारों को संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों के कमरों में प्रवेश करने से शारीरिक रूप से रोका गया।

इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए यात्रा कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं और सांसद पीवी मिथुन रेड्डी पर हमला किया गया।

वाईएसआरसीपी ने इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में पर्याप्त सुरक्षा वाले वैकल्पिक नामांकन केंद्रों के लिए निर्देश देने की मांग की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सुरक्षित और निष्पक्ष नामांकन प्रक्रिया सुनिश्चित करने में विफलता संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।

हालांकि, 15 अक्टूबर को एक एकल न्यायाधीश ने पार्टी द्वारा मांगी गई व्यापक राहत देने से इनकार कर दिया, जबकि धमकियों का सामना कर रहे व्यक्तिगत उम्मीदवारों को वैकल्पिक स्थानों पर नामांकन दाखिल करने की अनुमति के लिए संबंधित चुनाव अधिकारियों से संपर्क करने की अनुमति दी।

वाईएसआरसीपी ने बाद में अपील दायर की और नामांकन की समय सीमा बढ़ाने की मांग की, जिसमें कहा गया कि कथित बाधाओं के कारण उसके उम्मीदवार चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सके।

18 अक्टूबर को याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि नामांकन दाखिल करने की समय सीमा समाप्त हो चुकी है और इस स्तर पर कोई भी निर्देश देना चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान होगा।

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राजनीति

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पुरुष प्रधान और संविधान विरोधी संगठन : राहुल गांधी

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लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरएसएस को एक पुरुष प्रधान और संविधान विरोधी संगठन बताया है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा कि आरएसएस एक पुरुष प्रधान, संविधान विरोधी संगठन है, जो मानता है कि महिलाएं पुरुषों की संपत्ति हैं। उन्होंने कहा कि मैं शिव-शक्ति में विश्वास करता हूं, इसलिए मुझे उनसे लड़ना इतना आनंद देता है। सबसे खूबसूरत बात यह है कि उनके संगठन की कई महिलाएं मेरे साथ हैं।

नेता विपक्ष ने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। अहंकार, अन्याय और अत्याचार पर सत्य और न्याय की विजय का यह पर्व आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए।

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अक्सर अपना ज्यादातर समय विदेश यात्राओं में बिताते हैं। राहुल गांधी भारत आते हैं, किसी मुद्दे पर विवाद खड़ा करते हैं और फिर विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं।

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी की विदेश यात्राओं के उद्देश्य और वहां उनकी मुलाकातों के बारे में लोगों को स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी से पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान की गई विदेश यात्राओं का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी इन यात्राओं के दौरान किन लोगों से मिलते हैं और उनके खर्च का भुगतान कौन करता है।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और एक सार्वजनिक हस्ती हैं। ऐसे में जनता को उनकी विदेश यात्राओं के उद्देश्य और खर्च के बारे में जानकारी मिलने का अधिकार है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए खंडेलवाल ने कहा कि उन्हें लगता है कि खड़गे ने आरोप लगाने से पहले कांग्रेस के इतिहास पर पर्याप्त नजर नहीं डाली है। खड़गे जिन कामों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, कांग्रेस खुद अपने शासनकाल में पहले ही ऐसे काम कर चुकी है।

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