राजनीति
मालेगांव ब्लास्ट पर फिल्म बनाने का निर्माताओं को पूरा अधिकार: राम कदम
RAM KADAM
मुंबई, 4 अगस्त। महाराष्ट्र भाजपा के वरिष्ठ नेता राम कदम ने मालेगांव ब्लास्ट पर फिल्म बनाने की वकालत की है और भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी के बयान का समर्थन किया है। मेधा कुलकर्णी ने सुझाव दिया था कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ की तर्ज पर ‘मालेगांव फाइल्स’ जैसी फिल्म बननी चाहिए, जो 2008 के मालेगांव बम विस्फोट की कहानी को सामने लाए। उनका कहना था कि यह फिल्म लोगों को इस घटना से जुड़े कथित कुकृत्यों और सच्चाइयो के बारे में जागरूक करेगी।
सोमवार को मिडिया से बातचीत में राम कदम ने कहा कि मेधा कुलकर्णी का मालेगांव फाइल्स पर फिल्म बनाने का सुझाव उचित है, क्योंकि यह साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के उस बयान को बल देता है जिसमें उन्होंने कहा था कि इस मामले में दोषियों का पर्दाफाश हो गया है। उन्होंने कहा कि न्याय का नियम है कि सत्य को अस्थायी रूप से दबाया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता।
राम कदम ने दावा किया कि मालेगांव विस्फोट मामले में पवित्र भगवा को आतंकवाद से जोड़ने की साजिश रची गई थी। उनके अनुसार, गवाहों और एटीएस अधिकारियों पर दबाव डाला गया ताकि हिंदू नेताओं और सनातन धर्म को बदनाम किया जाए। उन्होंने मांग की कि इस साजिश के पीछे के कांग्रेस नेताओं के नाम उजागर होने चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो कि वे किसे खुश करना चाहते थे।
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) नेता जितेंद्र आव्हाड के सनातन धर्म पर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, ” आव्हाड का बयान सनातन धर्म की छवि को जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश है। यह “सर्वे भवन्तु सुखिनः” (सभी सुखी हों) का संदेश देता है, विश्व को परिवार मानता है और मानवता की सेवा को सर्वोपरि रखता है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शरद पवार गुट इन मूल्यों को नहीं समझता? कदम ने आरोप लगाया कि एनसीपी (सपा) और कांग्रेस जैसे दल भगवा रंग को आतंकवाद से जोड़कर बदनाम करते हैं, जो उनके लिए पवित्र है। उन्होंने इसे एक विशेष धार्मिक समूह के प्रति तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा करार दिया।
कांग्रेस नेता उदित राज के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में अनेक देवी-देवताओं को पूजने और हर जीव-जंतु में ईश्वर का रूप देखने की परंपरा पर आपत्ति जताना गलत है। उन्होंने सावन के पवित्र महीने का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे बयान साधु-संतों और करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं, और इसके लिए शरद पवार गुट के नेता बददुआ के हकदार हैं।
बीएमसी चुनावों को लेकर उन्होंने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि महायुति गठबंधन (भाजपा, शिवसेना-एकनाथ शिंदे, और एनसीपी-अजित पवार) पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगा और जीत हमारी होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि महाराष्ट्र में भाजपा अग्रणी पार्टी बनी रहेगी और महायुति सत्ता में कायम रहेगी। कदम ने कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की आवाज उठाती है।
राम कदम ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों की कड़ी आलोचना की। कदम ने ‘अर्बन नक्सलवाद’ का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी एक तरफ संविधान का सम्मान करने का दावा करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ संवैधानिक संस्थाओं, जैसे चुनाव आयोग, पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाते हैं और समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश करते हैं।
2024 के लोकसभा चुनावों में संविधान बदला जाएगा। जैसे झूठे नैरेटिव फैलाकर वोट हासिल करने में सफल रहे राहुल गांधी, बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी ऐसा करना चाहते हैं।
तेजस्वी यादव के पास दो वोटर कार्ड को लेकर राम कदम ने धांधली का आरोप लगाया, और पूछा कि वोटर लिस्ट में दो नाम कैसे हो सकते हैं?
कदम ने यह भी कहा कि विपक्ष, खासकर बिहार में अपनी संभावित हार को देखते हुए, पहले से ही हार का बहाना बनाने के लिए चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहा है। कोर्ट ने राहुल गांधी को उनके बयानों के लिए फटकार लगाई है, लेकिन वे बचकानी बातें करते हैं।
अभी वह एटम बम की बात कर रहे हैं, मैं पूछना चाहता हूं कि क्यों वह सही मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं, सबूत है तो दिखाओ।
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका, गुरुवार को सुनवाई की उम्मीद

दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। वकील लक्ष्य सैनी और तुषार गुप्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर लंबे समय से राजधानी में विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होने की उम्मीद है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि लोगों को विरोध-प्रदर्शन के लिए शहर से दूर स्थित वैकल्पिक जगहों पर भेजा जाता है, तो आम नागरिकों के लिए अपनी आवाज उठाना और विरोध दर्ज कराना मुश्किल हो सकता है। इससे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाने का खतरा है।
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थलों की पहचान भी की है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा था कि वैकल्पिक स्थलों की पहचान सुप्रीम कोर्ट के पिछले सप्ताह के आदेश के अनुरूप की गई है। उन्होंने दलील दी कि शीर्ष अदालत ने उपयुक्त स्थलों की पहचान कर उन्हें निर्धारित करने को कहा था और अधिकारियों ने उसी के अनुसार कार्रवाई की है।
दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी मैदान को प्रदर्शन के लिए नए निर्धारित स्थलों के रूप में पेश किया है।
यह मामला भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब की उस याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने दलील दी कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई किए जाने के बाद उदय भानु चिब की याचिका निष्फल हो गई है। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि याचिका में उठाई गई अन्य मांगें अब भी विचारणीय हैं। उन्होंने इन मांगों पर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया।
दिल्ली पुलिस के वकील ने नोटिस जारी करने की मांग का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति महाजन ने याचिका में उठाई गई तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले सक्षम अधिकारियों से राजधानी में शांतिपूर्ण और वैध विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने और उन्हें निर्धारित करने पर विचार करने को कहा था। शीर्ष अदालत ने इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया था।
राजनीति
सुप्रिया सुले ने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर जताई चिंता, केंद्र से रिहाई की मांग

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी तथा उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप कर दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।
सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “जंतर-मंतर पर तिरंगा थामना कोई अपराध नहीं है। सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर चिंताजनक है। मैं गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप करने और उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध करती हूं।”
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए। असहमति लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर भारतीय को बिना भय के अपनी आवाज उठाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर अतिक्रमण के मामले में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जानकारी के अनुसार, सौरव दास को तिहाड़ जेल नंबर-2 और आशुतोष रांका को जेल नंबर-4 में रखा गया है। वहीं, इसी मामले में गिरफ्तार किए गए अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
सीजेपी नेताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिष्ट हेला ने बताया कि अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है। उन्होंने दावा किया कि यह आदेश पर्याप्त न्यायिक विचार किए बिना पारित किया गया और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने केवल आशंकाओं के आधार पर कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह मान लिया कि आरोपी कुछ कर सकते हैं और इसी आधार पर उन्हें पांच दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोगों को ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने और तिरंगा लहराने के लिए जेल भेजा जाना चिंताजनक है।
पुलिस के अनुसार, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर पुलिस बैरिकेड्स पार करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। तीनों नेता चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने जा रहे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान बनाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
सऊदी अरब में भारतीयों की तादाद ठीक-ठाक, दूतावास कर रहा हरसंभव मदद : विदेश मंत्रालय

भारत ने सऊदी अरब पर हो रहे मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक नागरिक या सार्वजनिक ठिकानों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। बिगड़ते हालात के भारतीय दूतावास की तरफ से अपने नागरिकों को पहुंचाई जा रही हरसंभव मदद का भी उल्लेख किया।
बुधवार को पाक्षिक प्रेस ब्रीफिंग में एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुए हमले को लेकर कहा, “सऊदी अरब पर कई हमले हुए हैं। कल अरामको मुख्यालय पर भी हमला हुआ। हम सऊदी अरब में आम लोगों के बुनियादी ढांचे पर हुए ऐसे सभी हमलों की निंदा करते हैं। हमारा मानना है कि ये हमले तुरंत बंद होने चाहिए। ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। हम सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की जनता और सरकार के साथ खड़े हैं, और हमें उम्मीद है कि इस इलाके में जल्द ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी।”
प्रवक्ता ने वहां रह रहे भारतीयों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “सऊदी अरब में हमारा दूतावास भारतीय समुदाय के लगातार संपर्क में है और उनकी भलाई के लिए एडवाइजरी जारी की है। हवाई अड्डों पर हमलों के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय एयरलाइंस, खासकर रियाद, दम्मम, मदीना और जेद्दा से आने-जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं। लेकिन कुछ सऊदी एयरलाइंस आ जा रही हैं। दूतावास यात्रियों और फंसे हुए लोगों को ताजा जानकारी दे रहा है। कह सकते हैं कि विकल्प तो हैं लेकिन साथ में दिक्कतें भी मौजूद हैं।”
हवाई अड्डे हमले में पीड़ितों, भारतीय प्रवासियों और धार्मिक यात्रा को लेकर पूछे सवाल पर जायसवाल ने कहा, “10 अक्टूबर के हमले में 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक की दुर्भाग्य से मौत हो गई। परिवार की इच्छानुसार, दूतावास की मदद से रियाद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बाकी 11 घायलों में से तीन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि आठ अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से चार आईसीयू में हैं। दूतावास के अधिकारी लगातार उनसे मिल रहे हैं और पीड़ित परिवारों के संपर्क में हैं। वहां भारतीय प्रवासियों और यात्रियों की संख्या ठीक-ठाक है और हम विदेश में अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा की खातिर हर संभव मदद करने को तत्पर हैं।”
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