राष्ट्रीय समाचार
2022 में सुरक्षा संबंधी पूर्व चेतावनियों के बावजूद गुजरात में 45 साल पुराना गंभीरा पुल ढहने से 14 लोगों की मौत, 6 लापता
वडोदरा: मध्य गुजरात को सौराष्ट्र से जोड़ने वाले महिसागर नदी पर बने 45 साल पुराने गंभीरा पुल का एक हिस्सा ढहने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है, जबकि छह लोग अभी भी लापता हैं। इस हादसे में पुल के ऊपर से गुजर रहे दो ट्रक, दो पिकअप और एक रिक्शा समेत कई वाहन दोनों किनारों पर बह रही महिसागर नदी में गिर गए।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 8 से ज़्यादा लोगों को बचा लिया गया है। गुरुवार सुबह एनडीआरएफ के तलाशी अभियान के दौरान एक और शव मिला, जिसे पादरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया है। छह लोग अभी भी लापता हैं और नदी में बचाव अभियान जारी है।
वडोदरा के मुजपुर गाँव के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की इस हादसे में मौत हो गई। मुजपुर गाँव में शोक की लहर दौड़ गई क्योंकि एक ही समय में पिता, पुत्र और पुत्री का अंतिम संस्कार किया गया। पिता रमेशभाई, पुत्र नायक और पुत्री वैदिका, सभी बगदाना बढ़ा पूरा करने जा रहे थे और रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के एक महीने से भी कम समय में गुजरात में एक और दुर्घटना घटी, जिसमें गंभीरा पुल का जर्जर हिस्सा ढह गया, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई।
यह हादसा बुधवार सुबह करीब 7 से 7.30 बजे हुआ। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुल टूटने से तीन ट्रक, दो इको, एक रिक्शा, एक पिकअप और दो बाइक नदी में गिर गए हैं।
मृतकों की पहचान वैदिक रमेशभाई पढियार, नैतिक रमेशभाई पढियार, हसमुखभाई महिजीभाई परमार, रमेशभाई दलपतभाई पढियार, उम्र 32, वखतसिंह मनुसिंह जादव, प्रवीणभाई रावजीभाई जादव, उम्र 26, ग्राम-उंडेल और तीन अन्य अज्ञात व्यक्तियों के रूप में की गई है।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने ट्वीट किया, “आनंद और वडोदरा को जोड़ने वाले गंभीरा पुल के 23 स्पैन में से एक के ढहने से हुई त्रासदी दुखद है। मैं इस दुर्घटना में जान गंवाने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ। वडोदरा कलेक्टर से बात करके घायलों के तत्काल उपचार की व्यवस्था करने और प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।”
स्थानीय नगरपालिका और वडोदरा नगर निगम की अग्निशमन टीम नावों और तैराकों के साथ दुर्घटनास्थल पर बचाव और राहत कार्य में जुटी हुई है, साथ ही एनडीआरएफ की टीम भी घटनास्थल पर पहुँचकर बचाव कार्य में जुट गई है। सड़क निर्माण विभाग को इस दुर्घटना की तुरंत जाँच के आदेश दे दिए गए हैं।
अगस्त 2022 में, वडोदरा जिला पंचायत के सदस्य हर्षदसिंह परमार ने अधिकारियों को लिखित रूप से चेतावनी दी। उन्होंने सड़क एवं भवन (आर एंड बी) प्रभाग के कार्यकारी अभियंता को एक पत्र लिखकर गंभीरा पुल का तत्काल स्थल निरीक्षण करने और उसे बंद करने का आग्रह किया।
परमार ने पत्रकारों को बताया, “पुल बेहद जर्जर हालत में था और मुझे भारी वाहनों के आवागमन के कारण दुर्घटना की आशंका साफ़ थी। मैंने इसे बंद करने और नया पुल बनाने की माँग की। लेकिन उन्होंने सिर्फ़ ऊपरी मरम्मत ही की।”
इतना ही नहीं, परमार ने अपने पत्र में मोरबी पुल के ढहने का हवाला देकर उपेक्षा के दुष्परिणामों पर ज़ोर दिया। उनकी चेतावनियों को वडोदरा कलेक्टर कार्यालय के अतिरिक्त सचिव ने भी दोहराया और पुल का निरीक्षण कर एक परीक्षण रिपोर्ट प्रकाशित करने का आदेश जारी किया। हालाँकि, मामूली मरम्मत के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई।
2022 में आधिकारिक तौर पर असुरक्षित घोषित किए जाने के बावजूद, गंभीरा पुल पर ट्रकों और बसों सहित वाहनों का पूरा आवागमन जारी रहा। सूत्र बताते हैं कि ₹212 करोड़ की लागत वाली एक नई पुल परियोजना को मंज़ूरी तो मिल गई थी, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं हुआ।
स्थानीय कार्यकर्ता रेखा सोलंकी ने कहा, “प्रशासन ने हर लाल झंडे को नज़रअंदाज़ कर दिया। यह कोई दुर्घटना नहीं है। यह प्रशासनिक हत्या है।”
पुल के ढहने की घटना राज्य सरकार द्वारा भारी बारिश से प्रभावित बुनियादी ढाँचे पर आयोजित बैठक के ठीक दो दिन बाद हुई है। इस घटना के समय ने जनता के आक्रोश को और बढ़ा दिया है।
राजनीति
ममता बनर्जी की सुरक्षा हटाने के आरोपों को कोलकाता पुलिस ने किया खारिज, कहा- केवल दो अधिकारियों की हुई अदला-बदली

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, कोलकाता पुलिस ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि राज्य सरकार ने जानबूझकर ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था वापस ले ली है।
बुधवार रात टीएमसी के दो राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन और सागरिका घोष तथा लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के सामने मौजूद पुलिस चौकी खाली दिखाई दे रही थी। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया था कि प्रशासन के निर्देश पर उनकी सुरक्षा व्यवस्था हटा दी गई है।
हालांकि, राज्य पुलिस के सूत्रों ने इन दावों को गलत बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ममता बनर्जी की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। केवल उनकी सुरक्षा में तैनात दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत बदला गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी चाहती थीं कि जब वह मुख्यमंत्री थीं, उस दौरान उनकी सुरक्षा संभालने वाले दो कोलकाता पुलिस अधिकारियों को ही उसी ड्यूटी पर बनाए रखा जाए। लेकिन सरकारी नियमों के तहत किसी अधिकारी की नियुक्ति या तैनाती व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं की जा सकती।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “सुरक्षा अधिकारियों का तबादला ड्यूटी रोस्टर और तय सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार होता है। इस मामले में भी सामान्य प्रशासनिक फेरबदल किया गया है।”
सूत्रों के मुताबिक, जिन दो नए सुरक्षा अधिकारियों को बुधवार रात कालीघाट स्थित आवास पर भेजा गया था, उन्हें ममता बनर्जी और उनके सहयोगियों ने ड्यूटी संभालने की अनुमति नहीं दी। बताया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री उन अधिकारियों से परिचित नहीं थीं।
इस बीच, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी के आवास की सुरक्षा कम नहीं बल्कि और मजबूत की गई है। बुधवार से उनके घर के बाहर ऊंचे सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए गए हैं।
राष्ट्रीय समाचार
लियोनेल मेसी ‘गोट इंडिया टूर’ विवाद: पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास की बढ़ीं मुश्किलें, सवालों के जवाब देने थाने पहुंचे

कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीडांगन में दिसंबर 2025 में आयोजित लियोनेल मेसी के “गोट इंडिया टूर” के दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर जांच एक बार फिर तेज हो गई है। इस मामले को लेकर राज्य के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास गुरुवार को बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन पहुंचे। जहां उनसे पूछताछ की जाएगी।
इससे पहले पूर्व खेल मंत्री बिस्वास बुधवार को भी बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन पहुंचे थे, जहां उनसे पूछताछ की गई। यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई है जो मेसी की टीम की ओर से पुलिस को ईमेल के माध्यम से भेजी गई थी।
मेसी की टीम के एक सदस्य ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त त्रिपुरारी अथर्व को भेजे गए ईमेल में आरोप लगाया है कि स्टेडियम में अफरा-तफरी तब शुरू हुई, जब तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास मैदान में पहुंचे। आरोप में कहा गया है कि बिस्वास बार-बार मेसी के पास जाकर उनके कंधे और कमर को छूते हुए तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही कई अनधिकृत लोग भी मैदान में प्रवेश कर गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आयोजन स्थल पर केवल तीन फोटोग्राफरों को अनुमति दी गई थी, लेकिन उस समय लगभग 40 लोग मैदान में मौजूद थे। इससे न केवल भीड़ बढ़ी, बल्कि मेसी भी असहज हो गए और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई, जिसके बाद उन्हें कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा।
आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मेसी की टीम द्वारा दिए गए नए विवरण जांच में मददगार साबित होंगे। इसी घटना के बाद दत्ता को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने भी पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास पर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था फैलाने के आरोप लगाए हैं।
आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता ने दावा किया है कि कार्यक्रम के लिए कुल 70 हजार टिकट छापे गए थे, जिनमें से लगभग 22 हजार टिकट तत्कालीन खेल मंत्री ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ले लिए थे। आरोप है कि इन टिकटों को आगे परिचितों में बांटा गया और कुछ की बिक्री भी की गई, जिससे भीड़ अनियंत्रित हो गई।
इस मामले में पुलिस ने कई बार अरूप बिस्वास को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन वे अब तक जांच में शामिल नहीं हुए थे। हालांकि अदालत से मिली अंतरिम राहत के बाद वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। अदालत ने पहले उन्हें कुछ शर्तों के साथ गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था और पुलिस को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे।
राजनीति
अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला, ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर पैसा लेने वालों को खोज रहे अधिकारी-ठेकेदार

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्ताधारी व्यवस्था और प्रशासनिक-राजनीतिक गठजोड़ पर कटाक्ष करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “टिकट के इच्छुक लोगों के बाद अब अधिकारी और ठेकेदार मिलकर ‘ढुंढाई पंचायत’ कर रहे हैं। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर असंतोष और घबराहट का माहौल बनता जा रहा है।”
सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि पहले केवल भावी प्रत्याशी ही ऐसे लोगों को ढूंढ रहे थे, जिनसे कथित तौर पर टिकट दिलाने के नाम पर अग्रिम धनराशि ली गई थी।
अपने पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि “अफवाह मंत्री” को लेकर जो चर्चाएं चल रही थीं, उन्हें अब तक केवल वही लोग तलाश रहे थे जो खुद प्रत्याशी बनने की दौड़ में थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब यह बात सामने आ चुकी है कि “30 सीट” मिलने की चर्चा मात्र अफवाह साबित हो रही है और वास्तविकता में स्थिति वैसी नहीं है जैसी प्रचारित की जा रही थी।
अखिलेश यादव के अनुसार, जैसे-जैसे इन कथित दावों की सच्चाई सामने आ रही है, वैसे-वैसे एई, जेई, एएमए जैसे विभागीय अधिकारी और ठेकेदार भी सक्रिय हो गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग भी उन व्यक्तियों की तलाश कर रहे हैं, जिन्होंने ट्रांसफर-पोस्टिंग और ठेके-कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के नाम पर उनसे कथित रूप से अग्रिम धनराशि ली थी।
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि जिस “काली कमाई” के सहारे बड़े-बड़े दावे और राजनीतिक बयान दिए जा रहे थे, वही पैसा अब संबंधित लोगों के खिलाफ ही माहौल बना रहा है। उनके मुताबिक, यह स्थिति एक तरह की “पंचायत” जैसी बन गई है, जहां सभी पक्ष एक-दूसरे से जवाबदेही मांगते दिख रहे हैं।
इससे पहले भी अखिलेश यादव ने एनडीए पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ लोग लालच देकर और डराकर विधायक व एमएलसी को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। जो डरेगा वो तो जाएगा, बहादुर लोग होने चाहिए। यूपी में तो भाजपा के ही विधायक पाला बदलने को तैयार बैठे हैं। कुछ लोग समय पर पत्ते खोलते हैं। सपा पूरी तरह मजबूत है और पार्टी कई बार उतार-चढ़ाव देख चुकी है।
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