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Tuesday,06-October-2026
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महाराष्ट्र ने महज नौ महीनों में अब तक का सबसे अधिक वार्षिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश दर्ज किया: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

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मुंबई: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र को वित्तीय वर्ष 2024-25 के सिर्फ नौ महीनों में दशकों का सबसे अधिक वार्षिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के हवाले से बताया कि वित्त वर्ष 2024-2025 के पहले नौ महीनों में कुल 1,39,434 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।

अक्टूबर 2019 और दिसंबर 2024 के दौरान संचयी एफडीआई इक्विटी प्रवाह 6,71,863 करोड़ रुपये बताया गया है, जो देश में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का 31 प्रतिशत है। इस प्रकार महाराष्ट्र ने कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, तमिलनाडु और हरियाणा सहित अन्य प्रतिस्पर्धी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

एक्स पर अपने पोस्ट में, मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले 10 वर्षों में रिकॉर्ड विदेशी निवेश, केवल 9 महीनों में महाराष्ट्र में आया! केंद्र सरकार के डीपीआईआईटी ने दिसंबर 2024 के अंत के लिए विदेशी निवेश रिपोर्ट जारी की है, और महाराष्ट्र को केवल 9 महीनों में पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक वार्षिक विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है। वित्तीय वर्ष 2024-2025 के पहले 9 महीनों में कुल 1,39,434 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। यह पिछले 10 वर्षों में किसी एक वर्ष में महाराष्ट्र में प्राप्त सबसे अधिक विदेशी निवेश है।”

उन्होंने आगे कहा, “ऐसा करके, महागठबंधन सरकार ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बेशक, इस वित्तीय वर्ष में अभी एक तिमाही बाकी है। पूरे महाराष्ट्र को एक बार फिर हार्दिक बधाई! मेरे सहयोगी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजीत पवार और मंत्रिमंडल के नेतृत्व में, हमारे महाराष्ट्र की यह दौड़ जारी रहेगी।”

मुख्यमंत्री का यह बयान राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा विधानसभा में अपने अभिभाषण में दिए गए उस बयान के कुछ दिनों बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए एक पसंदीदा गंतव्य है और यह देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद में 14 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है तथा देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों में से एक है।

उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 में स्विटजरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में सरकार ने 63 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ लगभग 15.72 लाख करोड़ रुपये के निवेश के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे राज्य में 15 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

इसके अलावा, सरकार ने निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए राज्य में विभिन्न उद्योगों को लगभग 5,000 करोड़ रुपये की निवेश प्रोत्साहन सब्सिडी वितरित करने की योजना बनाई है। सरकार ने समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक स्वीकृतियाँ प्रदान करने के लिए एकल खिड़की प्रणाली के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से परेशानी मुक्त तरीके से निवेश की सुविधा के लिए पिछले साल कानून बनाया था।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

व‍िदेश मंत्री का घाना-कोट डी आइवर-इथियोपिया का दौरा, द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा

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विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 6 से 10 अक्टूबर तक घाना, कोट डी आइवर और इथियोपिया की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वे तीनों देशों में अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। बैठक में व्यापार, विकास, सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी।

व‍िदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, घाना, कोट डी आइवर और इथियोपिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान विदेश मंत्री तीनों देशों में अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे और वहां के शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।

मंत्रालय ने बताया क‍ि इन बैठकों में आपसी दोस्ती और सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के संबंधों के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होगी। इनमें व्यापार और आर्थिक संबंध, विकास से जुड़ा सहयोग, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे मुद्दे शामिल होंगे। इसके अलावा, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर भी विचार साझा किए जाएंगे।

मंत्रालय के अनुसार, अदीस अबाबा में विदेश मंत्री क्षेत्रीय भारतीय मिशन प्रमुखों (एचओएमएस) के सम्मेलन की अध्यक्षता भी करेंगे। विदेश मंत्री की यह यात्रा अफ्रीका के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दिखाती है। साथ ही, यह ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की एकजुटता को भी और मजबूत करेगी।

इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को नई दिल्ली में स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर उत्साह की प्रशंसा की।

विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्‍ट पर इस मुलाकात से संबंधित जरूरी जानकारी साझा की। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन के बीच बैठक से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ेगा।

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्‍ट में ल‍िखा, “भारत की राजकीय यात्रा पर आए स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से मुलाकात कर खुशी हुई। भारत-ईएफटीए टीईपीए के वादे को आगे बढ़ाते हुए हमारी साझेदारी को गहरा करने के राष्ट्रपति परमेलिन के विचारों की गहराई से सराहना करता हूं।”

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

फ्रांस: हाई स्कूल की गिरती शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आज, लेंस शहर के15 वर्षीय बच्चे ने धमाके में गंवाया हाथ

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फ्रांस में स्कूलों के बदहाल हालात और शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर जारी छात्र आंदोलन को लंबा वक्त बीत चुका है। विरोध राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में बदल गया है। देशभर में हजारों छात्रों, शिक्षकों, ट्रेड यूनियनों और अभिभावक संगठनों ने मंगलवार को सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है। इस बीच उत्तरी शहर लेंस में प्रदर्शन के दौरान एक 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ जाने की घटना ने पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस और तेज कर दी है।

सोमवार को लेंस में एक हाई स्कूल के बाहर प्रदर्शन के दौरान छात्र गंभीर रूप से घायल हुआ। पास-दे-कलै के प्रीफेक्ट फ्रांस्वा-जेवियर लॉश ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि छात्र किस तरह घायल हुआ या इसमें पुलिस की स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल शामिल था या नहीं।

स्थानीय समाचार पत्र ‘ला वोआ दु नोर’ ने बताया कि छात्र ने पुलिस की ओर से इस्तेमाल किए गए स्टन ग्रेनेड को उठाया था, जिसके बाद विस्फोट में उसका हाथ उड़ गया। रॉयटर्स ने बाद में अपनी रिपोर्ट में भी इस दावे को स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया और स्पष्ट किया कि प्रीफेक्ट ने स्वयं इस बात की पुष्टि नहीं की थी।

प्रीफेक्ट के अनुसार, घटना के समय करीब 150 से 200 प्रदर्शनकारी पुलिस पर विभिन्न वस्तुएं फेंक रहे थे, जिसके बाद दंगा-रोधी पुलिस ने हस्तक्षेप किया। घटना की परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक जांच जारी है।

छात्र संगठनों ने मंगलवार को देशव्यापी विरोध दिवस का आह्वान किया था। ट्रेड यूनियनों, शिक्षकों, सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों और अभिभावक संगठनों ने भी छात्रों के समर्थन में मार्च का आह्वान किया है।

यह आंदोलन फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था में कथित कम निवेश, शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं और जर्जर स्कूल भवनों को लेकर शुरू हुआ था। पिछले सप्ताह विरोध प्रदर्शनों ने तेजी पकड़ ली और कई जगहों पर छात्रों तथा पुलिस के बीच झड़पें हुईं।

शिक्षा मंत्री एडुआर जफ्रे के अनुसार, सोमवार को देश के करीब 3,700 हाई स्कूलों में से 400 से 500 स्कूल पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहने की संभावना थी। इससे पहले सरकार ने कहा था कि 24 स्कूलों में आगजनी या तोड़फोड़ हुई है और 78 शिक्षा कर्मचारी घायल हुए हैं।

प्रदर्शन अब केवल हाई स्कूलों तक सीमित नहीं रह गया है। सोमवार को फ्रांस के करीब 40 विश्वविद्यालय परिसरों में भी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन के समर्थन में गतिविधियां कीं। उच्च शिक्षा मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट ने कहा कि मंगलवार के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालयों में भी व्यवधान बढ़ सकता है।

पिछले दिनों प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुई हैं। पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया है और स्कूलों तथा अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस अधिकारियों के घायल होने की भी खबर है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे ऐसे स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं, जहां कक्षाएं जरूरत से ज्यादा भरी हुई हैं, शिक्षकों की कमी है और इमारतों की हालत खराब है। छात्रों का आरोप है कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में पर्याप्त निवेश नहीं किया गया है।

सरकार ने हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं की निंदा की है। फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान किया जाएगा, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मंगलवार के प्रदर्शन से पहले राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई । अधिकारियों को आशंका है कि बड़ी संख्या में छात्रों के सड़कों पर उतरने से तनाव बढ़ सकता है। छात्र संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सरकार से छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग को लेकर है।

इस बीच 15 वर्षीय छात्र के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्रांस में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है। छात्र आंदोलन के मंगलवार के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के साथ और व्यापक होने की आशंका है।

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राष्ट्रीय समाचार

तमिलनाडु में 79 प्रतिशत खनिज परिवहन ट्रकों में नहीं लगा जीपीएस, सरकार ने बढ़ाई समयसीमा

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तमिलनाडु में निर्माण खनिजों के परिवहन के लिए पंजीकृत पांच में से लगभग चार ट्रकों में जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण नहीं लगे हैं, जिसके चलते खनिज आवागमन की निगरानी को कड़ा करने के उद्देश्य से मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद स्थापना की समय सीमा को एक बार फिर बढ़ा दिया गया है।

खनिज प्रबंधन प्रणाली पोर्टल पर पंजीकृत 1.4 लाख ट्रकों में से 30 सितंबर तक केवल 30,000 ट्रकों में ही वाहन स्थान ट्रैकिंग उपकरण लगे हुए थे। शेष 79 प्रतिशत ट्रकों को एम-रेत, पी-रेत और अन्य निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों को ढकने की आवश्यकता का पालन करना बाकी है।

भूविज्ञान एवं खनन विभाग ने परिवहन संघों द्वारा अतिरिक्त समय की मांग के बाद, समय सीमा को बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दिया है। मूल समय सीमा 31 मार्च को पहले ही बढ़ा दी गई थी जबकि सरकार ने अलग से घोषणा की थी कि जीपीएस उपकरण के बिना वाहनों को 1 सितंबर से खनिज पारगमन पास मिलना बंद हो जाएगा।

वाहन ट्रैकर्स को खनिज प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने का उद्देश्य ट्रकों द्वारा सामग्री लोड करने के स्थान और उनकी आवाजाही को रिकॉर्ड करके खनिज परिवहन की निगरानी को मजबूत करना है। ऐसे रिकॉर्ड अधिकारियों को अनधिकृत खदानों से आने वाली आपूर्ति की पहचान करने और अवैध खनन और परिवहन उल्लंघनों की जांच करने में मदद कर सकते हैं।

इस प्रणाली के धीमी गति से लागू होने पर ट्रक मालिकों ने सरकार की इस प्रणाली को लागू करने की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं। तमिलनाडु राज्य ट्रक मालिक संघ के महासचिव जी. गणेश ने कहा कि ट्रैकिंग उपकरणों की लागत में भारी गिरावट आई है, जो 15,000 रुपये से घटकर 3,700 रुपये हो गई है।

उन्होंने कहा कि कई विक्रेता एआईएस-140 मानक को पूरा करने वाले एक लाख से अधिक उपकरण उपलब्ध करा सकते हैं और उनका तर्क था कि उपलब्धता को देखते हुए और देरी को उचित नहीं ठहराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस आवश्यकता को लागू करने में सरकार की अनिच्छा ने अवैध खनन पर अंकुश लगाने के उसके संकल्प पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विभाग के अधिकारियों ने कहा कि लगभग 37 अधिकृत आपूर्तिकर्ताओं के पास अल्पावधि के भीतर शेष सभी वाहनों को सुसज्जित करने के लिए पर्याप्त स्टॉक नहीं है।

एक अधिकारी ने बताया कि यह नवीनतम विस्तार कई संगठनों के अनुरोधों के बाद किया गया है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि फर्जी क्यूआर कोड वाले फर्जी खनिज पारगमन पास बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

खनन संबंधी उल्लंघनों की शिकायतों के लिए जल्द ही एक समर्पित नंबर शुरू किया जाएगा और इसे चेन्नई स्थित विभाग के नियंत्रण कक्ष से जोड़ा जाएगा।

निर्माण की मांग और अधिकृत खदान उत्पादन के बीच पर्याप्त अंतर के बीच प्रवर्तन संबंधी चुनौतियां सामने आती हैं।

तमिलनाडु में निर्माण सामग्री की औसत दैनिक आवश्यकता लगभग 5.25 लाख यूनिट है, जबकि खदानों से अनुमत उत्पादन केवल 1.2 लाख यूनिट है, जो गहन नियामकीय जांच की आवश्यकता को उजागर करता है।

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