राजनीति
मनमोहन सिंह के निधन पर योगी आदित्यानाथ, हिमंत बिस्वा सरमा, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी ने जताया दुख
नई दिल्ली, 27 दिसंबर। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर देश के अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गुरुवार को दु:ख जताया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री एवं प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन अत्यंत दुखद एवं भारतीय राजनीति की अपूरणीय क्षति है। वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश की शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति एवं उनके शोकाकुल परिजनों तथा समर्थकों को यह अथाह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “मुझे डॉ. मनमोहन सिंह को 1991 से जानने का सौभाग्य मिला है, जब वह असम से पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे। एक ऐसा राज्य, जिसका उन्होंने 28 वर्षों तक प्रतिनिधित्व किया। डॉ. साहब विनम्रता के प्रतीक थे और वह कभी सत्ता के मोह में नहीं झुके। उनके साथ मेरी सभी बातचीत में उनकी सादगी और शालीनता, उनके बौद्धिक कौशल के साथ हमेशा सामने आई। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान मुझे असम से संबंधित मुद्दों पर उनसे बातचीत करने का अवसर मिला और उन्होंने हमेशा हमें धैर्यपूर्वक सुना और सामाजिक मुद्दों के प्रति दृढ़ विश्वास दिखाया। विभाजन के बाद के भारत में साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने कई प्रतिष्ठित पदों पर राष्ट्र की सेवा की। उनके निधन से राष्ट्र ने एक महान देशभक्त, एक असाधारण विद्वान, एक अपरंपरागत राजनीतिज्ञ और एक बेहतरीन राजनेता खो दिया है।”
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन दुःखद है। वह एक कुशल राजनेता एवं अर्थशास्त्री थे। उनके नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिली। उनका निधन भारतीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए प्रार्थना है।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मनमोहन सिंह के निधन पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आकस्मिक निधन से मैं बहुत स्तब्ध और दुखी हूं। मैंने उनके साथ काम किया था और केंद्रीय मंत्रिमंडल में उन्हें बहुत करीब से देखा था। उनकी विद्वता और बुद्धिमत्ता पर कोई सवाल नहीं था और देश में उनके द्वारा शुरू किए गए वित्तीय सुधारों की गहराई को व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है। देश को उनकी देखरेख की कमी खलेगी और मुझे उनके स्नेह की कमी खलेगी। उनके परिवार, मित्रों और अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदनाएं।”
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन से बहुत दुःख हुआ। वह अद्वितीय बुद्धि के धनी राजनेता थे, उनके नेतृत्व और दूरदर्शिता ने हमारे राष्ट्र पर अमिट छाप छोड़ी। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान ही मैं पहली बार कर्नाटक का मुख्यमंत्री बना। हमारे बजटीय उपायों को लेकर उनके प्रोत्साहन और खाद्य अधिकार अधिनियम जैसी ऐतिहासिक यूपीए नीतियों के प्रभाव ने कर्नाटक की प्रगति और कल्याणकारी पहलों को आकार दिया। उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं। उनकी विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”
दिल्ली की सीएम आतिशी ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से देश ने न केवल एक विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री खो दिया है, बल्कि एक ऐसा नेता भी खो दिया है, जिसकी विद्वता और गरिमा को हमेशा याद रखा जाएगा।”
तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा, “हमारे समय के सबसे महान अर्थशास्त्रियों, नेताओं, सुधारकों और सबसे बढ़कर मानवतावादी मनमोहन सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने दिखाया कि कैसे शालीनता और शिष्टता राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन के बहुत जरूरी पहलू हैं। वह एक ऐसे महापुरुष थे, जिनके निधन से भारत ने एक महान सपूत खो दिया है।”
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री एवं महान अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की खबर से मन अत्यंत व्यथित है। पूरे देश और कांग्रेस परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है। आज भारतीय राजनीति में एक युग का अंत हो गया है।”
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं महान अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन राजनीतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत की पुण्यात्मा को शांति प्रदान करें। आरबीआई के गवर्नर, देश के वित्त मंत्री एवं प्रधानमंत्री जैसे दायित्व को निभाते हुए उन्होंने अपनी कुशल और दूरदर्शी नीतियों से देश की आर्थिक समृद्धि के प्रयासों में सहभागिता की और विभिन्न चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया। देश के आर्थिक विकास में योगदान के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवारजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।”
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन का अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ। विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र की सेवा के प्रति समर्पित रहा। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों और समर्थकों को यह असीम कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मनमोहन सिंह के निधन पर दुख जताते हुए कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से हमने एक महान विद्वान, अर्थशास्त्री और राजनेता खो दिया है। भारतीय आर्थिक सुधारों में उनके योगदान और 10 वर्षों तक प्रधानमंत्री के रूप में हमारे देश की सेवा करने को हमेशा याद किया जाएगा। उन्हें मेरी श्रद्धांजलि।”
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ। मुझे उनसे बातचीत करने और उनसे सीखने के कई अवसर मिले। वह वास्तव में एक बौद्धिक दिग्गज थे, एक कुशल अर्थशास्त्री थे, लेकिन सबसे बढ़कर वह एक सज्जन व्यक्ति थे। उनके निधन से भारत ने एक महान सपूत खो दिया है।”
तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से बहुत दुख हुआ। वह एक ऐसे राजनेता थे, जिनके नेतृत्व ने भारत के आर्थिक परिवर्तन को दिशा दी। उनके कार्यकाल ने स्थिर विकास, सामाजिक प्रगति और सुधारों के युग को चिह्नित किया, जिसने लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाया।”
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारजनों के साथ है। प्रभु श्री राम दिवंगत आत्मा को अपने परम धाम में स्थान तथा शोकाकुल परिवार को यह अथाह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।”
गुजरात के सीएम भूपेंद्र भाई पटेल ने कहा, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, विख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की खबर अत्यंत दुःखद है। विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रभु उनकी आत्मा को शांति दें और उनके परिवार और समर्थकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।”
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, “आज देश ने अपना एक महान लाल खो दिया। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और विश्वविख्यात अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह के निधन का समाचार अत्यंत दुखदायी है। विकासशील राजनीति और गवर्नेंस के पुरोधा आदरणीय मनमोहन सिंह ने निःस्वार्थ भाव के साथ देश और देशवासियों की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दिया था। आज मनमोहन सिंह हमारे बीच नहीं हैं, मगर उनके आदर्श और विचार हमें हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।”
पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा, “देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की दुखद खबर मिली। देश के लिए यह बड़ा नुकसान है। भारत की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने वाले इस महान अर्थशास्त्री की कमी देशवासियों को हमेशा खलती रहेगी। परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि वह दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें और परिवार सहित प्रशंसकों को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और धर्मनिरपेक्षता तथा लोकतंत्र के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध एक प्रतिष्ठित राजनेता डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से बहुत दुःख हुआ। उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति मेरी संवेदना।”
महाराष्ट्र
बीएमसी ने गणपति विसर्जन के लिए 383 से ज़्यादा कृत्रिम झीलें उपलब्ध कराई हैं।

मुंबई मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) एडमिनिस्ट्रेशन महाराष्ट्र के सरकारी त्योहार गणेश उत्सव को इको-फ्रेंडली तरीके से मनाने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसमें विसर्जन जुलूस के लिए कई तरह की सुविधाएं और इंतज़ाम शामिल हैं। हाई कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, बीएमसी ने इस साल छह फीट ऊंची मूर्तियों के विसर्जन के लिए 383 से ज़्यादा आर्टिफिशियल झीलें बनाई हैं। इसके अलावा, छह फीट से ज़्यादा ऊंची मूर्तियों के विसर्जन के लिए 67 नेचुरल जगहों पर कई तरह की सुविधाएं दी गई हैं। आम लोगों के बीच पर्यावरण बचाने का मैसेज फैलाने के मकसद से, इस साल ‘एक गणपति, एक पेड़’ पहल शुरू की गई है, जिसका आइडिया मेयर रितु तावड़े ने दिया था। बीएमसी ने मुंबई में विसर्जित की जाने वाली कुल गणेश मूर्तियों के बराबर पेड़ लगाने का वादा किया है। ‘एक गणपति, एक पेड़’ के कॉन्सेप्ट के तहत, भगवान गणेश के आने से लेकर विसर्जन तक का त्योहार पर्यावरण बचाने की कोशिशों के साथ जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, मूर्ति विसर्जन सेरेमनी को आसानी से चलाने के लिए 25,000 से ज़्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरी व्यवस्था की गई है। इस साल, गणेश उत्सव 14 सितंबर, 2026 को शुरू हुआ। मुंबई की मेयर रितु तावड़े, डिप्टी मेयर संजय घाडी, म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े और एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर (ईस्टर्न सबर्ब्स) डॉ. अविनाश ढाकने की गाइडेंस में, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने पूरे मुंबई में, और खासकर विसर्जन वाली जगहों पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। विसर्जन के रास्तों से रुकावटें हटाने, सड़कों पर गड्ढों और नाली के ढक्कनों को ठीक करने और पेड़ों की डालियों को काटने जैसे काम पूरे हो चुके हैं। समुद्र के किनारों और नेचुरल और आर्टिफिशियल विसर्जन वाली जगहों पर स्टील प्लेट, राफ्ट, क्रेन, एम्बुलेंस, लाइफगार्ड, ‘निर्मलिया’ (पूजा के बाद बचे फूल और दूसरी चीजें) कलेक्शन बॉक्स, कंट्रोल रूम, ऑब्जर्वेशन टावर, लाइटिंग का इंतज़ाम, टेम्पररी टॉयलेट और ज़रूरी मैनपावर जैसी कई सुविधाएं और सर्विस दी गई हैं।
एक गणपति; एक पेड़
गणपति भक्ति, आस्था और सामाजिक मेलजोल का त्योहार है। इस त्योहार के ज़रिए लोगों तक पर्यावरण बचाने का मैसेज पहुँचाने के मकसद से, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने इस साल जितनी गणेश मूर्तियाँ विसर्जित की जाएँगी, उतने ही पेड़ लगाने का वादा किया है। ‘एक गणपति – एक पेड़’ पहल का आइडिया मेयर रितु तावड़े ने दिया था। इस पहल का मकसद त्योहार के दौरान, भगवान गणेश के आने से लेकर विसर्जन तक, पर्यावरण बचाना है, जिसमें हर विसर्जित मूर्ति के लिए एक पेड़ लगाया जाएगा, जिससे मुंबई के हरे-भरे भविष्य में योगदान मिलेगा। गणेश उत्सव के ज़रिए, मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने लोगों की भागीदारी से मुंबई को हरा-भरा, सुंदर और इको-फ्रेंडली बनाने का वादा किया है, साथ ही पेड़ लगाने, पेड़ों की सुरक्षा और पर्यावरण बचाने के बारे में जागरूकता भी पैदा की है।
इस साल, भगवान गणेश की मूर्तियों के विसर्जन के लिए 67 नेचुरल विसर्जन की जगहें (जिनमें 44 बीच/जेटी और 23 नेचुरल झीलें शामिल हैं) और 383 आर्टिफिशियल विसर्जन की जगहें उपलब्ध कराई गई हैं। इन जगहों पर ये इंतज़ाम किए गए हैं: 1,194 स्टील प्लेट, 23 जर्मन राफ्ट, 34 क्रेन, 85 एम्बुलेंस, 10 मोटर बोट, 498 ‘निर्मलिया’ (पूजा का प्रसाद/सामान) इकट्ठा करने वाले बर्तन, 326 ‘निर्मलिया’ डंपर, 261 रिसेप्शन सेंटर, 228 कंट्रोल रूम, 75 ऑब्ज़र्वेशन टावर, 1,132 लाइफ़गार्ड, 6,052 फ़्लडलाइट/सर्चलाइट और 489 टेम्पररी टॉयलेट। इसके अलावा, लगभग 25,000 नगर निगम के अधिकारी और अलग-अलग वॉलंटरी ऑर्गनाइज़ेशन ड्यूटी पर रहेंगे।
आर्टिफ़िशियल झीलों में छह फ़ीट से नीचे की मूर्तियों का विसर्जन
हाई कोर्ट के 20 अगस्त, 2026 के निर्देशों के अनुसार, 24 जुलाई, 2025 का आदेश पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) पर आख़िरी फ़ैसला आने तक ज़रूरी है। इसलिए, 6 फीट तक ऊंची भगवान गणेश की मूर्तियों को आर्टिफिशियल झीलों में विसर्जित करना ज़रूरी है और नगर निगम ने इसके लिए ज़रूरी इंतज़ाम किए हैं। इस पहल के बारे में ज़रूरी पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन भी शुरू किए गए हैं। मुंबई में 278 जगहों पर 383 से ज़्यादा आर्टिफिशियल तालाब
इको-फ्रेंडली ‘गणेश उत्सव’ को बढ़ावा देने और आर्टिफिशियल तालाबों में मूर्ति विसर्जन को बढ़ावा देने के लिए, मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने 278 जगहों पर 383 से ज़्यादा आर्टिफिशियल तालाब बनाए हैं। इसके अलावा, नगर निगम प्रशासन 6 फीट से ज़्यादा ऊंची मूर्तियों के लिए 67 नेचुरल विसर्जन पॉइंट पर ज़रूरी सुविधाएं देगा।
स्वराज्य भूमि (गुड़गांव चौपाटी) पर 12 आर्टिफिशियल तालाब
स्वराज्य भूमि, जिसे ‘गुड़गांव चौपाटी’ के नाम से जाना जाता है, मुंबई में सबसे ज़्यादा गणेश मूर्ति विसर्जन का हब है। शहर भर के पब्लिक ‘मंडलों’ और घरों से मूर्तियां विसर्जन (पानी में विसर्जन) के लिए यहां लाई जाती हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में मस्जिद के पास विस्फोट, 15 लोगों की मौत; 50 से अधिक घायल

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट जिले में शुक्रवार को पुलिस लाइंस क्षेत्र स्थित एक मस्जिद के पास हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हो गए। यह धमाका जुमे की नमाज के दौरान हुआ, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया जियो न्यूज के मुताबिक, जिला मुख्यालय (डीएचक्यू) अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ताहिर अली शाह ने बताया कि अस्पताल में 15 शव और 50 से अधिक घायल लोगों को लाया गया है। घायलों में कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, विस्फोट मस्जिद के पास हुआ, जिससे वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया। धमाके की वजह से मस्जिद का बाहरी हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसकी एक दीवार भी ढह गई।
घटना के तुरंत बाद पुलिस लाइंस क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुट गए। अधिकारियों के मुताबिक, बचाव अभियान जारी है।
यह विस्फोट ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान में, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में, कानून-व्यवस्था से जुड़े कर्मियों को निशाना बनाकर हमलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
इससे पहले 10 सितंबर को बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के कंक क्षेत्र में एक पुलिस चौकी पर अज्ञात हमलावरों ने हमला किया था, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल की मौत हो गई थी और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हुआ था। हमले के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया था।
इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज की मासिक सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में पाकिस्तान में 199 आतंकी हमले दर्ज किए गए, जबकि जुलाई में इनकी संख्या 144 थी। अगस्त के हमलों में 158 लोगों की मौत हुई और 181 लोग घायल हुए।
राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी 19 सितंबर को ग्लोबल एनवायरनमेंट कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 सितंबर को ‘पर्यावरण और जलवायु की गतिशीलता का भविष्य’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी अहम चुनौतियों और न्यायिक दृष्टिकोणों पर चर्चा की शुरुआत होगी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, दिल्ली में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में 17 देशों के जज और न्यायिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। वे पॉलिसी बनाने, उसे लागू करने और उसके पालन में आने वाली कमियों जैसी चुनौतियों पर चर्चा करेंगे और पर्यावरण से जुड़े कामकाज (गवर्नेंस) और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करेंगे।
बयान में कहा गया है कि इस सम्मेलन में पर्यावरण विशेषज्ञ, भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, राज्य न्यायिक अकादमियों, राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों (एसईएसी), राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरणों (एसईआईएए), राज्य वेटलैंड प्राधिकरणों और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
यह सम्मेलन न्यायिक दृष्टिकोण और पर्यावरण से जुड़े कामकाज के तरीकों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी अहम चुनौतियों जैसे पॉलिसी बनाने, उसे लागू करने और उसके पालन में कमियों पर बातचीत को बढ़ावा देगा और पर्यावरण से जुड़े कामकाज और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करेगा।
इससे पहले, ‘नीले आसमान के लिए स्वच्छ हवा के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के मौके पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन जस्टिस (रिटायर्ड) प्रकाश श्रीवास्तव ने स्वच्छ हवा को विलासिता की चीज नहीं बल्कि एक बुनियादी जरूरत बताया था। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण एक जटिल चुनौती है क्योंकि यह राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानता।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ‘स्वच्छ वायु दिवस 2026’ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस श्रीवास्तव ने कहा, “विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं बल्कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता बनाए रखते हुए साथ-साथ चल सकते हैं।”
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के चेयरपर्सन ने इस बात पर जोर दिया कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि आने वाली पीढ़ियां स्वच्छ पर्यावरण में रह सकें।
जस्टिस श्रीवास्तव ने कहा, “स्थानीय निकायों को नागरिकों को जागरूक करके प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही रोकने की कोशिश करनी चाहिए; समस्या से निपटने के लिए नवीनतम तकनीकों को अपनाना चाहिए और समस्या के समाधान के लिए सभी को शामिल करने वाले और ‘पूरे समाज’ के दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए।”
पर्यावरण सचिव तन्मय कुमार ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुसार वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई स्तरों वाले, समन्वित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना रही है। इस कार्यक्रम के दौरान, पर्यावरण मंत्रालय ने ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ (एनसीएपी) के तहत सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को भी सम्मानित किया। इन्हें 5वें ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण’ के तहत रैंकिंग दी गई थी।
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