व्यापार
विदेशों में बसे भारतीय देश में जमकर भेज रहे डॉलर, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रेमिटेंस
नई दिल्ली, 25 दिसंबर। नॉन-रेजिडेंट इंडियन (एनआरआई) जमा खातों में चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से अक्टूबर अवधि में 11.9 अरब डॉलर का इनफ्लो आया है, जो पिछले साल समान अवधि के आंकड़े 6.1 अरब डॉलर से करीब दोगुना है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर के अंत तक भारत में एनआरआई खातों में जमा रकम बढ़कर 162.7 अरब डॉलर हो गई है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 143.5 अरब डॉलर थी।
एनआरआई डिपॉजिट योजनाओं में फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (एफसीएनआर) डिपॉजिट, नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल (एनआरई) डिपॉजिट और नॉन-रेजिडेंट ऑर्डिनरी (एनआरओ) डिपॉजिट शामिल हैं।
आंकड़े के मुताबिक, एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट में सबसे अधिक 6.1 अरब डॉलर का इनफ्लो आया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में जमा की गई 2.1 अरब डॉलर की राशि से लगभग तीन गुना है। इन खातों में कुल राशि 31.87 अरब डॉलर थी।
इन खातों को विदेशों में काम करने वाले भारतीय पसंद करते हैं क्योंकि वे इनमें एक से पांच साल तक का फिक्स्ड डिपॉजिट रख सकते हैं, जिससे उन्हें अधिक ब्याज मिलता है। साथ ही ये खाते विदेशी मुद्रा में होते हैं, इसलिए ये जमा रुपये में उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहती हैं।
आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में एफसीएनआर (बी) खातों पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा बढ़ा दी थी, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए अधिक इनफ्लो को आकर्षित किया जा सके।
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को दर्शाती है और आरबीआई को विदेश मुद्राओं के मुकाबले रुपये को स्थिर रखने में मदद करती है।
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि के दौरान एनआरई जमा में 3.09 अरब डॉलर का इनफ्लो देखा गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 1.95 अरब डॉलर से अधिक था। एनआरई जमा एनआरआई रेमिटेंस के लिए एक उच्च ब्याज अर्जित करने वाला रुपया जमा विकल्प है।
अप्रैल-अक्टूबर के दौरान एनआरओ जमा राशि पिछले वर्ष की इसी अवधि के 2 अरब डॉलर की तुलना में बढ़कर 2.66 अरब डॉलर हो गई।
अंतरराष्ट्रीय
जनवरी-जून में जर्मनी में भारतीय पर्यटकों के ठहरने की संख्या (विज़िटर नाइट्स) स्थिर

सोमवार को जारी एक बयान के अनुसार, जर्मनी में आने वाले पर्यटकों में भारत का योगदान स्थिर रहा। भारतीय पर्यटकों के ठहरने की संख्या (नाइट्स) में साल-दर-साल 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और देश के दस प्रमुख शहरों में भारतीय पर्यटकों के ठहरने की कुल संख्या का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया।
जर्मन नेशनल टूरिस्ट ऑफिस के एक बयान में कहा गया है कि जर्मनी में 2026 की पहली छमाही में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के ठहरने की संख्या 36.4 मिलियन (3.64 करोड़) दर्ज की गई, “जबकि भारत में स्थिर विकास और लंबी अवधि की मजबूत संभावनाएं बनी हुई हैं।”
जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के ठहरने की संख्या में साल-दर-साल 0.5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, और जून 2025 की तुलना में जून 2026 में ठहरने वालों की संख्या में 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
GNTO (जर्मन नेशनल टूरिस्ट ऑफिस) के भारत में मार्केटिंग और सेल्स ऑफिस के निदेशक रोमित थियोफिलस ने कहा, “भारत, जर्मनी के लिए एक महत्वपूर्ण और बहुत संभावनाओं वाला स्रोत बाजार बना हुआ है। 2026 के शुरुआती पांच महीनों में स्थिर प्रदर्शन यह दिखाता है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बदलती आर्थिक स्थितियों के बावजूद भारतीय यात्रा की मांग मजबूत बनी हुई है।”
थियोफिलस ने कहा कि भारतीय यात्री तेजी से ऐसी सुरक्षित और अच्छी कनेक्टिविटी वाली जगहों की तलाश कर रहे हैं जो वास्तविक सांस्कृतिक अनुभव, बेहतरीन मेहमाननवाजी और पैसे की सही कीमत (वैल्यू) प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि जर्मनी अपने विविध शहरों, विरासत, प्राकृतिक परिदृश्यों और कुशल सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के साथ इन उम्मीदों को पूरा करने की मजबूत स्थिति में है।
थियोफिलस ने कहा, “जर्मनी जाने वाले भारतीय पर्यटक युवा और अनुभव को प्राथमिकता देने वाले हैं, जिनकी औसत आयु 38 वर्ष है। जर्मनी जाने वाले लगभग 95 प्रतिशत भारतीय पर्यटक 55 वर्ष से कम आयु के हैं, जो इस बाजार की महत्वपूर्ण दीर्घकालिक संभावनाओं को उजागर करता है।”
उन्होंने 2026 की दूसरी छमाही में भी मांग जारी रहने को लेकर उम्मीद जताई।
इसी अवधि के दौरान होटल ऑक्यूपेंसी (कमरों की भराई) भी 1.2 प्रतिशत अंक बढ़कर 65.5 प्रतिशत हो गई।
जर्मन नेशनल टूरिस्ट ऑफिस ने कहा कि जर्मनी भारतीय यात्रियों के लिए जीवंत शहरों, ऐतिहासिक आकर्षणों, प्रकृति, बेहतरीन अनुभवों और पूरे यूरोप में आगे की यात्रा के लिए सुविधाजनक कनेक्टिविटी का एक शानदार मिश्रण पेश करता है।
व्यापार
अगले हफ्ते कच्चे तेल, अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और बढ़ती बॉन्ड यील्ड समेत इन कारकों पर रहेगी बाजार की नजर

भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह वैश्विक घटनाक्रमों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़े और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं, जिसके चलते बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना है।
शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ, हालांकि कारोबारी सत्र के दौरान हासिल की गई अधिकांश बढ़त बाजार के बंद होने तक कायम नहीं रह सकी। सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत चढ़कर 76,515.43 पर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 23,897.70 के स्तर पर बंद हुआ। क्लोजिंग ऑक्शन सत्र के दौरान हुई हलचल के कारण प्रमुख सूचकांक दिन के उच्च स्तर से नीचे फिसल गए।
इस दौरान, व्यापक बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.22 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की रुचि चुनिंदा शेयरों तक सीमित रही।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अगले सप्ताह बाजार की सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतें हो सकती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के बाद इस सप्ताह तेल की कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति अभी भी बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
ऊर्जा बाजार में बढ़ते जोखिमों को देखते हुए प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थान सिटी ने भी अपने अनुमानों में संशोधन किए हैं। संस्था ने तीसरी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य अनुमान 80 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर 86 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जिसका कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य संचालन में अपेक्षा से अधिक समय लगने की आशंका है।
विश्लेषकों का कहना है कि तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय हैं, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, कंपनियों की लागत में वृद्धि हो सकती है और चालू खाते के घाटे पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति और तेल आपूर्ति बहाल होने से जुड़े संकेतों पर बनी रहेगी।
दूसरा बड़ा कारक वैश्विक बॉन्ड यील्ड है। दुनिया भर में बॉन्ड बाजार में बिकवाली के चलते कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में प्रतिफल कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। बढ़ती तेल कीमतों से मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं, जिसके कारण निवेशक सख्त मौद्रिक नीति की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
बढ़ती बॉन्ड यील्ड का असर शेयर बाजारों पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ता है। साथ ही सरकारों और कंपनियों के लिए उधारी की लागत भी बढ़ जाती है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ सकता है।
अमेरिका से आए हालिया रोजगार आंकड़ों ने भी बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। अगस्त में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1.62 लाख नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से लगभग तीन गुना अधिक हैं। श्रम भागीदारी दर बढ़कर 61.6 प्रतिशत हो गई, जबकि बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रही।
मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद यह संभावना फिर से बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रख सकता है या बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है और विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में भारतीय बाजार की दिशा मुख्य रूप से तेल कीमतों, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों, वैश्विक बॉन्ड बाजार और विदेशी निवेश प्रवाह से तय होगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और तेल कीमतों में नरमी आती है तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं, यदि तेल और बॉन्ड यील्ड दोनों ऊंचे बने रहते हैं तो निवेशकों की सतर्कता बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, घरेलू आर्थिक बुनियाद मजबूत होने के बावजूद वैश्विक परिस्थितियां अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख दिशा-निर्धारक बनी रहेंगी।
व्यापार
‘रोग एआई’ एजेंट्स ने जर्मन वेबसाइट पर किया कब्जा, ओपनएआई ने कहा- फ्रेमवर्क पर कर रहे काम

रिसर्चर्स ने पाया कि ओपनएआई के कुछ ‘रोग एआई’ एजेंट्स ने एक जर्मन वेबसाइट पर नियंत्रण कर लिया था और उसे दूसरे एआई एजेंट्स के लिए एक मैसेज बोर्ड में बदल दिया था। इस मामले के सामने आने के बाद अमेरिका की एआई कंपनी ओपनएआई ने कहा है कि वह ऐसी चिंताओं को दूर करने के लिए एक फ्रेमवर्क पर काम कर रही है और आने वाले हफ्तों में इसे शेयर करेगी।
कंपनी ने यह भी कहा कि वह इन मुद्दों पर दुनिया भर की दर्जनों सरकारी रेगुलेटरी एजेंसियों के साथ काम कर रही है, जिसमें हालिया ‘विकी इंसिडेंट’ भी शामिल है।
बता दें कि रिसर्च में पाया गया था कि इस साल वसंत में ‘रोग ओपनएआई’ एजेंट्स के एक समूह ने एक जर्मन वेबसाइट पर कब्जा कर लिया था।
‘ओपनएआई’ ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “हम विकी इंसिडेंट के बारे में कैसे सोचते हैं, जहां हमारे एजेंट्स ने कई इंटरनेट साइटों पर लिखा था। अब समय आ गया है कि हम यह तय करें कि हम कब और कैसे मिसअलाइनमेंट की घटनाओं को शेयर करेंगे, न कि सिर्फ हमारे मॉडल के मिसअलाइनमेंट प्रॉपर्टीज को।”
कंपनी ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से हमने मिसअलाइनमेंट को मुख्य रूप से एक रिसर्च सवाल के रूप में देखा है, जिसे सिस्टम कार्ड जैसे रिसर्च पब्लिकेशन में बताया जाता है। “इस साल, हमने देखा है कि मिसअलाइनमेंट के कारण नए प्रकार के वास्तविक दुनिया पर प्रभाव पड़ रहे हैं।”
‘हगिंग फेस’ घटना पर, जहां मिसअलाइनमेंट के कारण कंपनी और थर्ड पार्टी को सुरक्षा के लिहाज से नुकसान हुआ, ओपनएआई ने कहा कि उसने पारंपरिक सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया प्लेबुक का पालन किया।
कंपनी ने बताया, “हमने तुरंत ‘हगिंग फेस’ के साथ मिलकर यह समझने के लिए काम करना शुरू किया कि क्या हुआ था और अगले ही दिन सार्वजनिक रूप से इसका खुलासा भी किया। हमारी जांच जारी है, और हम उन पक्षों को सूचित करना जारी रखे हुए हैं, जिन पर हमारे मॉडल ने कम महत्वपूर्ण तरीकों से प्रभाव डाला।”
‘हगिंग फेस’ घटना से पहले, कंपनी ने एजेंट्स द्वारा इंटरनेट का अनपेक्षित तरीकों से उपयोग करने के शुरुआती संकेत देखे थे।
ओपन एआई ने कहा, “हमने विकी इंसिडेंट को मिसअलाइनमेंट का एक उदाहरण माना, जैसा कि हमने पहले शेयर किया था। मॉडल क्षमताओं के इस नए चरण के लिए हमारे मिसअलाइनमेंट डिस्क्लोजर प्रैक्टिस को विस्तार देने की जरूरत है।”
कंपनी ने कहा, “हमारे और बड़े एआई समुदाय के पास अभी तक यह स्पष्ट मानक नहीं है कि ट्रेनिंग, मूल्यांकन और तैनाती के दौरान दिखने वाले मिसअलाइनमेंट की रिपोर्ट कैसे की जाए, जिसमें ऐसे उदाहरण भी शामिल हैं जो पारंपरिक सुरक्षा घटनाओं की तरह नहीं दिखते, लेकिन एआई व्यवहार और भविष्य के जोखिमों के बारे में जानकारी दे सकते हैं।”
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