अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-कनाडा कूटनीतिक विवाद: आक्रामक ट्रूडो ने कहा कि नई दिल्ली ने ‘मौलिक त्रुटि’ की है
भारत कनाडा कूटनीतिक विवाद: भारत और कनाडा के बीच विवाद के कम से कम निकट भविष्य में बढ़ने और जारी रहने की संभावना के संकेत देते हुए, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार (14 अक्टूबर) को भारत पर “मौलिक त्रुटि” करने का आरोप लगाया। कनाडा की राजधानी ओटावा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, ट्रूडो ने भारत पर हमला करते हुए अपने दावे को दोहराया कि भारत कनाडा के अंदर कनाडाई लोगों के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों का समर्थन कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को देखते हुए, दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) के बीच आगामी बैठक ‘अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण’ है। NSA इस सप्ताहांत सिंगापुर में मिलने वाले हैं।
ट्रूडो ने कहा, “भारत सरकार ने यह सोचकर बुनियादी गलती की है कि वे कनाडा की धरती पर कनाडाई लोगों के खिलाफ आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, चाहे वह हत्या हो या जबरन वसूली। यह बिल्कुल अस्वीकार्य है।”
उन्होंने कहा, “जब मैंने पिछले सप्ताह के अंत में प्रधानमंत्री मोदी से बात की थी, तो मैंने बताया था कि इस सप्ताहांत सिंगापुर में हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच होने वाली बैठक कितनी महत्वपूर्ण होने जा रही है। उन्हें उस बैठक के बारे में पता था और मैंने उन पर जोर दिया था कि इस बैठक को बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा एवं अंतर-सरकारी मामलों के मंत्री डोमिनिक लेब्लांक और विदेश मंत्री मेलानी जोली ट्रूडो के साथ मौजूद थे।
यद्यपि उन्होंने कहा कि कनाडा भारत के साथ काम करने के लिए तैयार है, लेकिन उनके शब्दों के लहजे से ऐसा प्रतीत हुआ कि गेंद अब भारत के पाले में है।
ट्रूडो ने कहा, “हम यह लड़ाई नहीं चाहते, लेकिन जाहिर है कि कनाडा की धरती पर एक कनाडाई की हत्या ऐसी चीज नहीं है जिसे हम एक देश के रूप में नजरअंदाज कर सकते हैं।”
पिछले साल ट्रूडो ने कनाडा की संसद में एक बयान दिया था और आरोप लगाया था कि खालिस्तान समर्थक आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत के ‘एजेंट’ हैं। भारत ने इन दावों को सिरे से नकार दिया है और कनाडा से ठोस सबूत मांगे हैं, जिसके बारे में भारत का कहना है कि उसे अब तक कोई सबूत नहीं मिला है।
लेकिन ट्रूडो इससे असहमत थे।
उन्होंने कहा, “इसलिए हमने भारत को हर कदम पर अवगत कराया है। मैंने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे बात की है। हमने खुफिया समकक्षों से संपर्क किया है और दुर्भाग्य से, पिछले साल सितंबर में हाउस ऑफ कॉमन्स में मेरे बयान के बाद से लेकर अब तक, हर कदम पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया नकारने, उलझाने और मुझ पर व्यक्तिगत रूप से तथा कनाडा सरकार और उसके अधिकारियों और पुलिस एजेंसियों की ईमानदारी पर हमला करने की रही है।”
भारत-कनाडा विवाद का नवीनतम अध्याय
पिछले साल ट्रूडो के संसद में दिए गए भाषण के बाद से ही दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव है। एक नया अध्याय तब शुरू हुआ जब कनाडा ने भारत को राजनयिक संदेश भेजा जिसमें कहा गया कि कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त संजय वर्मा और कुछ अन्य राजनयिक एक हत्या की जांच में ‘रुचि के व्यक्ति’ हैं।
भारत ने एक कड़े बयान में कनाडा के दावों को खारिज कर दिया।
भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “भारत सरकार इन बेतुके आरोपों को दृढ़ता से खारिज करती है और इन्हें ट्रूडो सरकार के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा मानती है, जो वोट बैंक की राजनीति पर केंद्रित है।”
इसके बाद भारत ने भारत में कनाडा के प्रभारी स्टीवर्ट व्हीलर को तलब किया और बताया कि कनाडा के ऐसे दावे ‘अस्वीकार्य’ हैं।
भारत ने संजय वर्मा सहित कनाडा से छह राजनयिकों को वापस बुला लिया तथा कनाडा के छह राजनयिकों को भारत से निष्कासित कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने राष्ट्रपति मुर्मु से की मुलाकात, हासिल किया परिचय पत्र

चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से अपने परिचय पत्र प्राप्त किए हैं। चीन में भारतीय दूतावास ने इसकी जानकारी दी। मार्च में 1992 बैच के आईएफएस अधिकारी दोराईस्वामी को चीन में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया था।
चीन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “विक्रम दोराईस्वामी को चीन में राजदूत के तौर पर उनके असाइनमेंट के लिए भारत की राष्ट्रपति से क्रेडेंशियल्स मिले।” 1992 बैच के आईएफएस अधिकारी विक्रम दोराईस्वामी को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के मुताबिक उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में मास्टर डिग्री ली।
1992-1993 में नई दिल्ली में अपनी इन-सर्विस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, दोराईस्वामी मई 1994 में हांगकांग में भारतीय दूतावास में थर्ड सचिव नियुक्त हुए। उन्होंने हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय के न्यू एशिया येल-इन-एशिया लैंग्वेज स्कूल से चीनी भाषा में डिप्लोमा पूरा किया।
विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी में बताया गया कि विक्रम दोराईस्वामी अभी ब्रिटेन में भारत के हाई कमिश्नर हैं और उन्हें चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। उम्मीद है कि वह जल्द ही यह काम संभाल लेंगे।
सितंबर 1996 में उन्हें बीजिंग में भारतीय दूतावास में नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने लगभग चार साल तक जिम्मेदारी संभाली। फिर 2000 में नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में लौटने पर दोराईस्वामी ने डिप्टी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल (ऑफिशियल) नियुक्त की भूमिका निभाई। दो साल बाद उन्हें प्रधानमंत्री के ऑफिस में प्रमोट किया गया। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री के निजी सचिव के तौर पर काम किया।
2006 में दोराईस्वामी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में राजनीतिक सलाहकार के तौर पर और अक्टूबर 2009 में जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) में भारत के महावाणिज्य दूत के तौर पर कार्यभार संभाला।
जुलाई 2011 में दोराईस्वामी नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में वापस आ गए, जहां उन्होंने साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (एसएएआरसी) विभाग का नेतृत्व किया। इस दौरान वे मार्च 2012 में नई दिल्ली में चौथे ब्रिक्स समिट के कोऑर्डिनेटर भी थे।
फिर अक्टूबर 2012 से अक्टूबर 2014 तक दोराईस्वामी विदेश मंत्रालय के अमेरिकी विभाग में संयुक्त सचिव थे। अप्रैल 2015 में कोरिया में भारत के राजदूत नियुक्त होने से पहले वे अक्टूबर 2014 में उज्बेकिस्तान में भारत के राजदूत बने।
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अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने से कच्चा तेल चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर

अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने की संभावना के चलते गुरुवार को कच्चे तेल की कीमत चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
भारतीय समयानुसार सुबह 10:22 पर बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम 6.33 प्रतिशत बढ़कर 125.5 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम 3.35 प्रतिशत बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
इससे पहले कच्चे तेल में यह कीमतें 2022 की शुरुआत में रूस-यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के दौरान देखी गई थीं।
कच्चे तेल में तेजी ऐसे समय पर देखी गई है, जब कुछ अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान में संभावित कार्रवाई के विकल्पों के बारे में जानकारी देगी। इससे दोनों देशों में फिर से संघर्ष शुरू होने की संभावना में इजाफा हुआ है।
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक कर रखा है, जिससे ईरान का तेल निर्यात करीब रुक गया है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कहा गया कि जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करता, तब तक यह नाकेबंदी नहीं हटेगी। ईरान भी पीछे हटने के तैयार नहीं है। हालांकि, वह अमेरिका के शांति के प्रस्ताव दे चुका है, जिसे ट्रंप ने ठुकरा दिया था।
इस हफ्ते की शुरुआत में मध्य पूर्व में तनाव के कारण अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैश ने 2026 की चौथी तिमाही के लिए कच्चे तेल की औसत कीमतों के अनुमान में फिर एक बार बढ़ोतरी की है।
अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक का कहना है कि इस साल के अक्टूबर से दिसंबर अवधि में ब्रेंट क्रूड की कीमत औसत 90 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम औसत 83 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है।
औसत कीमतों में संशोधन की वजह, मध्य पूर्व में लगातार तनाव बने रहने के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित रहना है। इससे पहले गोल्डमैन सैश ने 2026 की चौथी तिमाही में ब्रेट क्रूड का दाम औसत 80 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम औसत 75 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया था।
इन्वेस्टमेंट बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि तनाव के चलते मध्य पूर्व से आने वाला लगभग 14.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल बाजार से बाहर हो गया है।
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भारत और रूस के रक्षा मंत्रियों की मुलाकात, अंतरराष्ट्रीय हालात व रक्षा सहयोग पर बात

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव के साथ मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह ने इस बातचीत को बेहतरीन और सार्थक बताया। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान मंगलवार को भारत और रूस के बीच यह अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। खास तौर पर रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक और संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं।
भारतीय सशस्त्र बलों में उपयोग होने वाले कई प्रमुख सैन्य उपकरण और प्लेटफॉर्म रूस से जुड़े हैं। इसमें लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और मिसाइल प्रणाली जैसे अहम संसाधन शामिल हैं, जो भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाते हैं। दोनों देश रक्षा उत्पादन में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताते रहे हैं। भारत में ही संयुक्त रूप से रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी और तकनीकी क्षमता में भी वृद्धि होगी।
दोनों पक्ष समय समय पर रक्षा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करते हैं। तय समयसीमा में रक्षा परियोजनाओं को पूरा को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति है। माना जा रहा है कि सैन्य-तकनीकी सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए नए क्षेत्रों की पहचान पर भी यहां चर्चा हुई।
इससे पहले मंगलवार को ही रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई है। यह मुलाकात भी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर आयोजित की गई। दोनों देशों के रक्षामंत्रियों ने यहां क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग पर चर्चा की। राजनाथ सिंह यहां एससीओ के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। वह किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे।
माना जा रहा है कि इस उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान दोनों देशों के रक्षामंत्रियों ने एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति व क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर विचार विमर्श किया। साथ ही भारत-चीन के बीच संवाद को मजबूत करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। वहीं सीमा क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और तनाव कम करने के लिए प्रभावी संचार तंत्र को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एससीओ जैसे मंच पर इस तरह की द्विपक्षीय वार्ताएं सदस्य देशों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ाती हैं। बिश्केक में हुई यह बैठकें भारत-रूस के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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