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Sunday,11-October-2026
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दिल्ली की अदालत ने संजय सिंह को दूसरी बार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने की दी इजाजत

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दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) नेता संजय सिंह को दूसरी बार पुलिस हिरासत में संसद में भाग लेने और राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने की अनुमति दे दी।

संजय सिंह को कथित उत्पाद शुल्क नीति मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया और आरोप पत्र दायर किया गया।

सिंह को सोमवार को शपथ लेने की अनुमति नहीं मिलने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है।

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के कार्यालय के एक सूत्र ने कहा था, “राज्यसभा की कार्यवाही सूचीबद्ध व्यवसाय द्वारा विनियमित होती है, जिसे बुलेटिन में अधिसूचित किया जाता है। संजय सिंह का शपथ ग्रहण सदन के व्यवसाय में सूचीबद्ध नहीं था।”

राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने मंगलवार को सिंह को 8 या 9 फरवरी को संसद जाने की इजाजत दे दी।

न्यायाधीश ने जेल अधिकारियों को शपथ दिलाने के लिए सिंह को न्यायिक हिरासत और उचित सुरक्षा के तहत राज्यसभा ले जाने का निर्देश दिया।

सिंह के वकील को उनसे मिलने और शपथ ग्रहण समारोह के लिए आवश्यक प्रासंगिक दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर लेने के लिए तिहाड़ जेल जाने की अनुमति दी गई है।

सिंह के वकील ने अदालत को सूचित किया कि शपथ ग्रहण की तारीख को अंतिम रूप देने के लिए कुछ दस्तावेजों पर उन्हें हस्ताक्षर करने और राज्यसभा कार्यालय में जमा करने की आवश्यकता है।

विशेष रूप से, सिंह से संबंधित कुछ मामले विशेषाधिकार समिति के समक्ष लंबित हैं, इनमें राज्यसभा सभापति के निर्देशों की कथित जानबूझकर अवहेलना भी शामिल है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नॉर्थ एवेन्यू क्षेत्र में उनके आवास पर तलाशी लेने के बाद 4 अक्टूबर, 2023 को सिंह को गिरफ्तार किया था। 24 जुलाई, 2023 को उनके निलंबन का आदेश दिया गया और 11 अगस्त, 2023 को सदन ने आदेश पारित किया। उसके अनुसार उनका निलंबन जारी है।

1 फरवरी को, अदालत ने सिंह के आवेदन पर ईडी को नोटिस जारी किया था, इसमें उन्होंने मौजूदा संसद सत्र में भाग लेने के लिए 4 से 10 फरवरी तक अंतरिम जमानत की मांग की थी।

न्यायाधीश नागपाल ने पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया और सिंह की न्यायिक हिरासत भी 17 फरवरी तक बढ़ा दी थी, जो अदालत में शारीरिक रूप से पेश हुए थे।

न्यायाधीश ने अंतरिम जमानत के लिए सिंह की उपर्युक्त याचिका को वापस लेते हुए न्यायिक हिरासत में शपथ लेने के उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया था।

सिंह ने अपने अनुरोध के कारण के रूप में 7 फरवरी को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक अदालत में उपस्थिति का भी हवाला दिया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 31 जनवरी को सिंह की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। विशेष न्यायाधीश नागपाल द्वारा 22 दिसंबर को उनकी याचिका खारिज करने के बाद सिंह ने 4 जनवरी को जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था। न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।

राष्ट्रीय समाचार

युवा संगम: उत्तराखंड के युवाओं ने जाना पश्चिम बंगाल का सांस्कृतिक वैभव

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युवा संगम के तहत एक राज्य के विद्यार्थियों और शिक्षकों को दूसरे राज्यों में जाकर वहां की संस्कृति और परंपराओं को जानने का अवसर मिला है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की इस पहल के अंतर्गत अब उत्तराखंड के छात्रों का एक दल पश्चिम बंगाल के दौरे पर है। यहां उत्तराखंड के युवाओं को पश्चिम बंगाल की संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है।

इस दौरान दल ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि से मुलाकात की। यहां युवाओं ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा और देश के विभिन्न राज्यों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा की। यह दौरा केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से संचालित युवा संगम कार्यक्रम के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसकी शुरुआत विद्यार्थियों और शिक्षकों के दल के पश्चिम बंगाल पहुंचने के साथ हुई। यहां विद्यार्थियों और शिक्षकों का स्वागत किया गया और इसके बाद सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा अनुभव आधारित सीखने की गतिविधियां शुरू हुईं।

पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को करीब से देखने के लिए उत्तराखंड के दल ने 9 अक्टूबर को कोलकाता के प्रिंसेप घाट और सुंदरवन का भ्रमण किया। हुगली नदी के किनारे स्थित प्रिंसेप घाट कोलकाता के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है। यहां युवाओं को शहर के ऐतिहासिक परिवेश, नदी के आसपास के सुंदर दृश्यों और जीवंत वातावरण को अनुभव करने का अवसर मिला। इस भ्रमण ने उनके दौरे को एक यादगार अनुभव दिया। दल ने सुंदरवन का भी दौरा किया। इस तरह युवाओं को पश्चिम बंगाल के विभिन्न स्थलों और वहां की विशिष्ट पहचान से परिचित होने का अवसर मिला। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत कर रहा युवा संगम युवा संगम कार्यक्रम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं के बीच राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना और विभिन्न राज्यों के लोगों के बीच सीधे संपर्क को बढ़ावा देना है।

उत्तराखंड के इस दल का समन्वयक संस्थान हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय है। वहीं पश्चिम बंगाल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर इसकी मेजबानी कर रहा है। संस्थान के माध्यम से युवाओं को पश्चिम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत, स्थानीय परंपराओं तथा शैक्षणिक परिवेश को समझने का अवसर मिल रहा है। राज्यपाल से मुलाकात में शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर चर्चा दौरे के दौरान 8 अक्टूबर को उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि से मुलाकात की। इस संवाद में सीखने के अवसरों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और देश के अलग-अलग हिस्सों के युवाओं के बीच संबंध मजबूत करने के महत्व पर चर्चा हुई।

मंत्रालय के मुताबिक, इस मुलाकात से विद्यार्थियों और शिक्षकों को राज्यपाल के विचार जानने तथा पश्चिम बंगाल की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को केवल दूसरे राज्य की संस्कृति से परिचित कराना ही नहीं, बल्कि उनके बीच संवाद और आपसी समझ को भी बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के सातवें चरण में 20 जोड़ी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवाओं को एक-दूसरे के यहां जाकर वहां की संस्कृति, शैक्षणिक संस्थानों, नवाचार से जुड़े प्रयासों और विकास संबंधी पहलों को समझने का अवसर दिया जा रहा है।

इस पहल के माध्यम से युवा अपने राज्य से बाहर निकलकर दूसरे क्षेत्रों की जीवनशैली, परंपराओं और सामाजिक परिवेश को समझते हैं। साथ ही, उन्हें अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों से मिलने, नए अनुभव हासिल करने और मित्रता के संबंध बनाने का अवसर मिलता है। उत्तराखंड के युवाओं का पश्चिम बंगाल दौरा भी इसी उद्देश्य को आगे बढ़ा रहा है। ऐसे कार्यक्रम देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को समझने और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी सम्मान बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। युवा संगम के माध्यम से केंद्र सरकार एक ऐसे भारत की भावना को मजबूत करने का प्रयास कर रही है, जहां विविधता के बावजूद एकता बनी रहे और साझा अनुभव देशवासियों को एक-दूसरे के करीब लाएं।

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राजनीति

देश में हालत गंभीर, सरकार ने खुद दिल्ली में मचाया आतंकः अशोक गहलोत

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा रविवार को दिल्ली में मेट्रो और रेलवे सेवाओं के सामान्य संचालन, इंटरनेट कनेक्टिविटी की बहाली को लेकर दिए गए निर्देश पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में हालात बहुत गंभीर हैं।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा, “देश के अंदर हालात बड़े गंभीर होते जा रहे हैं। आज रविवार को सुप्रीम कोर्ट खुल रहा है तो आप अंदाजा लगा लीजिए। इतिहास में पहली बार इस प्रकार के काम के लिए सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई करनी पड़ रही है कि मेट्रो बंद क्यों किए जा रहे हैं। ऐसा भी हो सकता है कि जो वकीलों को गिरफ्तार किया था, उस पर भी सुनवाई हो सकती है। सरकार जिस तरह से खुद अराजकता फैला रही है, समझ नहीं आ रहा है कि ये चाहते क्या हैं? ऐसी स्थिति हो गई है जैसे कोई क्रैकडाउन (सख्त कार्रवाई) हो। सरकार ने खुद पूरी दिल्ली में आतंक मचा रखा है।”

दिल्ली में जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है और देशभर से आ रहे लोगों को पाबंदियों और बदसलूकी का सामना करना पड़ रहा है। ये सभी इसी देश के नागरिक हैं, बाहरी नहीं। जिस तरह से नेताओं को हिरासत में लिया गया है, कुछ को छोड़ दिया गया जबकि कुछ अभी भी हिरासत में हैं, यह बहुत चिंता की बात है। सरकार को विपक्ष से बातचीत करनी चाहिए और चुनावी गड़बड़ियों को लेकर जताई जा रही चिंताओं का समाधान करना चाहिए।”

अशोक गहलोत ने कहा कि कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकील कह रहे हैं कि वकीलों की सुनवाई नहीं हो रही है। देश में पहली बार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ अनुचित व्यवहार हो रहा है। विपक्ष को जो सम्मान मिलना चाहिए, वो नहीं मिल रहा। देश में लोकतंत्र की भूमिका का सही निर्वहन नहीं हो रहा है।

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राजनीति

सीएम योगी के अयोध्या से चुनाव लड़ने पर अखिलेश बोले-‘पवन की हवा में अहंकारी लोग टिक नहीं पाएंगे’

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लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) से भाजपा सरकार के खिलाफ राजनीतिक हमला तेज करते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का दावा किया।

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने से जुड़े सवाल पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पवन पांडे की हवा में अहंकारी लोग टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री खुद टिकट बांटते हैं। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को अपने टिकट का भरोसा नहीं है, उन्हें पहले अपना टिकट पक्का कराने की चिंता करनी चाहिए। भाजपा की राजनीति से जनता परिचित हो चुकी है और पार्टी को अपने फैसलों का जवाब देना होगा।

उन्होंने दावा किया कि 2027 में बदलाव होगा और इसकी शुरुआत हो चुकी है। सपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पीडीए की राजनीतिक ताकत से घबराई हुई है।

सपा प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी पर अन्याय करने, पीडीए से घबराने और चुनावी प्रक्रिया में बाधाएं पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए सीईसी के इस्तीफे की मांग की। गोमतीनगर स्थित जेपीएनआईसी पहुंचकर अखिलेश यादव ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान केंद्र के मुख्य द्वार को टीन की चादरों से ढके जाने, परिसर के आसपास बैरिकेडिंग और पुलिस तथा पीएसी की तैनाती को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति के माध्यम से सत्ता और व्यवस्था को चुनौती देने का रास्ता दिखाया था। उनका आंदोलन आज भी प्रासंगिक है और समाजवादी पार्टी उसी रास्ते पर चलकर परिवर्तन लाएगी। अखिलेश यादव ने कहा, “ऐसा तो नहीं कि परिवर्तन का आगाज हो गया है। लगता है बदलाव की शुरुआत है।”

उन्होंने दावा किया कि जनता के भीतर बढ़ती पीड़ा बदलाव की प्रक्रिया को तेज करेगी। उन्होंने जयप्रकाश नारायण के योगदान को याद करते हुए कहा कि वह हमेशा दबे-कुचले लोगों के अधिकारों के लिए खड़े रहे। उन्होंने सामाजिक सुधार के क्षेत्र में विनोबा भावे के भूदान आंदोलन के योगदान को भी याद किया। जेपीएनआईसी को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल किया कि प्रदेश में क्या इस तरह की कोई दूसरी इमारत है।

उन्होंने परिसर में बने हेलीपैड, लगभग 1,200 वाहनों की पार्किंग और निर्माण परियोजना पर खर्च को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने 800 करोड़ रुपये के आंकड़े का उल्लेख करते हुए निर्माण कार्यों, ठेकेदारों और भुगतान से जुड़े मुद्दों पर भी जवाब मांगा। सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस केंद्र को पैसों के भार में दबा दिया है और विचारधारा के महत्व को नजरअंदाज किया है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इस केंद्र को कितने रुपये में बेच दिया गया होगा। उनके मुताबिक, जयप्रकाश नारायण का आंदोलन सत्ता परिवर्तन के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का भी प्रतीक है।

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग का दायित्व अधिक से अधिक लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करना और मतदान प्रक्रिया को सुचारु बनाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान लोगों को वोट डालने से रोका जाता है। दिल्ली में उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ कथित मारपीट का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल किए और उसके इस्तीफे की मांग की। लखनऊ में जलभराव की समस्या को लेकर अखिलेश यादव ने रिवरफ्रंट और पलासियो क्षेत्र का उल्लेख करते हुए सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि पहले रिवरफ्रंट की तारीफ की गई थी लेकिन अब वहां जलभराव की स्थिति सामने आ रही है। उनके अनुसार, नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण और सिंचाई विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण जल निकासी की समस्या गंभीर हुई है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि अधिकारी यह तय करने में विफल हैं कि विभिन्न क्षेत्रों का पानी किस दिशा में जाएगा और उसकी निकासी कैसे होगी। उन्होंने बंधों, नालों और पुलों की डिजाइन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जल निकासी व्यवस्था की खामियों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

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