राष्ट्रीय समाचार
कर्नाटक में कोविड-19 के 78 नये मामले दर्ज, एक की मौत
कर्नाटक में शुक्रवार को कोविड-19 मामलों में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य में 78 नए कोविड मामले दर्ज किए गए हैं और व्यक्ति की मौत हुई है।
इसी के साथ राज्य में एक्टिव मरीजों की संख्या 175 हो गई है। वहीं पॉजिटिविटी दर 3.29 प्रतिशत हो गई है और मृत्यु दर 1.28 प्रतिशत है।
दक्षिण कन्नड़ जिले में एक व्यक्ति की मौत हुई है। एक्टिव मामलों में से 162 मरीज होम आइसोलेट हैं और 13 अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से छह लोगों का इलाज आईसीयू में किया जा रहा है।
कोविड टेस्ट में वृद्धि की गई है और पिछले 24 घंटों में राज्य भर में 2,366 टेस्ट किए गए हैं।
बेंगलुरु में 68 नए मामले सामने आए और शहर में 156 एक्टिव मामले हैं। चिक्कमगलुरु में 4, बेंगलुरु ग्रामीण में 1, दक्षिण कन्नड़ में 2 और मैसूरु में 1 मामला सामने आया है। गुरुवार को राज्य में 24 नए कोविड मामले सामने आए, जिनमें से 23 बेंगलुरु से सामने आए।
राष्ट्रीय समाचार
रुचि एक्रोनी केस में ईडी की कार्रवाई, 7.76 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 7.76 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है, जिसे अब स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड के नाम से जाना जाता है।
कुर्क की गई संपत्तियां कंपनी के नाम पर दर्ज भूमि के टुकड़ों के रूप में हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है।
ईडी ने इस मामले में जांच की शुरुआत सीबीआई, एसीबी भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की थी। एफआईआर में कंपनी पर यूको बैंक, इंदौर के साथ धोखाधड़ी कर 58 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। आरोप है कि कंपनी ने बेईमानी से अपनी समूह कंपनियों में निवेश किया और सहयोगी व संबंधित संस्थाओं को ऋण और अग्रिम देकर धन का हेरफेर किया।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने क्रेडिट सुविधाएं और ‘लेटर ऑफ क्रेडिट’ जाली, मनगढ़ंत और हेरफेर किए गए दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किए, जिनके पीछे कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं थी।
इन माध्यमों से प्राप्त धन को योजनाबद्ध तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया, उसकी परतें बनाई गईं और फिर आपस में जुड़ी कंपनियों के जटिल नेटवर्क के जरिए वापस उसी उधार लेने वाली इकाई तक पहुंचाया गया। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से अवैध रूप से निकाले गए धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई और बाद में इसका इस्तेमाल विभिन्न अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया।
ईडी के अनुसार, यह मामला वित्तीय अनियमितताओं और संगठित तरीके से किए गए धन के दुरुपयोग का उदाहरण है। इससे पहले भी ईडी, इंदौर इस प्रकरण में 10.15 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियों को कुर्क कर चुकी है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजनीति
दिल्ली में युवक की हत्या पर भड़के तेजस्वी , कहा- भाजपा सरकार में ‘बिहारी’ होना सबसे बड़ा अपराध

राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने दिल्ली में बिहार के खगड़िया निवासी पांडव कुमार की हत्या को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पांडव कुमार की सिर्फ इसलिए गोली मारकर हत्या कर दी गई क्योंकि वह ‘बिहारी’ था।
‘बिहारी होने के अपराध’ में ही उसका दोस्त कृष्ण जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में जिस जगह ‘बिहारी’ जानकर गोली मारी गई है, वहां निगम पार्षद, विधायक, सांसद भाजपा के हैं।
उन्होंने आगे लिखा, “यही नहीं, सीएम भी भाजपा की हैं, बिहार सीएम भी भाजपा के हैं और आधा दर्जन ‘निष्क्रिय बड़बोले’ केंद्रीय मंत्री बिहार के, उपराज्यपाल भाजपा के, गृहमंत्री और प्रधानमंत्री भी भाजपा के हैं। भाजपा बिहारियों के लिए काल बन चुकी है।”
राजद नेता ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या इन भाजपाइयों में किसी में हिम्मत है कि एक गरीब मेहनतकश बिहारी की हत्या करने वाले उस हत्यारे पुलिसकर्मी को सजा दिलवा सके? उन्होंने कहा कि असल में, 21 वर्षों की नीतीश-भाजपा की खराब नीतियों के कारण बिहारवासियों को मजबूरन दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है, और दूसरे राज्यों की भाजपा सरकार और प्रशासन मेहनतकश बिहारियों को सम्मान नहीं बल्कि शक, नफरत और हीनभावना की नजर से देखती है।
उन्होंने कहा कि हर बार बिहारी पर अत्याचार होता है, प्रवासी बिहारी प्रताड़ना के शिकार होते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली जिस दिल्ली पुलिस पर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उसी ने ‘बिहारी होने’ मात्र से अपराधी मान लिया और गोली मार दी। इससे अधिक निंदनीय घटना क्या हो सकती है? बड़बोले एनडीए नेता इस घटना पर बिल में छिपे हुए हैं।
उन्होंने पूरे मामले की जांच कराकर बिहारियों को प्रताड़ित करने वाले दोषियों पर कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग सरकार से की है। उन्होंने कहा कि यह घटना बिहार और बिहारवासियों के सम्मान पर आघात है, इसलिए न्याय चाहिए और अभी अविलंब चाहिए।
राजनीति
‘एक आदमी गलत हो सकता है, लेकिन सात लोग नहीं’, राघव चड्ढा ने ‘आप’ छोड़ने की बताई वजह

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस फैसले के बाद से लगातार उन पर कई सवाल उठ रहे थे। कुछ लोग उन्हें शुभकामनाएं दे रहे थे तो कुछ उनके फैसले के पीछे के कारण जानना चाहते थे। इन सवालों का जवाब देने के लिए राघव चड्ढा ने सोमवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया।
राघव चड्ढा ने वीडियो में कहा कि पिछले तीन दिनों से उनके पास ढेर सारे मैसेज आ रहे हैं। ज्यादातर लोग उन्हें बेस्ट विशेस और बधाई दे रहे हैं, जबकि कुछ लोग उनके इस बड़े फैसले के पीछे क्या वजहें हैं, ये जानना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने यह वीडियो उन सभी के लिए बनाया है, जिन्होंने शायद उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी नहीं देखी।
उन्होंने बताया कि राजनीति में आने से पहले वह एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट थे। उनके सामने एक बहुत अच्छा करियर था, लेकिन उन्होंने उस करियर को छोड़कर राजनीति में कदम रखा। उन्होंने कभी करियर बनाने के लिए राजनीति नहीं की। बल्कि वे आम आदमी पार्टी के फाउंडिंग मेंबर बने और उस पार्टी को अपने युवा दिनों के पूरे 15 साल दिए। उन्होंने अपनी मेहनत, खून-पसीने से उस पार्टी को सींचा और बड़ा किया। लेकिन अब वह पार्टी अब पहले जैसी नहीं रही। आम आदमी पार्टी में आज एक टॉक्सिक माहौल बन गया है। वहां काम करने से रोका जाता है, संसद में बोलने से रोका जाता है। पूरी पार्टी अब कुछ भ्रष्ट और समझौता करने वाले लोगों के हाथ में फंसकर रह गई है। ये लोग अब देश के लिए नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए काम करते हैं।
राघव चड्ढा ने कहा कि पिछले कई सालों से ये महसूस हो रहा था कि वे सही जगह पर नहीं हैं। उन्होंने कहा, “शायद मैं सही आदमी हूं, लेकिन गलत पार्टी में।” उनके सामने सिर्फ तीन रास्ते थे। पहला, पूरी तरह राजनीति छोड़ देना। दूसरा, उसी पार्टी में रहकर चीजें सुधारने की कोशिश करना, जो संभव नहीं हुआ और तीसरा, अपनी एनर्जी और अनुभव को लेकर किसी और प्लेटफॉर्म पर जाकर सकारात्मक राजनीति करना। इसलिए उन्होंने तीसरा रास्ता चुना, लेकिन उन्होंने अकेले यह फैसला नहीं लिया। उनके साथ और भी सांसद थे। कुल सात सांसदों ने मिलकर यह तय किया कि अब वो इस पार्टी से अपना रिश्ता तोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “एक आदमी गलत हो सकता है, दो आदमी गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते।”
उन्होंने कहा कि कितने सारे पढ़े-लिखे, समझदार लोग इस पार्टी के सपने के साथ जुड़े थे, लेकिन बाद में उन्होंने भी पार्टी छोड़ दी। क्या वो सब गलत हो सकते हैं?
राघव चड्ढा ने उदाहरण देते हुए कहा, “आप में से जो लोग नौकरी करते हैं, अगर आपका ऑफिस एक टॉक्सिक जगह बन जाए, जहां आपको काम करने नहीं दिया जाता, आपकी मेहनत को दबाया जाता है और आपको चुप करा दिया जाता है, तो आप क्या करेंगे? जाहिर है, आप उस जगह को छोड़ देंगे।” उन्होंने कहा कि उन्होंने भी ठीक वही किया है।
उन्होंने कहा, “मैं अब आपकी समस्याओं को पहले से भी ज्यादा जोश और एनर्जी के साथ उठाऊंगा। अच्छी बात ये है कि अब हम उन समस्याओं के समाधान भी ढूंढ पाएंगे और उन्हें लागू भी करा पाएंगे।”
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