राष्ट्रीय समाचार
धनबाद में जेनरल स्टोर में लगी भीषण आग, एक ही परिवार के तीन की मौत
धनबाद शहर के केंदुआ बाजार स्थित एक जेनरल स्टोर में सोमवार की देर रात लगी आग से कारोबारी के परिवार के तीन लोगों की मौत हो गयी। परिवार और पड़ोस से छह अन्य लोग घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए धनबाद स्थित मेडिकल कॉलेज एसएनएमसीएच में दाखिल कराया गया है।
जिस दुकान में आग लगी, उसी के ऊपरी तल्ले पर व्यवसायी का पूरा परिवार रहता है।
बताया गया कि रात में स्टोर बंद करने के बाद साढ़े नौ से दस बजे दुकान में आग लगी और देखते-देखते लपटों और धुएं के गुबार ने पूरे मकान को अपने कब्जे में ले लिया। व्यवसायी का पूरा परिवार ऊपर मंजिल पर फंस गया।
धुएं से दम घुटने से स्टोर के मालिक सुभाष गुप्ता की मां 70 वर्षीया उमा देवी, 32 वर्षीया बहन प्रिया गुप्ता और पुत्री छह वर्षीय सौम्या ने दम तोड़ दिया।
दुकान तंग गली में है, इसलिए आग पर काबू पाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। आस-पास के लोगों ने पानी फेंककर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।
करीब एक घंटे बाद फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ी पहुंची, लेकिन वह गली में नहीं घुस पाई। बाद में दमकल की छोटी गाड़ी मंगाई गई, तब जाकर आग बुझाई जा सकी।
स्टोर मालिक सुभाष गुप्ता, उनके पिता अशोक गुप्ता, पत्नी सुमन गुप्ता, पुत्र शिवांश के अलावा आग बुझाने के दौरान जख्मी हुए पड़ोसी वीरेंद्र चौरसिया और तुषार वर्णवाल को इलाज के लिए हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया है।
राजनीति
“आप” का आरोप: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली छावनी में तब्दील

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज 10 अक्टूबर को प्रस्तावित वोट चोरी और एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के विरोध में होने वाले प्रदर्शन को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। आप नेताओं आतिशी और गोपाल राय ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
पार्टी ने दावा किया कि प्रदर्शन से पहले बड़े पैमाने पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है तथा कई स्थानों पर लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। आप नेता आतिशी ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि दिल्ली में 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं, जबकि करीब 45 हजार पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई है। उन्होंने हजारों लोगों को एहतियातन हिरासत में लिए जाने, इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने और बाजारों के बंद होने का भी आरोप लगाया।
आतिशी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि आखिर एक ऐसे व्यक्ति की सुरक्षा के लिए इतनी बड़ी व्यवस्था क्यों की जा रही है, जिस पर उन्होंने भाजपा को अवैध तरीके से चुनाव जिताने में मदद करने का आरोप लगाया। उनके बयान का संदर्भ चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के खिलाफ आप के आंदोलन से जुड़ा है। पार्टी लगातार चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रही है।
आप नेता गोपाल राय ने भी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “देश में आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा ब्लैक इमर्जेंसी घोषित की गई है।” गोपाल राय ने आरोप लगाया कि पूरे दिल्ली शहर को छावनी में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को दबाने के लिए जितनी अधिक कोशिश की जाएगी, यह आंदोलन उतना ही आगे बढ़ेगा। उनके मुताबिक, पार्टी का विरोध प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के मुद्दे को जनता के बीच उठाने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना राजनीतिक दलों और नागरिकों का अधिकार है। पार्टी नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था और कथित प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को विरोध की आवाज दबाने के बजाय उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
रणनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर मतभेदों के बावजूद भारत-अमेरिका साझेदारी आगे बढ़ रही है : रिपोर्ट

पिछले 25 वर्षों के ज्यादातर समय में भारत-अमेरिका संबंध इस सोच पर आधारित रहे हैं कि एक मजबूत भारत एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखने, सप्लाई चेन में विविधता लाने और एक स्वतंत्र व खुले इंडो-पैसिफिक को मजबूत करने में मदद करके अमेरिका के बड़े रणनीतिक मकसद को पूरा करता है।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मतभेद तो हमेशा से रहे हैं, लेकिन व्यापक रणनीतिक वजहें इतनी मजबूत मानी जाती थीं कि वे इन मतभेदों को झेल सकें। हालांकि, अब इस सोच को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने हाल ही में ‘इंडिया नैरेटिव’ में लिखा, “भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा मतभेद सिर्फ तेल के मुद्दे तक सीमित नहीं हैं। शायद साझेदारी के मतलब को लेकर भी गहरी असहमति है। वॉशिंगटन अक्सर रणनीतिक तालमेल को राजनीतिक सहमति की मांग करने का आधार बनाता है। वहीं, नई दिल्ली में साझेदारी का मतलब संप्रभु देशों के बीच सहयोग माना जाता है, जिनके बीच रूस, ईरान और चीन से निपटने के तरीकों को लेकर मतभेद बने रहेंगे।”
उन्होंने कहा, “जब ये मतभेद वफादारी की सार्वजनिक परीक्षा बन जाते हैं तो कूटनीति की जगह दिखावा ले लेता है। समझौता करना इसलिए और मुश्किल हो जाता है क्योंकि इसे घुटने-टेकने जैसा दिखाया जाता है।”
राव ने कहा कि नई दिल्ली ने वॉशिंगटन की उस पुरानी सोच से दूर होने में कई साल लगाए हैं, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान को एक ही क्षेत्रीय समीकरण का हिस्सा माना जाता था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने के ट्रंप के बार-बार किए जा रहे दावों से उस पुरानी सोच पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
पूर्व भारतीय राजनयिक ने कहा, “यह आपत्ति सिर्फ सम्मान की बात नहीं है। भारत के वैश्विक आर्थिक, तकनीकी और समुद्री हित हैं, जिन्हें सिर्फ पड़ोसी देश के साथ झगड़े के संकीर्ण नजरिए से नहीं समझा जा सकता, लेकिन सोचने की पुरानी आदतें दशकों की कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद बनी रह सकती हैं, खासकर तब जब वे किसी राष्ट्रपति के राजनीतिक जुनून को पूरा करती हों।”
इस रिपोर्ट में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हाल ही में न्यूयॉर्क में की गई टिप्पणियों का जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने भारत का पक्ष साफ तौर पर रखा।
विदेश मंत्री जयशंकर ने एशिया सोसाइटी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा से जुड़ी भारत की सबसे अहम चिंताओं में से किसी एक को न समझने से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने पड़ोसी देश से होने वाले आतंकवाद को दशकों से चली आ रही एक सोची-समझी नीति बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रतिक्रिया आहत राष्ट्रवाद से प्रेरित नहीं होनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि रणनीतिक स्वायत्तता की असली परीक्षा इस बात से नहीं होती कि बाहरी दबाव की कितनी जोर-शोर से निंदा की जाती है, बल्कि इस बात से होती है कि देश उसका कितनी प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।
राव ने ‘इंडिया नैरेटिव’ में लिखा, “इसके लिए अलग-अलग तरह की डिफेंस सप्लाई, बेहतर एनर्जी सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी की क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग की ताकत और संस्थागत मजबूती की जरूरत है। इन आधारों के बिना स्वायत्तता सिर्फ बातें होंगी जो असल में निर्भरता पर टिकी होंगी। भारत को उन कीमतों को समझना होगा जो उसे चुकानी पड़ सकती हैं और उन्हें चुकाने के साधन भी विकसित करने होंगे।”
इस बात पर जोर देते हुए कि इसका मतलब अमेरिका से पीछे हटना नहीं है, उन्होंने कहा, “एशिया में अनुकूल संतुलन बनाए रखने के लिए भारत को अमेरिकी टेक्नोलॉजी, निवेश और सहयोग की जरूरत है। वहीं, अमेरिका को ऐसे भारत की जरूरत है जो चीन के दबदबे का मुकाबला कर सके। दोनों देशों के पास जो कुछ उन्होंने बनाया है, उसे बनाए रखने की वजह है, और जब भी किसी असहमति को रिश्तों पर जनमत संग्रह बना दिया जाता है, तो किसी को भी फायदा नहीं होता।”
अपराध
असम राइफल्स और कस्टम विभाग ने त्रिपुरा में 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया

असम राइफल्स ने कस्टम विभाग के समन्वय से त्रिपुरा के खोवाई जिले में लगभग 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया है।
रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए असम राइफल्स ने कस्टम विभाग के सहयोग से गुरुवार शाम को त्रिपुरा के खोवाई जिले में एक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया।
यह अभियान खुफिया जानकारी और निरंतर निगरानी के आधार पर चलाया गया था।
संयुक्त टीम ने पश्चिम सोनातला से संदिग्ध वाहन का पीछा शुरू किया। पीछा पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिले की सीमा पर स्थित हेजामारा ब्लॉक से 18 किलोमीटर पहले बैखुंतपुर गांव में समाप्त हुआ।
हालांकि, अभियान के दौरान वाहन का चालक मौके से भागने में सफल रहा।
इस जब्ती के संबंध में किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं मिली है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अवैध नशीले पदार्थों की बरामदगी पूर्वोत्तर में सक्रिय नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को बाधित करने के लिए असम राइफल्स और सहयोगी एजेंसियों के निरंतर प्रयासों को उजागर करती है।
बरामद प्रतिबंधित सामग्री को आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
इस बीच, असम राइफल्स ने सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ मिलकर 6 अक्टूबर को खोवाई जिले में लगभग 1.74 करोड़ रुपए मूल्य का 340 किलोग्राम गांजा जब्त किया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राज्य पुलिस, असम राइफल्स, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) और अन्य सुरक्षा बल संयुक्त अभियानों में राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर बांग्लादेश से सटे सेपाहिजाला जिले में अवैध गांजे की खेती को अक्सर नष्ट कर देते हैं।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, त्रिपुरा में उत्पादित सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल नहीं होता और बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में तस्करी करके भेजा जाता है, जहां इसकी ऊंची कीमत मिलती है।
परिवहन के दौरान, सूखे गांजे की खेप अक्सर ट्रकों, छोटे वाहनों और यहां तक कि यात्री ट्रेनों से भी जब्त की जाती है।
महिलाओं सहित निवासियों ने दावा किया है कि वे अपनी आजीविका के लिए पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में गांजे की खेती करते हैं।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई बार यह पाया गया है कि वन भूमि और अन्य सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके अवैध रूप से गांजे की खेती की जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि मादक औषधि और मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा मादक और मनोरोगी पदार्थों की खेती, कब्जा, बिक्री, खरीद या सेवन करना अवैध है, और उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और 20 साल तक की कैद हो सकती है।
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