राष्ट्रीय समाचार
हावड़ा में प्लास्टिक गोदाम में लगी भीषण आग
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में फोरशोर रोड पर एक गोदाम में शुक्रवार को भीषण आग लग गई, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
गोदाम में प्लास्टिक के सामान का भंडार था, जिसके बाद कुछ ही देर में आग ने भयावह रूप ले लिया।
आग पर अभी तक काबू नहीं पाया जा सका है। मौके पर दमकल की 12 गाड़ियां आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं।
हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन आग में गोदाम में रखे करीब एक करोड़ रुपये के सामान के पूरी तरह जल जाने की आशंका है। गोदाम के काफी करीब एक पेट्रोल-पंप भी है, जहां आग पहुंचने की आशंका है। आग बुझाने वाले दल आग को फैलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
मौके पर मौजूद एक अग्निशमन अधिकारी ने कहा, “हमें बहुत सावधान रहना होगा ताकि आग पेट्रोल पंप तक न पहुंचे। अगर ऐसा हुआ तो बड़ी आपदा होगी। इसलिए जब तक आग पूरी तरह से नियंत्रण में नहीं आ जाती, हमें पूरी तरह से राहत नहीं मिल सकती।”
राज्य के अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बसु भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर यह शॉर्ट-सर्किट का मामला लग रहा है।
अग्निशमन अधिकारी ने कहा, “हालांकि, फॉरेंसिक टीम द्वारा घटनास्थल की जांच के बाद ही सटीक कारण का पता चल सकेगा। किस्मत से आग उस समय लगी जब गोदाम में कोई नहीं था और इसलिए कोई हताहत नहीं हुआ।”
राजनीति
शाहदरा थाने में वकीलों से मारपीट पर भड़के सौरभ भारद्वाज, बोले-पुलिस की बर्बरता और सरकार के खिलाफ एकजुट हों अधिवक्ता

नई दिल्ली । शाहदरा पुलिस स्टेशन में वकीलों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद अधिवक्ताओं की हड़ताल और पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने इस मामले में अधिवक्ताओं से एकजुट होने की अपील करते हुए पुलिस की कार्यशैली और सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की बर्बरता और सरकार के अहंकार के खिलाफ सभी अधिवक्ताओं को एक साथ खड़ा होना चाहिए।
सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, शाहदरा थाने में वकीलों के साथ कथित मारपीट की घटना के विरोध में अधिवक्ता हड़ताल पर हैं। वकीलों का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करने के बदले रिश्वत ली थी। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि वकीलों की शिकायत पर थाना प्रभारी (एसएचओ) के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बजाय पुलिस ने अधिवक्ताओं के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी। उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कानून के रखवाले ही न्याय की मांग कर रहे हों और उनके खिलाफ ही कार्रवाई होने लगे, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
सौरभ भारद्वाज ने अपने बयान में पत्रकार से जुड़े एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब एक पत्रकार ने एसीपी विवेक भगत के खिलाफ कथित छेड़छाड़ के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, तब बाद में पुलिस ने पत्रकार के खिलाफ ही जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर दिया था। भारद्वाज ने दोनों मामलों के बीच समानता बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।
उनका आरोप है कि शिकायत करने वालों की बात सुनने और आरोपों की निष्पक्ष जांच करने के बजाय शिकायतकर्ताओं के खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियों और आरोपों की कानूनी स्थिति का निर्धारण जांच तथा संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। आप नेता ने बार काउंसिलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पत्रकार से जुड़े मामले के समय बार काउंसिलों को आवाज उठानी चाहिए थी।
अब शाहदरा थाने के मामले में अधिवक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए बार काउंसिलों को आगे आना चाहिए। भारद्वाज ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में वकीलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में अधिवक्ताओं को अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ कथित अन्याय होने पर एकजुट होकर न्याय की मांग करनी चाहिए
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ गर्भवती पत्रकार की याचिका पर नोटिस जारी किया, सुनवाई 3 नवंबर को होगी।

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह 3 नवंबर को एक गर्भवती महिला पत्रकार की याचिका पर सुनवाई करेगा। पत्रकार का आरोप है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उन्हें धक्का दिया और खींचा। यह घटना तब हुई जब विपक्षी ‘इंडिया’ (भारत) गठबंधन के नेता मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एस आई आर) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट परिसर की ओर मार्च कर रहे थे। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के समक्ष यह मामला उठाया और बताया कि महिला पत्रकार की याचिका अभी तक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। इस पर सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले में नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है और इस पर 3 नवंबर को सुनवाई होगी। एक समाचार वेबसाइट के लिए काम करने वाली पत्रकार ऋचा पाराशर ने आरोप लगाया है कि विपक्षी नेताओं के मार्च को कवर करते समय राहुल गांधी ने उनका हाथ पकड़ा और जोर से खींचा। इसके बाद उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का दिया, जिससे वह जमीन पर गिर गईं।
इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। तीन महीने की गर्भवती पाराशर का आरोप है कि यह घटना 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी नेताओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान मची अफरा-तफरी के बीच हुई। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया है। वहीं, पार्टी नेताओं और समर्थकों ने घटना के वीडियो साझा किए हैं और सवाल उठाया है कि क्या इन दृश्यों से यह साबित होता है कि राहुल गांधी ने पत्रकार को धक्का दिया था। यह घटनाक्रम एक अन्य याचिका के संदर्भ में सामने आया है, जिसमें विपक्षी मार्च के बाद सुप्रीम कोर्ट परिसर और उसके आसपास होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों के खिलाफ सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की गई है। 15 अक्टूबर को, सीजेआई सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस याचिका पर नोटिस जारी किया और घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। यह मार्च ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं (जिसमें राहुल गांधी भी शामिल थे) द्वारा तब निकाला गया था, जब सीजेआई ने उनसे और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात करने तथा मतदाता सूची के पुनरीक्षण (एस आई आर) पर ज्ञापन सौंपने के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। सीजेआई ने विपक्षी नेताओं को सलाह दी थी कि वे तय कानूनी प्रक्रिया के जरिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करें। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाना, शक्तियों के बंटवारे के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ होगा।
राष्ट्रीय समाचार
सरकार ने चालू इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च किए 17.73 लाख करोड़ रुपए

सरकार ने सोमवार को बताया कि सितंबर 2026 तक केंद्र के 17 मंत्रालयों और विभागों में कुल 37.56 लाख करोड़ रुपए की नवीनतम अनुमानित लागत वाली 1,853 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी की जा रही है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, इन प्रोजेक्ट्स पर अब तक कुल 17.73 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जो प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का लगभग 47.21 प्रतिशत है। यह इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।
बयान में कहा गया, “काफी संख्या में प्रोजेक्ट्स अग्रिम चरण में पहुंच गए हैं। कुल 654 प्रोजेक्ट्स (35 प्रतिशत) में 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति दर्ज की गई है, जबकि 338 प्रोजेक्ट्स (18 प्रतिशत) में 80 प्रतिशत से अधिक वित्तीय कार्य पूरा हो चुका है।”
कुल 1,853 जारी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से 780 मेगा प्रोजेक्ट्स हैं, जिनकी लागत 1,000 करोड़ रुपए या इससे अधिक है। वहीं, 1,073 प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत 1,000 करोड़ रुपए से कम है।
बयान के अनुसार, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सबसे अधिक 1,320 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनकी कुल लागत 20.07 लाख करोड़ रुपए है। यह कनेक्टिविटी आधारित बुनियादी ढांचे के विकास को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाता है।
बयान में आगे कहा गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत सबसे अधिक 974 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जो कुल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का 53 प्रतिशत है। इनकी संशोधित कुल लागत 9.46 लाख करोड़ रुपए है, जो सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का 25 प्रतिशत है। यह राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के विकास में मंत्रालय की केंद्रीय भूमिका को दिखाता है।
रेल मंत्रालय के तहत 284 प्रोजेक्ट्स (15 प्रतिशत) जारी हैं, जिनकी कुल संशोधित लागत 7.21 लाख करोड़ रुपए है। यह कुल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लागत का 19 प्रतिशत है।
कोयला मंत्रालय के तहत 121 प्रोजेक्ट्स (6 प्रतिशत) चल रहे हैं, जिनकी कुल संशोधित लागत 2.22 लाख करोड़ रुपए है। यह कुल लागत का 6 प्रतिशत है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग क्रमशः 115, 106, 49 और 35 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को क्रियान्वित कर रहे हैं। इनकी संबंधित लागत क्रमशः 4.30 लाख करोड़ रुपए, 6.40 लाख करोड़ रुपए, 3.41 लाख करोड़ रुपए और 1.95 लाख करोड़ रुपए है।
बयान में कहा गया कि शेष 169 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (9 प्रतिशत) विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के अंतर्गत आते हैं। इनकी कुल लागत 2.62 लाख करोड़ रुपए है, जो सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का 7 प्रतिशत है।
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