राजनीति
2024 में भाजपा से मुकाबला करने के लिए इंडिया गंठबंधन का गठन किया गया, विधानसभा चुनाव गठबंधन पर किसी ने चर्चा नहीं की : कांग्रेस सूत्र
यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के इंडिया गठबंधन के भीतर कांग्रेस पार्टी के खिलाफ दैनिक बयानबाजी के बीच सूत्रों ने कहा, ”विपक्षी गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव को एक साथ लड़ने के लिए बनाया गया था और पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए किसी भी गठबंधन पर कोई चर्चा नहीं हुई।”
अखिलेश यादव हाल ही में कांग्रेस के आलोचक रहे हैं और उन्होंने कहा है कि सबसे पुरानी पार्टी अपने दोहरे बोल के लिए जानी जाती है और ‘भाजपा की बी-टीम’ की तरह काम करती है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कांग्रेस को एक चालाक पार्टी भी करार दिया और लोगों से उसे वोट न देने की अपील की।
कांग्रेस के एक सूत्र ने कहा कि 17 और 18 जुलाई एवं 31 अगस्त तथा 1 सितंबर को बेंगलुरु में इंडिया गठबंधन की दूसरी और तीसरी बैठक के दौरान सभी सदस्यों ने इस बात पर चर्चा की कि 2024 में केंद्र में बीजेपी को कैसे हराया जाए।
सूत्र ने स्पष्ट किया कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में किसी भी तरह के गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। दूसरी और तीसरी बैठक के दौरान भी किसी ने विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन का मुद्दा नहीं उठाया।
सूत्र ने कहा, “यह स्पष्ट था। इंडिया गठबंधन की दूसरी और तीसरी दोनों बैठकों में, लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन पर चर्चा की गई।”
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, उस पर टिप्पणी करते हुए पार्टी सूत्र ने कहा कि यह भाषा अच्छी नहीं थी और इंडिया गठबंधन पर अच्छा प्रभाव नहीं डालती थी।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी एक सार्वजनिक बैठक के दौरान शिकायत की थी कि कांग्रेस पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव में व्यस्त है।
पिछले गुरुवार को पटना में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा था, ”हमने सभी दलों से बात की, उनसे एकजुट होने और देश को उन लोगों से बचाने का आग्रह किया जो इसके इतिहास को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए पटना और अन्य जगहों पर बैठकें हुईं। इंडिया गठबंधन का गठन हुआ, लेकिन कुछ खास नहीं हो रहा है। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। कांग्रेस की दिलचस्पी उनमें ज्यादा है।”
उन्होंने कहा था, ”हम सभी कांग्रेस पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे थे, लेकिन वे अभी इस सब को लेकर चिंतित नहीं हैं। वे अभी पांच राज्यों के चुनाव में व्यस्त हैं। इसलिए, पांच राज्यों के चुनाव के बाद, वे खुद ही सभी को बुलाएंगे।
सूत्र ने कहा कि नीतीश कुमार के आरोप के बाद, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तुरंत बिहार के मुख्यमंत्री को फोन किया था। नीतीश कुमार इंडिया गठबंधन के मुख्य संस्थापकों में से एक हैं।
खड़गे ने उन्हें विधानसभा चुनावों का महत्व समझाया और यह भी कहा कि 28 नवंबर के बाद इंडिया गठबंधन चर्चा में तेजी आएगी, जब सभी पांच राज्यों में चुनाव प्रचार बंद हो जाएगा।
क्या खड़गे कांग्रेस पर निशाना साध रहे अखिलेश यादव से भी बात करेंगे। इस सवाल के जवाब में सूत्र ने कहा, ”संभावना है कि खड़गे आने वाले दिनों में अखिलेश यादव से बात करेंगे और समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव से भी बात करेंगे।”
सूत्र ने यह भी बताया कि पांच विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में सबसे पुरानी पार्टी का दांव सबसे ज्यादा है क्योंकि वह वहां मुख्य दावेदार है।
मिजोरम राज्य में जमीनी स्थिति के बारे में बताते हुए (जहां मंगलवार को मतदान संपन्न हुआ), पार्टी सूत्र ने कहा कि सत्तारूढ़ एमएनएफ, अन्य क्षेत्रीय पार्टी जेडपीएम और कांग्रेस पूर्वोत्तर राज्य में मुख्य दावेदार हैं।
सूत्र ने कहा कि एमएनएफ के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर है और जेडपीएम मिजोरम में सभी मुद्दों पर विरोध की आप की तकनीक अपनाने वाली क्षेत्रीय पार्टियों में से एक के रूप में उभरी है। इसलिए मिजोरम में लड़ाई त्रिकोणीय है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर राज्य में भाजपा कोई फैक्टर नहीं है लेकिन खंडित जनादेश की स्थिति में क्षेत्रीय दल भाजपा पार्टी के साथ जा सकते हैं। पूर्वोत्तर में सभी ने क्षेत्रीय पार्टियों का इस्तेमाल किया है।
सूत्र ने यह भी कहा कि भाजपा अधिकतम सीटें नहीं जीतती है और वास्तविकता यह है कि क्षेत्रीय दल जीतते हैं और वे केंद्र में सत्तारूढ़ दल का समर्थन करते हैं। लेकिन मिजोरम में फाइट है।
राष्ट्रीय समाचार
झारखंड छात्र आंदोलन: सीबीआई जांच की मांग पर अड़े छात्र, तिरंगा यात्रा निकालने की तैयारी

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन 20वें दिन भी जारी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 6 छात्र अभी भूख हड़ताल पर हैं। छात्र परीक्षाओं में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच, रिफॉर्म और जिम्मेदारी तय करने की मांग पर अड़े हैं। इस बीच तिरंगा यात्रा निकालने की भी योजना बना रहे हैं।
छात्र नेता रवींद्र ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, “आज विरोध प्रदर्शन का 20वां दिन है। मेरे दो साथी भूख हड़ताल पर हैं और दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई अन्य छात्र भी भूख हड़ताल पर हैं। सरकार से मेरी अपील है कि हम सभी छात्र हैं, इसलिए कृपया हमें यहां लंबे समय तक न रहने दें और हमारी मांगें पूरी करें।”
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी कीमत पर अपनी मांगो से समझौता नहीं करेंगे। जब तक मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “हम सरकार के हमसे बात करने के लिए तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं। हम मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बातचीत करना चाहते हैं।”
रवींद्र ने कहा, “हम स्वतंत्रता दिवस की तैयारी कर रहे हैं और एक भव्य तिरंगा यात्रा की योजना बना रहे हैं। जब से हम यहां हैं, हम कई तरह की गतिविधियां आयोजित कर रहे हैं, जिनमें से हर एक यह संदेश देती है कि यहां के छात्र शिक्षित और जागरूक हैं। इससे पहले हमने सरकार को यह दिखाने के लिए एक मौन मार्च निकाला था कि नारे लगाने और शोर मचाने के बाद, अब हम शांतिपूर्वक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।”
वहीं, झारखंड पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने पर उन्होंने कहा, “कल हमारी एसएसपी के साथ बैठक हुई थी, लेकिन उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया कि छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। हमारा विरोध प्रदर्शन ऐतिहासिक था, जिसमें छात्रों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई और उसे मजबूत किया। अगर प्रशासन को लगता है कि कुछ असामाजिक तत्व मौजूद थे जो छात्रों के आंदोलन को भटकाने की कोशिश कर रहे थे तो सरकार को उनकी पहचान करनी चाहिए। ऐसा करते समय, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि वहां लगभग 50,000 छात्र मौजूद थे। अगर एक या दो प्रतिशत ऐसे अवांछित या असामाजिक तत्व थे, तो केवल उन्हीं लोगों की पहचान की जानी चाहिए और छात्रों को किसी भी तरह से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।”
इस बीच विरोध कर रहे छात्र पीयूष कुमार सिंह ने कहा, “फिलहाल, हम इसी तरह अपना शांतिपूर्ण और अनुशासित विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। जब तक बातचीत का अगला दौर नहीं होता या हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हम न्याय चाहते हैं और हमें मंत्री पर पूरा भरोसा है कि हमें न्याय मिलेगा। हमें सरकार से उम्मीद है, इसीलिए हम यहां बैठे हैं। हम अपने मुख्यमंत्री से गुजारिश करते हैं कि वे जल्द से जल्द हमारी समस्याओं का समाधान करें।”
राष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में हुए शामिल

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में देशभर से लोग जुड़ रहे हैं। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी गुरुवार को इस अभियान का हिस्सा बने।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने आवास पर लहराते राष्ट्रीय ध्वज के साथ एक तस्वीर ‘एक्स’ पर शेयर की। तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा “हर घर तिरंगा।”
विदेश मंत्रालय ने भी जयशंकर की पोस्ट को रीशेयर करते हुए लिखा, “हर दिल में तिरंगा, हर घर में तिरंगा।”
‘हर घर तिरंगा’ अभियान आजादी का अमृत महोत्सव के तहत शुरू किया गया था। इसका मकसद नागरिकों को अपने घरों में राष्ट्रीय ध्वज लगाने और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराने के लिए प्रोत्साहित करना है।
अभियान की सोच यह थी कि अब तक लोगों का राष्ट्रीय ध्वज से रिश्ता ज्यादा औपचारिक और संस्थागत रहा है। इसे व्यक्तिगत गर्व और सम्मान की अभिव्यक्ति बनाने के लिए लोगों को घर-घर तिरंगा लाने के लिए कहा गया। इससे तिरंगा देश से व्यक्तिगत जुड़ाव का प्रतीक बने और साथ ही राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय एकता के प्रति सामूहिक संकल्प को भी दर्शाए।
इस साल ‘हर घर तिरंगा 2026’ को ‘वंदे मातरम के 150 साल’ की भावना को समर्पित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देशवासियों से 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की थी।
इंस्टाग्राम रील में पीएम मोदी ने कहा था, “15 अगस्त को गौरव के साथ मनाएं, स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दें, विकसित भारत का संकल्प लें। हर घर तिंरगा, घर घर तिंरगा, हर मन तिंरगा।” उन्होंने कैप्शन में लिखा था, “आइए, हर घर तिरंगा को हर घर का उत्सव बनाएं।”
वहीं, ‘एक्स’ पर पीएम मोदी ने लिखा था, “हमारा तिरंगा हमारा गर्व है और देश के लिए हमेशा सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा का स्रोत है।” उन्होंने कहा था, “आइए ‘हर घर तिरंगा’ आंदोलन में उत्साह से भाग लें और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराएं।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा संकेत, मतदाता पहचान के लिए लगा सकते हैं राष्ट्रीय आपातकाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह संकेत दिया है कि वह अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से पहले मतदाता पहचान और नागरिकता सत्यापन को अनिवार्य बनाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करने की संभावना पर विचार कर सकते हैं।
ट्रंप ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके इस बयान ने चुनावी नियमों, मतदाता अधिकारों और संघीय सरकार की शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ट्रंप ने ‘रियल अमेरिकाज वॉयस’ पर वेन एलिन रूट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “इससे भी ज्यादा असामान्य चीजें पहले हो चुकी हैं। फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा।”
रूट ने ट्रंप से कहा कि अगर सीनेट ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को मंजूरी नहीं देती, तो उन्हें आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। रूट ने सुझाव दिया कि ऐसी शक्तियों के जरिए फोटो पहचान पत्र, नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य किया जा सकता है और डाक के जरिए भेजे जाने वाले मेल-इन बैलेट पर भी सीमाएं लगाई जा सकती हैं।
ट्रंप ने इस प्रस्ताव का साफ तौर पर समर्थन नहीं किया, लेकिन उन्होंने बार-बार कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी नियमों पर सीनेट को कार्रवाई करनी चाहिए।
ट्रंप ने कहा, “सीनेट को ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पर आगे बढ़ना होगा। मुझे सच में लगता है कि ऐसा होना चाहिए, क्योंकि लोग इसकी उम्मीद कर रहे हैं और यह जरूरी भी है।”
उन्होंने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि नागरिकता का प्रमाण हो। और मतदाता पहचान पत्र भी होना चाहिए।
ट्रंप ने दावा किया कि कुछ रिपब्लिकन सीनेटर इन उपायों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन की तारीफ की और कहा कि प्रतिनिधि सभा इस कानून को पांच बार मंजूर कर चुकी है, लेकिन यह हर बार सीनेट में जाकर अटक जाता है।
राष्ट्रपति ने डाक से मतदान की व्यवस्था की भी फिर से आलोचना की। उन्होंने बिना कोई सबूत दिए दावा किया कि यह प्रणाली धोखाधड़ी के लिए संवेदनशील है और खास तौर पर कैलिफोर्निया की चुनावी व्यवस्था पर निशाना साधा। ट्रंप ने कहा कि मेल-इन बैलेट्स बहुत भ्रष्ट हैं।
उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया चुनावों के मामले में सबसे भ्रष्ट जगहों में से एक है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में रिपब्लिकन मतदाताओं को मतपत्र प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
रूट ने ट्रंप से कहा कि चुनाव संबंधी यह कानून शायद सीनेट से मंजूरी न पा सके। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस इसे पारित कर भी दे, तब भी इसे तुरंत कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
इसके बाद रूट ने ट्रंप से आग्रह किया कि वे अगले एक महीने के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करें। रूट का दावा था कि इससे प्रशासन सीनेट की मंजूरी का इंतजार किए बिना फोटो पहचान पत्र, नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता और मेल-इन वोटिंग पर सीमाएं लागू कर सकेगा।
ट्रंप की प्रतिक्रिया ने इस संभावना को जिंदा रखा, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार की ओर से इस रास्ते को अपनाने की कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस कानून को पारित कर देती है तो इसे अदालत में चुनौती देना ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।
इंटरव्यू में जिस चुनावी प्रस्ताव पर चर्चा हुई, वह रिपब्लिकन पार्टी के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत संघीय चुनावों में वोटर पंजीकरण करवाते समय अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य किया जाए।
समर्थकों का कहना है कि इससे चुनावी सुरक्षा और मजबूत होगी। वहीं विरोधियों का तर्क है कि जिन योग्य नागरिकों के पास जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें वोटर पंजीकरण कराने में परेशानी हो सकती है।
अमेरिकी संघीय कानून पहले से ही गैर-नागरिकों को संघीय चुनावों में मतदान करने से रोकता है। अमेरिका में चुनाव मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन की ओर से कराए जाते हैं, जो अमेरिकी संविधान और संघीय कानूनों द्वारा तय ढांचे के तहत काम करते हैं।
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