राष्ट्रीय समाचार
हिमाचल प्रदेश: शिमला में भूस्खलन से 8 मकान गिरे;
शिमला: हिमाचल प्रदेश पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश से जूझ रहा है. राज्य में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। मंगलवार (15 अगस्त) को भारी बारिश के कारण हुए भारी भूस्खलन से शिमला भी प्रभावित हुआ। शिमला में भूस्खलन के कारण करीब आठ घर ढह कर दुर्घटनाग्रस्त हो गये. यह घटना कैमरे में कैद हो गई जिसमें भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के कारण लगभग आठ घर बह गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कृष्णा नगर में आठ मकान गिरने से करीब दो लोगों की मौत हो गई।
भूस्खलन के बाद मकान ढह गए
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. कैद हुई घटना हिमाचल प्रदेश के शिमला के कृष्णा नगर की बताई जा रही है. वीडियो में देखा जा सकता है कि इलाके में बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद कुछ घर पहाड़ी से नीचे गिर गए। घटना घटने के बाद तलाश एवं बचाव अभियान जारी है. हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 60 के करीब पहुंच गई है.
बचाव अभियान जारी हैअधिकारियों के अनुसार, ढहे मकानों के मलबे में कुछ निवासियों के फंसे होने की आशंका है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें और राज्य पुलिस के जवान भी बचाव अभियान चलाने के लिए मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि इलाके के आसपास करीब दस से पंद्रह मकान खाली करा लिए गए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि भूस्खलन एक पेड़ के उखड़ने से हुआ।
राहुल गांधी आज हिमाचल दौरे पर रहेंगे
हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी राज्य में भूस्खलन और बाढ़ से प्रभावित इलाकों का दौरा किया. सीएम के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से साइट पर न जाने के लिए कहा क्योंकि यह जोखिम भरा हो सकता है, फिर भी वह लोगों से मिलने गए। खबरें हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज भूस्खलन और बाढ़ प्रभावित राज्य का दौरा करेंगे. वह भूस्खलन प्रभावित राज्य की स्थिति का आकलन करेंगे।
राष्ट्रीय समाचार
भारत की केमिकल और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: सरकार

भारत का रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग, जिसका वर्तमान आकार लगभग 220 अरब डॉलर है, वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार द्वारा शनिवार को जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, भारत वैश्विक रसायन उद्योग में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और यह क्षेत्र देश की औद्योगिक एवं विनिर्माण वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है।
फैक्टशीट में कहा गया है कि भारत वर्तमान में दुनिया का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक और एशिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस क्षेत्र के उत्पादों का उपयोग औषधि, वस्त्र, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं सहित अनेक उद्योगों में किया जाता है।
सरकार ने अधिकांश रसायन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को स्वचालित मार्ग के तहत अनुमति दे रखी है, जिसके तहत विदेश से आने वाले निवेश को सरकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। इसी का परिणाम है कि 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में 1,04,895 करोड़ रुपए का एफडीआई आया, जो 2004 से 2014 के दौरान प्राप्त 45,240 करोड़ रुपए के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।
फैक्टशीट के अनुसार, प्रमुख रसायनों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन 2015-16 के 45,638 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 58,617 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि उत्पादन क्षमता विस्तार, विशेषीकृत विनिर्माण हब के विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार का परिणाम मानी जा रही है।
बयान में आगे कहा गया है कि विशेष रसायनों के क्षेत्र में भी भारत की वैश्विक उपस्थिति मजबूत है। देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डाई निर्माता और निर्यातक है, जबकि कृषि रसायनों के निर्यात में तीसरे स्थान पर है। वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 13,000 बड़े उद्योग और 4.45 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कार्यरत हैं।
सरकार इस क्षेत्र को और गति देने के लिए कई नई पहलें लागू कर रही है, जिनमें समर्पित केमिकल पार्क, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली योजनाएं तथा गुणवत्ता और निवेश को प्रोत्साहित करने वाले कदम शामिल हैं। इनका उद्देश्य भारत की वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भागीदारी को मजबूत करना है।
जुलाई 2026 में मंजूर की गई भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) के तहत देश में तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क का क्षेत्रफल कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) होगा। केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपए तक की सहायता देगी, जबकि संबंधित राज्य सरकार को कम से कम 500 करोड़ रुपए का योगदान देना होगा।
इस योजना का कुल वित्तीय प्रावधान 3,030 करोड़ रुपए है, जिसमें 3,000 करोड़ रुपए बुनियादी ढांचे और सामान्य सुविधाओं के विकास के लिए तथा 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक खर्चों के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।
इसके अलावा, नवंबर 2025 में शुरू की गई अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का कोष बनाया गया है, जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र के अनुसंधान और नवाचार निवेश को बढ़ावा देना है। यह योजना दीर्घकालिक वित्तपोषण और पुनर्वित्त सुविधा प्रदान करती है, जिससे उन्नत तकनीकों को अपनाने, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और महत्वपूर्ण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय समाचार
दिवाली पर कारोबार में उछाल, दिल्ली का व्यापार 80,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद: सीटीआई

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने शनिवार को बताया कि दिवाली के त्योहारी सीजन के दौरान देशभर में कारोबार लगभग 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। जबकि अकेले दिल्ली में लगभग 80,000 करोड़ रुपए का कारोबार दर्ज होने की संभावना है।
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि त्योहारी सीजन ने देशभर के व्यापारियों के लिए कारोबार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा किए हैं, क्योंकि स्वदेशी उत्पादों की उपभोक्ताओं के बीच मजबूत मांग देखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के जिन व्यापारियों को पिछले महीने रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबार में बाधाओं का सामना करना पड़ा था, अब दिवाली की खरीदारी के बंपर सीजन से अपने नुकसान की भरपाई करने की उम्मीद कर रहे हैं।
गोयल के अनुसार, अनुमानित 5 लाख करोड़ रुपए के देशभर के कारोबार में दिवाली की खरीदारी और विभिन्न संबंधित सेवाओं से उत्पन्न कारोबार शामिल है।
ऑटोमोबाइल उद्योग की सर्वोच्च संस्था द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में खुदरा ऑटोमोबाइल बिक्री में 55 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दोपहिया, तिपहिया, वाणिज्यिक वाहन, यात्री वाहन और ट्रैक्टरों की बिक्री में क्रमशः 52 प्रतिशत, 110 प्रतिशत, 48 प्रतिशत, 70 प्रतिशत और 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े मजबूत उपभोक्ता मांग को दर्शाते हैं और त्योहारी सीजन के दौरान सकारात्मक व्यावसायिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते हैं।
गोयल ने आगे कहा कि दिवाली के त्योहार के दौरान किफायती वस्तुओं से लेकर प्रीमियम उत्पादों तक लगभग पांच करोड़ उपहारों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे त्योहारी बिक्री में काफी योगदान मिला।
सीटीआई ने कहा कि उसने होटल और बैंक्वेट एसोसिएशन, रेस्तरां और मॉल एसोसिएशन, सिनेमा एसोसिएशन, शॉपिंग सेंटर एसोसिएशन, ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन, मेकअप और सैलून एसोसिएशन, टूर एंड ट्रैवल एसोसिएशन, मार्केट एसोसिएशन और उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद अपने अनुमानित व्यावसायिक अनुमान तैयार किए हैं।
व्यापारियों के संगठन ने एक बयान में कहा कि इस साल दिवाली के मौसम में स्वदेशी उत्पादों की खरीद-बिक्री पर विशेष जोर दिया जा रहा है और भारतीय निर्मित वस्तुओं की लोकप्रियता उपभोक्ताओं के बीच बढ़ रही है।
संगठन ने यह भी कहा कि जीएसटी सुधारों से भारतीय उत्पादों को अधिक मान्यता मिली है और स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं की मांग मजबूत हुई है।
घर की सजावट के सामान, दिवाली पूजा की सामग्री, मिट्टी के दीये, देवी-देवताओं की मूर्तियां, दीवार पर टांगने वाली वस्तुएं, हस्तशिल्प और शुभ-लाभ और ओम जैसे पारंपरिक शुभ प्रतीक, और उन उत्पादों में शामिल हैं जिनकी मांग देखी जा रही है। देवी-लक्ष्मीो और भगवान गणेश की पूजा से संबंधित वस्तुएं, साथ ही स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और कुशल श्रमिकों द्वारा निर्मित सजावटी उत्पाद भी त्योहारी बिक्री में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है।
इनके अलावा, कई अन्य क्षेत्रों (एफएमसीजी, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली के उपकरण, रसोई के बर्तन, उपहार वस्तुएं, मिठाई, स्नैक्स, घरेलू साज-सज्जा, वस्त्र, रेडीमेड कपड़े, फैशन परिधान, जूते, घड़ियां, फर्नीचर, सौंदर्य प्रसाधन, सौंदर्य उत्पाद, मोबाइल फोन और सहायक उपकरण शामिल) में भी अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है।
त्योहारी मांग पैदा करने वाले अन्य क्षेत्रों में बर्तन, निर्माण सामग्री, लकड़ी और प्लाईवुड, पेंट और कांच, दूध और डेयरी उत्पाद, किराना, अनाज, खाद्य तेल, दालें, साइकिल और सहायक उपकरण, दीवार घड़ियां, गोटा-जरी, साड़ियाँ और पोशाक सामग्री शामिल हैं।
सीटीआई ने कहा कि दिल्ली के व्यापारी त्योहारी सीजन में लगभग 80,000 करोड़ रुपए के कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच रैलियां और विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय राजधानी के व्यापारियों को लगभग 14,000 करोड़ रुपए का अनुमानित व्यापारिक नुकसान हुआ।
गोयल ने कहा कि अब व्यावसायिक गतिविधियां गति पकड़ रही हैं और त्योहारी खरीदारी के लिए दिल्ली भर के बाजारों में भारी भीड़ उमड़ रही है।
उन्होंने बताया कि चांदनी चौक, दरीबा कलां, मालीवाड़ा, सदर बाजार, कमला नगर, अशोक विहार, मॉडल टाउन, शालीमार बाग, वज़ीरपुर, पीतमपुरा, राजौरी गार्डन, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, ग्रीन पार्क, यूसुफ सराय, लाजपत नगर, प्रीत विहार, शाहदरा और लक्ष्मी नगर जैसे बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही में वृद्धि देखी जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न कंपनियों के ऑटोमोबाइल शोरूम भी त्योहारी अवधि के दौरान अच्छी बिक्री दर्ज कर रहे हैं।
ग्राहक मोबाइल फोन, उपहार, सजावटी सामान, सूखे मेवे, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू साज-सज्जा सहित कई तरह के उत्पाद खरीद रहे हैं, जो राष्ट्रीय राजधानी में खरीदारी गतिविधियों में सुधार का संकेत है।
अपराध
बेंगलुरु : सात परिजनों की हत्या में नाबालिग लड़की की भूमिका की जांच, पुलिस कर रही पूछताछ

बेंगलुरु पुलिस कैब चालक इंदुशेखर की नाबालिग बेटी की कथित भूमिका की जांच कर रही है। उस पर आरोप है कि उसने अपनी मां के परिवार के सात सदस्यों की हत्या में अपने पिता की मदद की। पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने शुक्रवार को कहा कि जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इंदुशेखर ने कथित तौर पर अपनी बेटी को इस अपराध में शामिल होने के लिए कैसे तैयार किया।
पुलिस नाबालिग से पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे हत्याओं में शामिल होने के लिए कैसे राजी किया गया और पीड़ितों को आरोपी तक पहुंचाने में उसकी क्या भूमिका रही।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि इतने गंभीर अपराध में एक नाबालिग की कथित संलिप्तता चिंता का विषय है और जांचकर्ता हर पहलू की जांच कर रहे हैं।
पुलिस आयुक्त ने कहा, “आरोपी की एक नाबालिग बेटी है। कई व्यक्तिगत और अन्य कारणों की जांच की जानी है। हमें समय चाहिए और अपराध में उसकी मदद करने वालों से पूछताछ की जा रही है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि आरोपी ने कथित तौर पर नाबालिग बेटी की मदद से यह अपराध किया। यह गंभीर मामला है, क्योंकि वह नाबालिग है। हम जांच कर रहे हैं कि उसका ब्रेनवॉश कैसे किया गया, उसे कैसे राजी किया गया और उससे मदद कैसे ली गई।”
पुलिस के अनुसार, इंदुशेखर ने सबसे पहले अपनी 40 वर्षीय पत्नी सुनीता की हत्या की। इसके बाद उसने अपनी 65 वर्षीय सास रूपावती को मार डाला। फिर उसने अपने 30 वर्षीय साले शिवकुमार, उनकी पत्नी दिव्या और उनके सात वर्षीय बेटे पुनीत की हत्या कर दी। आखिरी शिकार उसके दूसरे साले 40 वर्षीय शंकर और उनकी पत्नी नलिनी बने। उनका 10 वर्षीय बेटा जीवित बच गया।
पुलिस हत्या के मकसद, वारदात की जगह और घटनाक्रम सहित कई पहलुओं की जांच कर रही है। आरोपी के बयान के अनुसार, हत्याएं 15 से 20 दिनों की अवधि में की गईं और ये एक ही घटना में नहीं हुईं। हालांकि, पुलिस उसके दावों की पुष्टि कर रही है।
पुलिस आयुक्त ने कहा, “हम यह जांच कर रहे हैं कि हत्याएं घर में की गईं या कहीं और। आरोपी ने सभी पीड़ितों को बुलाया था और अपराध एक साथ नहीं हुआ। उसके बयान के अनुसार, घटनाएं 15 से 20 दिनों में हुईं। इन सभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है। सत्यापन पूरा होने के बाद हम और जानकारी साझा करेंगे।”
पुलिस ने बताया कि नाबालिग लड़की को मामले में दूसरा आरोपी माना जा रहा है और उसने कथित तौर पर सभी हत्याएं होते हुए देखी थीं। आरोप है कि पत्नी की हत्या करने और शव ठिकाने लगाने के बाद आरोपी ने अपनी बेटी के साथ मिलकर अन्य परिजनों को एक-एक करके घर बुलाया और उनकी हत्या कर दी। बाद में शवों को बोरियों में भरकर अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया गया।
इस बीच, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या श्रीरामपुरा में करीब 2.5 करोड़ रुपए की संपत्ति को लेकर विवाद इन हत्याओं का कारण था। जांचकर्ताओं को शक है कि आरोपी संपत्ति पर कब्जा करने के लिए हत्याओं की योजना बना सकता था, क्योंकि संपत्ति कथित तौर पर पीड़ितों के नाम पर थी।
रिश्तेदारों से मिली जानकारी के अनुसार, इंदुशेखर ने कथित तौर पर किसी बहाने से अपनी सास के हस्ताक्षर छह स्टांप पेपर पर करवा लिए थे। उसकी पत्नी को यह बात अपनी मां से पता चली और उसने इस पर आपत्ति जताई। उसने कथित तौर पर सभी स्टांप पेपर वापस ले लिए थे। पुलिस को शक है कि इसी वजह से आरोपी के मन में पत्नी और उसके परिवार के प्रति नाराजगी पैदा हुई।
पुलिस के अनुसार, पहली हत्या 16 अक्टूबर को की गई थी। आरोपी ने कथित तौर पर शवों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर ठिकाने लगाया और इसके लिए अपनी कार का इस्तेमाल किया। जांचकर्ताओं को ऐसे सीसीटीवी फुटेज भी मिले हैं, जिनमें आरोपी कथित रूप से शवों को वाहन में ले जाता दिखाई दे रहा है।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर दावा किया कि उसकी पत्नी उसे अक्सर निकम्मा कहकर ताना मारती थी, जिससे वह मानसिक तनाव में रहता था। पुलिस इस दावे और संपत्ति विवाद दोनों की जांच कर रही है, ताकि हत्या के असली मकसद का पता लगाया जा सके।
आरोप है कि 16 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच आरोपी ने रिश्तेदारों को संदेश भेजकर यह जताने की कोशिश की कि परिवार कहीं घूमने गया हुआ है। मामला तब सामने आया, जब नलिनी की मां ने श्रीरामपुरा पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन ट्रैक किया और पाया कि वह लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहा था। लापता परिवार के सदस्यों के मोबाइल फोन भी उसी के साथ लोकेशन दिखा रहे थे, जिससे शुरुआत में लगा कि सभी लोग साथ यात्रा कर रहे हैं। बाद में इसी से पुलिस को शक हुआ और आरोपी से पूछताछ शुरू की गई।
इसके बाद पुलिस इंदुशेखर को चिक्कबल्लापुर जिले के नंदी हिल्स इलाके में महाजर और तलाशी अभियान के लिए ले गई। वहां से सात वर्षीय पुनीत का शव बरामद किया गया, जबकि अन्य शवों की तलाश जारी है।
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