राष्ट्रीय समाचार
मणिपुर में शांति के लिए जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया
नई दिल्ली, 24 जून : हिंसा प्रभावित मणिपुर में शांति बहाली की मांग को लेकर 40 संगठनों के एक समूह ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने जातीय हिंसा पर अपनी हार्दिक संवेदना और दुख व्यक्त किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले समूहों ने राज्य के कुछ हिस्सों में जलाए गए सैकड़ों चचरें पर भी अपनी पीड़ा व्यक्त की।
समूहों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि हमारे राज्य में कानून और व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है, जहां सशस्त्र भीड़ आए दिन शासन करती है। मणिपुर के लोगों द्वारा कई दशकों में बनाई और विकसित की गई संपत्तियां कुछ ही घंटों में जलकर राख हो गई हैं। हालांकि, दुख की बात यह है कि स्थानीय अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने में अप्रभावी साबित हुए हैं, और पीड़ितों का अपने घरों को छोड़कर जाना जारी है। राज्य सरकार मणिपुर के लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करने के अपने कर्तव्य में निराशाजनक रूप से विफल रही है।
वर्तमान में, महिलाओं और बच्चों सहित 1,000 से अधिक व्यक्तियों ने असम और मिजोरम के पड़ोसी क्षेत्रों में राहत शिविरों में शरण ली है। इस बात पर जोर देना महत्वपूर्ण है कि राहत शिविरों में पनाह चाहने वाले लोग बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। उनके पास भोजन, कपड़े और साफ पानी जैसे जरूरी सामानों का अभाव है।
हालांकि, हम मृतकों के परिवारों को मुआवजे की पेशकश करने वाले तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की नियुक्ति के लिए गृह मंत्रालय द्वारा की गई पहल की सराहना करते हैं। लेकिन, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के आयोजकों ने महसूस किया कि मौजूदा पुनर्वास पैकेज जरूरतों को पर्याप्त रूप से पूरा करने में कम है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि स्कूलों से बच्चों के विस्थापन ने भी स्थिति को खराब कर दिया है।
ज्ञात हो कि तीन मई को मणिपुर में पहली बार हिंसा भड़कने के बाद से अब तक करीब 120 लोग मारे जा चुके हैं और 400 से ज्यादा घायल हुए हैं। इसके अलावा लगभग 50,650 पुरुष, महिलाएं और बच्चे अपने स्थान को छोड़कर दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हुए हैं।
राष्ट्रीय समाचार
शीर्ष 10 कंपनियों की मार्केट वैल्यू में 3.65 लाख करोड़ रुपए का उछाल; टीसीएस, भारती एयरटेल और इंफोसिस रहीं टॉप गेनर्स

भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह आई तेज उछाल के बीच देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 9 के संयुक्त बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) में 3.65 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), भारती एयरटेल और इंफोसिस सबसे अधिक लाभ पाने वाली कंपनियों के रूप में उभरीं।
दलाल स्ट्रीट पर सकारात्मक माहौल के बीच सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 2,256.94 अंक यानी 3.11 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी में 625.7 अंकों यानी 2.77 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
शीर्ष 10 कंपनियों में टीसीएस सबसे बड़ी वेल्थ क्रिएटर रही। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1,08,542.63 करोड़ रुपए बढ़कर 8,91,134.96 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
इसके बाद भारती एयरटेल का स्थान रहा, जिसकी मार्केट वैल्यू 61,406.53 करोड़ रुपए बढ़कर 11,88,815.45 करोड़ रुपए हो गई। वहीं इंफोसिस ने 55,893.05 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की और उसका बाजार पूंजीकरण 4,71,409.41 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण भी 53,047.56 करोड़ रुपए बढ़कर 16,37,437.19 करोड़ रुपए हो गया और उसने अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा।
निजी क्षेत्र के बैंकों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक की मार्केट वैल्यू 32,379.05 करोड़ रुपए बढ़कर 11,22,628.07 करोड़ रुपए हो गई, जबकि आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप 30,769.95 करोड़ रुपए बढ़कर 10,02,871.44 करोड़ रुपए हो गया।
अन्य बढ़त दर्ज करने वाली कंपनियों में बजाज फाइनेंस शामिल रही, जिसकी वैल्यू 14,786.65 करोड़ रुपए बढ़कर 6,11,326.72 करोड़ रुपए हो गई। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के बाजार पूंजीकरण में 4,933.5 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई और यह 5,02,204.82 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। वहीं भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मार्केट वैल्यू 3,323.07 करोड़ रुपए बढ़कर 8,87,722.84 करोड़ रुपए हो गई।
शीर्ष 10 कंपनियों में केवल लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ऐसी कंपनी रही, जिसके बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई, और कंपनी की मार्केट वैल्यू 9,232.26 करोड़ रुपए घटकर 4,99,725.06 करोड़ रुपए रह गई।
देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों की रैंकिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही। इसके बाद क्रमशः भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, एसबीआई, बजाज फाइनेंस, एलआईसी, लार्सन एंड टुब्रो और इंफोसिस का स्थान रहा।
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भारत की आर्थिक प्रगति जश्न मनाने लायक, अगले वर्षों में भी मजबूत विकास की संभावनाएं : शीर्ष अर्थशास्त्री

शीर्ष अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने रविवार को कहा कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक प्रगति सराहना की हकदार है। उन्होंने कहा कि देश की लगातार मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर होती आर्थिक स्थिति भविष्य के लिए आशावाद के पर्याप्त कारण प्रदान करती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में किम ने कहा कि भारत के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक रूप से तेजी से आगे बढ़ने की देश की क्षमता और मध्यम अवधि की विकास संभावनाएं बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
उन्होंने कहा, “मेरा निष्कर्ष वही है। भारत के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन विशेष रूप से पिछले दशक में उसकी आर्थिक प्रगति और मध्यम अवधि में सकारात्मक विकास संभावनाएं जश्न मनाने योग्य हैं। 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए यह प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है।”
किम की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने एक दिन पहले ही भारत की मजबूत विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और विश्व बैंक जैसे लगभग सभी प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7 प्रतिशत से अधिक कर दिया है।
अर्थशास्त्री के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने असाधारण मजबूती का प्रदर्शन किया है। महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी, लेकिन इसके बाद 2021 में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अगले चार वर्षों तक विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रही।
किम ने कहा कि उनके सहित कई अर्थशास्त्रियों को लगातार अपनी विकास दर संबंधी भविष्यवाणियों में ऊपर की ओर संशोधन करना पड़ा, क्योंकि प्रत्येक तिमाही के जीडीपी आंकड़े उम्मीदों से बेहतर रहे।
उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप भारत ने लगातार पांच वर्षों तक 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर दर्ज की है। यह प्रदर्शन 2003 से 2007 के उस दौर के बराबर है, जब भारत पहली बार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ था।
किम ने यह भी कहा कि वर्ष 2021 से 2025 के दौरान 7.83 प्रतिशत की औसत वार्षिक विकास दर 1960 के बाद किसी भी पांच वर्षीय अवधि की दूसरी सबसे ऊंची औसत वृद्धि दर है। इससे अधिक केवल 2003 से 2007 के दौरान 7.89 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर रही थी।
भारत की अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार का उल्लेख करते हुए किम ने कहा कि आज का भारत दो दशक पहले की तुलना में बिल्कुल अलग आर्थिक स्तर पर खड़ा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 1 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक था, जबकि अब यह 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है। ऐसे में समान विकास दर का अर्थ अब कहीं अधिक बड़े पैमाने पर आर्थिक विस्तार और मूल्य सृजन से है।
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सीईसी को कोई नहीं बचा सकता, चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत: जयराम रमेश

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने रविवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर राजनीतिक दलों को आठ साल तक खोजने योग्य (सर्च करने लायक) मतदाता सूची न देकर ‘वोट चोरी’ में मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) को तुरंत रोकने की भी मांग की।
जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में कहा, “पिछले दो वर्षों से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार और दृढ़ता से यह मांग कर रहे हैं कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) सभी राजनीतिक दलों को खोजने योग्य (सर्च करने योग्य) प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराए। ईसीआई ने बार-बार इस मांग को ठुकरा दिया और 2018 में सर्च करने योग्य मतदाता सूची देना बंद कर दिया था, जब कांग्रेस को मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाता मिले थे। ‘वोट चोरी’ को संभव बनाने के लिए 8 वर्षों तक इस मांग को खारिज किया गया।”
कांग्रेस नेता ने कहा, “15 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने एक आदेश जारी किया कि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दो साल के अंतराल के बाद फिर से शुरू हुए ‘विशेष सारांश पुनरीक्षण’ (एसएसआर) के लिए राजनीतिक दलों को सर्च करने योग्य प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाएगी। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि पूरा देश ‘वोट चोरों’ के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है।”
जयराम रमेश ने आरोप लगाया, “हर बार जब ‘वोट चोरी’ पकड़ी जाती है, तो केंद्र सरकार कोई नया हथकंडा अपनाती है, जैसे कि सर्च करने योग्य मतदाता सूची को रोकना, फर्जी मतदाताओं को जोड़ना या एसआईआर का इस्तेमाल करना लेकिन इस बार ऐसा नहीं चलेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को कोई नहीं बचा सकता, जिन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करते हुए चुनाव आयोग में जनता के भरोसे और विश्वास को खत्म कर दिया है। उन्हें पद से हटना ही होगा। हालांकि सिर्फ इतना ही काफी नहीं होगा। भारतीय चुनाव आयोग और उसके आईटी सिस्टम में पूरी तरह से बदलाव (ओवरहॉल) करने की जरूरत है। एसआईआर की वजह से 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के संवैधानिक मताधिकार को खतरे में डाल दिया है, इसे तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए।
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