राजनीति
कर्नाटक सरकार फेक न्यूज फैलाने वालों पर करेगी कार्रवाई
बेंगलुरु, 21 जून : कर्नाटक सरकार ने फेक न्यूज का मुकाबला करने के लिए हर पुलिस स्टेशन में एक अलग साइबर विंग बनाने का फैसला किया है। इसके अलावा राज्य सरकार फेसबुक, ट्विटर, गूगल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी करेगी। राज्य गृहमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने बुधवार को यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि फेसबुक, ट्विटर, गूगल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों की एक बैठक जल्द ही बुलाई जा रही है। फर्जी खबरों को प्रसारित करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इस पर काबू पाया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि जो कोई भी फेक न्यूज बनाता है और इसे प्रसारित करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई निश्चित है, चाहे कोई भी राजनीतिक संगठन हो।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मंगलवार को अधिकारियों को फर्जी समाचार अभियानों की उत्पत्ति का पता लगाने का निर्देश दिया था। राज्य में नई कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर फर्जी खबरें चलाए जाने के बाद यह आदेश जारी किया गया।
अधिकारियों ने फर्जी खबरें फैलाने वालों की पहचान करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया है। सिद्दारमैया ने आदेश के संबंध में राज्य के गृह मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर के साथ विस्तृत चर्चा की।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि 2013 में जब कांग्रेस सरकार सत्ता में आई थी तब फेक न्यूज का संकट खड़ा हो गया था। इस बार भी राजनीतिक विरोधी यही हथकंडा अपना रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। वे अधिक से अधिक फर्जी खबरों के प्रसार में लिप्त हैं और इससे समाज में अशांति पैदा होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से शुरुआत में ही जड़ों को काटकर कार्रवाई करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा शासन के दौरान सुरक्षाबलों ने बच्चा चोरों, गाय के मांस की ढुलाई आदि के बारे में झूठी खबरें फैलाने की कोशिश की है।
लोगों ने भाजपा और संघ परिवार को ²ढ़ विश्वास के साथ खारिज कर दिया है। ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव की तैयारी चल रही है, फर्जी खबरों के माध्यम से समूहों के बीच झड़पों, दंगों के संकेत मिल रहे हैं।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने साइबर पुलिस को फर्जी खबरों का पता लगाने के लिए तैयार रहने और मासिक आधार पर एक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
हूती विद्रोहियों के हमले तेज, सऊदी गठबंधन ने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल मार गिराने का किया दावा

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने एक ड्रोन और एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराने का दावा किया है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मालिकी ने सोमवार को बताया कि यमन के हूती समूह की ओर से दागे गए एक ड्रोन और एक बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया गया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अलग-अलग बयानों में अल-मालिकी ने कहा कि ड्रोन को सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत (ईस्टर्न प्रोविंस) में इंटरसेप्ट किया गया, जबकि बैलिस्टिक मिसाइल को हूतियों ने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के खमीस मुशैत शहर की ओर दागा था।
ये कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सीमा पार हमलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। रविवार को सऊदी अरब के दो हवाई अड्डों पर हमले हुए थे।
सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी विमानन अधिकारियों ने बताया कि रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए एक हमले में पाकिस्तान के एक नागरिक की मौत हो गई और 11 अन्य लोग घायल हो गए। वहीं, दम्माम के पास स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया।
इसके अलावा, अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए एक अन्य हूती विद्रोहियों के हमले में 12 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 309 लोग घायल हुए थे।
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को रियाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूतियों ने फिर से हमला किया। इस हमले में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए। इससे एक दिन पहले भी यमन के इसी ग्रुप ने एक जानलेवा हमला किया था, जिसके कारण अधिकारियों को एयरपोर्ट पर कामकाज रोकना पड़ा था।
शनिवार का हमला पिछले एक दशक से ज्यादा समय में सऊदी अरब की जमीन पर हुआ सबसे घातक हमला था। यह यमन युद्ध में तनाव बढ़ने का एक बड़ा संकेत है।
राजनीति
सीएमआरएल-एक्सालॉजिक स्कैम: पूर्व सीएम पिनाराई विजयन और रियास दो अलग-अलग मामलों में पहले आरोपी बनाए गए

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और सीपीआई (एम) विधायक और पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास को अलग-अलग मामलों में पहला आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) की ओर से सोमवार को विजिलेंस कोर्ट में विवादित मामलों में दो एफआईआर दर्ज कराएगी।
पहला केस सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मंथली पेमेंट से जुड़ा है, जिसमें विजयन पहले आरोपी हैं। दूसरा केस रियास को मिले कथित करप्शन के पैसे से जुड़ा है, जो दूसरे एलडीएफ कैबिनेट में टूरिज्म मिनिस्टर थे और विजयन की बेटी टी. वीना के पति हैं। वीना दोनों केस में दूसरी आरोपी हैं।
केरल हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के उस निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसमें कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) की ओर से एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को किए गए मंथली पेमेंट और सरकारी पद पर बैठे लोगों द्वारा कंपनी को दिए गए कथित फायदों से जुड़े आरोपों की पूरी जांच करने और केस दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री विजयन की बेटी वीना की यह कंपनी है। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक ट्रांजैक्शन से जुड़े पहले केस में, विजयन पहले आरोपी और वीना दूसरी आरोपी होंगी।
वहीं, दूसरे केस में पी.ए. मोहम्मद रियास पहले आरोपी और वीना दूसरी आरोपी होंगी। दोनों एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग आरोपों, पेमेंट और कथित फेवर से जुड़े हालात की जांच की जाएगी। हाई कोर्ट ने विजिलेंस को शुरुआती जांच करने के बजाय एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने सरकार की मंजूरी के बिना स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाने के पुलिस चीफ के आदेश को भी रद्द कर दिया था। सरकार से उम्मीद है कि वह विजिलेंस डायरेक्टर द्वारा सुझाई गई स्पेशल टीम को नियुक्त करने के लिए एक नया आदेश जारी करेगी, जो ऐसी टीम बनाने के अधिकार पर कोर्ट की टिप्पणियों के अनुसार होगा।
क्राइम ब्रांच के पास मौजूद सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स विजिलेंस को सौंप दिए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि हाईकोर्ट के खास निर्देश को देखते हुए जांच आगे बढ़ाने के लिए पहले से मंजूरी की जरूरत नहीं है। इस बीच, घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने कहा कि विजयन सोमवार को बाद में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने एक याचिका के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी गई है।
महाराष्ट्र
एमपीएससी में गड़बड़ियों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बनाई समिति, तुकाराम मुंडे को मिली सचिव की जिम्मेदारी

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) में गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर जारी उम्मीदवारों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आयोग से जुड़े मामलों की जांच और सुधार के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार का यह फैसला रविवार को सामने आया। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने पुणे में एसएम जोशी पुल पर आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों से मुलाकात के दौरान समिति के गठन की जानकारी दी। यहां उम्मीदवार पिछले 10 दिनों से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग में सुधार समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। तुकाराम मुंडे के अलावा इसमें लक्ष्मी गौतम, गणेश पाटील और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक को शामिल किया गया है। समिति से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर विचार करने की अपेक्षा है।
सरकार के इस फैसले को आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों की मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग पर सरकार ने क्या निर्णय लिया है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हुआ है।
आंदोलनकारी उम्मीदवारों की मांगों में केवल महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार ही शामिल नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन में शामिल कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती करने और जनवरी में प्रस्तावित ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी उठाई है।
इसके अलावा, उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग उम्मीदवारों के आंदोलन का समर्थन कर रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पाटील ने समिति में तुकाराम मुंडे को शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा। सरकार की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की भी खबर है।
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