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Thursday,06-August-2026
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देवघर रोपवे हादसा : 6 महीने बाद भी कोई जांच रिपोर्ट नहीं, किसी पर नहीं हुआ कोई एक्शन

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 झारखंड के देवघर की त्रिकूट पहाड़ी पर इसी साल 10 अप्रैल को हुए रोपवे हादसे की दर्दनाक यादें अब भी लोगों के जेहन से उतरी नहीं हैं, लेकिन अब शायद ही किसी को फिक्र है कि हादसे की जांच के लिए सरकार ने जो हाईलेवल कमेटी बनाई थी उसकी रिपोर्ट कहां है? हकीकत यह है कि जिस कमेटी को दो महीने में जांच पूरी कर सरकार को रिपोर्ट सौंपनी थी, उसने तकरीबन छह माह बाद भी यह टास्क पूरा नहीं किया है।

हादसों के तुरंत बाद तो सरकारें जबर्दस्त तेजी दिखाती हैं और उसके कुछ दिनों बाद किस तरह पूरा का पूरा सिस्टम बेफिक्री की चादर ओढ़कर सो जाता है, यह उसी का एक आदर्श उदाहरण है।

याद दिला दें कि झारखंड के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन केंद्र देवघर के त्रिकूट पर्वत पर बीते 10 अप्रैल की शाम लगभग 6 बजे रोपवे का एक तार टूट जाने की वजह से तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे।

रोपवे की 24 में से 23 ट्रॉलियों पर सवार कुल 78 लोग पहाड़ी और खाई के बीच हवा में फंस गये थे। इनमें से 28 लोगों को उसी रोज सुरक्षित निकाल लिया गया था, जबकि 48 लोग 36 से लेकर 45 घंटे तक बगैर कुछ खाए-पिए पहाड़ी और खाई के बीच हवा में लटके रह गए। वायुसेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और आर्मी के लगातार 45 घंटे के जोखिम भरे ऑपरेशन के बाद हवा में लटके इन 48 में से 46 लोगों को बचा लिया गया था, जबकि रेस्क्यू के दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी।

एक व्यक्ति की मौत ट्रॉली गिरने से पहले ही हो गई थी। तब यह बात सामने आई थी कि रोपवे चलाने वाली कंपनी ने न तो मापदंडों के अनुसार इसका मेंटेनेंस किया था और न ही सेफ्टी ऑडिट में सामने आई खामियों को दूर करने की जरूरत समझी थी।

हादसे से तीन हफ्ते पहले ही एक सरकारी एजेंसी ने 1,770 मीटर लंबे इस रोपवे का सेफ्टी ऑडिट किया था और इसमें करीब 24 खामियां बताई थीं। इन्हें नजरअंदाज कर रोपवे का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा था।

हादसे के बाद झारखंड सरकार ने 19 अप्रैल को राज्य के वित्त सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में जांच समिति के गठन का नोटिफिकेशन जारी किया था। नोटिफिकेशन में कहा गया था कि कमेटी दो महीने में रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। आप हैरान हो सकते हैं, लेकिन सच यह है कि जिस कमेटी को दो महीने यानी 60 दिनों में रिपोर्ट देनी थी, वह पूरे 70 दिन बाद घटनास्थल पर जांच के लिए पहुंची।

अब बताया जा रहा है कि रोपवे के जिस शाफ्ट के टूटने से यह हादसा हुआ था, उसकी मेटालर्जिकल लैब से जांच रिपोर्ट आने में देर होने की वजह से कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार नहीं कर पाई है। इस प्रकरण में हैरान करने वाली बात यह भी है कि मेटालर्जिकल लैब की रिपोर्ट करीब एक माह पहले ही राज्य के पर्यटन विभाग को मिल चुकी है, लेकिन यह अब तक जांच कमेटी तक नहीं पहुंची है।

इसी हफ्ते जब गुजरात के मोरबी का हादसा सामने आया तो रोपवे हादसे की जांच कमेटी ने पर्यटन विभाग को पत्र लिखकर मेटालर्जिकल लैब की रिपोर्ट की मांग की है। अब कहा जा रहा है कि जल्द ही कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी।

पिछले साले 27 मई को यास तूफान के दौरान रांची के पास कांची नदी पर हाराडीह-बुढ़ाडीह पुल पर 13 करोड़ की लागत से बना पुल उद्घाटन के पहले ही बह गया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तब इसकी जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनाने की घोषणा करते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जांच कमेटी में पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख मुरारी भगत को अध्यक्ष बनाया गया था। इसके अलावा भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता जेपी सिंह सदस्य थे। कमेटी को पुल ढहने के कारणों की जांच कर एक माह में रिपोर्ट देने को कहा गया था। डेढ़ साल बाद भी न तो इस मामले की जांच रिपोर्ट का कोई अता-पता है और न ही किसी पर कोई कार्रवाई हो पाई है।

वर्ष 2017 में हजारीबाग के सदर प्रखंड के डंडई कलां में सेवाने नदी पर बना पुल मात्र चार साल में धंस गया था। यह पुल जब बना, तभी इसके घटिया निर्माण की शिकायत आई।

जांच में भी यह बात साबित हुई तो 2013 में विशेष प्रमंडल के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता गोपाल राम रजक को सस्पेंड किया किया था। ठेकेदार को फिर से पुल का पिलर बनाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन पहली ही बारिश में पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

दरअसल झारखंड में घटिया निर्माण कार्य की वजह से बीते एक दशक में तीन दर्जन से भी ज्यादा पुल ध्वस्त हुए हैं, लेकिन किसी भी मामले में दोषियों को चिह्न्ति कर उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई हुई हो, ऐसा कोई उदाहरण नहीं है। कुछ अधिकारी कुछ महीनों के लिए सस्पेंड जरूर हुए, लेकिन इससे ज्यादा बड़ी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मसलन, रांची के सोनाहातू में बलमाडीह के पास कांची नदी पर पुल धंसने, पलामू के चैनपुर में शाहपुर-गढ़वा मार्ग पर तहले नदी के ऊपर बने पुल के बह जाने, चैनपुर में ही कोयल नदी पर बने पुल के ध्वस्त होने, धनबाद के निरसा में पुसई नदी पर स्थित पुल के क्षतिग्रस्त होने जैसे कई हादसे हुए हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर आईवॉश का खेल चलता रहा।

राज्य में अब भी ऐसे कई पुल हैं, जो हर रोज खतरों को दावत दे रहे हैं। मसलन धनबाद में झारखंड और बंगाल को जोड़ने वाला चिरकुंडा-बराकर पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके दो पिलर ध्वस्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं। चिरकुंडा की ओर से पुल के दूसरे पिलर के नीचे की मिट्टी व पत्थर हट चुके हैं, जबकि चौथे पिलर में दरार आ गई है। यह पुल कभी भी ध्वस्त हो सकता है।

अगर ऐसा हुआ तो जान-माल की भारी क्षति तो होगी ही, साथ ही झारखंड व बंगाल का संपर्क भी टूट जाएगा। इस पुल का निर्माण वर्ष 1925 में कुमारधुबी इंजीनियरिंग वर्कस लिमिटेड (केईडब्ल्यू) ने किया था। पुल पर लगे शिलापट्ट पर साफ लिखा है कि अधिकतम 10 टन भार लेकर कोई भी वाहन गुजर सकता है। मगर इस निर्देश की धज्जियां उड़ाते हुए हर रोज मालवाहक वाहन यहां से होकर गुजरते हैं।

इसी तरह हजारीबाग जिले में दारू और टाटीझरिया प्रखंड को आपस में जोड़ने वाली सेवाने नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त होकर एक तरफ धंसता जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इस पुल का निर्माण कुछ वर्ष पूर्व करोड़ों रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ था और बेहद कम समय में यह पुल खतरनाक ढंग से क्षतिग्रस्त हो गया है। यह पुल धनबाद, गिरिडीह, गोमिया, बोकारो आदि को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर स्थित है।

बराकर नदी के बजरा घाट पर धनबाद-जामताड़ा को जोड़ने वाला पुल बालू के अवैध खनन के कारण खतरे में है। लातेहार जिला मुख्यालय में औरंगा नदी पुल भी नदी में बालू के अंधाधुंध खनन की वजह से खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। खूंटी जिले के तोरपा में गोविंदपुर-उरमी रोड में कारो नदी पर बना पुल बीते अगस्त महीने में क्षतिग्रस्त हो गया। पुल का एक हिस्सा नीचे झुक चुका है और यह किसी भी रोज बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

अपराध

1.30 करोड़ रुपए की सराफा लूट का खुलासा, 5 आरोपी गिरफ्तार, पूरा लूटा गया माल बरामद

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गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने महज तीन दिन के भीतर चांदी व्यापारी से हुई करोड़ों रुपए की लूट का सफल खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपए मूल्य का सोना और चांदी, घटना में प्रयुक्त बिना नंबर प्लेट की बलेनो कार, एक अवैध तमंचा और दो जिंदा कारतूस भी बरामद किए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद आभूषणों की कीमत एक करोड़ रुपए से अधिक होने के कारण मामले की सूचना आयकर विभाग (इनकम टैक्स) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी भेजी जाएगी। डीसीपी ग्रेटर नोएडा ने बताया कि यह घटना 2 अगस्त 2026 की सुबह करीब 4:30 बजे थाना बीटा-2 क्षेत्र में जीरो प्वाइंट के पास हुई थी। दिल्ली के चांदनी चौक से एक सराफा व्यापारी सोने-चांदी के आभूषण आगरा में डिलीवरी के लिए लेकर जा रहा था। इसी दौरान आरोपियों ने दुर्घटना का बहाना बनाकर व्यापारी की गाड़ी रुकवाई और तमंचे के बल पर आभूषणों से भरा बैग लूटकर फरार हो गए।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नरेट ने तत्काल पांच विशेष टीमों का गठन किया। एसओजी ग्रेटर नोएडा, थाना बीटा-2 और थाना इकोटेक-1 पुलिस की संयुक्त टीम ने 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई। पुलिस ने एटीएस गोलचक्कर के पास से पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा कर दिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंकुर, अमित, सोहित बंसल, हिमांशु और कमलकांत के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया। घटना से करीब आठ दिन पहले आरोपी कमलकांत ने दिल्ली के चांदनी चौक स्थित सराफा बाजार में व्यापारियों की गतिविधियों की लगातार रेकी की थी। उसने अपने साथियों को सूचना दी कि एक विशेष कार में बड़ी मात्रा में आभूषण आगरा भेजे जाएंगे। इसके बाद सभी आरोपियों ने दो कारों के जरिए व्यापारी का पीछा किया और पूर्व निर्धारित योजना के तहत जीरो प्वाइंट के पास वारदात को अंजाम दिया।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि मुख्य साजिशकर्ता कमलकांत पहले से सराफा व्यापारियों के संपर्क में था और इसी जान-पहचान का फायदा उठाकर उसने पूरी योजना तैयार की। आरोपियों ने बताया कि फाइनेंस कंपनी में करीब एक करोड़ रुपए का नुकसान होने और रिश्तेदारों के कर्ज के दबाव के चलते उन्होंने लूट की साजिश रची थी।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 635 ग्राम सोने के आभूषण बरामद किए हैं, जिनमें पांच हार, दो मंगलसूत्र, 29 पेंडेंट, महिलाओं की 56 अंगूठियां, पुरुषों की 34 अंगूठियां, 18 लॉकेट और 42 जोड़ी झुमकियां शामिल हैं। इसके अलावा करीब 12.138 किलोग्राम चांदी, घटना में प्रयुक्त बिना नंबर प्लेट की बलेनो कार तथा एक अवैध .315 बोर तमंचा और दो जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे लूटे गए माल की बरामदगी कर ली गई है। मामले में थाना बीटा-2 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा आयुध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज है। पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है, साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने पहले भी कहीं इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं।

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अपराध

मुंबई: रात में एमटीएनएल केबल चुराने वाले गैंग का पर्दाफाश, दो एफआईआर दर्ज, 7 आरोपी गिरफ्तार, फरार आरोपियों की तलाश जारी

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मुंबई एक टिप-ऑफ़ पर कार्रवाई करते हुए, एक पुलिस टीम ने 2 अगस्त को बर्कले पैलेस रेलवे कॉलोनी के सामने फुटपाथ पर दो लोगों को एक गैंती और एक फावड़े से ज़मीन खोदते हुए पाया। गिरफ्तार होने के बाद, उनके दो साथी एक टेंपो में भाग गए। गिरफ्तार किए गए दो लोगों से कड़ी पूछताछ में पता चला कि वे और उनके साथी अंडरग्राउंड एमटीएनएल कॉपर केबल चुरा रहे थे। सरकार द्वारा एक औपचारिक शिकायत दर्ज की गई, एक मामला दर्ज किया गया और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस टीम फिलहाल फरार साथियों और टेंपो में ले जाए गए केबल की तलाश कर रही है। अब तक इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और अपराध में इस्तेमाल किए गए औजार जब्त कर लिए गए हैं।

4 अगस्त को, 04:35 और 04:42 पूर्वाह्न के बीच, यह सूचना मिली कि लोग सर जे. जे. रोड (दक्षिण की ओर जाने वाली लेन) पर बर्कले पैलेस की दीवार से सटे फुटपाथ पर एक जेसीबी और एक टेंपो की मदद से ज़मीन खोदकर एमटीएनएल केबल चुरा रहे हैं। पुलिस टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया और चार लोगों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। चारों लोग जेसीबी से ज़मीन खोद रहे थे, कॉपर के तार निकाल रहे थे और उन्हें एक टेम्पो में लाद रहे थे। एक जेसीबी, एक आयशर टेम्पो, एक कार, चोरी की 70 मीटर केबल और केबल काटने के औज़ार समेत कुल 55 लाख रुपये की प्रॉपर्टी ज़ब्त की गई है। चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

सर जेजे मार्ग पुलिस स्टेशन ने एमटीएनएल केबल चोरी के दो मामले सुलझाए हैं। इन मामलों में कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार करके और चोरी की प्रॉपर्टी के साथ-साथ जुर्म में इस्तेमाल किए गए औज़ार और गाड़ियों को ज़ब्त करके, उन्होंने एक इंटर-स्टेट केबल चोरी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। जुर्म की पूरी जांच चल रही है।

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अपराध

बंगाल पुलिस की छापेमारी में 28 करोड़ रुपये और 15 किलो सोना जब्त, तुलु मंडल का रिश्तेदार गिरफ्तार

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पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में लगभग 24 घंटे तक चली छापेमारी, तलाशी अभियान और पूछताछ के बाद पुलिस ने गुरुवार को जिले के पत्थर खदान कारोबारी तुलु मंडल के रिश्तेदार मीनार मंडल को गिरफ्तार कर लिया।

बुधवार दोपहर शुरू हुए इस अभियान के दौरान पुलिस ने मीनार मंडल के घर से भारी मात्रा में नकदी और सोना बरामद किया। बरामद नकदी की गिनती के लिए पुलिस को स्थानीय बैंक शाखा से करेंसी काउंटिंग मशीनें लानी पड़ी।

गुरुवार सुबह नकदी की गिनती और दोबारा गिनती पूरी होने के बाद जांच दल के एक सदस्य ने बताया कि बरामद नकदी की कुल राशि 28 करोड़ रुपये से कुछ अधिक पाई गई।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा मीनार मंडल के घर से 15 किलोग्राम सोना भी बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 21 करोड़ रुपये से अधिक है।

उन्होंने कहा, “बरामद नकदी और सोने की कुल अनुमानित कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये है।”

गुरुवार सुबह मीनार मंडल को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर पहले स्थानीय पुलिस थाने ले जाया गया। वहीं, पुलिस उसके घर से नकदी और सोने से भरे दो ट्रंक भी अपने साथ ले गई।

मीनार मंडल को दिन में बाद में सूरी स्थित जिला अदालत में पेश किया जाएगा, जहां सरकारी वकील उसकी पुलिस हिरासत की मांग करेंगे।

शुरुआत में मीनार मंडल ने इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोने के स्रोत को लेकर पुलिस के बार-बार पूछे गए सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। हालांकि, बाद में उसने स्वीकार किया कि बरामद नकदी और सोना एक संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़ा हुआ था। इसकी पुष्टि बीरभूम के पुलिस अधीक्षक बिदित राज बुंदेश ने की।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पिछले मंगलवार को बीरभूम के मोहम्मद बाजार थाना पुलिस ने सात डकैतों को गिरफ्तार किया था। उन्हीं डकैतों से मिली जानकारी के आधार पर जांचकर्ताओं को मीनार मंडल के घर में नकदी और सोने के इस बड़े जखीरे का पता चला। इसके बाद बुधवार दोपहर उसके घर पर छापेमारी और तलाशी अभियान शुरू किया गया, जो गुरुवार सुबह तक जारी रहा।

बताया जाता है कि मीनार मंडल राज्य परिवहन निगम में बस चालक था। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि वह तुलु मंडल के पत्थर खदान कारोबार में बड़े स्तर पर शामिल था। तुलु मंडल को बीरभूम में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष अनुव्रत मंडल का करीबी माना जाता है।

मीनार मंडल के घर से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद होने से उसके पड़ोसी भी हैरान रह गए हैं। इससे पहले भी पत्थर खदान कारोबारी तुलु मंडल पर अवैध पत्थर खनन के आरोप लग चुके हैं।

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