अपराध
मदरसों को स्कूल में बदलने का कानून, मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुवाहाटी उच्च न्यायालय के एक फैसले को चुनौती देने वाली एक अपील पर नोटिस जारी किया है। दरअसल, साल 2020 में असम विधानसभा में एक कानून पारित किया गया था, जिसके अनुसार राज्य सरकार द्बारा संचालित मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदला जाना था। इस कानून को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखने का फैसला सुनाया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर मंगलवार यानी आज हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले पर नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति सी.टी. रविकुमार ने असम सरकार और अन्य से जवाब मांगा। अधिवक्ता अदील अहमद के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने गलत तरीके से देखा कि याचिकाकर्ता मदरसे सरकारी स्कूल हैं, और राज्य द्वारा पूरी तरह से प्रांतीयकरण होता है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 28(1) से प्रभावित होते हैं और इस तरह, नहीं कर सकते। धार्मिक शिक्षा प्रदान करने की अनुमति दी जाए। अपील उस निर्णय को चुनौती देती है जिसने असम में मौजूदा प्रांतीय मदरसों को नियमित सरकारी स्कूलों में बदल दिया था।
याचिकाकर्ताओ का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि उच्च न्यायालय का फैसला गलत था क्योंकि उसने राष्ट्रीयकरण के साथ प्रांतीयकरण की बराबरी की थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि साल 1995 का अधिनियम मदरसों में कार्यरत शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करने और परिणामी लाभ प्रदान करने के लिए राज्य के उपक्रम तक सीमित था। साथ ही के लिए भी इन धार्मिक संस्थानों के प्रशासन, प्रबंधन और नियंत्रण का अधिकार था। हालांकि, साल 2020 का कानून अल्पसंख्यकों की संपत्ति छीन रहा है और धार्मिक शिक्षा प्रदान करने के अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकार को प्रभावित करता है।
याचिका में कहा गया है- मदरसों से संबंधित भूमि और भवनों की देखभाल याचिकाकर्ता द्वारा की जाती है और बिजली और फर्नीचर पर खर्च याचिकाकर्ता मदरसों द्वारा स्वयं वहन किया जाता है। 2020 का निरसन अधिनियम मदरसा शिक्षा की वैधानिक मान्यता के साथ युग्मित संपत्ति को छीन लेता है और राज्यपाल द्वारा जारी 12.02.2021 के आक्षेपित आदेश ने 1954 में बनाए गए ‘असम राज्य मदरसा बोर्ड’ को भंग कर दिया। याचिका में आगे तर्क दिया गया कि यह विधायी और कार्यकारी शक्तियों दोनों के मनमाने ढंग से प्रयोग के बराबर है और याचिकाकर्ता मदरसों को धार्मिक शिक्षा प्रदान करने वाले मदरसों के रूप में जारी रखने की क्षमता से वंचित करना है।
याचिका में कहा गया है कि पर्याप्त मुआवजे के भुगतान के बिना याचिकाकर्ता मदरसों के मालिकाना अधिकारों में इस तरह का अतिक्रमण भारत के संविधान के अनुच्छेद 30(1ए) का सीधा उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका, मोहम्मद इमाद उद्दीन बरभुइया और असम के 12 अन्य निवासियों द्वारा दायर की गई है, जिसमें अंतरिम राहत के रूप में उच्च न्यायालय के संचालन पर रोक लगाने की मांग की गई है।
इस साल फरवरी में पारित उच्च न्यायालय के फैसले का विरोध करने वाली याचिका में कहा गया है, हाईकोर्ट के फैसले के संचालन के परिणामस्वरूप मदरसों को बंद कर दिया जाएगा। साथ ही, इस शैक्षणिक सत्र में पुराने पाठ्यक्रमों के लिए छात्रों को प्रवेश देने से रोक दिया जाएगा।
अपराध
दिल्ली पुलिस ने किया अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 12 आरोपी गिरफ्तार

ARREST
दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट यूनिट ने एक बड़े अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान 5 नवजात बच्चों को रेस्क्यू किया है। यह गिरोह लंबे समय से नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल था और देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय था।
पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम करता था। आरोपी पहले दूसरे राज्यों से नवजात बच्चों को लाते थे और फिर उनके जन्म रिकॉर्ड और पहचान दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर उन्हें अवैध रूप से बेच देते थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह लाखों रुपए लेकर जरूरतमंद और संतानहीन दंपतियों को बच्चे बेच देता था।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कुछ की गिरफ्तारी दिल्ली से हुई है, जबकि अन्य को राजस्थान से पकड़ा गया है। यह गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ था और हरियाणा सहित अन्य जगहों पर भी बच्चों को बेचे जाने के संकेत मिले हैं। पुलिस का कहना है कि यह एक बड़ा रैकेट है जो लंबे समय से सक्रिय था और अब तक 20 से अधिक बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त की बात सामने आई है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी अस्पतालों और अन्य माध्यमों से नवजात बच्चों को हासिल करने के बाद उनकी पहचान छुपाते थे। इसके लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे, ताकि बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने जैसा दिखाया जा सके।
पुलिस ने इस पूरे मामले में गहन जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही, यह भी जांच हो रही है कि बच्चों को किन-किन राज्यों में और किन लोगों को बेचा गया है।
रेस्क्यू किए गए 5 नवजात बच्चों को फिलहाल सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और बाल कल्याण समिति की निगरानी में उन्हें आगे की देखभाल दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि इस तरह के संगठित अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और पूरे नेटवर्क को जल्द ही पूरी तरह उजागर किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई को मानव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता बताया है और कहा है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
अपराध
वायु सेना अधिकारी की पत्नी से जुड़े जबरन धर्मांतरण मामले में मौलवी गिरफ्तार

नागपुर पुलिस ने भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी की 24 वर्षीय पत्नी के कथित जबरन धर्म परिवर्तन मामले में एक मौलवी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान हजरत मौलाना के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे मध्य प्रदेश से हिरासत में लिया और आगे की पूछताछ के लिए नागपुर लाया है।
महिला ने अपनी शिकायत में पूर्व सहपाठी और उसके कई साथियों पर दुष्कर्म, ब्लैकमेल, जबरन धर्म परिवर्तन और काला जादू से जुड़े कथित अनुष्ठान कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस सप्ताह सामने आए इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में कथित तौर पर एक व्यक्ति महिला का हाथ पकड़कर धार्मिक आयतें पढ़ता दिखाई दे रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद मामले को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ गया और पुलिस जांच तेज कर दी गई।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य आरोपी 26 वर्षीय अयाज मदारे और उसका सहयोगी अमीन शेख पहले से ही पुलिस हिरासत में हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि गिरफ्तार मौलवी ने कथित धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया और निकाह कराने में अहम भूमिका निभाई थी।
एफआईआर के अनुसार, महिला ने आरोप लगाया है कि 8 फरवरी 2025 को अयाज उसे एक होटल ले गया, जहां उसके पेय पदार्थ में नशीला पदार्थ मिलाया गया। बेहोश होने के बाद उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बना लिए गए। बाद में इन्हीं के जरिए उसे ब्लैकमेल किया गया और पति को भेजने व सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर कई बार यौन उत्पीड़न किया गया। महिला का यह भी आरोप है कि उससे करीब चार लाख रुपए भी वसूले गए।
महिला ने शिकायत में बताया कि वायरल वीडियो में वह रोते हुए खुद को छोड़ने की गुहार लगा रही थी, जबकि आरोपी धार्मिक आयतें पढ़ रहा था। इसके बाद उसे बताया गया कि उसका धर्म परिवर्तन करा दिया गया है और फिर उसके साथ दोबारा यौन उत्पीड़न का प्रयास किया गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि अयाज नियमित रूप से उसे प्लास्टिक की बोतल से एक तरल पदार्थ पीने के लिए मजबूर करता था। उसने दावा किया कि इसे पीने के बाद वह उर्दू में मंत्र पढ़ता था, उसके चेहरे पर फूंक मारता था और इस प्रक्रिया को सम्मोहन या काला जादू बताता था।
एफआईआर के अनुसार, 31 मई को आरोपी उसे अपने सहयोगी के साथ कलमेश्वर ले गया, जहां हजरत मौलाना ने धार्मिक गतिविधि के दौरान उसकी इच्छा के विरुद्ध उससे “कबूल है” कहलवाया। महिला का आरोप है कि इसके बाद मौलवी ने उसका धर्म परिवर्तन घोषित किया और अयाज के साथ निकाह करा दिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौलवी से पूछताछ के दौरान मामले में और भी अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
अपराध
पंजाब: पुलिस ने ड्रग्स और नशे की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ की कार्रवाई, एक गिरफ्तार

पंजाब पुलिस ने ड्रग्स और नशे की तस्करी में संलिप्त तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस अभी इनसे पूछताछ कर मामले के बारे में पूरी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।
पुलिस का स्पष्ट कहना है कि इस मामले से जुड़े अगर किसी आरोपी के बारे में जानकारी प्रकाश में आएगी, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। पुलिस ने इस कार्रवाई के बारे में अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर जानकारी दी है।
पुलिस के मुताबिक, इन आरोपियों के पास से 5.775 किलोग्राम हेरोइन, 1,33,640 प्रतिबंधित कैप्सूल/गोलियां, 39 कारतूस और 36,600 नकद बरामद किए हैं। पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।
पुलिस ने बताया कि जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनसे पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है, ताकि इस बात की जानकारी सामने आ सके कि इसमें कौन लोग शामिल हैं और किस-किस प्रकार की भूमिकाओं का निर्वहन कर रहे हैं। अगर कोई अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होकर रहेगी।
पुलिस का कहना है कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने की दिशा में इस तरह की कार्रवाई जरूरी है। हमारा एकमात्र उद्देश्य पंजाब को नशा मुक्त करना है और इस दिशा में हमारी पूरी कार्रवाई जारी रहेगी। हम नहीं चाहते हैं कि पंजाब के युवा किसी भी प्रकार की नशीले पदार्थों की तस्करी में संलिप्त पाए जाए।
बता दें कि पंजाब में सीमा पार से लगातार नशीले पदार्थों की तस्करी की जाती है। पुलिस अब तक इस मामले में कई बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। इससे पहले पंजाब पुलिस ने 11 जून को कार्रवाई के दौरान 30 किलोग्राम हेरोइन बरामद की थी। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी दुबई में बैठे तस्करों के संपर्क में रहते थे और उनकी मदद से पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी किया करते थे।
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