राष्ट्रीय
आईटेल ने विजन 3 टर्बो 6 जीबी रैम, 18 वॉट फास्ट चार्जिग के साथ 7,699 रुपये में किया लॉन्च
10,000 रुपये से कम के भारत के नंबर 1 मोबाइल ब्रांड आईटेल ने गुरुवार को एक और प्रोडक्ट ‘विजन 3 टर्बो’ लॉन्च किया, जो 6 जीबी टर्बो रैम और 18 वॉट फास्ट चार्जिग तकनीक के साथ 7,699 रुपये में आता है, जो इसे सेगमेंट में पहला स्मार्टफोन बनाता है। इस पेशकश के साथ, कंपनी ने कहा कि इसका उद्देश्य भारत में टियर 2, 3 शहरों और नीचे के बाजारों में प्रीमियम, किफायती स्मार्टफोन में बदलाव को बढ़ावा देना है, जो नए युग के उपभोक्ताओं की आकांक्षाओं को पूरा करता है जो गति, प्रदर्शन और सामथ्र्य की तलाश करते हैं।
आईटेल इंडिया के सीईओ अरिजीत तालापात्रा ने एक बयान में कहा, “प्रौद्योगिकी उपभोक्ताओं को टियर 2 और उससे नीचे के बाजारों में तेजी से पहुंच गई है। हम डेटा खपत में भारी वृद्धि, और मनोरंजन वरीयता, स्वाद, आदतों और मीडिया ग्रहणशीलता में बदलाव देख रहे हैं।”
तालापात्रा ने आगे कहा, “आईटेल में, हम इन बाजारों में भारतीय उपभोक्ताओं में बदलाव के लिए नवाचार, आधुनिक सुविधाओं, बहुत सारे मूल्यवर्धन और सबसे महत्वपूर्ण रूप से सस्ती कीमत पर अगली पीढ़ी के प्रोडक्ट्स लाकर प्रासंगिक होने की कोशिश कर रहे हैं।”
अपने प्रमुख एसपी विजन 3 के साथ उपभोक्ताओं से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिलने के बाद, आईटेल ने अपने प्रीमियम किफायती एसपी विजन 3 टर्बो को 3 जीबी प्लस 3 जीबी टर्बो रैम के साथ 18वॉट फास्ट चार्जिग के साथ लॉन्च किया है, जो उपयोगकर्ताओं के लिए निर्बाध मोबाइल अनुभव प्रदान करने के लिए स्पीड में काफी सुधार करता है।
तालापात्रा ने कहा, “विजन 3 टर्बो उपरोक्त अंतर्²ष्टि का प्रमाण है क्योंकि यह स्मार्टफोन हमारे उपभोक्ताओं को प्रीमियम और बेहतर गुणवत्ता के साथ-साथ बेहतरीन फीचर्स देकर उनकी आकांक्षाओं को पूरा करता है। हमारे बाजार और उपभोक्ता अंर्तदृष्टि ने हमें इस पीढ़ी की जरूरतों को समझने में मदद की है जो भीतरी इलाकों और टियर 2, 3 और नीचे के शहरों में रहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “विजन 3 टर्बो का उद्देश्य अर्ध-शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं के जीवन को बदलना है जो प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करना चाहते हैं। हमने विजन 3 टर्बो के साथ अपने वादे को पूरा करने के लिए अत्यंत समर्पण के साथ काम किया है। विस्तार योग्य टर्बो रैम, हाई रोम क्षमता, शक्तिशाली बैटरी और बड़ी स्क्रीन के साथ, यह डिवाइस निश्चित रूप से हमारे उपभोक्ताओं की प्रौद्योगिकी आकांक्षाओं को पूरा करने वाला है।”
विजन 3 टर्बो 3 जीबी प्लस 3 जीबी टर्बो रैम के साथ आता है, जो पूरी तरह से स्पीड में सुधार करने के लिए निष्क्रिय मेमोरी को सक्रिय कर सकता है और उपयोगकर्ता को एक शानदार अनुभव प्रदान कर सकता है।
18 वॉट फास्ट चार्जिग टेक्नोलॉजी सपोर्ट चार्जिग समय को 50 प्रतिशत तक कम कर सकता है, जिससे यह इस प्राइस सेगमेंट में अपनी तरह का पहला ऑफर है। 20 मिनट का फ्लैश चार्ज भी फोन को 3 घंटे का टॉकटाइम देता है।
साथ ही, विजन 3 टर्बो 64 जीबी रोम का समर्थन करता है, जिसे 128 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को उनकी पसंदीदा फिल्म, वेब सीरीज या वीडियो शूट करने के लिए पर्याप्त जगह देता है।
विजन 3 टर्बो रिवर्स चार्जिग के साथ 5000 एमएएच की इन-बिल्ट ली-पॉलीमर बैटरी द्वारा संचालित है। इंटेलिजेंट पॉवर मैनेजमेंट के साथ, बिल्ट-इन एआई पॉवर मास्टर बैटरी बैकअप को 20 प्रतिशत तक बढ़ा देता है।
विजन 3 टर्बो में प्रीमियम, बड़ी 6.6-इंच एचडी प्लस आईपीएस वाटरड्रॉप डिस्प्ले है, जो स्टाइल और परफॉर्मेस का एक आदर्श संयोजन प्रदान करता है। 8.85 मिमी स्लिम यूनीबॉडी डिजाइन स्मार्टफोन को आकर्षक बनाता है।
फोन तीन कलर ऑप्शन्स- मल्टी ग्रीन, ज्वेल ब्लू और डीप ओशन ब्लू में उपलब्ध है।
विजन 3 में 8 एमपी का एआई डुअल रियर कैमरा और 5 एमपी का सेल्फी कैमरा भी है, जो उपभोक्ताओं को बेहतरीन फोटोग्राफी का अनुभव प्रदान करता है।
विजन 3 टर्बो वन टाइम स्क्रीन रिप्लेसमेंट ऑफर के सेवा आश्वासन के साथ भी आता है, जहां उपभोक्ता बिना किसी लागत या शून्य लागत पर खरीद के 100 दिनों के भीतर टूटी हुई स्क्रीन के मुफ्त वन-टाइम स्क्रीन रिप्लेसमेंट का लाभ उठा सकते हैं। कार्लकेयर भारत भर में 1100 से अधिक के सर्विस नेटवर्क के साथ ट्रांसियन होल्डिंग्स का विशिष्ट सेवा ब्रांड है।
राष्ट्रीय
पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।
एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।
डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।
इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।
रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।
डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।
इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।
वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।
राष्ट्रीय
राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।
यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।
न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।
साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
राजनीति
बारामती उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे की इस शर्त से बढ़ी सियासी हलचल

पुणे, 6 अप्रैल : बारामती विधानसभा उपचुनाव में एक नए मोड़ आ गया है। कांग्रेस उम्मीदवार और वकील आकाश मोरे ने साफ कह दिया है कि वह अपना नामांकन तभी वापस लेंगे, जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल संयोग नहीं था और सच सामने लाना बेहद जरूरी है।
आकाश मोरे ने कहा, “हम यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने के लिए लड़ रहे हैं। अगर सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है और गंभीर जांच करती है, तभी मैं अपना नामांकन वापस लेने पर विचार करूंगा।”
आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनकी एक राजनीतिक विरासत है। उनके पिता 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इतने बड़े नेता की मौत को गंभीरता से लेना चाहिए। मोरे ने कहा, “बारामती और महाराष्ट्र के ‘कर्तापुरुष’ चले गए। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर क्यों नहीं हुई या जांच क्यों नहीं हुई? हमने अजित दादा का राजनीतिक विरोध किया, ये हो सकता है, लेकिन राज्य के विकास के मामले में उनके साथ खड़े रहे। अगर कोई बड़ा नेता हादसे में मर जाए और एफआईआर दर्ज न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।”
उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी इस रुख से सहमत हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे की शर्त पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा, “अजित दादा के निधन के बाद उनके परिवार ने भी जांच की मांग की थी। इसलिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन यह प्रक्रिया कहां अटकी? रोहित पवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महाराष्ट्र भर में दौड़ लगानी पड़ी और आखिरकार यह एफआईआर केवल कर्नाटक में हुई। क्या यही संवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि एफआईआर महाराष्ट्र, खासकर बरामती में दर्ज हो तभी हम निर्णय करेंगे।”
अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे सोमवार को कांग्रेस की तरफ से नामांकन दाखिल करेंगे। इस पर काफी चर्चा और आलोचना हो रही है। कई लोग पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए सुझाव दे रहे हैं कि कांग्रेस को इस चुनाव में निर्विरोध मतदान होने देना चाहिए। क्या नांदेड में वसंतराव चव्हाण की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं हुए थे? क्या भरत भालके के निधन के बाद मंगलवेढा में चुनाव नहीं हुए थे? ऐसे अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं जहां भाजपा ने अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति की है।”
कांग्रेस के इस कदम ने निर्विरोध चुनाव की संभावना को रोक दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे के समर्थन से सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को मैदान में उतारे जाने के फैसले ने सबको चौंका दिया और अब नामकंन वापस लेने के लिए ये मांग रखी है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पहले कोशिश की कि चुनाव बिना मुकाबले हो, लेकिन कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर खेल बदल दिया। जैसे-जैसे नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें अब महायुति सरकार पर हैं कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बारामती के लोगों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को रिकॉर्ड बहुमत से चुने।
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