राजनीति
कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव : केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण को सीडब्ल्यूसी की मंजूरी का इंतजार
केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण (सीईए) पार्टी के राष्ट्रपति चुनाव के लिए कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि सीईए, जो संगठनात्मक चुनाव कराने के लिए अधिकृत है, ने सीडब्ल्यूसी के अंतिम निर्णय से पहले मतदाता सूची की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
पार्टी के अधिकांश नेताओं को लगता है कि राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालना चाहिए, लेकिन 2019 की चुनावी हार के बाद पद छोड़ने के बाद से उनकी ओर से कोई स्पष्टता नहीं है।
साथ ही, कांग्रेस अंतरिम रूप से सोनिया गांधी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में जारी रखने और प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए प्लान बी तैयार कर रही है। एक और नाम चर्चा में है, जो सोनिया के वफादार राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का है। उन्होंने कथित तौर पर शीर्ष पद से इनकार किया है और कहा है कि राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालना चाहिए।
कांग्रेस का कार्यक्रम 21 अगस्त से प्रक्रिया शुरू करने वाला था, लेकिन अभी तक सीडब्ल्यूसी की बैठक नहीं बुलाई गई है। अनुसूचित जाति के जिन नेताओं को शीर्ष पद दिया जा सकता है उनमें सुशील कुमार शिंदे, मल्लिकार्जुन खड़गे और मीरा कुमार शामिल हैं। खड़गे राहुल गांधी के विश्वासपात्र हैं और कर्नाटक चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, सूत्रों ने कहा कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य इकाइयों के साथ कई बैठकें की हैं। उन्होंने आम चुनावों से पहले देश के हर जिले का दौरा करने की भी योजना बनाई है। योजना को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
गैर-गांधी को पद संभालने का मौका देने की राहुल गांधी की जिद ने पार्टी को दुविधा में डाल दिया है। उनके करीबी नेता उन्हें फिर से पद संभालने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों ने कई बार राहुल गांधी से पार्टी के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने की अपील की है, लेकिन वह अनिच्छुक रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने कहा : “सभी सदस्य एकमत थे कि राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करना चाहिए। सीडब्ल्यूसी ने पार्टी के आंतरिक चुनाव को हरी झंडी दे दी है।”
सीडब्ल्यूसी ने संगठनात्मक चुनावों को मंजूरी दी थी और कार्यक्रम तय किया गया था।
पीसीसी महासभा द्वारा पीसीसी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और पीसीसी कार्यकारी और एआईसीसी सदस्यों का चुनाव पहले 20 अगस्त तक समाप्त होने वाला था।
एआईसीसी अध्यक्ष का चुनाव 21 अगस्त से 20 सितंबर के बीच होना है।
प्रारंभिक सत्र (तिथि की घोषणा बाद में) के दौरान एआईसीसी सदस्यों द्वारा सीडब्ल्यूसी सदस्यों और अन्य निकायों का चुनाव संभवत: सितंबर-अक्टूबर में होगा।
राष्ट्रीय समाचार
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष एकजुट, बैठक के बाद चुनाव आयोग पर तीखा हमला

नई दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन के बीच इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में इंडिया ब्लॉक में शामिल लगभग सभी पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक के बाद नेताओं ने मीडिया को भी संबोधित किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रशांत भूषण, सपा सांसद समेत तमाम नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी नेताओं ने जनता के मुद्दों को लेकर काम किया और इसमें सफलता भी मिली है। इससे पहले दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में लोग एकत्रित नहीं हुए थे। यह पहली बार है कि सभी लोग यहां पहुंचे हैं। सरकार का वोट चोरी का जो प्लान है, उसके खिलाफ सभी तैयार हो गए हैं।
इसके बाद आरजेडी के तेजस्वी यादव ने कहा कि सभी जानते हैं कि ज्ञानेश कुमार ने जिस तरह लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास किया है। हम सभी लोकतंत्र को बचाने के लिए तैयार हैं और किसी भी कुर्बानी के लिए भी तैयार हैं। यह देश गांधी, लोहिया, भगत सिंह और कर्पूरी ठाकुर का है। इस देश की संवैधानिक संस्थाओं को हाईजैक करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स को हाईजैक करने की कोशिश हो रही थी, लेकिन चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार उससे भी आगे निकल गए। जिस तरह वे एक कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं, उन्हें सजा मिलनी जरूरी है। उनका डर ही है कि उन्होंने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। इसी से उनका डर दिखाई देता है। हम सभी लड़ेंगे और जीतेंगे। जिन लोगों ने षड्यंत्र किया है, फर्जी चुनाव कराया है, जनता उनसे जवाब मांग रही है। इन लोगों पर कार्रवाई जरूर होगी।
डी. राजा ने कहा कि सभी वरिष्ठ नेताओं ने देश के हालात पर चर्चा की है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान की समीक्षा की है। दिल्ली देश की राजधानी है और यह हमारा शहर है, लेकिन यहां हर तरफ बैरिकेड दिखाई देते हैं, लोगों को आने-जाने से रोका जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन होंगे, आप उन्हें कुचल नहीं सकते। सरकार ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है, इसे वापस लिया जाना चाहिए। पहले राजपथ और संसद मार्ग को बंद किया गया और अब जंतर-मंतर को बंद किया जा रहा है। हम इसकी निंदा करते हैं। हम इसके लिए भी लड़ाई लड़ेंगे। हम कुछ नया नहीं मांग रहे हैं, लेकिन संविधान में हमें प्रदर्शन करने का जो अधिकार मिला है, उसे हम छीनने नहीं देंगे।
सुप्रिया सुले ने कहा कि हम सभी इंडिया गठबंधन के साथ हैं। संविधान खतरे में है और हम इसके लिए लड़ते रहेंगे। हम आंदोलन जारी रखेंगे। संविधान में जो अधिकार हमें मिले हैं, सरकार उन्हें कुचलने की बड़ी भूल कर रही है। इसके खिलाफ हम पूरी ताकत के साथ खड़े हैं। हम पूरी मजबूती के साथ गठबंधन के साथ हैं।
सपा के हरेंद्र मलिक ने कहा कि समाजवादी पार्टी इंडिया गठबंधन के साथ खड़ी है। हम न्याय की इस लड़ाई में विपक्ष की एकता को बनाए रखते हुए लोकतंत्र के हत्यारों और संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर चुनाव को प्रभावित करने तथा वोट चोरी करने वालों के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। हम न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।
प्रशांत भूषण ने कहा कि 2 अक्टूबर से दिल्ली में चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार, वोट चोरी और लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ है। इस आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार ने मेट्रो बंद कर दी, इंटरनेट बंद कर दिया। ट्रेनें रोक दीं और दिल्ली में सब कुछ बंद कर दिया। प्रदर्शन करना हमारा अधिकार है, इसे कोई नहीं रोक सकता। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि सड़कों और पार्कों को प्रदर्शन के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हम सभी साथ आ गए हैं और एकजुट होकर लड़ेंगे। किसान संगठनों समेत तमाम संगठन साथ आएंगे। हम सभी मिलकर इस लड़ाई को लड़ेंगे और जीतेंगे भी।
सीपीआई (एम) के एम.ए. बेबी ने कहा कि जिसे निष्पक्ष होकर काम करना था, वह सत्ताधारी पार्टी के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसलिए हम उनके खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। ये लोग वोट चोरी करते हैं, प्रदर्शन की जगह छीनते हैं और लोकतंत्र की चोरी करते हैं। इसके खिलाफ हम संघर्ष कर रहे हैं और करते रहेंगे।
संजय राउत ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ऐसे माफिया हैं, जिन्होंने पूरे सिस्टम का अपराधीकरण किया है। ऐसे लोगों से कैसे निपटना है, हमें पता है। पिछले दस-बारह वर्षों से लोगों को डरा-धमकाकर रखा गया है, लेकिन अब डराने वालों की बारी डरने की है। इतनी बड़ी संख्या में फोर्स तैनात करके लोग अंदर बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में जो संघर्ष चल रहा है, वह जारी रहेगा। हम सभी एक साथ हैं और एक साथ ही रहेंगे।
राष्ट्रीय समाचार
तेलंगाना कांग्रेस ने दो ग्रेजुएट एमएलसी निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर पंजीकरण के लिए ऑब्जर्वर किए नियुक्त

तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) ने मंगलवार को तेलंगाना विधान परिषद के लिए दो ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्रों से होने वाले आगामी चुनावों के सिलसिले में ग्रेजुएट वोटरों के नामांकन के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त किए।
टीपीसीसी प्रेसिडेंट बी. महेश कुमार गौड ने हैदराबाद-रंगारेड्डी-महबूबनगर निर्वाचन क्षेत्र के लिए 43 और वारंगल-खम्मम-नलगोंडा निर्वाचन क्षेत्र के लिए 34 ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं।
टीपीसीसी प्रमुख ने नियुक्त ऑब्जर्वर से कहा कि वे संबंधित जिलों के सभी नेताओं और स्टेकहोल्डर्स के साथ तालमेल बिठाएं और सलाह-मशविरा करें। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि ग्रेजुएट वोटरों का पंजीकरण पार्टी के उद्देश्यों के अनुसार सही ढंग से और पूरी ईमानदारी से हो।
हैदराबाद-रंगारेड्डी-महबूबनगर निर्वाचन क्षेत्र के ऑब्जर्वर में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के भाई अनुमुला तिरुपति रेड्डी, मंत्री वाकिटी श्रीहरि, जुपल्ली कृष्णा राव, वरिष्ठ नेता और सरकारी सलाहकार वी. हनुमंत राव, और सांसद अनिल कुमार यादव व मल्लू रवि शामिल हैं।
वारंगल-खम्मम-नलगोंडा निर्वाचन क्षेत्र के ऑब्जर्वर में उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, पी. श्रीनिवास रेड्डी और कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी शामिल हैं।
इन दो निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर एनरोलमेंट का काम पिछले महीने ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के नियम 31(3) के तहत पब्लिक नोटिस जारी होने के साथ शुरू हुआ था।
वोटर लिस्ट नए सिरे से तैयार की जाएगी और इसके लिए 1 नवंबर, 2026 को क्वालिफाइंग तारीख माना जाएगा। जिन लोगों ने पहले वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया था, उन्हें भी नए सिरे से रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
भारत निर्वाचन आयोग ने घोषणा की है कि मार्च 2027 में दो सीटें खाली हो रही हैं और द्विवार्षिक चुनाव कराकर उन्हें भरा जाना है।
उम्मीदवार ने क्वालिफाइंग तारीख से कम से कम तीन साल पहले कोई डिग्री या उसके बराबर का डिप्लोमा पूरा कर लिया हो। साथ ही, उम्मीदवार का संबंधित ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र के इलाके का सामान्य निवासी होना भी जरूरी है।
चुनाव आयोग के घोषित शेड्यूल के अनुसार, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 25 नवंबर, 2026 को जारी की जाएगी। फाइनल वोटर लिस्ट 30 दिसंबर, 2026 को जारी की जाएगी।
सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा पहले ही कर दी है।
समा राममोहन रेड्डी महबूबनगर-रंगा रेड्डी-हैदराबाद निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार होंगे, जबकि रामरेड्डी सर्वोत्तम रेड्डी वारंगल-खम्मम-नलगोंडा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।
राजनीति
आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए लगातार उठाता रहेगा कदम : वित्त मंत्री

रुपए में गिरावट पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की प्राथमिकता घरेलू मुद्रा के किसी स्तर का बचाव करना नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित माहौल तैयार करना है।
राष्ट्रीय राजधानी में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में उन्होंने कहा कि वैश्विक कारणों के चलते रुपए पर दबाव के बीच केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए लगातार कदम उठाता रहेगा।
उन्होंने कहा, “आरबीआई रुपए में स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने नियामक उपायों के जरिए अहम कोशिशें कर रहा है। वे रुपए को किसी खास स्तर पर बनाए करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।”
सीतारमण ने कहा, “आगे भी इसी तरह के उपाय जारी रहेंगे।”
उनका यह बयान तब आया है जब हाल ही में भारतीय रुपए में गिरावट के बाद मुद्रा बाजार को स्थिर करने के लिए केंद्रीय बैंक ने कई कदम उठाए थे।
इससे पहले अक्टूबर में, केंद्रीय बैंक ने सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों के लिए एक खास डॉलर लिक्विडिटी विंडो खोली थी, कैंसल किए गए फॉरेन-एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को फिर से बुक करने के नियमों को कड़ा किया था और बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर वाले कुछ डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन की लिमिट को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया था।
हालांकि, इन उपायों से मार्केट को भरोसा मिला और रुपया मजबूत होकर 94.50 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि नीति-निर्माता राजकोषीय अनुशासन और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के जरिए मजबूत व्यापक आर्थिक आधार बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि हाल ही में मुद्रा में आई ज्यादातर कमजोरी ऐसे कारणों से है जो भारत के नियंत्रण से बाहर हैं।
उन्होंने कहा, “पिछले डेढ़ साल में रुपए की कीमत में काफी गिरावट आई है और इसे रोकने के लिए उपाय किए गए हैं।”
उनके अनुसार, “लेकिन इसके पीछे कई कारण हैं और मेरा मानना है कि उनमें से ज्यादातर देश के बाहर की चुनौतियों से जुड़े हैं।”
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 77 पैसे मजबूत होकर 95.05 पर पहुंच गया।
भारत की आर्थिक मजबूती पर भरोसा जताते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बैंक सतर्क रहेगा और अगर जरूरत पड़ी तो मुद्रा बाजार में अस्थिरता को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाएगा।
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