अपराध
ईडी ने पीएमएलए मामले में 78.38 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत जालना सहकारी सखर कारखाना लिमिटेड की 78.38 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा, “ईडी ने महाराष्ट्र के सावरगांव हडप, तालुका और जिला जालना में जालना सहकारी सखार कारखाना लिमिटेड की साइट, भवन संरचनाओं और 200 एकड़ से अधिक भूमि पर अवशिष्ट संयंत्र और मशीनरी को अस्थायी रूप से संलग्न किया है।”
वर्तमान में संपत्ति अर्जुन शुगर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं।
आर्थिक अपराध शाखा, मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर वित्तीय जांच एजेंसी ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की थी।
उक्त प्राथमिकी बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसरण में दर्ज की गई थी।
उक्त प्राथमिकी में यह आरोप लगाया गया है कि सहकारी एसएसके को एमएससीबी के तत्कालीन अधिकारियों और निदेशकों द्वारा उनके रिश्तेदारों या निजी व्यक्तियों को सरफेसी अधिनियम के तहत निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना धोखाधड़ी से बेच दिया गया था।
जालना एसएसके लिमिटेड की स्थापना 1984-85 में लगभग 235 एकड़ भूमि पर की गई थी, जिसमें 100 एकड़ भूमि महाराष्ट्र सरकार से बिना किसी मौद्रिक प्रतिफल के प्राप्त हुई थी।
अधिकारी ने कहा, “जालना एसएसके एमएससीबी से प्राप्त ऋण को चुकाने में विफल रहा और मार्च 2002 में एनपीए के रूप में घोषित किया गया था। सितंबर, 2008 तक जालना एसएसके पर एमएससीबी का 33.49 करोड़ रुपये का ऋण बकाया था। अपनी बकाया राशि की वसूली के लिए, एमएससीबी ने फरवरी 2009 में सरफेसी अधिनियम के तहत एसएसके अपने कब्जे में ले लिया।”
इसके बाद, एमएससीबी ने फरवरी 2012 में 42.18 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य के साथ जालना एसएसके की नीलामी की।
केवल दो पक्ष – तपड़िया कंस्ट्रक्शन प्रा लिमिटेड, औरंगाबाद और अजीत सीड्स प्रा लिमिटेड, औरंगाबाद – ने उक्त नीलामी में भाग लिया।
तापड़िया कंस्ट्रक्शन्स ने सबसे ज्यादा बोली लगाई। ईडी की जांच से पता चला है कि बोली दस्तावेजों के खरीदार और नीलामी में अंतिम प्रतिभागी एक दूसरे से जुड़े हुए थे और तपड़िया कंस्ट्रक्शन और अजीत सीड्स जालना में एक ही इमारत से काम कर रहे थे।
एमएससीबी द्वारा बिक्री राशि की अंतिम किस्त की प्राप्ति के बाद, दिसंबर 2012 में तपड़िया कंस्ट्रक्शन को बिक्री प्रमाण पत्र जारी किया गया था।
हालांकि, तपड़िया कंस्ट्रक्शन ने एसएसके का संचालन नहीं किया और 15 महीने के अंतराल के बाद, एसएसके को जालना में स्थित 235 एकड़ जमीन के साथ अर्जुन शुगर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया गया।
पीएमएलए के तहत जांच से यह भी पता चला कि अर्जुन खोटकर 1998-2004 की अवधि के दौरान महाराष्ट्र स्टेट को-ऑप बैंक लिमिटेड के निदेशक मंडल में थे।
ईडी की जांच में यह भी पता चला कि जालना एसएसके को मूल्य को छुपाकर 42.31 करोड़ रुपये में बेचा गया था, जबकि ईडी द्वारा नियुक्त स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता द्वारा किए गए संपत्ति के मूल्यांकन से पता चला कि जालना एसएसके का मूल्य सामग्री पर लगभग 78 करोड़ रुपये था।
अपराध
एआई डीपफेक और अश्लील तस्वीरों से परेशान रूपाली गांगुली पहुंचीं बॉम्बे हाईकोर्ट, 4 नवंबर को होगी सुनवाई

टीवी की मशहूर अभिनेत्री रूपाली गांगुली ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कई ऑनलाइन पोर्टल उनकी तस्वीरों और अन्य कंटेंट का इस्तेमाल बिना अनुमति कर रहे हैं। इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से उनकी नकली तस्वीरें बनाई जा रही हैं और कुछ वीडियो के साथ भी छेड़छाड़ की गई है।
रूपाली का कहना है कि इस तरह तैयार किए गए कंटेंट को कुछ ऐसी वेबसाइटों पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री दिखाई जाती है।
अभिनेत्री ने अपनी याचिका में इसे अपने पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन बताया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की पहचान, तस्वीर, आवाज और छवि का इस्तेमाल उसकी सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत से इस मामले में दखल देने की मांग की है।
इस याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में 4 नवंबर को सुनवाई होगी। इस मामले को जस्टिस माधव जामदार की बेंच सुनेगी।
रूपाली से पहले कई दूसरी अभिनेत्रियां भी अपनी तस्वीरों और पहचान के गलत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत पहुंच चुकी हैं। हाल ही में अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि कई वेबसाइट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी तस्वीरों, आवाज और पहचान का इस्तेमाल करके एआई से नकली वीडियो, मॉर्फ की गई तस्वीरें और अश्लील कंटेंट तैयार कर रहे हैं।
इस मामले में कोर्ट ने सामंथा को अंतरिम राहत दी थी। अदालत ने गूगल, मेटा और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाले चिह्नित कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया था।
इससे पहले जुलाई में अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी एआई से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो और मॉर्फ तस्वीरों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश दिए थे।
अपराध
कर्नाटक: नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और कंपनी के पांच ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ईडी की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और कंपनी के पांच ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया है।
ईडी की ओर से यह कार्रवाई 18 अगस्त से चल रही मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई। यह केस तवरेकेरे पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।
यह एफआईआर ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी और पुलिस वालों की ओर से 18 अगस्त को सीके तांड्या गांव में एक रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर की गई जॉइंट सर्च और रेड से जुड़ी है, जहां आरोपी बिना वैलिड लाइसेंस, परमिट या ऑथराइजेशन के दवाएं और फार्मास्युटिकल ड्रग्स स्टोर करते हुए और स्टोर की गई दवाओं पर लेबल बदलते हुए पाए गए।
ईडी ने केस दर्ज किया और पीएमएलए, 2002 के तहत जांच शुरू की। जांच से पता चला है कि आर. प्रशांत ने कथित तौर पर बिना ड्रग लाइसेंस या परमिट के दवाओं को बनाने, री-पैकेजिंग और री-लेबलिंग के लिए बिदादी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था। अलग-अलग राज्यों के मैन्युफैक्चरिंग सेंटरों से मंगाए गए सस्ते बल्क फॉर्मूलेशन को कथित तौर पर नई शीशियों में रीपैकेज किया गया और धोखे से महंगे फाइजर एंटीबायोटिक्स, जैसे कि जेविसेफ्टा, एम्ब्लेवो वगैरह के तौर पर रीलेबल किया गया।
शीशियों में जेनेरिक दवाएं थीं, लेकिन उन पर फाइजर-ब्रांडेड लेबल थे। ये दवाएं कथित तौर पर मेसर्स डीएम फार्मास्यूटिकल्स के जरिए बांटी गईं और मेसर्स कृपा हेल्थकेयर को सप्लाई की गईं। इसके बाद मेसर्स कृपा हेल्थकेयर ने पता लगने से बचने के लिए असली दवाओं के साथ दूसरी फार्मास्यूटिकल कंपनियों और अस्पतालों को भी सप्लाई कीं।
छापेमारी के दौरान, वीरेश कुमार के बैंक अकाउंट में लगभग 9 लाख रुपए थे। उस अकाउंट को फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा, सर्च एक्शन के दौरान अलग-अलग लोगों के डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड और गलत जानकारी देने वाले डॉक्यूमेंट्स जब्त किए गए। इस मामले में आगे की जांच की जा रही है।
अपराध
बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, करीब 54 करोड़ रुपए की संपत्ति की जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2,200 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड (पीएएल) से जुड़ी 53.95 करोड़ रुपए मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।
ईडी के मुंबई जोन-1 कार्यालय के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। एजेंसी ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 546 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।
यह जांच सीबीआई, ईओडब्ल्यू मुंबई और ईओबी मुंबई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। मामले में पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
ईडी की जांच में सामने आया कि कंपनी ने कथित तौर पर स्टॉक और देनदारियों से संबंधित बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के आधार पर बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) से ऋण प्राप्त किया। बाद में कंपनी के ऋण खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिए गए, जिनकी कुल राशि 2,296 करोड़ रुपए से अधिक थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित धोखाधड़ी में जेके शाह ग्रुप ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विभिन्न संस्थाओं तथा व्यक्तियों के जरिए 110.54 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित आय को इधर-उधर करने में मदद की।
ईडी ने दावा किया कि इस धनराशि का एक लाभार्थी 70.25 करोड़ रुपए का फायदा उठाने में सफल रहा, जो कुल 2,296.58 करोड़ रुपए की कथित अपराध आय का हिस्सा था।
एजेंसी ने बताया कि इससे पहले भी इस मामले में 493 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। साथ ही ईडी विशेष पीएमएलए अदालत, मुंबई में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) भी दाखिल कर चुकी है, जिस पर अदालत ने संज्ञान ले लिया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इंडियन ओवरसीज बैंक के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के कंसोर्टियम को इस कथित साजिश के कारण भारी वित्तीय नुकसान हुआ। ईडी अब छापों के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि इस बैंक धोखाधड़ी में शामिल अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान की जा सके।
एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच जारी है और धन के प्रवाह तथा अन्य संभावित लाभार्थियों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
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