अंतरराष्ट्रीय
वनडे विश्व कप से पहले टी20 पर ध्यान देने की जरूरत : मोर्गन
इंग्लैंड के टी20 और वनडे के कप्तान इयोन मोर्गन ने कहा है कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि अगले साल भारत में होने वाले 50 ओवर के विश्व कप में खिताब का बचाव करेंगे, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि वह टीम के लिए योगदान देना चाहते हैं। 35 वर्षीय मोर्गन उस टीम के कप्तान थे, जिसने 2019 में लॉर्डस में एक टाई में मैच समाप्त होने के बाद न्यूजीलैंड को हराकर रोमांचक विश्व कप फाइनल जीता था।
इंग्लैंड ने अगले हफ्ते नीदरलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के साथ मेगा-इवेंट की तैयारी शुरू करेंगे और उन्होंने कहा कि वह भविष्य में देश की हित में काम करना चाहते हैं।
डेलीमेल डॉट को डॉट यूके ने मोर्गन के हवाले से कहा, “यह (वनडे विश्व कप) बहुत दूर है। मुझे पहले टी20 विश्व कप (इस साल ऑस्ट्रेलिया में) पर ध्यान देने की जरूरत है।”
उन्होंने कहा, “मैं पूरी ईमानदारी से कप्तानी शुरू करने के बाद से सभी के साथ दिया है। फिलहाल, मुझे अभी भी लगता है कि मैं विश्व कप जीत में योगदान दे सकता हूं। यह मेरे लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है।”
मोर्गन का मुख्य ध्यान अब सफेद गेंद के नए कोच, ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू मॉट की सहायता करना है, ताकि इस साल अक्टूबर-नवंबर में ऑस्ट्रेलिया में टी20 विश्व कप जीतने में सक्षम टीम को एक साथ लाया जा सके और फिर अगले साल 50 ओवर के विश्व कप पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
इंग्लैंड ने सीमित ओवरों के खेल के कुछ दिग्गजों जैसे जेसन रॉय, जोस बटलर, मोईन अली और आदिल राशिद को डच श्रृंखला के लिए शामिल किया है और मॉर्गन ने कहा कि यह नए कोच आगे बढ़ना चाहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान और मध्य पूर्व पर अमेरिका की कूटनीति तेज, भारत, कनाडा और केन्या से बातचीत की

वाशिंगटन, 24 मार्च : अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत, कनाडा और केन्या के अपने समकक्ष नेताओं से बातचीत की। इन बातचीतों में ईरान, मध्य पूर्व की स्थिति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। यह जानकारी उनके प्रवक्ता ने दी।
रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद और केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो से बात की। इस दौरान अमेरिका ईरान और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अपने सहयोगी देशों से लगातार संपर्क बढ़ा रहा है।
भारत के साथ हुई बातचीत में मध्य पूर्व की बदलती स्थिति पर चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश विभाग के उप-प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों पर विचार किया और आपसी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम जारी रखने पर सहमति जताई।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है। भारत और अमेरिका दोनों ने साझा रणनीतिक हितों पर मिलकर काम करने के संकेत दिए हैं।
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ बातचीत में खास तौर पर ईरान और उसके परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की कार्रवाई पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर बात की।
इस बातचीत में हैती का मुद्दा भी उठा। रुबियो ने बताया कि अमेरिका वहां शांति और स्थिरता बहाल करने के प्रयास कर रहा है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी से गठित ‘गैंग सप्रेशन फ़ोर्स’ को समर्थन भी शामिल है।
केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो के साथ अलग से हुई बातचीत में रुबियो ने ईरान के मुद्दे पर केन्या के रुख और क्षेत्रीय सुरक्षा में उसकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने खाड़ी देशों के खिलाफ ईरान की आक्रामकता की निंदा करने के लिए रुटो को धन्यवाद दिया और “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के उद्देश्यों पर भी चर्चा की।
रुबियो ने हैती में शांति बनाए रखने में केन्या के योगदान की भी सराहना की और ‘गैंग सप्रेशन फ़ोर्स’ के लिए उसके सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। दोनों नेताओं के बीच आर्थिक संबंधों पर भी बात हुई।
इन सभी बातचीतों से यह साफ है कि अमेरिका ईरान और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपने प्रमुख साझेदार देशों के साथ तालमेल मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत, कनाडा और केन्या क्रमशः एशिया, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका में अमेरिका के अहम सहयोगी देश हैं, जो कूटनीति, सुरक्षा सहयोग और शांति स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान युद्ध पर घिरे ट्रंप, यूएस डेमोक्रेट्स ने उठाए सवाल

वाशिंगटन, 24 मार्च : अमेरिका में ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। शीर्ष डेमोक्रेट नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाते हुए युद्ध की बढ़ती लागत, स्पष्ट रणनीति की कमी और संघर्ष के लंबे खिंचने के खतरे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि इस युद्ध का कोई स्पष्ट लक्ष्य या रणनीति नहीं है। उन्होंने सीनेट में कहा, “ट्रंप का ईरान के साथ युद्ध चौथे हफ्ते में है और इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा।” चक शूमर ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति आगे की योजना को लेकर साफ जवाब देने में विफल रहे हैं।
चक शूमर ने व्हाइट हाउस के बयानों को भी विरोधाभासी बताया। उन्होंने कहा, “यह क्या हो रहा है? यह कमांडर-इन-चीफ की लीडरशिप नहीं है। या तो वह भ्रमित हैं, या सच नहीं बोल रहे, या दोनों एक साथ हैं।”
उन्होंने इस युद्ध को अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल कीमतों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक महीने पहले गैस की औसत कीमत करीब 2.93 डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब बढ़कर 3.94 डॉलर हो गई है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद देखी गई सबसे बड़ी मासिक उछालों में से एक है।
चक शूमर ने सीनेट में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए रिपब्लिकन नेताओं से हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमें जवाबदेही चाहिए, पारदर्शिता चाहिए, और सबसे जरूरी एक स्पष्ट रणनीति और अंत का रास्ता भी चाहिए।”
इसी तरह, सीनेटर ग्रेग लैंड्समैन ने कहा, “अब समय आ गया है कि ईरान में अभियान समाप्त किया जाए। न इसका विस्तार हो और न ही जमीनी सैनिक भेजे जाएं।”
ग्रेग लैंड्समैन के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च क्षमता को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया है और हथियारों के ढांचे को निशाना बनाने का उद्देश्य पूरा हो चुका है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अब और गहराई से शामिल होना अमेरिका को बिना रणनीति वाले लंबे युद्ध में फंसा सकता है।
सीनेटर पीटर वेल्च ने भी सरकार के रुख की आलोचना की और युद्ध के लिए मांगे गए 200 अरब डॉलर के फंड का विरोध किया। उन्होंने कहा, “हमारा देश इस पीढ़ी के सबसे बड़े युद्ध में गहराई तक उतर चुका है, लेकिन अब तक सीनेट में एक भी सुनवाई नहीं हुई है।”
पीटर वेल्च ने इसके आर्थिक असर पर भी चिंता जताते हुए कहा कि पूरे देश में पेट्रोल की कीमतें कम से कम 1 डॉलर बढ़ गई हैं, जिससे एक आम अमेरिकी परिवार को सालाना करीब 2,000 डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उर्वरक और हीटिंग ऑयल की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त 1,000 डॉलर का बोझ पड़ सकता है।
वहीं, सीनेटर सारा जैकब्स ने इस पूरे मामले को अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी गलती बताया। उन्होंने कहा, “यह शायद अमेरिकी विदेश नीति की सबसे बड़ी चूकों में से एक है।” सारा जैकब्स ने यह भी कहा कि सरकार के पास आगे की कोई स्पष्ट योजना नहीं है और आम लोगों को यह तक नहीं बताया जा रहा कि यह युद्ध है क्या, इसका लक्ष्य क्या है और इसकी लागत कितनी होगी।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान से तनातनी के बीच ट्रंप ने पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर से फोन पर की बात

वॉशिंगटन, 24 मार्च : ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध से उपजी चिंताओं के बीच पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश करता नजर आ रहा है। वह अमेरिका के संदेशों को ईरान पहुंचा रहा है और ईरान के जवाबों से अवगत करा रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर से फोन पर बात की।
व्हाइट हाउस के मुताबिक चर्चा का मुख्य विषय ईरान युद्ध था। हालांकि इस बातचीत को संवेदनशील बताते हुए अधिकारियों ने और ज्यादा बताने से इनकार कर दिया।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लिविट ने पहले कहा था कि ये संवेदनशील कूटनीतिक चर्चा है और अमेरिका मीडिया के जरिए कोई वार्ता नहीं करेगा।
सूत्रों के अनुसार, मुनीर ने ट्रंप से बातचीत की और पाकिस्तान ने खुद को अमेरिकी और ईरानी वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वार्ता की संभावित जगह के रूप में पेश किया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की। एक्स पोस्ट के जरिए उन्होंने ईद-उल-फितर और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और ईरान के लोगों के साथ अपनी सहानुभूति जताई।
शरीफ ने कहा कि दोनों पक्षों ने खाड़ी क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा की और तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति की जरूरत पर सहमति जताई। उन्होंने इस्लामी दुनिया में एकता और क्षेत्र में शांति स्थापित करने में पाकिस्तान की भूमिका पर भी जोर दिया।
इस बीच सोमवार को ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ बेहतर और सार्थक बातचीत के बाद उन्होंने हमले को पांच दिनों तक टालने की घोषणा की थी, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता का ट्रंप के फैसले से सीधा संबंध है या नहीं। ईरान ने सीधे अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ मित्र देशों के माध्यम से संदेश मिले हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह कूटनीतिक प्रयास अभी शुरुआती चरण में है और इसे पूरी तरह से संरचित वार्ता नहीं माना जा सकता।
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