राष्ट्रीय
हनुमानगढ़ में चारे की भारी कमी से दुधारू पशुओं को बेचने पर बाध्य हुए किसान
नुमानगढ़ (राजस्थान), 2 जून (आईएएनएस/101 रिपोर्टर्स)। राजस्थान के हनुमानगढ़ में पशुओं के चारे की कीमत इतनी अधिक हो गई है कि किसानों को अपने दुधारू पशुओं को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पहले किसान बिना दूध देने वाले या कम दूध देने वाले मवेशियों को आराम से पाल लेते थे लेकिन अब उन्होंने महंगे चारे की वजह से खुले में छोड़ दिया गया है।
हनुमानगढ़ में हमेशा से गेहूं की बंपर पैदावार होती थी और गेहूं को निकालकर बचे उसके पौधे (टुडी) को चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। गत साल सरसों की खेती में अधिक लाभ को देखते हुए किसानों ने इस बार गेहूं की जगह सरसों की फसल को तरजीह दी और इसकी वजह से टुडी के दाम आसमान छूने लगे।
गत साल 2,70,000 हेक्टेयर जमीन में गेहूं की बुवाई हुई थी लेकिन इस साल 1,90,000 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है। दूसरी तरफ सरसों की बुवाई गत साल 1,35,000 हेक्टेयर में हुई थी लेकिन इस साल 2,25,000 हेक्टेयर में सरसों की बुवाई की गई।
लाम्बी धाव गांव के एक किसान रघुवीर सिंह ने बताया कि किसान गेहूं की जगह सरसों की अधिक बुवाई की क्योंकि सरसों की खेती करना गेहूं की खेती से अधिक सस्ता है और इसके दाम भी अधिक मिलते हैं। गेहूं की खेती में उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई का बहुत खर्चा आता है जबकि सरसों की खेती पर खर्च बहुत कम है। गेहूं की सिंचाई के लिए इस साल नहरों में पर्याप्त पानी की भी कमी रही। सरसों खुले बाजार में 7,250 रुपये से 7,300 रुपये प्रति क्विं टल के बीच बिका।
चारे की किल्लत की दूसरी वजह मार्च में पूरे देश में बेतहाशा गर्मी है। राजस्थान में गर्मी का पारा और अधिक चढ़ा रहा और लू के थपेड़ों से पूरा राज्य त्रस्त रहा। यहां तापमान 40 डिग्री के पार ही बना रहा। बेतहाशा गर्मी की वजह से फसलों को काफी नुकसान हुआ और दाने बहुत छोटे और हल्के रहे।
लू की वजह से एक बीघे में औसतन 6 से 9 क्विं टल गेहूं की उपज हुई जबकि पहले औसतन प्रति बीघे 12 से 16 क्विं टल गेहूं की उपज होती थी। उपज कम होने के कारण टुडी की किल्लत भी पैदा हो गई।
गेहूं पर सरकार का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति क्विं टल 2,015 रुपये है लेकिन स्थानीय मंडियों में किसानों को प्रति क्विं टल 2,100 से 2,350 रुपये मिल जाते हैं। गेहूं के भाव बढ़ने की वजह से भी टुडी महंगी बिक रही है।
सांगरिया के एक मवेशी पालक भोला सिंह ने 101 रिपोर्टर्स को बताया कि गत साल उन्होंने 200 रुपये प्रति क्विं टल टुडी खरीदी थी। इस साल टुडी ही नहीं, बल्कि हारा चारा और पशु आहार भी बहुत महंगे हैं।
उन्होंने कहा कि एक व्यस्क पशु के लिए हर दिन 10 किलोग्राम चारे की जरूरत होती है और इसमें 100 रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा पशुओं को हरा चारा और पशु आहार देना होता है और उसका खर्च अलग है। ऐसे में पशुपालन हानि का कारोबार हो रहा है।
भोला सिंह ने अपनी आपबीती बताई। उन्होंने कहा कि उनके पास 18 गायें और भैंसे हैं। इनमें से 11 दुधारू हैं। भैंसों से 35 लीटर दूध मिलता है और गायें 15 लीटर दूध देती हैं। इनसे हर दिन तीन हजार रुपये मिलते हैं और पशुओं के चारे, पशु आहार और भूसी खिलाने में हर दिन 3,600 रुपये खर्च होते हैं।
पशुपालक और डेयरी मालिकों का कहना है कि महंगे चारे के कारण उन्होंने भैंस के दूध के दाम 60 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये प्रति लीटर और गाय के दूध के दाम 40 रुपये से बढ़ाकर 45 रुपये प्रति लीटर कर दिये हैं।
उनका कहना है कि दूध के दाम बढ़ाने के बावजूद टुडी का जुगाड़ मुश्किल है। पंजाब से टुडी मंगाने में 800 रुपये प्रति क्विं टल के हिसाब से पैसे देने होते हैं और उपर से मालढुलाई का खर्च। पंजाब में टुडी मंगाना बहुत महंगा पड़ता है।
किसानों का कहना है कि उपज में 40 से 50 फीसदी की कमी आई है, जिससे जिले के 220 गौशालाओं को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कई किसान पहले गौशालाओं को चारा दान में देते थे लेकिन चारे की भारी कीमत के कारण उन्होंने दान देना बंद कर दिया है।
श्री गौशाला सेवा समिति के अध्यक्ष इंद्र हिसारिया ने 101 रिपोर्टर्स को बताया कि उनके गौशाले को हर साल 2,300 पशुओं के लिए करीब 15,000 क्विं टल टुडी की जरूरत होती है। इस साल लेकिन वे 6,000 क्विं टल टुडी ही जमा कर पाये हैं और उन्हें और टुडी जमा होने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस साल गौशाले को इतने ही चारे से काम चलाना पड़ेगा।
हरियाणा सरकार ने सिरसा और हिसार जिले से पशु चारे को ले जाना प्रतिबंधित कर दिया है। इंद्र हिसारिया ने कहा कि इसकी वजह से नोहार और भद्रा की गौशालाओं को बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है।
हनुमानगढ़ में कुल 8,65,000 दुधारू पशु हैं, जिनके लिए प्रति वर्ष 13.13 लाख मीट्रिक टन पशु चारे की जरूरत होती है। हनुमानगढ़ में चारे की कमी की एक और वजह यह है कि यहां से बाडमेर, बिकानेर, डुंगरपुर, जैसलमेर, जालौर, पाली, सिरोही, नागौर और चुरु में चारे को भेजा जा रहा है। इन जगहों पर सूखे जैसी स्थिति है और इसी कारण चारे का संकट भी अधिक गहरा है।
हनुमानगढ़ के कारोबारी भारी मात्रा में चारा इन जगहों पर भेज दे रहे हैं, जिससे चारे का भंडार जिले में कम हो गया है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक दानाराम गोदारा ने बताया कि किसान अपनी जरूरत भर का चारा रखकर शेष चारा सूखाग्रस्त जिलों में बेचने के लिए भेज दे रहे हैं। इससे जिले में चारे का संकट पैदा हो गया है।
इस समस्या से निपटने की दिशा में, जिलाधिकारी नाथमल डिडैल ने हाल में एक कार्यशाला आयोजित की, जहां 129 किसानों ने डेयरी फार्म के लिए 168 बीघे जमीन में हरा चारा उगाने की प्रतिज्ञा ली। वन विभाग ने भी कोहला फार्म में 100 बीघे जमीन पर हारा चारा उगाने का फैसला लिया है।
इसके अलावा चारे की भंडारण क्षमता की सीमित कर दी गई है, ताकि कोई कारोबारी इसकी जमाखोरी न कर पाये। कोई भी कारोबारी 100 मीट्रिक टन से अधिक चारा जमा नहीं कर सकता है। जिले के सभी 220 गौशालाओं के लिए 34 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं।
राष्ट्रीय
मुंबई पुलिस ने अंधेरी ईस्ट से लापता महिला को सुरक्षित बरामद किया

police
मुंबई, 18 मार्च : मुंबई की अंधेरी पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने एक 52 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को सुरक्षित बरामद कर लिया और उसे उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया है। महिला की वापसी से परिवारवालों ने राहत की सांस ली है।
दरअसल, मुंबई पुलिस के कमिश्नर देवेन भारती के निर्देश पर लापता महिलाओं और बच्चों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अंधेरी पुलिस ने 15 दिन की कड़ी मेहनत के बाद 52 साल की रत्ना धर्मेंद्र यादव को खोज निकाला, जो कि पिछले कई दिनों से लापता थीं।
रत्ना अंधेरी ईस्ट के सैवादी इलाके से गायब हुई थीं। उनकी बेटी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और उसी के आधार पर लापता होने का मामला दर्ज किया गया। इसके बाद अंधेरी पुलिस ने उनकी खोजबीन के लिए एक स्पेशल अभियान चलाया।
पुलिस की टीम ने हर छोटे-बड़े रास्ते, कॉलोनी और आस-पड़ोस की जगहों पर छानबीन की। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के सहारे पता चला कि रत्ना अस्थायी तौर पर चेंबूर के एक होमलेस शेल्टर में रह रही थीं।
जांच के दौरान पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि रत्ना मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और बोल नहीं सकती थीं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित ढंग से ढूंढना और वहां से लाना आसान काम नहीं था। पुलिस ने बहुत धैर्य और समझदारी से काम लिया और आखिरकार उन्हें सुरक्षित उनके परिवार के पास पहुंचा दिया।
उनकी बेटी और परिवार ने मुंबई पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने जो मेहनत और लगन दिखाई, उससे उन्हें रत्ना की खोज में बहुत मदद मिली। इसके लिए उनका परिवार मुंबई पुलिस का आभारी है।
पुलिस का कहना है कि उनके द्वारा लापता महिलाओं और बच्चों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की टीमें जल्द से जल्द लापता लोगों की खोज में लग जाती हैं। इस क्रम में रत्ना को भी सुरक्षित बरामद कर उनके परिवार को सौंप दिया गया।
राष्ट्रीय
ईरान में युद्ध लंबा चला तो बढ़ सकती हैं वैश्विक चुनौतियां, फिलहाल भारत पर कोई असर नहीं: एन चंद्रशेखरन

जमशेदपुर, 3 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान में युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा की 187वीं जयंती के अवसर पर जमशेदपुर पहुंचे थे। इस दौरान टाटा स्टील परिसर में आयोजित मुख्य समारोह में उन्होंने संस्थापक को श्रद्धांजलि अर्पित की और शहरवासियों को संस्थापक दिवस की शुभकामनाएं दीं।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट क्षेत्र से टाटा समूह को लाइमस्टोन सहित अन्य कच्चे माल का आयात होता है। समूह का कारोबार वैश्विक स्तर पर फैला हुआ है, ऐसे में किसी भी लंबे युद्ध का प्रभाव सप्लाई चेन, माल की डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और सस्टेनेबिलिटी पर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस युद्ध का टाटा समूह या भारत पर कोई सीधा असर नहीं पड़ा है।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि टाटा समूह के कर्मचारी विश्व भर में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, होटल और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ऐसे में सभी कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा समूह की सर्वोच्च प्राथमिकता है और कंपनी इस दिशा में सतर्कता के साथ आवश्यक कदम उठा रही है।
रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नई इकाइयों की स्थापना और विस्तार योजनाओं के कारण रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले पांच-छह वर्षों में समूह के कर्मचारियों की संख्या लगभग 7 लाख तक थी, लेकिन अब बढ़कर 11 लाख तक पहुंच चुकी है। वहीं आने वाले 5-6 साल में इसे 15 लाख तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही महिला कर्मचारियों की भागीदारी 28-30 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
आईटी क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के आगमन से रोजगार को लेकर आशंकाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से स्टील, ऑटोमोबाइल, फाइनेंस और अन्य क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न होंगे। इसका सकारात्मक लाभ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को भी मिलेगा।
इस अवसर पर टाटा स्टील के सीईओ टी वी नरेन्द्रन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय
नए आधार वर्ष के साथ भारत की जीडीपी वृद्धि दर मजबूत बने रहने की उम्मीद

GDP
नई दिल्ली, 27 फरवरी : नई जीडीपी सीरीज (बेस ईयर 2022-23) शुक्रवार को जारी होने वाली है। इससे पहले सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा गठित एक उप-समिति ने जीडीपी अनुमानों के लिए नई सीरीज में जीएसटी डेटा के अधिक उपयोग की सिफारिश की है।
उप-समिति की यह रिपोर्ट राष्ट्रीय खातों के बेस ईयर को वित्त वर्ष 2022-23 में संशोधित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे एमओएसपीआई ने शुरू किया है।
2011-12 सीरीज में जीएसटी डेटा का उपयोग तिमाही राष्ट्रीय खातों और वार्षिक राष्ट्रीय खातों के कुछ क्षेत्रों में किया गया था।
भारत अब जीडीपी का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर रहा है। इसके साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का बेस भी 2024 में अपडेट किया जाएगा, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना को बेहतर तरीके से दिखाना है, जिसमें डिजिटल कारोबार और सेवा क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी शामिल है।
इस बदलाव में असंगठित क्षेत्र के बेहतर आकलन और जीएसटी जैसे नए डेटा स्रोतों का इस्तेमाल शामिल है। इसके अलावा ई-वाहन (वाहन पंजीकरण) और प्राकृतिक गैस की खपत से जुड़े आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा। नई पद्धति से भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें मुख्य योगदान घरेलू मांग का होगा।
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8 से 8.1 प्रतिशत के बीच रह सकती है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था ने मजबूत रफ्तार बनाए रखी है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 (चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही) के उच्च-आवृत्ति आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखाते हैं।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में प्रतिकूल बेस इफेक्ट के बावजूद जीडीपी वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत तक रह सकती है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम जीडीपी अनुमान, पिछले तीन वित्त वर्षों के जीडीपी आंकड़े और नए बेस 2022-23 के अनुसार त्रैमासिक जीडीपी आंकड़े शुक्रवार को जारी किए जाएंगे।
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