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Tuesday,03-November-2026
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स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय को बेहतर ढंग से चलाने में सक्षम बनाती है : टाटा 1एमजी

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महामारी के पिछले दो वर्षों में भारतीय ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा बाजार में तेजी से वृद्धि हुई है। 2020 में 460 अरब रुपये का आंका गया यह बाजार 2026 तक 3,228 अरब रुपये तक पहुंच सकता है। रिसर्च एंड मार्केट्स डॉट कॉम के अनुसार, 2021-2026 की अवधि के दौरान, घरेलू स्वास्थ्य सेवा समाधान (होम हेल्थकेयर सॉल्यूशंस) सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंस) के नियमों और सेल्फ-आइसोलेशन के मानदंडों के परिणामस्वरूप बाजार का सबसे तेजी से बढ़ने वाला खंड बनने की उम्मीद है, जो कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए लागू किया गया है।

बाजार को मोटे तौर पर घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं, उपकरणों (डिवाइस) और समाधानों में विभाजित किया गया है।

टाटा 1 एमजी में ई-फार्मेसी, ई-डायग्नोस्टिक्स और ई-कंसल्ट्स में इंजीनियरिंग मामलों के प्रमुख तुशीर अग्रवाल के अनुसार, सभी उपयोगकर्ता (यूजर) यात्रा को पूरा करने के लिए कई स्टेज और एक्टर्स को शामिल करते हैं, जिसके लिए विभिन्न प्रणालियों के बीच एक एकीकृत और सहयोगी ²ष्टिकोण की आवश्यकता होती है।

अग्रवाल ने आईएएनएस को बताया कि एक निर्बाध उपयोगकर्ता अनुभव (सीमलेस यूजर एक्सपीरियंस) के लिए, इसे विभिन्न परतों के माध्यम से सटीक और समयबद्ध तरीके से प्रवाहित होने वाली जानकारी की आवश्यकता होती है और अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) उन्हें अपने व्यवसाय को चलाने के कई पहलुओं में बढ़त हासिल करने के लिए सशक्त बना रही है।

पेश हैं उनके साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश:

प्रश्न: महामारी ने अधिकांश उद्यमों की डिजिटल ट्रांसफोर्मेशन यात्रा को तेज कर दिया है। क्या आप हमें अपने प्रमुख रणनीतिक स्तंभों (स्ट्रैटेजिक पिलर्स) के बारे में बता सकते हैं, जिन पर आप टाटा 1एमजी की डिजिटल रणनीति बनाना चाहते हैं?

उत्तर: हम स्वास्थ्य सेवा को समझने योग्य, वहनीय और सुलभ बनाने के लिए हमेशा पहले दिन से ही एक ‘डिजिटल फर्स्ट स्ट्रैटेजी’ रणनीति का पालन कर रहे हैं। स्थिरता, मापनीयता, अनुकूलन और प्रगति (स्टेबिलिटी, स्केलेबिलिटी, ऑप्टिमाइजेशन और प्रोग्रेशन) हमारी प्रौद्योगिकी के मुख्य स्तंभ रहे हैं।

उपयोगकर्ता यात्रा जो हम अपने प्लेटफॉर्म पर सुविधा प्रदान करते हैं, प्रकृति में संवेदनशील और महत्वपूर्ण हैं और उस यात्रा के प्रत्येक चरण का समर्थन करने वाले विभिन्न प्रतिभागियों के साथ कई चरण शामिल हैं।

इसलिए हर कदम पर ज्यादा से ज्यादा डिजिटल ऑटोमेशन का होना और भी जरूरी हो जाता है। अपने परिचालनों (ऑपरेशंस) को डिजिटाइज करने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, हम लगातार उन परिवर्तनों पर काम कर रहे हैं, जो हमारे यूजर्स को हमारे प्लेटफॉर्म पर संलग्न (जुड़ने) होने के दौरान सहज अनुभव प्राप्त करने में सक्षम बनाते हैं।

प्रश्न: जहां महामारी ने स्वास्थ्य-तकनीक पर हमारी निर्भरता बढ़ा दी है, वहीं लोग अपने स्वास्थ्य डेटा के बारे में भी अधिक जागरूक हैं। आप यूजर डेटा की सुरक्षा कैसे कर रहे हैं और आप नियामक परि²श्य (रेगुलेटरी लैंडस्केप) को कैसे विकसित होते हुए देखते हैं?

उत्तर: स्वास्थ्य सेवा में, हम न केवल व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी (पीआईआई) डेटा बल्कि संरक्षित स्वास्थ्य सूचना (पीएचआई) डेटा से भी निपटते हैं, जो यूजर डेटा की सुरक्षा के लिए दोहरी चुनौती लाता है। जब हम डेटा सुरक्षा के बारे में सोचते हैं, तो हम न केवल डेटा लीक की सुरक्षा के बारे में सोचते हैं, बल्कि यह भी सोचते हैं कि हम भविष्य में किसी भी समय किसी भी संदर्भ के लिए उपयोगकर्ता के लिए डेटा को कैसे संरक्षित करते हैं और यूजर्स को उस डेटा से समझने में आसान और सार्थक जानकारी प्रदान करते हैं।

डेटा को संरक्षित करने की आवश्यकता है, चाहे वह उपयोग में हो या न हो। यह सुनिश्चित करने के लिए हम एन्क्रिप्शन, एसएसएल हैंडशेकिंग, डेटा बैकअप और अभिलेखीय, एक्सेस प्रमाणीकरण, सुरक्षा समीक्षाओं के साथ एक कठोर और समग्र ²ष्टिकोण का पालन करते हैं।

प्रश्न: ऑनलाइन फार्मेसी और डायग्नोस्टिक्स दोनों के साथ एक एकीकृत स्वास्थ्य सेवा फर्म बनाते समय क्लाउड तकनीक ने आपको क्या बेहतर करने की अनुमति दी है?

उत्तर: ई-फार्मेसी, ई-डायग्नोस्टिक्स और ई-कंसल्ट्स – सभी में उपयोगकर्ता यात्रा को पूरा करने के लिए कई स्टेज और एक्टर्स को शामिल किया जाता है, जिसके लिए विभिन्न प्रणालियों के बीच एक एकीकृत और सहयोगी ²ष्टिकोण की आवश्यकता होती है। एक निर्बाध उपयोगकर्ता अनुभव के लिए, इसे विभिन्न परतों के माध्यम से सटीक और समयबद्ध तरीके से प्रवाहित होने वाली जानकारी की आवश्यकता होती है। क्लाउड पर हमें मिलने वाली आधारभूत संरचना और सेवाओं का समर्थन हमें इस यात्रा को सर्वोत्तम संभव तरीके से एक साथ जोड़ने की अनुमति देता है।

सुरक्षा के लिए फायरवॉल के साथ, कंप्यूटिंग शक्ति, विभिन्न भंडारण विकल्प और नेटवर्क उपलब्ध होने से हमें अपने सभी उपयोग के मामलों के लिए पर्याप्त समर्थन मिलता है। इसके शीर्ष पर हम किसी भी समय होरिजोंटल और वर्टिकल दोनों तरह से ऊपर और नीचे स्केल कर सकते हैं, जो उस व्यवसाय की गतिशीलता के लिए अच्छा है।

एडब्ल्यूएस पर होने से हमें अपने व्यवसाय को चलाने के कई पहलुओं में बढ़त हासिल करने का अधिकार मिलता है। समीक्षाओं और सुझावों के संदर्भ में हमें एडब्ल्यूएस टीम से प्राप्त तकनीकी विशेषज्ञता के साथ, हम अपनी बुनियादी लागत को और कम कर सकते हैं। हम अपने संसाधनों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने में भी सक्षम हैं क्योंकि हमें अपने सभी नियोजित बुनियादी संसाधनों का एक समेकित और समग्र ²ष्टिकोण मिलता है। कई उपलब्धता क्षेत्रों और उनके संसाधनों पर बढ़ती निर्भरता के साथ, हम अपने प्रौद्योगिकी मंच की समग्र उपलब्धता पर अधिक आश्वस्त हैं।

क्लाउड की एक अनूठी विशेषता के रूप में हमें इच्छानुसार नया इंफ्रा मिलता है, जो हमेशा नए लॉन्च के लिए बाजार में समय बचाने में मदद करता है, क्योंकि रिलीज सायकल में कोई इंफ्रा क्लिफ नहीं जोड़ा गया है। इसने हमें कुछ मामलों में अपने व्यापार संचालन और प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने में सक्षम बनाया है, जहां प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप ने कुछ मैनुअल काम और जानकारी की उपलब्धता के स्वचालन में सहायता की है।

राजनीति

असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”

मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”

उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।

आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।

इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।

सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।

यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।

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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

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सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।

सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।

सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।

सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।

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राजनीति

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।

उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।

बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।

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