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Wednesday,14-October-2026
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नारायण राणे और उनका बेटा ‘झूठे’ हैं, हमें आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रहे-दिशा सालियान के माता-पिता ने की राष्ट्रपति से शिकायत

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बॉलीवुड से जुड़ी पूर्व उद्यमी दिवंगत दिशा सालियान के वृद्ध माता-पिता ने एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटाकर शिकायत की है कि केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नारायण राणे और उनके विधायक पुत्र नितेश राणे ‘झूठे’ हैं और वे उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

सतीश सालियान और उनकी पत्नी वसंती सालियान ने अपने पत्र में राजनेता पिता-पुत्र पर निशाना साधा है और साथ ही उनकी मृत बेटी दिशा को लेकर कुछ टेलीविजन चैनलों और सोशल मीडिया पर ‘झूठी कहानी’ पेश करने करने की बात भी कही है। दिशा ने 8 जून, 2020 को एक इमारत से नीचे कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। वह अनजाने में नीचे गिरी या उन्होंने आत्महत्या की या फिर उनकी मौत के पीछे कोई और कारण है, इस बारे में अभी तक सही प्रकार से कुछ सामने नहीं आया है। इसी के कुछ समय बाद 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी अपने मुंबई के आवास में मृत पाए गए थे। इसके बाद कई तरह की बातें सामने आई थीं।

एक दशक पहले दिल्ली के निर्भया दुष्कर्म-सह-हत्या मामले के साथ समानताएं दिखाते हुए, दिशा के माता-पिता ने बताया कि अब तक, उस पीड़ित की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन यहां ‘राणे मेरी बेटी का नाम स्पष्ट रूप से ले रहे हैं’ और कहा कि उसका दुष्कर्म हुआ था।

उन्होंने पूछा कि क्या देश का कानून केंद्रीय मंत्री पर लागू नहीं होता है और कहा कि उनके खिलाफ (पुलिस की ओर से मामला) दर्ज करने के बाद भी, ‘झूठे’ राणे की जोड़ी ने परिवार का नाम खराब करना बंद नहीं किया है।

संपर्क करने पर, सालियान दंपति ने कहा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखे दो दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई है।

सालियन ने आईएएनएस को बताया, “हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस और बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से भी यही अपील की है कि कुछ राजनेताओं को हमारी बेटी का नाम एवं छवि खराब करने से रोकें।”

उन्होंने बताया कि कैसे जब भी केंद्रीय मंत्री ने उनकी बेटी का नाम लिया, तो यह राष्ट्रीय समाचार बन गया और आश्चर्य जताया कि पुलिस की ओर से ‘राणे जैसे अमीर और शक्तिशाली राजनेताओं’ के खिलाफ मामले को सही ढंग से नहीं निपटा जाता है।

दिशा सालियान के माता-पिता ने कहा, “हमारी बेटी की मौत के बाद हमारा जीवन अस्त-व्यस्त और दयनीय हो गया है और उसके बाद राणे और अन्य लोगों द्वारा फैलाया गया यह झूठ. अपराध दर्ज होने के बाद भी, केंद्रीय मंत्री राणे और उनके बेटे ने हमारा नाम खराब करना बंद नहीं किया है, ऐसा लगता है कि जब तक हम जीवित हैं, हमें न्याय नहीं मिलेगा, क्योंकि झूठ फैलाने का अधिकार हमारे जीवन के मौलिक अधिकार और निजता के अधिकार, गरिमा के साथ जीने से ज्यादा जरूरी है।”

दिशा के माता पिता वसंती सालियान और सतीश सालियान ने राष्ट्रपति से अनुरोध करते हुए कहा, “हम आपसे अनुरोध करते हैं कि संबंधित अधिकारियों को उचित कदम उठाने के निर्देश जारी करें, ताकि न्याय हो सके अन्यथा हमारे पास अपना जीवन समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

ऐसे मामलों में आरोपी शक्तिशाली राजनेताओं का पक्ष लेने के बजाय ऐसे मुद्दों पर न्यायपालिका को संवेदनशील बनाने का आग्रह करते हुए, उन्होंने राणे के जमानत आदेश में सत्र न्यायालय के न्यायाधीश के अवलोकन का भी उल्लेख किया।

उन्होंने याद किया कि कैसे जांचकर्ताओं द्वारा चार घंटे की पूछताछ के बाद, राणे बाहर आए और दावा किया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को फोन किया जिसके बाद उन्हें मालवानी पुलिस स्टेशन से बाहर निकलने की अनुमति दी गई।

उन्होंने आगे कहा, “अगर यह सच है, तो न्याय पाने के लिए हम किस पर भरोसा कर सकते हैं.. जब ऐसे बेईमान तत्वों द्वारा हमारी गरिमा पर हमला किया जाता है।”

अग्रिम जमानत हासिल करने के बाद, नितेश राणे ने इसे ऐतिहासिक जीत करार दिया और दिशा सलियन को न्याय दिलाने का वादा किया।

दिशा के माता-पिता ने कहा, “हमारी बेटी को न्याय दिलाने वाले वे कौन होते हैं? इस तरह के बयान और आरोप हमें निराश कर रहे हैं।”

राणे के इस दावे को चुनौती देते हुए कि उन्हें (मुंबई) पुलिस पर भरोसा नहीं है और वे सीबीआई को सबूत सौंपेंगे, उन्होंने कहा कि अदालती कार्यवाही को ध्यान से सुनने के बाद, वे आश्वस्त हैं कि राणे पिता-पुत्र ‘झूठे’ हैं।

उन्होंने आगे कहा, “उनके पास कोई सबूत नहीं है.. तथ्य हमारी निजी जानकारी में हैं.. और हम अच्छी तरह जानते हैं कि वे दोनों कोई सबूत नहीं दे सकते, क्योंकि वे झूठे हैं.. वे सीबीआई को सबूत देने के झूठे बहाने बना रहे हैं।”

सालियान दंपति ने राष्ट्रपति और अन्य लोगों से संबंधित अधिकारियों को उचित कदम उठाने का निर्देश देने का आग्रह किया, ताकि न्याय किया जा सके।

दिशा के माता-पिता ने अपनी बातों का निष्कर्ष निकालते हुए कहा, “अन्यथा, हमारे पास अपने जीवन को समाप्त करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

महाराष्ट्र

राहुल गांधी का खुद को भगवान शिव से जोड़ना बदतमीजी है : एकनाथ शिंदे

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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने इंडिया ब्लॉक के आंदोलन की तुलना शिव तांडव और शिव बारात से करने पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब शिव का तीसरी आंख खुलेगी तो इंडिया ब्लॉक और सभी देशद्रोही भस्म हो जाएंगे।

आईएएनएस से बातचीत में एकनाथ शिंदे ने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, लेकिन अब वे खुद को भगवान शिव के रूप में पेश करने और अपनी तुलना महादेव से करने लगे हैं। यह बच्चों जैसी जिद और बदतमीजी भरा व्यवहार है। यह कोई दिव्य तांडव नहीं, बल्कि सिर्फ बदतमीजी है। मेरा कहना है कि जो लोग खुद की तुलना भगवान शंकर से करते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि जब भगवान शिव अपनी तीसरी आंख खोलेंगे, तो इंडी गठबंधन और देश के खिलाफ काम करने वाले लोग डलकर राख हो जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट तक इंडिया ब्लॉक के मार्च को लेकर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम ने कहा कि सोमवार का दिन देश के इतिहास में एक काले दिन के तौर पर याद किया जाएगा, क्योंकि लोकतंत्र और भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था का अपमान किया गया। भारत के इतिहास में सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कभी कोई विरोध मार्च नहीं निकाला गया। यह देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था पर हमला है। वे देश में अशांति और अराजकता फैलाना चाहते हैं। यह एक बड़ी और सुनियोजित साजिश है।

उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय साजिश है। उनके साथ विरोध करना देशद्रोह है। विपक्ष के नेता कठपुतली की तरह काम करते हैं। यह शर्मनाक है कि वे देश की प्रगति में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।”

एकनाथ शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ की और कहा कि देश 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी देश को नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं। वह देश को 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर ले जा रहे हैं। ऐसे समय में जब कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं चरमरा गई हैं, वह भारत को ‘फ्रैजाइल फाइव’ से निकालकर शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर रहे हैं। 140 करोड़ भारतीय प्रधानमंत्री के साथ खड़े हैं।

उन्होंने विपक्ष के नेताओं पर बार-बार चुनाव हारने के बावजूद सत्ता में लौटने के लिए बेताब होने का आरोप भी लगाया।

शिंदे ने कहा कि पानी के बिन जैसे मछली तड़पती है, वैसे सत्ता के बिना इंडिया ब्लॉक तड़प रहा है। यह सिर्फ देश को बदनाम करके कैसे भी सत्ता हासिल करना चाहते हैं। जनता ने तीन बार नकार दिया, हार की हैट्रिक हो गई है। फिर भी अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं।

इसी बीच एकनाथ शिंदे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार से जुड़ी कथित घटना को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की आलोचना की।

एक महिला पत्रकार ने दावा किया था कि वह तीन महीने की गर्भवती है और आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान गांधी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे आगे खींचा, जिसके बाद उनके सुरक्षाकर्मियों ने उसे दूर धकेल दिया।

गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए शिंदे ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता का इस तरह का व्यवहार अनुचित है और उन पर पब्लिसिटी पाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने नागरिकों से इस बात पर विचार करने का आग्रह किया कि क्या विपक्ष के नेता देश को एकजुट करने के लिए काम कर रहे हैं या बांटने के लिए। यह देश जोड़ने वाले नहीं, तोड़ने वाले हैं। जिस तरह इंडिया ब्लॉक देश की प्रगति को रोकने की कोशिश कर रहा है, हमें उन्हें विफल करना होगा।

देश के खिलाफ काम करने के आरोपी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपनी मांग को दोहराते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि सिर्फ एफआईआर ही नहीं, अगर वे देश के खिलाफ बोल रहे हैं या देशद्रोह जैसी गतिविधियों में शामिल हैं, तो उन्हें जेल में डाल दिया जाना चाहिए।

आपातकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब लोग सुप्रीम कोर्ट जाने, विरोध प्रदर्शन आयोजित करने और अपनी राय व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं, जबकि उस समय मीडिया पर प्रतिबंध लगाए गए थे।

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महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियों की समय सीमा बढ़ी, अब 26 अक्टूबर तक कर सकते हैं आवेदन : सीएम फडणवीस

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर जानकारी दी है कि मतदाता सूची के मसौदे पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। चुनाव आयोग ने यह समय सीमा 26 अक्टूबर तक बढ़ा दी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत मसौदा मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियां दर्ज करने की अवधि बढ़ाई गई है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को सटीक और अपडेट रखने के लिए की जा रही है।

सीएम फडणवीस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार नए शेड्यूल में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि 31 अगस्त से 26 अक्टूबर तक है। दावे और आपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया 31 अगस्त से 10 नवंबर तक है। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 16 नवंबर को किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे मसौदा मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जांच लें। अगर किसी का नाम छूट गया है तो उसे जोड़ने के लिए आवेदन करें, अगर जानकारी में कोई गलती है तो सुधार के लिए आवेदन करें और जरूरत होने पर 26 अक्टूबर से पहले आपत्ति दर्ज कराएं।

उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया हर पात्र नागरिक के वोट देने के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए की जा रही है, इसलिए पात्र नागरिकों को इस बढ़ाई गई समय सीमा का लाभ उठाना चाहिए। बता दें कि इसी बीच दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन जारी है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस प्रदर्शन को ‘संविधान बचाने की लड़ाई’ बताया है और चुनाव आयोग पर सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया में जुटा है।

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महाराष्ट्र

एमपीएससी में गड़बड़ियों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बनाई समिति, तुकाराम मुंडे को मिली सचिव की जिम्मेदारी

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महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) में गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर जारी उम्मीदवारों के आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आयोग से जुड़े मामलों की जांच और सुधार के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे को समिति का सचिव नियुक्त किया गया है।

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार का यह फैसला रविवार को सामने आया। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने पुणे में एसएम जोशी पुल पर आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों से मुलाकात के दौरान समिति के गठन की जानकारी दी। यहां उम्मीदवार पिछले 10 दिनों से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग में सुधार समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। तुकाराम मुंडे के अलावा इसमें लक्ष्मी गौतम, गणेश पाटील और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक को शामिल किया गया है। समिति से महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर विचार करने की अपेक्षा है।

सरकार के इस फैसले को आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों की मांगों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग पर सरकार ने क्या निर्णय लिया है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हुआ है।

आंदोलनकारी उम्मीदवारों की मांगों में केवल महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार ही शामिल नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन में शामिल कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती करने और जनवरी में प्रस्तावित ग्रुप-सी परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी उठाई है।

इसके अलावा, उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग उम्मीदवारों के आंदोलन का समर्थन कर रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पाटील ने समिति में तुकाराम मुंडे को शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा। सरकार की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की भी खबर है।

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