अंतरराष्ट्रीय
अंडर-19 सीडब्ल्यूसी : कप्तान ढुल ने कहा, डॉट गेंदों से इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर बनाएंगे दबाव
इंग्लैंड के खिलाफ अंडर-19 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप फाइनल से पहले भारत के कप्तान यश ढुल ने कहा कि उनकी टीम डॉट गेंदों के जरिए बल्लेबाजों में दबाव बनाना चाहेगी। शनिवार को यहां सर विवियन रिचर्डस स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड टीम के खिलाफ फाइनल मैच खेला जाएगा। अपने अभियान की शुरुआत में भारतीय टीम के कई खिलाड़ी कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे। इसके बावजूद टीम के अन्य खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर टीम को फाइनल तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया। दूसरी ओर, इंग्लैंड ने भी अपनी जीत में जोरदार प्रदर्शन किया है।
ढुल ने आईसीसी को बताया कि, “यह इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय टीम के लिए एक अच्छी चुनौती होगी। वे आक्रामक क्रिकेट खेलते हैं और विपक्ष पर हावी होते हुए दिख रहे हैं। उनके खिलाफ हमारा ²ष्टिकोण अधिक से अधिक डॉट गेंद फेंकने का होगा। टीम का मनोबल ऊंचा है। हम फाइनल खेलने के लिए उत्साहित हैं। यह फाइनल है लेकिन यह अभी भी सिर्फ एक खेल है। इसलिए, हम खेल को अच्छी मानसिकता के साथ खेलेंगे।”
भारतीय कप्तान ने कहा कि खिताबी मुकाबले से पहले विराट कोहली के मार्गदर्शन ने टीम के आत्मविश्वास में इजाफा किया है।
उन्होंने कहा, “विराट कोहली ने टीम को शुभकामनाएं दीं क्योंकि टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है। इसलिए, उनकी बातें हमें आत्मविश्वास देंगी। जब एक वरिष्ठ खिलाड़ी टीम के साथ खड़ा रहता है, तो टीम का मनोबल बढ़ता है। उन्होंने हमसे कुछ बुनियादी बातों के बारे में बात की। जैसे कि सामान्य क्रिकेट कैसे खेलें और अपने गेम प्लान पर कैसे टिके रहें। उनके साथ खिलाड़ियों को बातचीत करना अच्छा लगा।”
इंग्लैंड ने 24 साल पहले अपनी एकमात्र खिताबी जीत के बाद से अपने सर्वश्रेष्ठ आईसीसी अंडर-19 पुरुष सीडब्ल्यूसी का आनंद लिया है। पस्र्ट केवल उस इतिहास के बारे में जानते हैं और उनके पक्ष ने पहले ही कितना कुछ हासिल कर लिया है।
टेस्ट कप्तान जो रूट और सीमित ओवरों के कप्तान इयोन मोर्गन के समर्थन के साथ, इंग्लैंड 1998 की सफलता को दोहराने की उम्मीद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यह 24 वर्षो में पहली बार है जब इंग्लैंड इस फाइनल में है। मुझे नहीं पता कि क्या हम इस समय इस पर विश्वास कर सकते हैं, कि हम विश्व कप फाइनल में खेलने जा रहे हैं। यह कुछ ऐसा है जिसका आप बड़े होने का सपना देखते हैं। इसलिए हम सभी वास्तव में उत्साहित हैं और खेलने के लिए इंतजार नहीं कर सकते।”
उन्होंने कहा, “वरिष्ठ खिलाड़ी कह रहे थे कि वे हमारे खेल से कितना प्रभावित हुए हैं और 24 वर्षो में अपने पहले अंडर-19 पुरुष फाइनल में हमने जो किया है, उस पर उन्हें टीम पर गर्व है।”
क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में क्रमश: दक्षिण अफ्रीका और अफगानिस्तान को हराकर इंग्लैंड मैदान से परिचित है। हालांकि भारत को आयोजन स्थल पर नहीं खेलने से नुकसान होगा। लेकिन क्वार्टर में 2020 चैंपियन बांग्लादेश और फिर सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी प्रभावशाली जीत से उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पिछले चार संघर्षो में, ढुल ने एक शतक बनाया था और वह उसी की उम्मीद फिर से कर रहे हैं क्योंकि भारत इंग्लैंड के बड़े हिटरों को रोकने की कोशिश कर रहा है।
‘ग्रीम ले’ फाइनल के लिए मैच रेफरी होंगे और खेल में खड़े मैच अधिकारी आयरलैंड के रोलैंड ब्लैक और आईसीसी के अनुसार पाकिस्तान के आसिफ याकूब होंगे। पाकिस्तान के राशिद रियाज टीवी अंपायर के रूप में काम करेंगे और वेस्टइंडीज की जैकलीन विलियम्स चौथी अंपायर होंगी।
अंतरराष्ट्रीय
यूएन रिपोर्ट में भारत की बड़ी उपलब्धि: बाल मृत्यु दर में भारी गिरावट, पीएम नरेंद्र मोदी ने जताई खुशी

नई दिल्ली, 19 मार्च : संयुक्त राष्ट्र की तरफ से एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें भारत में बाल मृत्यु दर में भारी गिरावट देखने को मिली। संयुक्त राष्ट्र ने बाल मृत्यु दर में गिरावट को लेकर भारत की जमकर सराहना की। वहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। पीएम मोदी ने लिखा कि यूएन की रिपोर्ट में बच्चों की मौत में तेज गिरावट के लिए भारत की तारीफ की गई।
संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्युदर अनुमान अंतर-एजेंसी समूह (यूएनआईजीएमई) की हालिया रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, बच्चों की मौत की दर को कम करने में दुनियाभर में हुई तरक्की में भारत एक अहम योगदान देने वाला देश बनकर उभरा है।
रिपोर्ट में बच्चों के बचने के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए, खासकर नवजात और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले में देश की लगातार और बड़े पैमाने पर की गई कोशिशों पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नतीजों ने एक मजबूत, केंद्र और राज्यों द्वारा संचालित तथा मानकों पर आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की प्रभावशीलता को उजागर किया है। इसमें यह भी दिखाया गया है कि भारत ने राष्ट्रीय दृष्टिकोण को जमीनी स्तर पर मापने योग्य परिणामों में बदलने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।
नवजात शिशु मृत्यु दर में 70 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जो 1990 में 57 से घटकर 2024 में 17 हो गई है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 79 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई, जो 1990 में 127 से घटकर 2024 में 27 हो गई है।
पिछले दो दशकों में भारत ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में बच्चों की मृत्यु दर को कम करने की कोशिशों में अहम भूमिका निभाई है। 1990 से पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों में 76 फीसदी की कमी आई है और 2000 से 68 फीसदी की कमी आई। यह बड़ी कमी मुख्य रूप से भारत जैसे देशों के कारण आई है, जहां लक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप, बेहतर संस्थागत डिलीवरी व्यवस्था और टीकाकरण कवरेज में वृद्धि देखने को मिली है।
इस क्षेत्र में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में काफी कमी आई है। 2000 में हर 1,000 जीवित जन्मों पर 92 मौतों से घटकर 2024 में लगभग 32 हो गई है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के नतीजों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को दिखाता है।
भारत के खास दखल ने निमोनिया, डायरिया, मलेरिया और जन्म से जुड़ी दिक्कतों जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारियों से होने वाली मौतों को कम करने में मदद की है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकांश बच्चों की मौतें रोकी या उनका इलाज किया जा सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम, संस्थान-आधारित नवजात देखभाल और नवजात व बचपन की बीमारियों के एकीकृत प्रबंधन जैसे हस्तक्षेपों के विस्तार से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल (एनआईसीयू) में भारत के सुधार का खास असर हुआ है। पूरे दक्षिण एशिया में, 2000 से एनआईसीयू वाले बच्चों की मौत के मामले में लगभग 60 फीसदी की कमी आई है और 1-59 महीने के बच्चों की मौत की दर में 75 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है।
हालांकि दक्षिण एशिया में अभी भी दुनियाभर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की लगभग 25 फीसदी मौतें होती हैं, लेकिन इस इलाके ने दुनिया भर में सबसे तेजी से कमी की है।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका के सामने एक ही समय में परमाणु शक्ति संपन्न देशों रूस और चीन को रोकने की चुनौती : पेंटागन

वॉशिंगटन, 19 मार्च : वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने विधायकों को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका को एक ही समय में दो परमाणु शक्तियों को रोकने की “अभूतपूर्व चुनौती” का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, सैन्य नेताओं ने चीन और रूस से परमाणु, मिसाइल और अंतरिक्ष क्षेत्रों में बढ़ते खतरों के बारे में चेतावनी दी।
हाउस आर्म्ड सर्विसेज की स्ट्रैटेजिक फोर्सेज की सुनवाई में परमाणु निरोधक और रासायनिक व जैविक रक्षा के लिए रक्षा विभाग के सहायक सचिव रॉबर्ट कैडलेक ने कहा कि अमेरिकी रणनीति “एक महत्वपूर्ण मोड़” पर पहुंच गई है।
कैडलेक ने कहा, “चीन के रणनीतिक परमाणु विस्तार का मतलब है कि अब हमें एक साथ दो परमाणु शक्तियों को रोकने की अभूतपूर्व चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यह कोई दूर की समस्या नहीं है। यह आज हमारी रक्षा रणनीति की केंद्रीय चुनौती है।”
उन्होंने कहा कि चीन “अपने इतिहास के सबसे तेज और अस्पष्ट परमाणु विस्तार” में लगा हुआ है जबकि रूस के पास अब भी “दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु भंडार” है और वह दबाव बनाने के लिए परमाणु बलों पर निर्भर बना हुआ है।
कैडलेक ने कहा कि अमेरिका को “कई क्षेत्रों में समन्वित या अवसरवादी आक्रामकता की वास्तविक संभावना” के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि वॉशिंगटन को अपने प्रतिद्वंद्वियों के बराबर “हर वारहेड के बदले वारहेड” रखने की जरूरत नहीं है लेकिन ऐसी क्षमता जरूर होनी चाहिए जो किसी भी स्थिति में “दोनों विरोधियों पर अस्वीकार्य लागत थोप सके।
उन्होंने सेंटिनल अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल, कोलंबिया-श्रेणी की पनडुब्बी, बी-21 बॉम्बर और लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ क्रूज मिसाइल के लिए पूर्ण फंडिंग और जहां संभव हो, तेजी लाने की मांग की।
कैडलेक ने थिएटर-रेंज परमाणु विकल्पों की भी वकालत की। उन्होंने कहा, “एसएलसीएम-एन इसका एक उदाहरण है। यह अत्यंत आवश्यक है और किसी समान शक्ति वाले प्रतिद्वंद्वी के साथ संघर्ष में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।”
सुनवाई में अंतरिक्ष को लेकर बढ़ती चिंता भी उजागर हुई। यूएस स्पेस कमांड के कमांडर जनरल स्टीफन व्हाइटिंग ने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियान अब काफी हद तक अंतरिक्ष प्रणालियों पर निर्भर हैं और चेतावनी दी कि प्रतिद्वंद्वी उन्हें चुनौती देने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
व्हाइटिंग ने कहा, “कोई गलती न करें, हमारे विरोधी खतरनाक गति से आगे बढ़ रहे हैं और हमें अंतरिक्ष के उपयोग से वंचित करने की क्षमताएं विकसित और तैनात कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी सेनाओं में अंतरिक्ष-आधारित प्रभावों को एकीकृत कर लिया है और ऐसे हथियार विकसित कर रहा है जो “हमारे उपग्रहों को मात देने और नष्ट करने के लिए विशेष रूप से बनाए गए हैं।
रूस के बारे में उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी संपत्तियों को बाधित करने वाली क्षमताओं का प्रदर्शन करता रहा है, जिसमें “कक्षा में परमाणु हथियार तैनात करने की संभावित योजना” भी शामिल है।
अंतरिक्ष नीति के लिए रक्षा विभाग के सहायक सचिव मार्क बर्कोविट्ज़ ने अपने बयान में राष्ट्रपति ट्रंप की प्रस्तावित “गोल्डन डोम फॉर अमेरिका” योजना का समर्थन किया और इसे “संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने मौजूद सबसे विनाशकारी खतरों के खिलाफ एक व्यापक अगली पीढ़ी की रक्षा प्रणाली” बताया।
बर्कोविट्ज़ ने कहा, “गोल्डन डोम हमारे देश, नागरिकों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और जवाबी हमले की क्षमता की रक्षा करेगा।” उन्होंने इसे बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों और उन्नत क्रूज मिसाइलों से बढ़ते खतरों के प्रति “आवश्यक और व्यावहारिक प्रतिक्रिया” बताया।
डेमोक्रेट्स ने इस कार्यक्रम और व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण दोनों पर तीखी आपत्ति जताई। रैंकिंग सदस्य सेठ मौल्टन ने कहा कि अमेरिका को “ताकत चाहिए, अराजकता नहीं” और “हथियारों की दौड़ को और बढ़ावा देने” के खिलाफ चेतावनी दी।
यूएस नॉर्दर्न कमांड और नोराड के प्रमुख जनरल ग्रेगरी गुइलो ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए कमांडर बदलते खतरे के माहौल के अनुसार खुद को ढाल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में यूएस नॉर्थ कॉम ने जॉइंट टास्क फोर्स गोल्ड को सक्रिय किया, जो “गोल्डन डोम फॉर अमेरिका के तहत भविष्य की बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली के संचालन के लिए काम करेगा।”
यूएस स्ट्रैटेजिक कमांड के कमांडर एडमिरल रिचर्ड कोरेल ने कहा कि अमेरिका “आधुनिकीकरण और पुनर्निर्माण के इस महत्वपूर्ण दो पीढ़ी वाले दौर” से गुजर रहा है।
उन्होंने कहा कि रणनीतिक चुनौती है “कई परमाणु प्रतिद्वंद्वियों को रोकना, साथ ही तेज तकनीकी बदलाव के साथ तालमेल बिठाना।
अंतरराष्ट्रीय
12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले रोकने की अपील की

नई दिल्ली, 19 मार्च : इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के बीच कई देशों की हवा बारूद के धुएं से भर गई। इजरायल की ओर से ईरान के सबसे बड़े गैस प्लांट साउथ पार्स फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने कतर और संयुक्त अरब अमीरात के गैस प्लांट पर हमला कर दिया। इस बीच 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान के इस हमले की निंदा की और इन्हें तुरंत रोककर अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने को कहा।
सऊदी की राजधानी रियाद में गुरुवार को हुई मीटिंग के बाद जारी एक संयुक्त बयान में 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने को कहा।
यह बयान अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों की ओर से जारी किया गया था।
बयान में, मंत्रियों ने खाड़ी देशों-जॉर्डन, अजरबैजान और तुर्किए पर हमलों की निंदा की। विदेश मंत्रियों ने कहा कि ईरान ने रिहायशी क्षेत्रों, नागरिकों के इलाके के ढांचे, जिसमें तेल की फैसिलिटी, डीसेलिनेशन प्लांट, एयरपोर्ट, रेजिडेंशियल बिल्डिंग और डिप्लोमैटिक जगहें शामिल हैं, को टारगेट किया था।
इसके अलावा मंत्रियों ने लेबनान पर इजरायल के हमलों की भी निंदा की और इलाके की सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए समर्थन दोहराया।यह संयुक्त बयान तब आया, जब ईरान ने खाड़ी में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया और कतर में सुविधाओं में आग लगने और सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की खबरें आईं।
संयुक्त बयान में विदेश मंत्रियों ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के साथ संबंधों का भविष्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और उनके अंदरूनी मामलों में दखल न देने पर निर्भर करता है। साथ ही, किसी भी तरह से उनकी संप्रभुता या उनके इलाकों का उल्लंघन करने से बचना चाहिए और इलाके के देशों को धमकाने के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल या विकास नहीं करना चाहिए।
इससे पहले, ईरानी सरकारी मीडिया ने अमेरिका और इजरायल पर उसके तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन सुविधाओं के कुछ हिस्सों पर हमला करने का आरोप लगाया था।
वहीं कतर ने रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमले की कड़ी निंदा की है। कतर ने कहा कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन है। इस हमले के बाद ईरानी दूतावास के सैन्य अटैशे और सुरक्षा अटैशे के साथ-साथ उनके ऑफिस के स्टाफ को भी ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर दिया और उन्हें 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया। जब कोई देश किसी विदेशी राजनयिक को स्वीकार नहीं करता या उसे देश छोड़ने के लिए कह देता है, तो उसे पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित किया जाता है।
एक आधिकारिक बयान में कतर ने इस हमले को देश की आजादी का खुला उल्लंघन और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और इलाके की स्थिरता के लिए सीधा खतरा बताया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि कतर शुरू से ही इस संघर्ष से खुद को दूर रखने की नीति पर चल रहा है। तनाव बढ़ने से बचने के वादे के बावजूद ईरान ने उसे और पड़ोसी देशों को निशाना बनाना जारी रखा है। यह एक गैर-जिम्मेदाराना तरीका है जो इलाके की सुरक्षा को कमजोर करता है और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।
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