अंतरराष्ट्रीय
तीसरा टेस्ट : तीसरे दिन का खेल खत्म, दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 101/2, भारत को जीत के लिए 8 विकेट की जरूरत
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच न्यूलैंड्स में गुरुवार को तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन तक भारतीय टीम ने ऋषभ पंत (100) की शानदार नाबाद पारी की वजह से दूसरी पारी में 198 रन बनाए, जिससे साउथ अफ्रीका को 212 रन लक्ष्य दिया। दिन के खत्म होने तक दक्षिण अफ्रीका ने 29.4 ओवरों में दो विकेट खोकर 101 रन बना लिए हैं। टीम को जीतने के लिए अब भी 111 रनों की जरूरत है। वहीं, भारत को सीरीज अपने नाम करने के लिए 8 विकेट अपने नाम करने होंगे। कीगन पीटरसन (48) रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। भारत को दूसरी पारी में 198 रनों पर ऑलआउट के साथ, 212 रनों का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और चार चौके लगाने के बाद सलामी बल्लेबाज एडेन मार्करम 16 रन बनाकर मोहम्मद शमी की गेंद पर आउट हो गए। इसके बाद फॉर्म में चल रहे पीटरसन बल्लेबाजी के लिए आए और कप्तान एल्गर के साथ मिलकर पारी को संभालते हुए टीम के लिए महत्वपूर्ण पर रन बनाए।
दोनों ने मिलकर भारतीय गेंदबाजों पर कई चौके लगाए। इस बीच, 21वें ओवर में आर अश्विन की गेंद पर कप्तान एल्गर आउट होने से बाल बाल बचे, जब उन्हें अंपायर द्वारा एलबीडब्ल्यू दिया, लेकिन रिव्यू के कारण वह आउट न हो सके। इस समय तक प्रोटियाज की टीम को जीतने के लिए 142 रन और चाहिए थे।
इसके बाद पीटरसन भारतीय गेंदबाजों पर हावी होते दिखाई दिए और अश्विन के एक ही ओवर में दो चौके जड़ दिए। वहीं, दूसरी छोर पर कप्तान एल्गर संभलकर रन बनाए, जिससे 29वें ओवर में टीम का स्कोर एक विकेट पर 101 रन पहुंच गया। लेकिन दक्षिण अफ्रीका को दूसरा झटका बुमराह ने दिया, जब कप्तान एल्गर (30) को पंत के हाथों कैच आउट कराया। इसी के साथ, दोनों के बीच पनप रही 78 रनों की साझेदारी भी खत्म हो गई। पीटरसन 48 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं।
तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक दक्षिण अफ्रीका ने दो विकेट खोकर 101 रन बना लिए। टीम को जीतने के लिए अभी भी 111 रनों की जरूरत है। वहीं, भारत को जीतने के लिए 8 विकेट चटकाने होंगे। ऐसे में चौथा दिन दोनों टीमों के लिए अहम होने वाला है।
इससे पहले, तीसरे दिन के शुरुआती सत्र में भारत 57/2 रन से आगे खेलना शुरू किया और जेनसेन के पहले ही ओवर के दूसरी गेंद पर पुजारा को आउट कर दिया। इसके बाद, पांचवें स्थान पर आए अजिंक्य रहाणे भी एक बार फिर फेल साबित हुए और रबाडा की गेंद पर स्लिप में कप्तान एल्गर के हाथों कैच आउट होकर पवेलियन लौट गए।
छठे नंबर पर आए ऋषभ पंत ने कप्तान कोहली के साथ मिलकर पारी को संभाला और दोनों ने मिलकर लंच तक भारत के स्कोर को चार विकेट के नुकसान पर 130 रन पहुंचा दिया। इस समय तक कप्तान कोहली (28) और पंत (51) ने मिलकर 147 गेंदों में 72 रनों की साझेदारी कर क्रीज पर मौजूद थे।
लंच के बाद दूसरे सत्र में 130/4 से आगे खेलते हुए कप्तान कोहली और पंत ने शानदार बल्लेबाजी की। दोनों ने मिलकर अफ्रीकी तेज आक्रमण के खिलाफ तेजी से रन जोड़े। इस दौरान, पंत ने केशव महाराज की गेंद पर कई बड़े-बड़े शॉट लगाए। वहीं दूसरी छोर पर कोहली भी रन बनाते चले गए। लेकिन लंबी होती इस साझेदारी (94) को लुंगी एनगिडी ने तोड़ा, जब कप्तान कोहली को 29 रनों पर आउट कर पवेलियन भेज दिया।
इसके बाद भारत को लगातार झटके लगते चले गए, जिसमें रविचंद्रन अश्विन (7), शार्दुल ठाकुर (5), उमेश यादव (0), मोहम्मद शमी (0) और जसप्रीत बुमराह (2) रन बनाए। वहीं, पंत ने अपने करियर का एक और शतक लगाकर नाबाद 100 रन बनाए, जिससे भारत दूसरी पारी में 198 रनों पर ऑल आउट हो गया और दक्षिण अफ्रीका को 212 रनों का लक्ष्य दिया।
दक्षिण अफ्रीका की ओर से सबसे ज्यादा मार्को जेनसेन ने चार सफलताएं अपने नाम कीं। वहीं, कगिसो रबाडा और लुंगी एनगिडी ने तीन-तीन विकेट लिए।
संक्षिप्त स्कोर :
भारत 223 और दूसरी पारी में 67.3 ओवरों में 198/10 (ऋषभ पंत 100 नाबाद, कप्तान विरोट कोहली 29, मार्को जेनसेन 4/36, कगिसो रबाडा 3/53) दक्षिण अफ्रीका 210 और दूसरी पारी 29.4 ओवरों में 101/2 (कीगन पीटरसन 48 नाबाद, कप्तान डीन एल्गर 30, मोहम्मद शमी 1/22, जसप्रीत बुमराह 1/29)।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के विदेश मंत्री ने यूएस-इजरायल पर नरसंहार का लगाया आरोप, बोले-‘यूएन का बुनियादी मूल्य संकट में है’

तेहरान, 27 मार्च : ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर नरसंहार करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया के तमाम देशों से अमेरिका-इजरायल के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले का जिक्र करते हुए अराघची ने शुक्रवार दोपहर को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) को बताया कि ईरान के मिनाब में शजारेह तैयबेह गर्ल्स स्कूल पर हुए क्रूर हमले को सही नहीं ठहराया जा सकता, न ही इसे दबाया जा सकता है। इस पर चुप्पी और बेपरवाही से नहीं देखा जाना चाहिए। यह हमला जानबूझकर बेरहमी से किया गया था। संयुक्त राष्ट्र का बुनियादी मूल्य और मानवाधिकार का पूरा ढांचा गंभीर खतरे में हैं।
विदेश मंत्री अराघची ने कहा, “ईरान खुद को दो जबरदस्ती करने वाली न्यूक्लियर सरकारों यानी अमेरिका और इजरायल, की तरफ से थोपे गए एक गैर-कानूनी युद्ध के बीच में पाता है। यह हमला साफ तौर पर बिना किसी वजह के और बहुत बेरहम है। उन्होंने यह हमला 28 फरवरी को शुरू किया जब ईरान और अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर अमेरिका की कही जा रही चिंताओं को हल करने के मकसद से एक डिप्लोमैटिक प्रक्रिया में लगे हुए थे। नौ महीने में दूसरी बार, उन्होंने बातचीत को रोककर और पटरी से उतारकर डिप्लोमेसी को धोखा दिया।”
उन्होंने कहा कि इस हमले के सबसे डरावने उदाहरणों में से एक दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर सोची-समझी और धीरे-धीरे किया गया हमला था, जहां 175 से ज्यादा स्टूडेंट्स और टीचर्स को जानबूझकर और बेरहमी से मार डाला गया था। यह हमला केवल एक बड़े संकट की झलक भर है, जिसके पीछे कहीं अधिक गंभीर अत्याचार छिपे हुए हैं। इसमें मानवाधिकारों और मानवीय कानून के गंभीर उल्लंघनों को सामान्य बना देना और बिना सजा के जघन्य अपराध करने की हिम्मत शामिल है।
अराघची ने कहा कि अमेरिका और इजरायल हमेशआ खुद को सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और सबसे सटीक सैन्य और डेटा सिस्टम होने का दावा करते हैं। ऐसे में अगर वो यह कहते हैं कि ये हमला जानबूझकर और पहले से प्लान किया गया नहीं था, तो इसे माना नहीं जाना चाहिए। उम्होंने कहा कि स्कूल को टारगेट करना एक वॉर क्राइम और इंसानियत के खिलाफ एक ऐसा अपराध है जिसकी सभी को साफ और बिना शर्त निंदा करनी चाहिए। इसके अपराधियों की साफ और साफ जवाबदेही तय करनी चाहिए।
ईरानी विदेश मंत्री ने वीडियो जारी कर कहा कि इस दुखद घटना को न तो सही ठहराया जा सकता है, न ही छिपाया जा सकता है, और न ही इसे चुपचाप या नजरअंदाज करके देखा जाना चाहिए। मिनाब में शजारेह तैयबेह स्कूल पर हमला न तो कोई हादसा था और न ही कोई गलत अंदाजा। इस जुर्म को सही ठहराने की कोशिश में अमेरिका के उलटे-सीधे बयान किसी भी तरह से उन्हें जिम्मेदारी से बरी नहीं करते। एक आम नागरिक जगह पर ऐसे बेरहम हमले की बुराई करना, जहां सबसे मासूम लोग शिक्षा की तलाश में इकट्ठा होते हैं, यह सिर्फ मानवाधिकार के दायरे में एक कानूनी जिम्मेदारी नहीं है; यह एक नैतिक और जरूरी बात है। हमारी अंतरात्मा हमें किसी भी अदालत से कहीं ज्यादा गहराई से जज करेगी।
उन्होंने कहा, “शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल इस गैर-कानूनी युद्ध के पिछले सत्ताईस दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए घिनौने जुर्मों का अकेला शिकार नहीं है। हमलावरों ने मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का बड़े पैमाने पर और सिस्टमैटिक तरीके से, पहले कभी नहीं देखे गए और बहुत बेरहम तरीके से उल्लंघन किया है। युद्ध के कानूनों या इंसानियत और सभ्यता के बुनियादी उसूलों की कोई परवाह किए बिना, उन्होंने आम लोगों और आम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है। पूरे ईरान में 600 से ज्यादा स्कूल तबाह हो गए हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण हजार से ज्यादा छात्र और शिक्षक मारे गए या घायल हुए हैं। हमलावर घमंड से कोई रहम नहीं, कोई राहत नहीं का नारा लगाते हैं। वो ईरान के जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने की धमकी देते हैं, उन्होंने अस्पतालों, एम्बुलेंस, मेडिकल कर्मचारियों, रेड क्रिसेंट के मदद करने वाले कर्मचारियों, रिफाइनरियों, पानी के सोर्स और रहने की जगहों को निशाना बनाया है।”
अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए, उन्होंने कहा कि सिर्फ “वॉर क्राइम” और “मानवता के खिलाफ अपराध” शब्द उनके किए जा रहे जुल्मों की गंभीरता को बताने के लिए काफी नहीं हैं। टारगेट करने का तरीका और उनकी बयानबाजी, इस बात में कोई शक नहीं छोड़ती कि उनका साफ इरादा नरसंहार करना है।
अराघची ने कहा, “ईरान के नेक लोगों के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का यह गलत और मनमाना युद्ध, कब्जे वाले फिलिस्तीन, लेबनान और दूसरी जगहों पर पहले हुई अराजकता और अपराधों के सामने चुप्पी का सीधा नतीजा है। नाइंसाफी के सामने बेपरवाही और चुप्पी कभी भी शांति और सुरक्षा नहीं लाएगी; बल्कि, इससे और ज्यादा असुरक्षा और अधिकारों का और ज्यादा उल्लंघन होगा। संयुक्त राष्ट्र का बुनियादी मूल्य और मानवाधिकार का पूरा ढांचा गंभीर खतरे में हैं।
ईरानी विदेश मंत्री ने दुनिया के सभी देशों से अमेरिका-इजरायल के हमले के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा, “आप सभी को हमलावरों की खुलकर निंदा करनी चाहिए और यह दिखाना चाहिए कि देशों का समुदाय और इंसानियत की सामूहिक अंतरात्मा उन्हें ईरान के लोगों के खिलाफ किए जा रहे भयानक अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराएगी। ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा। ईरानी लोग एक शांतिप्रिय और इज्जतदार देश हैं, जो दुनिया की सबसे अमीर सभ्यताओं में से एक के वारिस हैं। हालांकि, उन्होंने बेरहम हमलावरों के खिलाफ खुद का बचाव करने का पक्का इरादा और संकल्प दिखाया है, जो अपराध करने की कोई सीमा नहीं मानते; यह बचाव तब तक जारी रहेगा जब तक जरूरी है।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान युद्ध के बीच बदलते समीकरणों के चलते चीन ने बदला अपना रुख

war
वॉशिंगटन, 27 मार्च : अमेरिकी सरकार के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चीन ईरान विवाद पर अपने नजरिए को बदल रहा है। पूर्व अधिकारी ने कहा कि चीन अमेरिका के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की तैयारी के लिए तनाव कम करने के लिए समर्थन का संकेत दे रहा है।
यह बात ऐसे समय में आई है जब प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने चीन जाने का प्लान बना रहे हैं, जबकि खाड़ी में लड़ाई बढ़ती जा रही है।
पूर्व अधिकारी ने कहा, “यह बहुत अच्छी बात है कि राष्ट्रपति इस बड़े युद्ध के बीच में चीन जाने के लिए तैयार थे।” उन्होंने इस समय को बहुत अजीब बताया।”
बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अप्रैल में चीन के दौरे पर जाने वाले थे। हालांकि, हालिया हमलों और तनाव की वजह से अब चर्चा हो रही है कि वह मई में चीन दौरे पर जाएंगे। ट्रंप के चीन दौरे को लेकर अधिकारी ने कहा कि एशिया भर के देश प्रस्तावित समिट पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि इससे इलाके की स्थिरता और आर्थिक हालात पर असर पड़ सकता है।
अधिकारी ने कहा, “एशिया का हर देश देख रहा है और उम्मीद कर रहा है कि जब राष्ट्रपति ट्रंप चीन आएंगे तो क्या उम्मीद की जा सकती है।”
अमेरिकी सरकार के एक दूसरे पुराने अधिकारी ने कहा कि हाल की आर्थिक बातचीत के बाद इस लड़ाई ने दोनों पक्षों को फिर से सोचने का मौका दिया है।
पेरिस में हुई बातचीत का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा, “खाड़ी में ऑपरेशन दोनों पक्षों के लिए ज्यादा समय पाने का एक पॉलिटिकल कवर बन गया।”
अधिकारी ने कहा कि चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति की मेजबानी के लिए तैयार होने का संकेत देना जारी रखा है। हालांकि, अभी इस दौरे से संबंधित डिटेल्स को लेकर कुछ भी तय नहीं हुआ है।
अधिकारी ने कहा, “चीनियों ने आज सुबह कमोबेश संकेत दिया कि वे अभी भी उनकी (ट्रंप की) मेजबानी के लिए तैयार होंगे, लेकिन तारीखें कन्फर्म नहीं कीं।”
इसके साथ ही, हाल की डिप्लोमैटिक बातचीत के बाद लड़ाई पर चीन के मैसेज में बदलाव के संकेत दिखे हैं।
एक तीसरे पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “शांति को बढ़ावा देने, ईरानियों को बातचीत की टेबल पर लाने पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।” उन्होंने इस बदलाव को छोटा लेकिन ध्यान देने लायक बताया।
अधिकारी ने आगे कहा कि अमेरिका के लिए एक शांति प्रस्ताव था, जिससे पता चलता है कि बीजिंग उच्च स्तरीय बातचीत से पहले हालात को स्थिर करना चाहता है। बदलते हालात ईरान विवाद और बड़ी अमेरिकी-चीन बातचीत के बीच के संबंध को भी दिखाते हैं।
दूसरे अधिकारी ने एजेंडा के संभावित विस्तार की ओर इशारा करते हुए कहा, “अमेरिका के बातचीत करने वाले अब किस हद तक, ईरानी तेल की चीनी खरीद जैसी बातें उठाना शुरू करेंगे।”
अधिकारी ने ईरान को चीन के संभावित समर्थन के बारे में भी चिंता जताई। अधिकारी ने कहा, “झगड़े से पहले, चीनियों ने ईरानियों को एंटी शिप मिसाइल बेचने की बात की थी।” उन्होंने कहा कि ऐसे विकास पर करीब से नजर रखी जाएगी।
इन मुश्किलों के बावजूद, दोनों पक्ष बातचीत बनाए हुए दिख रहे हैं। समिट को लेकर चीन की ओर से मिल रहे संकेतों को लेकर अधिकारी ने कहा, “मुझे लगता है यह उनके हित में है और यह हमारे भी हित में है।”
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी कॉरिडोर में से एक है, जो दुनिया भर में तेल और गैस शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। किसी भी रुकावट का ग्लोबल मार्केट पर तुरंत असर पड़ता है, खासकर एनर्जी इंपोर्ट पर निर्भर बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर।
अमेरिका-चीन के संबंध व्यापार, तकनीक और सुरक्षा में प्रतिस्पर्धा और समय-समय पर जुड़ाव से पहचाने जाते रहे हैं। एक एक्टिव संघर्ष के बीच एक संभावित समिट इस बात पर जोर देता है कि कैसे भू-राजनीतिक संकट और बड़ी ताकतों के बीच बातचीत तेजी से आपस में जुड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय
किम जोंग-उन और लुकाशेंको के बीच हुई मुलाकात, मित्रता व सहयोग संधि पर हस्ताक्षर

सियोल, 27 मार्च : उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने प्योंगयांग में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के साथ शिखर वार्ता की। इस दौरान, दोनों नेताओं ने मित्रता और सहयोग के लिए एक संधि पर हस्ताक्षर किए। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी लुकाशेंको, नेता किम जोंग उन के निमंत्रण पर दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर उत्तर कोरिया पहुंचे। बताया गया है कि उन्होंने कहा कि प्योंगयांग और मिन्स्क के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए चरण तक बढ़ाया गया है।
उत्तर कोरिया की कोरियन सेंट्रल समाचार एजेंसी (केसीएनए) के अनुसार, किम जोंग उन और लुकाशेंको ने कूटनीति, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। केसीएनए ने बताया कि दोनों नेताओं ने इस बात पर संतोष और विश्वास व्यक्त किया कि उनके सहयोगात्मक संबंध इस तरह से विस्तारित और विकसित होंगे, जो उनके लोगों के हितों को पूरा करते हों।
इससे पहले, 26 मार्च को किम जोंग-उन ने प्योंगयांग में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको का स्वागत किया था। यह उनकी उत्तर कोरिया की पहली आधिकारिक यात्रा थी।
केसीएनए के अनुसार, बुधवार को किम इल सुंग स्क्वायर पर लुकाशेंको के स्वागत के लिए एक समारोह आयोजित किया गया, जहां वह किम के निमंत्रण पर दो दिवसीय यात्रा के लिए अपने निजी विमान से पहुंचे थे।
उत्तर कोरिया और बेलारूस दोनों ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का समर्थन किया है। प्योंगयांग ने सैनिक और हथियार भेजे हैं, जबकि मिन्स्क ने मास्को को आक्रमण के लिए अपने क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति दी है।
किम जोंग के साथ, लुकाशेंको ने प्योंगयांग में ‘लिबरेशन टावर’ पर पुष्पांजलि भी अर्पित की। यह टावर उन पूर्व सोवियत सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है, जिनके बारे में उत्तर कोरिया का दावा है कि वे 1910-45 के दौरान जापान के औपनिवेशिक शासन से कोरिया को मुक्त कराने में मदद करते हुए मारे गए थे। दोनों नेताओं ने शहीद सैनिकों के सम्मान में कुछ देर का मौन भी रखा।
इस यात्रा के दौरान, लुकाशेंको के साथ उप प्रधानमंत्री यूरी शुलेइको और विदेश मामलों, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा व उद्योग मंत्रालयों के मंत्री भी मौजूद थे।
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