मनोरंजन
मेगन ट्रेनॉर को लाइव टीवी पर आया था पहला पैनिक अटैक
‘ऑल अबाउट दैट बास’ हिटमेकर मेगम ट्रेनॉर ने अपने मानसिक स्वास्थ्य संघर्षों के बारे में यह कहते हुए खुलासा किया कि उन्हें पहला पैनिक अटैक लाइव टेलीविजन पर हुआ था। फीमेलफस्र्ट डॉट को डॉट यूके की रिपोर्ट के अनुसार गेल किंग के साथ 2017 के ग्रैमी नॉमिनी की घोषणा करने से पहले गायिका ‘सीबीएस दिस मॉनिर्ंग’ में थीं, जब उन्होंने ‘कंपन’ करना शुरू किया और महसूस किया कि वह ‘मरने वाली हैं।
मेगम ट्रेनॉर ने कहा कि मैं नामांकित व्यक्तियों की घोषणा कर रही थी, और मैं अचानक कांपने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं लाइव टेलीविजन पर पास आउट होने जा रही हूं।
“जैसे ही उन्होंने ‘कट’ कहा, मैं ऑफस्टेज गई और सबके सामने हांफ रही थी”
मेगम ने डरावनी स्थिति में उसकी मदद करने के लिए टीवी प्रस्तोता गेल की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि गेल मेरी ईमेल दोस्त थी और हमेशा मुझे चेक करती रहती थी। मैं बहुत शमिंर्दा थी और माफी माँगती थी, लेकिन उसने मेरे लिए सब कुछ इतना बेहतर कर दिया। वह इस धरती पर एक परी है।
मेगम ट्रेनॉर को बाद में पैनिक डिसऑर्डर का पता चला।
डॉक्टर अंदर आया, उसने कहा कि ‘क्या आपने कभी पैनिक अटैक के बारे में सुना है?’
मैं ऐसी थी, ‘नहीं, नहीं, नहीं, मुझे एलर्जी की प्रतिक्रिया हो रही है। यह मेरा पहला सबक था कि पैनिक अटैक आपको क्या कर सकता है।
पिछले साल, ‘डियर फ्यूचर हसबैंड’ क्रोनर ने कहा कि वह महामारी के शुरूआती चरणों के दौरान संगीत का उपयोग करके मानसिक स्वास्थ्य के बेहतर कर रही है।
मनोरंजन
जब एक रोल के लिए शाहरुख खान को कटवाने पड़े थे लंबे बाल, दुखी मन से मानी थी शर्त

सिनेमा के इतिहास में कुछ ही ऐसे चेहरे होते हैं, जो पर्दे पर आते ही समय की धारा को मोड़ देते हैं। आज जिसे पूरी दुनिया ‘किंग खान’ बुलाती है और उनकी हेयरस्टाइल के लाखों दीवाने रहते हैं लेकिन उनके करियर की शुरुआत में एक ऐसा वक्त भी आया था, जब अभिनेता को अपने बालों को कटाना पड़ा था।
यह दौर तब का है जब शाहरुख अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाने की जद्दोजहद कर रहे थे। आज भले ही लंबे बाल और उनका सिग्नेचर हेयरस्टाइल उनकी पहचान बन चुका हो लेकिन संघर्ष के शुरुआती दिनों में निर्माताओं और निर्देशकों की शर्तों के आगे उन्हें अपनी पसंद से समझौता करना पड़ा था। आखिर क्या थी वो मजबूरी और किस फिल्म या प्रोजेक्ट के दौरान शाहरुख को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा था? आइए जानते हैं इस दिलचस्प किस्से के बारे में…
2 नवंबर 1965 को नई दिल्ली में एक मुस्लिम परिवार में जन्मे अभिनेता शाहरुख खान को रोमांस का किंग कहा जाता है लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि 90 के दशक में जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा था, तो किसी भी बड़े हीरो ने विलेन का रोल करने से परहेज किया था। उस दौर में शाहरुख ने बाजीगर, डर और अंजाम जैसी फिल्मों में निगेटिव रोल से दर्शकों के मन में खौफ पैदा किया और फिर हीरो बनकर दर्शकों का दिल जीत लिया।
शाहरुख खान ने हंसराज कॉलेज से बीए इकोनॉमिक्स किया था। इस दौरान वे दिल्ली के ‘थिएटर एक्शन ग्रुप’ से जुड़े और प्रसिद्ध थिएटर निर्देशक बैरी जॉन के मार्गदर्शन में अभिनय सीखा। इसके बाद उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से मास कम्युनिकेशन में पीजी में दाखिला लिया था लेकिन अभिनय करने के जुनून के चलते अभिनेता ने अपना पीजी बीच में छोड़ दिया था।
बताया जाता है कि माता-पिता के देहांत के बाद बड़ा मुकाम हासिल करने की इच्छा लेकर शाहरुख साल 1991 में दिल्ली छोड़कर मुंबई आ गए थे। अभिनेता रंगमंच में सक्रिय थे, जहां पर उनके स्वाभाविक अभिनय और जबरदस्त ऊर्जा ने कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया। शाहरुख खान को कैमरे के सामने अभिनय करने का सबसे पहला ब्रेक जाने-माने निर्देशक लेख टंडन ने अपने धारावाहिक ‘दिल दरिया’ में दिया था। हालांकि, इस शो में काम करने के लिए निर्देशक ने अभिनेता के सामने एक अजीब-सी शर्त रख दी थी।
उन्होंने शाहरुख से अपने लंबे और बिखरे बाल कटवाने के लिए कहा था। शाहरुख को अपने बालों से बहुत प्यार था लेकिन अभिनय के जुनून के कारण उन्होंने दुखी मन से इस शर्त को स्वीकार कर लिया और अपने बाल कटवा लिए। इस शो में अभिनेता को ‘नंदू’ का छोटा सा रोल मिला था। प्रोडक्शन और शूटिंग में देरी के कारण ‘दिल दरिया’ का प्रसारण समय पर नहीं हो पाया। शाहरुख खान को कर्नल राज कपूर का सीरियल फौजी मिल गया, जो पहले ऑन-एयर हो गया। इसी वजह से इसे आधिकारिक तौर पर शाहरुख खान का पहला ऑन-स्क्रीन डेब्यू माना जाता है।
धारावाहिक ‘फौजी’ के लिए अभिनेता जब कर्नल राज कपूर के ऑफिस ऑडिशन देने के लिए पहुंचे थे, तो निर्देशक को शाहरुख खान की काबिलियत पर भरोसा नहीं था। हालांकि, ऑडिशन की दिलचस्प बात यह है कि कर्नल कपूर को लगा था कि शाहरुख के गालों के डिंपल असली नहीं हैं बल्कि उन्होंने उसे छूकर देखा था।
शाहरुख खान को शुरुआत में इस शो में सेकेंड लीड या एक छोटे से साइड रोल (अभिमन्यु राय) के लिए चुना गया था लेकिन जब कैमरा चालू हुआ, तो कर्नल कपूर और कैमरामैन ने नोटिस किया कि अभिनेता की गजब की स्क्रीन प्रेजेंस और चुलबुले अंदाज को दर्शकों की तरफ से प्यार मिलने लगा जिस वजह से उनका रोल बढ़ा दिया गया और वह शो के मुख्य स्टार बनकर उभरे।
फौजी के सुपरहिट होने के बाद शाहरुख रातोंरात भारत के हर घर में मशहूर हो गए। इसके बाद उन्हें अजीज मिर्जा के लोकप्रिय शो ‘सर्कस’ (1989) में काम मिला। टेलीविजन पर उनकी इसी सफलता को देखकर हेमा मालिनी ने उन्हें पहचाना और अपनी फिल्म ‘दिल आशना है’ के लिए बतौर लीड हीरो साइन कर लिया जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
हालांकि, शुरुआती दौर में उन्होंने लीक से हटकर ‘बाजीगर’, ‘डर’ और ‘अंजान’ जैसी फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं निभाईं और खूब वाहवाही बटोरी। ‘बाजीगर’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। 1995 में आई ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ ने भारतीय सिनेमा का इतिहास बदल दिया और उन्हें रोमांटिक हीरो के रूप में अमर कर दिया।
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जुनूनी प्रेमी के रोल में नजर आए जहीर इकबाल, कहा- इंटेंसिटी नहीं भावनाएं दिखाना था मुश्किल

अभिनेता जहीर इकबाल साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म ‘तू है मेरी किरण’ में ‘समर’ नाम के एक जुनूनी प्रेमी के किरदार में नजर आ रहे हैं। अभिनेता का कहना है कि यह किरदार इंटेंसिटी दिखाने के बीरे में नहीं है बल्कि इसके पीछे की सोच, भावनाओं और उसके एक्शन के पीछे की वजहों को समझना भी जरूरी था।
जहीर इकबाल ने आईएएनएस के साथ बातचीत में एक जुनूनी प्रेमी का किरदार निभाने की चुनौतियों के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “एक एक्टर के तौर पर हम हमेशा चाहते हैं कि दर्शकों को कुछ ऐसा दें, जो उन्हें हमसे तो ये उम्मीद न हो। एक जुनूनी प्रेमी का किरदार निभाना एक रोमांचक चुनौती थी क्योंकि इस किरदार में कई तरह की भावनाएं थीं।”
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ इंटेंसिटी दिखाने के बारे में नहीं था बल्कि किरदार की सोच, उसकी भावनाओं और उसके एक्शन के पीछे की वजहों को समझना भी था। मैं इस किरदार को पूरी शिद्दत के साथ निभाना चाहता था और यह पक्का करना चाहता था कि सबसे मुश्किल भावनाएं भी पर्दे पर असली लगें। फिल्म रिलीज होने के बाद से किरदार को जो प्यार और सराहना मिली है, वह बहुत हौसला बढ़ाने वाली है। बहुत अच्छा लगता है जब दर्शक किसी ऐसी चीज से जुड़ते हैं, जिसके लिए आपने इतनी मेहनत की हो, खासकर जब वह किरदार आपको आपके कम्फर्ट जोन से बाहर ले जाता है।”
करण रावल द्वारा लिखित और निर्देशित ‘तू है मेरी किरण’ में सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल लीड रोल में हैं। फिल्म में अंकित गुप्ता, शर्लिन सेठ, जरीना वहाब और पूर्णेंदु भट्टाचार्य सपोर्टिंग रोल में हैं।
फिल्म में जहीर इकबाल का किरदार ‘किरण’ (सोनाक्षी सिन्हा) से एकतरफा और बेहद गहरा प्यार करता है। उनका यह प्यार धीरे-धीरे एक खतरनाक जुनून और डर का रूप ले लेता है, जिसमें वे किरण पर दबाव बनाते हैं और उसे नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। जहीर के इस किरदार और उनके अंदाज की तुलना फिल्म ‘डर’ के शाहरुख खान वाले जुनूनी किरदार से भी की जा रही है। यह रोमांटिक कॉमेडी 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज की जा चुकी है।
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इंस्पेक्टर भरत बनकर घर-घर में मशहूर हुए थे सुदेश बेरी, बोले-करियर का बेस्ट रोल था

अभिनेता सुदेश बेरी जल्द ही आगामी पारिवारिक कॉमेडी फिल्म ‘हे भगवान बचा ले’ में नजर आएंगे। अभिनेता ने आईएएनएस के साथ बातचीत में डीडी के दौर को याद करते हुए बताया कि उन्हें दर्शकों ने लोकप्रिय शो ‘सुराग – द क्लू’ में इंस्पेक्टर भरत के किरदार के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया था।
जब अभिनेता से पूछा गया कि उनके किस किरदार ने उन्हें सबसे ज्यादा पहचान दिलाई, तो बेरी ने कहा कि डीडी के मिस्ट्री क्राइम थ्रिलर ‘सुराग – द क्लू’ में क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर भरत चट्टोपाध्याय के तौर पर उनका रोल अब तक के करियर का सबसे बेहतरीन हिस्सा था। उन्होंने आईएएनएस से कहा, “इंस्पेक्टर भरत के किरदार को लोगों ने सच में बहुत पसंद किया था। अब इस शो का पार्ट 2 भी आ गया है।”
अभिनेता ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि उन्हें टीवी सीरियल ‘अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो’ में ठाकुर लोहा सिंह के किरदार के लिए भी काफी तारीफ मिली थी।
दूरदर्शन (डीडी नेशनल) पर प्रसारित होने वाला लोकप्रिय शो ‘सुराग-द क्लू में मशहूर अभिनेता सुदेश बेरी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। गौतम अधिकारी द्वारा निर्देशित और श्री अधिकारी ब्रदर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित इस शो में सुदेश बेरी ने क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर भरत चटर्जी का बेहद लोकप्रिय और दमदार किरदार निभाया था और अमित कपूर ने क्राइम ब्रांच सब इंस्पेक्टर श्रीवास्तव के तौर पर भी काम किया था।
सुदेश बेरी की भारी आवाज और डायलॉग डिलीवरी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था और वे घर-घर में ‘इंस्पेक्टर भरत’ के नाम से मशहूर हो गए थे।
यह एक सस्पेंस और इनवेस्टिगेटिव शो था, जो 14 जून 1999 से 4 नवंबर 2002 तक हर सोमवार रात 10:00 बजे डीडी नेशनल पर प्रसारित होता था। इस सीरियल की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसके हर एपिसोड में एक नई मर्डर मिस्ट्री या क्राइम केस को दिखाया जाता था और उसी एपिसोड में केस सुलझा भी लिया जाता था।
दर्शकों की पुरानी यादों को ताजा करने के लिए हाल ही में 21 सितंबर 2026 से डीडी नेशनल पर ‘सुराग 2.0’ का प्रसारण शुरू किया गया है, जिसमें सुदेश बेरी एक बार फिर अपने आइकोनिक ‘इंस्पेक्टर भरत’ के किरदार में वापस लौटे हैं।
रतन राजपूत स्टारर शो ‘अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो’ में अभिषेक रावत, मुकुल हरीश, रिचा मुखर्जी, दीपिका कक्कड़, आदित्य लखिया, रूपा गांगुली और सुकृति कांडपाल समेत कई अन्य कलाकार मुख्य भूमिका में थे। हालांकि, यह शो 400 से ज्यादा एपिसोड पूरे करने के बाद फरवरी 2011 में ऑफ एयर हो गया था।
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