राजनीति
गुजरात के मुख्यमंत्री को इसलिए हटाया, क्योंकि सरकार कोविड के दौरान विफल रही : भरत सोलंकी
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को इसलिए हटाया गया है, क्योंकि राज्य सरकार कोविड के दौरान सही प्रदर्शन करने और जनता को राहत देने में विफल रही। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता भरत सिंह सोलंकी ने कहा, रूपाणी कोविड के दौरान राहत देने में विफल रहे और हम मांग करते हैं कि नितिन पटेल को भी हटाया जाना चाहिए, क्योंकि वह भी लोगों के हित में काम करने में विफल रहे हैं।
सोलंकी ने कहा कि उनका निष्कासन इस बात का सबूत है कि वह सभी मोचरें पर विफल रहे।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह लोगों का ध्यान हटाने और प्रधानमंत्री पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भाजपा द्वारा चेहरा बचाने की कवायद है, क्योंकि वह राज्य सरकार के प्रदर्शन के आधार पर चुनाव लड़ने का जोखिम नहीं उठा सकती है।
सोलंकी ने कहा, अब कांग्रेस के पास जनता की नजर में एक व्यवहार्य विकल्प बनने की चुनौती और अवसर है।
हालांकि यह पूछे जाने पर कि क्या गुजरात कांग्रेस में सब कुछ ठीक है, सोलंकी ने कहा कि कांग्रेस इसी महीने प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति करने जा रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा ने अन्य कारणों से नगर निगम का चुनाव जीता और विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाएगी चाहे वे कप्तान बदल दें या नहीं।
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शनिवार को गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को गांधीनगर स्थित उनके आवास राजभवन में अपना इस्तीफा सौंपा।
विजय रूपाणी ने राजभवन में संवाददाताओं से कहा, मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं। मुझे पांच साल तक काम करने का मौका देने के लिए मैं पीएम मोदी और पार्टी को धन्यवाद देता हूं।
रूपाणी ने 7 अगस्त 2016 को राज्य के मुख्यमंत्री का पद ग्रहण किया था। वह गुजरात विधानसभा में राजकोट पश्चिम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सूत्रों से पता चला है कि पार्टी रविवार तक रूपाणी की जगह नए सीएम के नाम की घोषणा करेगी। सबसे अधिक संभावना है कि उनकी जगह उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल जगह ले सकते हैं।
राष्ट्रीय समाचार
अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में गतिरोध, व्यापार संतुलन फिलहाल भारत के पक्ष में: वित्त मंत्री सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता जारी है, लेकिन बातचीत एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच गई है, जहां आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है।
राष्ट्रीय राजधानी में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 में बोलते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बेहद कठिन और गहन बातचीत हुई है।
उन्होंने कहा, “बातचीत अभी भी जारी है, हालांकि हम यह मानना चाहेंगे कि दोनों पक्ष एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच गए हैं, जिसके आगे कुछ देना या लेना दोनों के लिए बहुत-बहुत मुश्किल हो सकता है।”
वित्त मंत्री ने कहा कि दोनों देश अब भी यह तलाश कर सकते हैं कि क्या आगे बातचीत की कोई गुंजाइश बाकी है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि फिलहाल व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है और अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की चिंता की वजह वर्षों से भारत के साथ होने वाले व्यापार में नुकसान होना है।
यह बातचीत फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के लिए तय रूपरेखा के तहत हो रही है।
भारत और अमेरिका ने कहा था कि दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखते हुए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे।
इसके अलावा, वित्त मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते को व्यापार समझौतों पर भारत के दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में पेश किया।
उन्होंने कहा कि यह समझौता करीब दो अरब लोगों और वैश्विक जीडीपी के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करेगा।
वित्त मंत्री सीतारमण ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा इस्तेमाल किए गए वाक्यांश का जिक्र करते हुए कहा कि इसे “सभी समझौतों की जननी” कहना उचित होगा।
उन्होंने कहा कि समझौते के तहत भारत ने अपनी 92.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों और व्यापार मूल्य के करीब 97 प्रतिशत हिस्से को खोल दिया है, जबकि यूरोपीय संघ ने व्यापार मूल्य के करीब 99 प्रतिशत और लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोला है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि बाजार पहुंच से जुड़ी प्रतिबद्धताओं का चयन दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता के आधार पर किया गया कि भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
महाराष्ट्र
किसानों की बढ़ती मुश्किलों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र सरकार पर साधा निशाना

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों से मानसून की वापसी की आधिकारिक घोषणा के बाद सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से चेतावनी दी गई कि महाराष्ट्र को गंभीर सूखे का सामना करना पड़ सकता है।
पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में ठाकरे गुट की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि बिना बारिश के मॉनसून के चले जाने से राज्यभर के किसानों की आखिरी उम्मीदें भी टूट गई हैं और महाराष्ट्र का आधे से ज्यादा हिस्सा बुरी तरह सूख गया है।
संपादकीय के अनुसार, इस सीजन में महाराष्ट्र के 36 में से 20 से ज्यादा जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई। मानसून के देर से आने के कारण शुरुआती बुआई में रुकावट आई। लगभग दो महीने तक लगातार बारिश नहीं होने से बुआई की कोशिशें भी बेकार गईं जिससे मराठवाड़ा, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र में फसलें बर्बाद हो गईं।
‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया, “राज्य में सबसे ज्यादा कमी सोलापुर में 58 प्रतिशत दर्ज की गई। बीड में बारिश की कमी 51 प्रतिशत रही। हिंगोली में 49 प्रतिशत, जालना में 48 प्रतिशत और अहिल्यानगर व धाराशिव दोनों में 46 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यहां तक कि तटीय सिंधुदुर्ग, जो आमतौर पर ज्यादा बारिश के लिए जाना जाता है, वहां भी 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।”
राज्य प्रशासन पर निशाना साधते हुए ठाकरे गुट की ओर से आरोप लगाया गया कि सूखे से प्रभावित सोलापुर में स्थानीय अधिकारियों ने गार्डियन मिनिस्टर को सिंचाई वाले हरे-भरे खेत का मुआयना कराया जबकि दूसरी जगहों पर फसलें सूख चुकी थीं। इसे उन्होंने पीड़ित किसानों का क्रूर मजाक बताया।
असामान्य मौसम के कारण यह संकट और भी गंभीर गया है। आम तौर पर अक्टूबर में होने वाली गर्मी अगस्त के मध्य में ही शुरू हो गई और राज्य भर में तापमान 36 डिग्री तक पहुंच गया। संपादकीय में कहा गया है कि इस लगातार गर्मी ने हरे-भरे चरागाहों, कुओं और स्थानीय जल स्रोतों को सुखा दिया है, जिससे पीने के पानी और मवेशियों के चारे की भारी कमी हो गई है।
संपादकीय में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारी आर्थिक तंगी के कारण विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे इलाकों में किसानों की आत्महत्या का नया दौर शुरू हो चुका है। राजनीतिक नेताओं पर सीधा निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि सिर्फ सूखा घोषित कर देने से सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाती।
संपादकीय में कहा गया है कि मॉनसून के लौटने के साथ ही, वे मंत्री और नेता भी सचिवालय लौट गए हैं जो पहले फोटो खिंचवाने के लिए खेतों की मेड़ों का दौरा करते थे और किसान अब भी तुरंत राहत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
राष्ट्रीय समाचार
सीबीआई की कार्रवाई: मुंबई की कंपनी पर 93 करोड़ के बैंक फ्रॉड का केस दर्ज, कई ठिकानों पर छापेमारी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मुंबई की एक कंपनी के खिलाफ 93 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इसी के साथ केंद्रीय जांच एजेंसी ने कंपनी के कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया।
दरअसल, सीबीआई ने मुंबई की एक कंपनी के खिलाफ 93.44 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड का मामला दर्ज किया है और मुंबई में हंजर बायोटेक एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टरों से जुड़ी कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
इसे लेकर सीबीआई ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि यह मामला 30 सितंबर को पंजाब नेशनल बैंक, एसएएम ब्रांच, मुंबई की शिकायत पर दर्ज किया। यह केस हंजर बायोटेक एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड, उसके डायरेक्टरों और गारंटर, अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अज्ञात प्राइवेट व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी की आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दर्ज किया गया है।
इन अपराधों के कारण शिकायतकर्ता बैंक को लगभग 93.44 करोड़ रुपए का कथित गलत नुकसान हुआ। आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश रची, अपनी संबंधित पार्टी के इनवॉइस पर 135 करोड़ रुपए का टर्म लोन लिया और उस पैसे को उन कामों में इस्तेमाल किया या दूसरी जगह भेज दिया, जिनके लिए मंजूरी नहीं मिली थी, जिससे बैंक को नुकसान हुआ।
सीबीआई की ओर से की गई तलाशी के दौरान जांच से जुड़े बैंक के जरूरी दस्तावेज और प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद और जब्त किए गए। वहीं, कंपनी की ओर से की गई साजिश की पूरी हद का पता लगाने, सरकारी कर्मचारियों और प्राइवेट व्यक्तियों सहित इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की पहचान करने और लोन के पैसे का आखिर में कहां इस्तेमाल हुआ, यह पता लगाने के लिए जांच जारी है।
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