अंतरराष्ट्रीय
बाउचर ने अतीत में नस्लीय व्यवहार के लिए माफी मांगी
दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कोच मार्क बाउचर ने अपने खेलने के दिनों के दौरान नस्लीय व्यहवार के लिए माफी मांगी है। बाउचर ने क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) के सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण (एसजेएन) की सुनवाई के लिए एक बयान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने अपने खेल के दिनों में उन पर लगाए गए नस्लीय व्यवहार के आरोपों का जवाब दिया।
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व स्पिनर पॉल एडम्स ने पिछले महीने सुनवाई में खुलासा किया था कि उनपर बाउचर और उनकी टीम के साथियों द्वारा 1990 के दशक के अंत में अपने करियर के दौरान नस्लीय टिप्पणी की गई थी।
इसको लेकर बाउचर ने कहा, “मैं किसी भी आपत्तिजनक आचरण के लिए अनारक्षित रूप से क्षमा चाहता हूं, जिसके लिए मुझे जिम्मेदार ठहराया गया है। मुझे टीम, कोचिंग स्टाफ, चयनकर्ता और सीएसए, विचाराधीन अवधि के दौरान, अधिक संवेदनशील होना चाहिए था और एक ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए था जहां टीम के सभी सदस्य इन मुद्दों को उठा सकते थे।”
अंतरराष्ट्रीय
भारत-अमेरिका वार्ता में व्यापार, प्रौद्योगिकी और रक्षा मामलों को अहम स्थान

वॉशिंगटन, 9 अप्रैल : भारत और अमेरिका ने व्यापार, रक्षा और जरूरी तकनीक के मामले में बातचीत बढ़ाई है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अपने तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे के दौरान वॉशिंगटन में कई उच्चस्तरीय बैठकें कीं।
यह बातचीत पेंटागन और भारत के वाणिज्य विभाग के बीच हुई। इसके साथ ही व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचने वाली पहल पर भी चर्चा की गई।
भारत के विदेश सचिव मिस्री और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने मिलकर भारत-अमेरिकी व्यापार फैसिलिटेशन पोर्टल लॉन्च किया। अमेरिका में भारतीय दूतावास ने इसे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार की पूरी क्षमता को अनलॉक करने की दिशा में एक और कदम बताया।
इस पोर्टल का मकसद मिशन 500 का समर्थन करना है, जिसमें एक्सपोर्टर्स के लिए रजिस्ट्रेशन अब खुले हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का मकसद मार्केट एक्सेस को आसान बनाना और कमर्शियल लिंकेज को गहरा करना है।
पेंटागन में, मिस्री अमेरिकी युद्ध विभाग में अधिग्रहण और सस्टेनमेंट के अवर सचिव माइक डफी के साथ बातचीत की। भारतीय दूतावास ने कहा, “दोनों पक्षों ने पिछले साल हस्ताक्षर किए गए द्विपक्षीय मेजर डिफेंस पार्टनरशिप के फ्रेमवर्क में तय बड़े लक्ष्यों के हिसाब से, भारत और अमेरिका के बीच रक्षा उद्योग, तकनीक और सप्लाई चेन लिंकेज को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।”
उन्होंने हिंद-प्रशांत और पश्चिम एशिया में ताजा गतिविधियों को लेकर गहरी बातचीत के लिए युद्ध नीति उप सचिव एलब्रिज कोल्बी से भी मुलाकात की। यह मीटिंग नई दिल्ली में उनकी हालिया बातचीत के बाद हुई।
रक्षा संबधित बातचीत में दोनों देशों के बीच ओद्योगिक सहयोग, तकनीकी ट्रांसफर और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन पर बढ़ते फोकस पर जोर दिया गया।
वाणिज्य विभाग में मिस्री ने कमर्शियल और जरूरी तकनीक में सहयोग बढ़ाने के लिए अवर सचिव जेफरी केसलर और विलियम किमिट से मुलाकात की। दूतावास ने कहा, “उन्होंने मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने पर भी चर्चा की।”
बैठकों के दौरान आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकता को एक साथ लाने के लिए, खासकर उभरती तकनीक और सुरक्षित सप्लाई चेन जैसे क्षेत्र में, एक कोऑर्डिनेटेड कोशिश को दिखाती है।
विक्रम मिस्री का यह दौरा फरवरी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के वॉशिंगटन दौरे के बाद हो रहा है। यह दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत की लगातार रफ्तार का हिस्सा है।
साथ-साथ सैन्य बातचीत ने भी इस रफ्तार को और बढ़ाया। एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह अमेरिकी दौरे के दौरान पीटरसन स्पेस फोर्स बेस गए और जनरल ग्रेगरी एम. गुइलोट से बातचीत की। इसे भारतीय वायु सेना ने “मुश्किल ऑपरेशनल तरीकों पर नजरिए का एक फायदेमंद आदान-प्रदान” बताया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा “भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम” की समीक्षा करने और व्यापार, रक्षा, विज्ञान और टेक्नोलॉजी, साथ ही आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक विकास सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का मौका देता है।
भारत और अमेरिका ने हाल के सालों में एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग बढ़ाया है। इसमें रक्षा, तकनीक और सप्लाई चेन प्रमुख स्तंभों के रूप में उभरे हैं।
द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ी है और दोनों पक्ष इसे और बढ़ाने का लक्ष्य बना रहे हैं। नए ट्रेड पोर्टल जैसी पहलों से एक्सपोर्ट को मदद मिलने और आर्थिक एकीकरण को गहरा करने की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय
नाजुक युद्धविराम के बीच बातचीत के लिए इस्लामाबाद जाएंगे जेडी वेंस, ईरान के न्यूक्लियर मुद्दे पर रहेगा फोकस

वॉशिंगटन, 9 अप्रैल : अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस हंगरी की अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद अब इस सप्ताह के अंत में इस्लामाबाद के लिए रवाना होंगे। जहां वह ईरान के साथ वार्ता के लिए एक उच्चस्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब वॉशिंगटन हाल के हफ्तों में हुई सैन्य तनातनी के बाद बने नाज़ुक युद्धविराम को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप प्रशासन इस संघर्ष विराम को स्थायी शांति में बदलने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहा है।
व्हाइट हाउस ने बुधवार को कहा कि वार्ता टीम में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल होंगे। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन अब उस चरण के बाद एक संगठित कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पत्रकारों से कहा, “मैं यह घोषणा कर सकती हूं कि राष्ट्रपति इस सप्ताहांत वार्ता के लिए अपनी टीम इस्लामाबाद भेज रहे हैं, जिसका नेतृत्व अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस, विशेष दूत विटकॉफ और श्री कुशनर करेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “इन वार्ताओं का पहला दौर शनिवार को होगा।”
हंगरी से स्वदेश लौटते समय मीडिया से बात करते हुए वेंस ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान और ईरान के बीच समानांतर कूटनीतिक बातचीत पहले ही तय हो चुकी थी। हमारी एक बातचीत है जो इस वीकेंड शुरू होनी है। यह सच है। मुझे लगता है कि यह एक अच्छा कदम है।”
यह बातचीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के बाद घोषित दो हफ्ते के सीजफायर के बाद हो रही है। इस सीजफायर को लेकर सरकार का कहना है कि इसने ईरान की मिलिट्री क्षमता को काफी कम कर दिया है।
प्रेस सचिव लेविट ने कहा, “यह अमेरिका की जीत है जिसे राष्ट्रपति और हमारी जबरदस्त सेना ने मुमकिन बनाया।” व्हाइट हाउस के मुताबिक, मिलिट्री ऑपरेशन के दबाव ने तेहरान को सीजफायर करने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर राजी होने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति के ज्यादा से ज्यादा दबाव और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता से बने फायदे की वजह से ईरानी सरकार ने सीजफायर का प्रस्ताव मांगा और अंत में उसके लिए राजी हो गई।”
वेंस ने कहा कि युद्धविराम का ढांचा शर्तों पर आधारित है। यह एक सीजफायर के साथ-साथ बातचीत की प्रक्रिया है। हम अपनी तरफ से कुछ देते हैं और बदले में उनसे उम्मीद करते हैं कि समुद्री रास्ते (स्ट्रेट्स) दोबारा खोले जाएंगे।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इन शर्तों का पालन नहीं किया गया, तो इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
डिप्लोमैटिक कोशिशों के बावजूद, सरकार ने चेतावनी दी है कि सीजफायर अभी अस्थिर है। लेविट ने कहा, “यह एक नाजुक सीजफायर है। सीजफायर प्रकृति से ही नाजुक होते हैं।”
इस्लामाबाद के कोर एजेंडा पर वेंस ने साफ किया कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम सेंट्रल होगा। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर हथियार न बना पाए। हम चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर फ्यूल छोड़ दे।”
लेविट ने दोहराया कि राष्ट्रपति की शर्तें यानी ईरान में यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह समाप्त करना, अब भी जस की तस बनी हुई हैं और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
वहीं, वेंस ने ईरान के प्रस्तावों पर आई मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा, “तीन अलग-अलग 10-बिंदुओं वाले प्रस्ताव सामने आए थे, लेकिन पहला प्रस्ताव तो तुरंत ही खारिज कर दिया गया।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन का मानना है कि तेहरान अब ज्यादा गंभीरता से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा, “ईरान में जमीन पर जो हो रहा है, वह यह है कि सरकार की स्थिति साफ है, जो कि अमेरिका के साथ बातचीत करने की है।”
अंतरराष्ट्रीय
भारत ने ईरान में मौजूद भारतीयों को दी जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह, युद्धविराम का स्वागत किया

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते के बावजूद, भारत ने बुधवार को ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को सलाह दी कि वे जल्द से जल्द देश छोड़ दें। भारत ने अपने नागरिकों को ईरान में स्थित दूतावास के बताए रास्तों का इस्तेमाल करने का भी सुझाव दिया है।
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को एक एडवाइजरी में कहा, “7 अप्रैल की एडवाइजरी के क्रम में और हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे दूतावास के साथ तालमेल बिठाकर और दूतावास की ओर से सुझाए गए रास्तों का इस्तेमाल करके जल्द से जल्द ईरान छोड़ दें।”
भारतीय दूतावास ने आगे कहा, “यह फिर से दोहराया जाता है कि दूतावास से पहले से सलाह और तालमेल किए बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा तक पहुंचने की कोई कोशिश नहीं की जानी चाहिए।” एडवाइजरी में दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए आपातकालीन नंबर भी शेयर किए हैं।
हालांकि, एक ताजा पोस्ट में भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम का स्वागत किया। इसके साथ ही, उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।
पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हमने पहले भी लगातार जोर दिया है, मौजूदा संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति बेहद जरूरी हैं। इस संघर्ष ने लोगों को पहले ही भारी कष्ट पहुंचाया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व व्यापार नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आवागमन की अबाध स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार का प्रवाह जारी रहेगा।”
यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौता होने के महज कुछ घंटों बाद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष-विराम समझौते के तहत ईरान के खिलाफ हमलों को दो हफ्ते के लिए सशर्त रोकने की घोषणा की। उन्होंने इस कदम को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने के प्रयासों से जोड़ा।
ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्थायी रूप से स्वीकार करने का संकेत दिया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले बंद हो जाते हैं, तो तेहरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देगा।
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