अपराध
एलईएम प्रमुख पाकिस्तान में जेईएम आतंकवादियों के संपर्क में था,मसूद अजहर का भाई भी शामिल
पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने 2019 के पुलवामा के मद्देनजर ‘अंतर्राष्ट्रीय दबाव से बचने’ के लिए अगस्त-सितंबर 2020 में नए आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-मुस्तफा का गठन किया था। सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला और हिदायत उल्लाह मलिक उर्फ हसनैन को भारत का प्रमुख नियुक्त किया। वह अपने ‘पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों’ के माध्यम से जैश के कमांडरों के साथ नियमित रूप से ‘संपर्क’ में था, जिसमें वांछित आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर का भाई मुफ्ती (अब्दुल) रौफ (असगर) भी शामिल था। यह खुलासे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा मलिक समेत एलईएम के छह आतंकवादियों के खिलाफ चार अगस्त को जम्मू में विशेष एनआईए अदालत के समक्ष दायर आरोपपत्र में किए गए हैं।
एनआईए ने अपनी चार्जशीट में, जिसे आईएएनएस द्वारा देखा गया है, उसमें दावा किया कि “एलईएम के गठन के बाद, मलिक उर्फ हसनैन को जेईएम के कमांडरों द्वारा आगे निर्देश दिया गया था कि उसे (पूर्ववर्ती) जम्मू और कश्मीर राज्य और जम्मू क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना है।”
“इस अवधि के दौरान, मलिक रोजाना पाकिस्तानी मोबाइल नंबर (92309 10..) और मौलाना मसूद अजहर के भाई मुफ्ती रौफ (प्लस92336648..) और अशक अहमद नेंगरू (प्लस92355809.. और प्लस92355141…) व्हाट्सएप के जरिए अबू तल्हा उर्फ डॉक्टर के संपर्क में था।”
अजहर, उसके भाइयों और नेंगरू को पहले भी एनआईए ने अगस्त 2020 में पुलवामा आतंकी हमले के मामले की चार्जशीट में नामित किया था।
एनआईए ने आगे दावा किया कि मलिक उन्हें नवगठित एलईएम की प्रगति के बारे में सूचित करता था।
एनआईए ने कहा, “वह जैश-ए-मोहम्मद के कुछ अन्य पाकिस्तान स्थित आकाओं के भी संपर्क में था।”
एनआईए ने कहा कि एलईएम का गठन अगस्त-सितंबर 2020 में मलिक द्वारा जेईएम के शीर्ष स्तर के कमांडरों द्वारा रची गई साजिश को जारी रखते हुए एक नए आतंकवादी संगठन बनाने के लिए किया गया था, जो जेईएम की एक शाखा के रूप में काम करेगा।
उन्होंने कहा कि यह 14 फरवरी, 2019 को पुलवामा के लेथपोरा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले के बाद ‘जांच से बचने’ और ‘जेईएम पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव को बंद करने’ के लिए किया गया था।
एनआईए ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के रडार पर आ गया था।
एनआईए ने कहा, “इस नए संगठन (एलईएम) के गठन के बाद, मलिक को एलईएम का प्रमुख घोषित किया गया था और उसे जेईएम द्वारा अपने स्तर पर रुपयों का प्रबंधन करने और स्थानीय कश्मीरी युवाओं को इस नए आतंकी संगठन में भर्ती करने की सलाह दी गई थी।”
एनआईए के एक प्रवक्ता ने 4 अगस्त को कहा था कि जांच के दौरान, यह पता चला था कि मलिक के नेतृत्व में आरोपी व्यक्तियों ने नवंबर 2020 में शोपियां में जम्मू-कश्मीर बैंक की मुख्य शाखा में 60 लाख रुपये की दिनदहाड़े बैंक लूट को भी अंजाम दिया था।
अधिकारी ने कहा, लूटे गए पैसे का इस्तेमाल एलईएम के आतंकवादियों ने कश्मीर और बिहार से हथियार खरीदने के लिए किया था।
अधिकारी ने कहा, “मलिक ने जम्मू और दिल्ली में कई सुरक्षा प्रतिष्ठानों की भी टोह ली थी और वह पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के अपने आकाओं के लगातार संपर्क में था।”
एनआईए ने इस साल 6 फरवरी को एलईएम और उसके प्रमुख मलिक द्वारा रची गई साजिश के सिलसिले में एक मामला दर्ज किया था, जिन्होंने पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के इशारे पर काम कर रहे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के कार्यालय का चक्कर लगाया था। जेईएम, इस साल मार्च में जम्मू में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाला था।
पिछले हफ्ते जुलाई में, एनआईए ने दो एलईएम आतंकवादियों, मोहम्मद अरमान अली उर्फ अरमान मंसूरी और मोहम्मद एहसानुल्लाह उर्फ गुड्डू अंसारी को गिरफ्तार किया था, जो बिहार के सारण जिले के निवासी हैं। दोनों बिहार से मोहाली और अंबाला में अवैध हथियारों और गोला-बारूद की दो अलग-अलग खेपों को ले जाने में शामिल थे।
मलिक के अलावा, आतंकवाद विरोधी जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां के निवासी बसीरत-उल-ऐन और मुदाबीर मंजूर, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के निवासी जान मोहम्मद तेली, बिहार के छपरा के रहने वाले मुस्ताक आलम और उनके भाई जावेद आलम को नामजद किया है।
एनआईए ने दो मार्च को जांच अपने हाथ में ली थी।
एनआईए ने 31 जुलाई को अनंतनाग के निवासी इरफान अहमद डार को भी गिरफ्तार किया था। एनआईए के अधिकारियों ने कहा कि डार ने जम्मू-कश्मीर में एलईएम आतंकवादियों के लिए लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की और हथियारों और गोला-बारूद की व्यवस्था भी की।
अपराध
भुवनेश्वर में युवक की गोली मारकर हत्या, पुलिस ने आठ आरोपियों को किया गिरफ्तार

शहर के धौली थाना क्षेत्र में 25 वर्षीय युवक की हत्या के मामले में गुरुवार को आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई कमिश्नरेट पुलिस ने बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात को हुई घटना के बाद की।
मृतक की पहचान कटक जिले के बैदेश्वर निवासी टापू नाइक के रूप में हुई है, जो शहर के भरतपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत सीताराम बस्ती में रह रहा था।
पुलिस ने आरोपियों की पहचान उमेश कुमार पटनायक, विष्णुप्रसाद सामंतराय उर्फ पिकुन, रत्नाकर साहू, आलोक जेना, मानस स्वैन, अक्षय प्रधान, कलिंग केशरी पात्रा और चित्रसेन गजेंद्र के रूप में की है।
पुलिस के अनुसार, यह घटना बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात धौली थाना क्षेत्र के शिशुपाल गढ़ गांव में नवज्योति कॉलेज के पीछे स्थित ‘मां दक्षिणकाली कंस्ट्रक्शन’ ऑफिस परिसर में हुई।
कमिश्नरेट पुलिस ने बयान में कहा, “बुधवार को लगभग सात लोगों का एक समूह ‘मां दक्षिणकाली कंस्ट्रक्शन’ ऑफिस परिसर के खुले इलाके में पार्टी कर रहा था। रात करीब 11:30 बजे, समूह में से एक व्यक्ति ने पिस्तौल निकाली और टापू नाइक पर गोली चला दी।”
बताया जा रहा है कि आरोपियों में से एक, उमेश ने पुरी में किसी व्यक्ति से पिस्तौल खरीदी थी। वह और उसके दोस्त (मृतक भी शामिल) इस हथियार के आने की खुशी में पार्टी कर रहे थे। इसी दौरान, शराब के नशे में दोस्तों के बीच बहस हो गई और अचानक भड़के आरोपी पिकुन ने टापू पर गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
गोली चलने के बाद दो आरोपी उमेश और पिकुन तुरंत घायल टापू को स्कूटर से कैपिटल अस्पताल ले गए। बाद में उसे शहर के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस कमिश्नर एस. देवदत्त सिंह ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पुलिस को इस घटना की जानकारी बुधवार रात करीब 1 बजे मिली। उन्होंने कहा कि पुलिस तुरंत कैपिटल अस्पताल पहुंची और बाद में निजी अस्पताल भी गई। पूछताछ के दौरान, उमेश और पिकुन (मृतक को अस्पताल ले गए थे) ने एक झूठी कहानी गढ़ी। उन्होंने दावा किया कि वे मौसी मां ब्रिज के पास बातचीत कर रहे थे, तभी मोटरसाइकिल पर दो अनजान लोग वहां आए। उनमें से एक ने हेलमेट पहना हुआ था, जबकि दूसरे ने अपने चेहरे को मास्क से ढका हुआ था। उन्होंने टापू नाइक पर गोली चलाई और फिर मौके से फरार हो गए।
उन्होंने आगे बताया कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों की जांच से पता चला कि यह पूरी कहानी मनगढ़ंत थी। बाद की पूछताछ में आरोपियों ने अपराध में अपनी संलिप्तता कबूल कर ली और पुलिस को बताया कि उन्होंने पिस्तौल को एक जलाशय में फेंक दिया था। पुलिस ने अब उस हथियार को बरामद कर लिया है।
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जंतर मंतर प्रदर्शन : दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए बुलाया

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन मामले के सिलसिले में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को गुरुवार को पूछताछ के लिए बुलाया है। सीजेपी सदस्यों को दोपहर में राजौरी गार्डन स्थित दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है।
इससे पहले अक्टूबर में भी दिल्ली पुलिस ने दास और रांका को समन भेजा था। हालांकि, वे समन पर पेश नहीं हुए और बाद में पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच के सामने हाजिर होने के लिए और समय मांगा।
सीजेपी नेताओं के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले अक्टूबर में क्राइम ब्रांच को सौंप दिए गए थे। ये मामले 13 अक्टूबर की उस घटना से जुड़े हैं, जब दास, रांका और अजिंक्य शिंदे 11 अन्य लोगों के साथ जंतर-मंतर में घुस गए थे। जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह के रूप में हटा दिया गया है।
दिल्ली पुलिस ने इन सभी को हिरासत में ले लिया था। शिंदे को तो जमानत बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया लेकिन सौरव दास और रांका एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे।
सीजेपी सदस्य मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध कर रहे थे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे भी लगाए।
21 अक्टूबर को एक सप्ताह की न्यायिक हिरासत के बाद दास और रांका को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। उन्होंने एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के सामने लिखित अंडरटेकिंग दी, जिसमें उन्होंने शांति बनाए रखने और जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन का आह्वान न करने का भरोसा दिलाया था।
जंतर-मंतर पर अनाधिकृत प्रवेश के मामले में चल रही जांच पूरी होने तक एसईएम ऋतु राज ने दोनों कार्यकर्ताओं को 50,000-50,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानत बांड भरने पर रिहा करने का आदेश दिया।
अपने लिखित वचनपत्रों में दोनों कार्यकर्ताओं ने शांति भंग न करने का वादा किया और न्यायपालिका तथा एसईएम कोर्ट सहित उसकी सभी इकाइयों में पूरा भरोसा जताया। एसईएम कोर्ट ने माना कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135(3) के तहत शांति भंग या सार्वजनिक व्यवस्था में खलल को रोकने के लिए तत्काल कदम, बांड भरवाने और लिखित वचनपत्र लेने के माध्यम से प्रभावी ढंग से उठाए जा सकते हैं।
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एआई डीपफेक और अश्लील तस्वीरों से परेशान रूपाली गांगुली पहुंचीं बॉम्बे हाईकोर्ट, 4 नवंबर को होगी सुनवाई

टीवी की मशहूर अभिनेत्री रूपाली गांगुली ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कई ऑनलाइन पोर्टल उनकी तस्वीरों और अन्य कंटेंट का इस्तेमाल बिना अनुमति कर रहे हैं। इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से उनकी नकली तस्वीरें बनाई जा रही हैं और कुछ वीडियो के साथ भी छेड़छाड़ की गई है।
रूपाली का कहना है कि इस तरह तैयार किए गए कंटेंट को कुछ ऐसी वेबसाइटों पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री दिखाई जाती है।
अभिनेत्री ने अपनी याचिका में इसे अपने पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन बताया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की पहचान, तस्वीर, आवाज और छवि का इस्तेमाल उसकी सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत से इस मामले में दखल देने की मांग की है।
इस याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में 4 नवंबर को सुनवाई होगी। इस मामले को जस्टिस माधव जामदार की बेंच सुनेगी।
रूपाली से पहले कई दूसरी अभिनेत्रियां भी अपनी तस्वीरों और पहचान के गलत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत पहुंच चुकी हैं। हाल ही में अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि कई वेबसाइट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी तस्वीरों, आवाज और पहचान का इस्तेमाल करके एआई से नकली वीडियो, मॉर्फ की गई तस्वीरें और अश्लील कंटेंट तैयार कर रहे हैं।
इस मामले में कोर्ट ने सामंथा को अंतरिम राहत दी थी। अदालत ने गूगल, मेटा और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाले चिह्नित कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया था।
इससे पहले जुलाई में अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी एआई से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो और मॉर्फ तस्वीरों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश दिए थे।
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