राजनीति
35 फीसदी जनता ने माना, अफगानिस्तान में अमेरिकी मिशन खत्म करना सही फैसला नहीं
आईएएनएस सी वोटर ट्रैकर के अनुसार, अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान में अपने सैन्य मिशन को समाप्त करने को लेकर 35 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि यह इस समय को देखते हुए सही निर्णय नहीं है, जबकि 34 प्रतिशत ने इस निर्णय का समर्थन किया। ट्रैकर ने पाया कि जैसे-जैसे अफगानिस्तान में अमेरिका का मिशन की समाप्ति की ओर आ रहा है 43 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि पिछले बीस वर्षों में अमेरिका के सैन्य मिशन के दौरान अफगानिस्तान की स्थिति में सुधार हुआ है, जबकि 31 प्रतिशत ने कहा कि वे इस समंबंध में कुछ कह नहीं सकते।
ट्रैकर का नमूना आकार 1815 है ।
यह सर्वेक्षण उन रिपोर्टों के बीच आया है जिनमें कहा जा रहा है कि तालिबान अब अफगानिस्तान के 85 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर रहा है और कई लोग इस देश में गृहयुद्ध की भविष्यवाणी कर रहे हैं।
एक ओपीनियन पीस में, वाशिंगटन पोस्ट ने कहा, “अब, यह त्रासदी कई निराशावादियों की कल्पना से भी अधिक तेजी से सामने आ रही है। हाल के हफ्तों में, तालिबान बलों ने एक राष्ट्रव्यापी हमले में दर्जनों जिलों पर कब्जा कर लिया है, कई प्रांतीय राजधानियों को घेर लिया है और काबुल में प्रमुख सड़कों को अवरुद्ध कर दिया है।”
अफगानिस्तान में तैनात शीर्ष अमेरिकी सैन्य कमांडर, जनरल ऑस्टिन एस मिलर ने गम्भीर शब्दों में चेतावनी दी कि ‘गृह युद्ध निश्चित रूप से एक रास्ता है जिसकी कल्पना की जा सकती है,’ यह कहते हुए उन्होंने चेताया कि ‘यह दुनिया के लिए एक चिंता का विषय होना चाहिए।’
वाशिंगटन पोस्ट ने कहा कि यह कम से कम, बाइडन के लिए एक चिंता का विषय होना चाहिए, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से एक कठिन हालात विरासत में मिला है लेकिन इसे ठीक करने के बजाय अमेरिकी मिशन खत्म का विकल्प चुना गया। राष्ट्रपति को सेना की वापसी के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। आज के अफगानिस्तान को बनाने में संयुक्त राज्य अमेरिका ने दो दशक बिताए हैं। इसके बजाय, वह इस देश की दुर्दशा के प्रति उदासीन रहा है।
जैसे ही अमेरिकी सलाहकार और हवाई समर्थन हट रहा है, तालिबान द्वारा अफगान सेना की इकाइयों का सफाया किया जा रहा है, या अफगान सैनिक बिना लड़ाई के आत्मसमर्पण कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हताशा में, सरकार ने 1990 के दशक में देश को त्रस्त करने वाले अराजक संघर्ष और दस्युओं की वापसी को जोखिम में डालते हुए, जातीय मिलिशिया को फिर से संगठित करने के लिए आमंत्रित किया है।
वाशिंगटन पोस्ट ने कहा है कि उस समर्थन के बावजूद भी सरकार शायद टिक न पाए। वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक पिछले सप्ताह सामने आए अमेरिकी खुफिया समुदाय के आकलन में कहा गया है कि यह अमेरिकी प्रस्थान के छह से 12 महीनों के भीतर गिर सकती है।
अगर ऐसा होता है, तो न केवल अफगानों को खतरा होगा। खुफिया समुदाय और कांग्रेस द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, अल-कायदा देश में अपने ठिकानों को फिर से स्थापित कर सकता है। शरणार्थियों का पलायन शुरू हो सकता है जिससे पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश अस्थिर हो सकते हैं और वे यूरोप की सीमाओं पर जमा हो सकते हैं।
ईरान, चीन और रूस जैसे अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि इराक, ताइवान और यूक्रेन जैसे अमेरिकी सहयोगियों के लिए खड़े होने के लिए बिडेन के पास साहस की कमी है।
राष्ट्रीय समाचार
केरल हाईकोर्ट ने तिरुवनंतपुरम के 20 भाजपा पार्षदों को दोबारा शपथ लेने का दिया निर्देश

केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 भाजपा पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश उस राजनीतिक रूप से संवेदनशील विवाद के फिर से सामने आने के बाद आया है, जिसमें उनके पदभार ग्रहण करने के बाद ली गई शपथ की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। अदालत के इस निर्णय से में लंबे समय से चल रहा यह विवाद फिर से चर्चा में आ गया है।
यह विवाद इस साल जनवरी से जुड़ा है, जब केरल उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इस मामले में पार्षदों को नोटिस जारी किए थे। यह याचिका सीपीआई(एम) के पार्षद एस. पी. दीपक ने दायर की थी।
याचिका में भाजपा के पार्षदों द्वारा ली गई शपथ की वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि कई पार्षदों ने शपथ लेते समय निर्धारित कानूनी प्रारूप का पालन करने के बजाय विशिष्ट देवी-देवताओं के नाम लिए।
पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि वैधानिक प्रारूप के अनुसार निर्वाचित प्रतिनिधियों को या तो ईश्वर के नाम पर शपथ लेनी होती है या फिर “गंभीर प्रतिज्ञान” करना होता है।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि जब कानून में शपथ का एक निश्चित प्रारूप निर्धारित है, तो उसे कई देवी-देवताओं के नाम पर कैसे लिया जा सकता है।
इसी याचिका पर कार्रवाई करते हुए अदालत ने बुधवार को 20 पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता दीपक ने कहा कि अदालत का यह आदेश उनके इस तर्क की पुष्टि करता है कि शपथ से जुड़ी प्रक्रियाओं और मानकों का उल्लंघन हुआ था। उनके अनुसार, कुछ पार्षदों ने निर्धारित शब्दों का पालन करने के बजाय विशिष्ट देवी-देवताओं के नाम लेकर शपथ ली थी।
अपनी याचिका में दीपक ने शपथों को रद्द करने की भी मांग की थी, यह तर्क देते हुए कि कई देवी-देवताओं के नाम पर शपथ लेना कानूनी रूप से अमान्य है।
उन्होंने पहले यह भी मांग की थी कि मामले के अंतिम निर्णय तक पार्षदों को नगर निगम की बैठकों में भाग लेने और मानदेय लेने से रोका जाए। हालांकि अदालत ने यह अंतरिम अनुरोध खारिज कर दिया और उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति दी, साथ ही स्पष्ट किया कि उनकी शपथ की वैधता अंतिम फैसले पर निर्भर रहेगी।
गौरतलब है कि भाजपा ने पहली बार राज्य के इतिहास में तिरुवनंतपुरम नगर निगम में जीत दर्ज की थी, जिसमें उसने चार दशकों से शासन कर रही सीपीआई(एम) को सत्ता से बाहर कर दिया था।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र विधानसभा में तीन तलाक़ और समान नागरिक संहिता को लेकर हंगामा, सना मलिक ने क़ुरान और शरिया लागू करने की मांग की।

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा में उस समय हंगामा हो गया जब तीन तलाक और यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर बहस चल रही थी। इस दौरान एनसीपी अजित पवार ग्रुप की नेता और विधायक सना मलिक ने गुस्से में कहा कि एक से ज़्यादा शादी सिर्फ मुसलमानों में ही नहीं, दूसरे धर्मों में भी आम है। सिर्फ मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा है। इस पर बीजेपी ने हंगामा करते हुए कहा कि देश संविधान से चलेगा, कुरान या शरिया से नहीं।
विधानसभा के मॉनसून सेशन के दूसरे दिन ‘तीन तलाक’, एक से ज़्यादा शादी और ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ (यूसीसी) जैसे बहुत सेंसिटिव मुद्दों पर सत्ताधारी और विपक्षी विधायक आपस में भिड़ गए। बीजेपी विधायक देवयानी फ्रांडे ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का सवाल उठाया तो एनसीपी (अजित पवार ग्रुप) विधायक सना मलिक ने गुस्से में रुख अपनाया। देवयानी ने यहां यूसीसी लागू करने की मांग की। ध्यानाकर्षण नोटिस
बीजेपी विधायक देवयानी ने तीन तलाक का मुद्दा उठाया। “तीन तलाक और एक से ज़्यादा शादी की वजह से मुस्लिम महिलाओं के साथ बहुत नाइंसाफ़ी हो रही है। सिर्फ़ पाकिस्तान में एक से ज़्यादा शादी की प्रथा है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। राज्य सरकार यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड कब लागू करेगी?” यह सवाल पूछे जाने पर गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने यूसीसी के लिए कमेटी बनाने की जानकारी दी और कहा कि इस पर सरकार का रुख़ साफ़ है, राज्य सरकार यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लागू करने पर पॉज़िटिव तरीके से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने एक कानूनी ड्राफ़्ट भी तैयार किया है और एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का फ़ैसला किया है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद यूसीसी को लागू करने के लिए कदम उठाए जाएँगे। यूसीसी लागू होने के बाद, यह देश के हर नागरिक पर एक जैसा लागू होगा। इसलिए, एक से ज़्यादा शादी और ज़्यादा शादियों पर रोक लगेगी।
एक मुसलमान कुरान और सुन्नत को मानता है और शरिया से बंधा होता है।
विधायक सना मलिक ने बहस में हिस्सा लेते हुए आक्रामक रुख अपनाया और कहा कि मुसलमान कुरान, सुन्नत और शरिया को मानते हैं और बीजेपी को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी और उसके सदस्य कहते हैं कि पाकिस्तान में फलां कानून लागू है, तो पाकिस्तान कुछ अनोखा नहीं कर रहा है। वह कुरान और हदीस को मानता है। वह सिर्फ कुरान की शिक्षाओं को लागू करता है। इसलिए, मैं मांग करती हूं कि यहां भी कुरान की शिक्षाओं का पालन किया जाए। क्या सिर्फ मुस्लिम पुरुष ही एक से ज़्यादा शादी करते हैं? दूसरे धर्मों में भी एक से ज़्यादा शादी होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि सिर्फ मुस्लिम धर्म में ही एक से ज़्यादा शादी के लिए एक जैसे नियम और कानून हैं। सना मलिक ने कहा, “तलाक हसन और ‘तलाक अहसन’ वो टाइप हैं जिन्हें हम फॉलो करते हैं। लेकिन ‘तलाक बिदअत’ अपने आप में एक अलग कल्चरल प्रैक्टिस है, कुरान में इसका कहीं ज़िक्र नहीं है। इसीलिए यह इंडिया में नहीं था, इसलिए सरकार ने इसे खत्म कर दिया। जिस पर मुसलमानों को कोई एतराज़ नहीं है क्योंकि मुसलमान तलाक बिदअत में यकीन नहीं करते।” कुरान को लागू करने पर सना मलिक के बयान पर बीजेपी मेंबर भड़क गए और कई मेंबर ने इस पर एतराज़ भी जताया। कई मेंबर ने सना मलिक से कहा, “हमें कुरान पर लेक्चर मत दो। यह देश कुरान से नहीं बल्कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान से चलेगा।” इस बीच, जब हाउस में सना मलिक का विरोध हुआ और बीजेपी ने उनके इस गुस्से पर हंगामा किया, तो नेशनलिस्ट कांग्रेस (शरद पवार ग्रुप) के स्टेट प्रेसिडेंट जयंत पाटिल ने सना के स्टैंड का सपोर्ट किया और कहा कि हाउस की परंपरा है कि अगर कोई अपनी राय रखता है, तो उसे बोलने की आज़ादी मिलनी चाहिए। सना मलिक की सलाह पसंद आए या न आए, उनकी भाषा बिल्कुल भी सही नहीं है। मैं सना मलिक के स्टैंड का सपोर्ट करता हूं।
मॉनसून सेशन में ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ (यूसीसी) और ‘ट्रिपल तलाक’ के मुद्दे पर रूलिंग ग्रैंड अलायंस के बीच आइडियोलॉजिकल टकराव और असहमति सामने आई है। एक तरफ बीजेपी और शिंदे ग्रुप हिंदुत्व और संविधान का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम विधायक सना मलिक शरिया और इस्लाम को लेकर हाउस में बोल्डनेस दिखा रही हैं और मुस्लिम मुद्दों पर बीजेपी को पूरी ताकत से जवाब दिया है। टकराव के और तीखे होने का चांस अब साफ हो गया है। दूसरी तरफ, यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को एड्रेस करते हुए नीतीश राणे ने भी मुसलमानों के खिलाफ जहर उगला और कहा कि यह देश डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान पर चलेगा। उन्होंने कहा कि जब हाउस में इस मुद्दे पर चर्चा हो रही थी, तो ऐसा लग रहा था जैसे हम कराची या पाकिस्तान के हाउस में बैठे हों। उन्होंने कहा कि यह हिंदुत्व की सरकार है। जब उनसे पूछा गया कि महायोति की विधायक सना मलिक ने सदन में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड और मुस्लिम महिलाओं से जुड़े सवाल पर आपत्ति जताई और कहा कि महाराष्ट्र में सिर्फ़ मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं, तो नीतीश राणे ने कहा कि जो भी हिंदुत्व का मुद्दा उठाएगा, हम उसका साथ देंगे।
राष्ट्रीय समाचार
भारत ने महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की 56 नीलामियां सफलतापूर्वक संपन्न कीं: सरकार

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। सरकार ने मंगलवार को कहा कि भारत ने महत्वपूर्ण (क्रिटिकल) और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की 56 नीलामियां सफलतापूर्वक संपन्न कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जो देश की घरेलू खनिज आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने और भारत के क्रिटिकल मिनरल मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
खान मंत्रालय ने केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सातवें चरण की नीलामी के तहत 10 महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की है। इसके साथ ही अब तक सफलतापूर्वक नीलाम किए गए ऐसे खनिज ब्लॉकों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा नीलामी के लिए रखे गए 88 अलग-अलग खनिज ब्लॉकों में से 56 की सफल नीलामी हुई है, जो 63 प्रतिशत से अधिक की सफलता दर को दर्शाती है।
सातवें चरण की नीलामी ने भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और विकास के दायरे को और बढ़ाया है। पहली बार केंद्र सरकार ने गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना में क्रिटिकल मिनरल ब्लॉकों की नीलामी की।
इस चरण में ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई), वैनेडियम, टाइटेनियम, ग्लॉकोनाइट, रॉक फॉस्फेट और अन्य संबंधित खनिजों के ब्लॉक शामिल थे। इससे देश में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज का भौगोलिक दायरा और विस्तृत हुआ है।
सातवें चरण की नीलामी में कुल 19 खनिज ब्लॉक शामिल थे, जिनमें महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज मौजूद हैं।
यह नीलामी खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा समय-समय पर संशोधित खनिज (नीलामी) नियम, 2015 के तहत आयोजित की गई।
क्रिटिकल मिनरल ब्लॉकों की नीलामी के साथ-साथ खान मंत्रालय ने एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (ईएल) नीलामी के दूसरे चरण को भी सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिससे भारत के खनिज अन्वेषण तंत्र को और मजबूती मिली है।
दूसरे चरण में पहली बार केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में एक्सप्लोरेशन लाइसेंस ढांचे का विस्तार किया। इससे महत्वपूर्ण और गहराई में मौजूद खनिजों की खोज के लिए नए अवसर खुलेंगे।
सरकार ने बताया कि दूसरे चरण की सफल नीलामी के बाद एक्सप्लोरेशन लाइसेंस व्यवस्था लागू होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा सफलतापूर्वक नीलाम किए गए एक्सप्लोरेशन लाइसेंस ब्लॉकों की कुल संख्या 11 हो गई है।
एक्सप्लोरेशन लाइसेंस व्यवस्था का उद्देश्य महत्वपूर्ण और गहराई में मौजूद खनिजों की व्यवस्थित खोज को बढ़ावा देना है, जिसके तहत निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को खनिज अन्वेषण में भाग लेने का अवसर मिलता है।
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