महाराष्ट्र
बीजेपी नेताओं को नहीं भाया उद्धव का आर्थिक पैकेज, फडणवीस बोले- यह तो केंद्रीय योजनाओं की रीपैकेजिंग
राज्य में कोरोना संक्रमण को प्रतिबंधित करने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा मंगलवार को घोषित किए गए सख्त प्रतिबंधों के दौरान रेहड़ी-पटरी वालों, पंजीकृत निर्माण मजदूरों और लाइसेंस प्राप्त ऑटोरिक्शा ड्राइवरों के लिए 5476 करोड़ रुपये का जो राहत पैकेज घोषित किया है, वह बीजेपी नेताओं को पसंद नहीं आया है। विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को आरोप लगाया कि महा विकास आघाड़ी सरकार केंद्र की योजनाओं को कुछ बदलाव के साथ कोविड-19 पाबंदी से प्रभावित लोगों के लिए खास कदम के तहत पेश कर रही है। राज्य सरकार की घोषणाएं छलावा हैं, क्योंकि केंद्र की योजनाओं को ही कुछ बदलाव के साथ पेश कर राज्य की अपनी योजना बताई गई। फडणवीस ने आरोप लगाया कि 2011 में गलत तरीके से सर्वेक्षण करने के कारण राज्य में करीब 88 लाख लोग खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे से बाहर हैं और मुख्यमंत्री ने इन लोगों के लिए किसी सहायता की घोषणा नहीं की है।
विधान परिषद के विधायक प्रसाद लाड ने कहा कि मजदूरों, फेरी वालों और टैक्सी-रिक्शा चालकों को कम से कम 5,000 रुपये की जरूरत है, जबकि सरकार ने 1500 रुपये देने की घोषणा की है। पूर्व राज्यमंत्री व भाजपा नेता अमरजीत मिश्र ने कहा है कि मजदूरों को भोजन देने का काम सरकार का है, पर उद्धव सरकार ने परप्रांतीय मजदूरों के दर्द को अनदेखा किया है। मजदूर कहीं का भी हो, उसे आधार कार्ड देख कर राशन देने की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। सरकार ने फेरी वालों को खाद्य पदार्थ बेचने की इजाजत दी, पर खरीददारों को बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी।
महाराष्ट्र
मुंबई महानगर क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के लिए महाराष्ट्र सरकार की व्यापक जल योजना तैयार

भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्र मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक जल स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार ने मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के लिए एक व्यापक 25 वर्षीय जल प्रबंधन योजना का मसौदा तैयार करने हेतु एक उच्च स्तरीय अध्ययन समूह का गठन किया है।
जल संसाधन विभाग द्वारा जारी सरकारी संकल्प (जीआर) के माध्यम से दिए गए निर्देश में विशेषज्ञ पैनल को भविष्य की मांग का मूल्यांकन करने, उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने, संरचनात्मक कमियों की पहचान करने और तीन महीने के भीतर एक व्यावहारिक रूपरेखा प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
प्रमुख नगर निगमों, औद्योगिक क्षेत्रों और तेजी से विकसित हो रहे अर्ध-शहरी केंद्रों से युक्त मुंबई महानगर क्षेत्र जनसंख्या वृद्धि, वाणिज्यिक विस्तार और बड़ी परियोजनाओं के कारण बढ़ती जल मांग का सामना कर रहा है।
वर्तमान में यह क्षेत्र राज्य के बांधों और नगर निगमों के जल स्रोतों के मिश्रित नेटवर्क पर निर्भर है, लेकिन सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि खंडित प्रबंधन अब व्यवहार्य नहीं है।
अध्ययन समूह घरेलू, औद्योगिक, वाणिज्यिक, संस्थागत और निर्माण क्षेत्रों में एकीकृत ऑडिट करेगा ताकि तीन प्रमुख समय सीमाओं (2031, 2041 और 2051) के लिए सटीक मांग अनुमान स्थापित किए जा सकें। नवगठित अध्ययन समूह की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त सचिव संजय बेलसारे कर रहे हैं।
विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों में अंतर-एजेंसी समन्वय सुनिश्चित करने के लिए पैनल में प्रमुख शहरी और क्षेत्रीय प्राधिकरणों के नेतृत्व को शामिल किया गया है।
इस अध्ययन समूह में कोंकण क्षेत्र के मुख्य अभियंता (सदस्य सचिव), बीएमसी और एमएमआरडीए के अतिरिक्त आयुक्त, ठाणे, नवी मुंबई और कल्याण-डोम्बिवली के आयुक्त, और महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी), महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (एमजेपी), और महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (एमआरएसएसी) के प्रतिनिधि शामिल हैं। अध्ययन समूह का कार्यक्षेत्र बांध निर्माण के पारंपरिक समाधानों से परे है, जिसमें सतत मांग प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन को प्राथमिकता दी गई है।
अध्ययन समूह पूर्ण हो चुकी, चल रही और प्रस्तावित जल आपूर्ति परियोजनाओं की समीक्षा करेगा ताकि अनुमानित स्थानीय कमियों के मुकाबले कुल सुनिश्चित उपज की गणना की जा सके, पुनर्चक्रित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग, बड़े पैमाने पर वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जल निकायों के पारिस्थितिक पुनरुद्धार का मूल्यांकन किया जा सके, गैर-राजस्व जल (एनआरडब्ल्यू) को कम करने, वितरण रिसाव को दूर करने और मीटरिंग प्रणालियों के आधुनिकीकरण के लिए सख्त उपायों की सिफारिश की जा सके और मानसून चक्र में परिवर्तन, अनियमित अत्यधिक वर्षा, लंबे समय तक सूखे और तटीय जलभंडारों पर बढ़ते समुद्री जल के प्रभाव से जुड़ी कमजोरियों का आकलन किया जा सके।
अंतिम रिपोर्ट में एक एकीकृत जल सुरक्षा योजना 2051 प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें प्राथमिकता वाले अवसंरचना परियोजनाओं, अनुमानित पूंजीगत व्यय, कार्यान्वयन समयसीमा, वित्तपोषण तंत्र और स्पष्ट अंतर-विभागीय जिम्मेदारियों का विवरण दिया जाएगा।
जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीली और स्पष्ट जल रणनीति तैयार करके, राज्य का लक्ष्य भविष्य में आपूर्ति संबंधी बाधाओं को दूर करना और अगले पच्चीस वर्षों तक पूरे क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखना है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र: 500 करोड़ लेनदेन और ऑडियो क्लिप मामले में संजय राउत ने अमित शाह को लिखा पत्र, ईडी जांच की मांग

शिवसेना-यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल से जुड़ी 500 करोड़ रुपए के कथित लेनदेन और वायरल ऑडियो क्लिप मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। संजय राउत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच की मांग करते हुए कहा कि यह मामला ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए) के अंतर्गत आता है।
सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र में लिखा, “आप इस बात से अच्छी तरह वाकिफ होंगे कि 20 अक्टूबर को मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने चौंकाने वाले आरोप लगाए और खुलासे किए। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र में भाजपा की कोर टीम के वरिष्ठ नेताओं से 500 करोड़ रुपए लिए थे। यह रकम उनके बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिए मनोज जरांगे तक पहुंचाई जानी थी, लेकिन यह पैसा उन तक कभी नहीं पहुंचा।”
शिवसेना-यूबीटी के सांसद ने आरोप लगाते हुए कहा कि जरांगे पाटिल के खुलासों के मुताबिक, यह सब 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से ठीक पहले किया गया था, ताकि उन्हें चुप कराया जा सके और मराठा आरक्षण के लिए चल रहे उनके आंदोलन को खत्म किया जा सके। राउत ने कहा, “मनोज जरांगे की ओर से एक ऑडियो क्लिप के रूप में किए गए ये खुलासे कई मायनों में बेहद गंभीर हैं। हालांकि, सबसे चौंकाने वाली और गंभीर बात 500 करोड़ रुपए की इतनी बड़ी रकम का इसमें शामिल होना है।”
राउत ने कहा कि गहन जांच होनी चाहिए कि किसने किसे 500 करोड़ रुपए दिए और अगर यह पैसा जरांगे पाटिल तक नहीं पहुंचा, तो आखिर यह कहां गायब हो गया? इतनी बड़ी रकम कहां से आई और कहां चली गई? ऐसा लगता है कि यह ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का एक स्पष्ट मामला है और इसकी जांच भी इसी तरह से की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “इन सवालों के जवाब तुरंत मिलने चाहिए। इस मामले की पूरी जांच के लिए मेरा आपसे अनुरोध है कि आप महाराष्ट्र पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को जल्द से जल्द जांच करने का निर्देश दें। साथ ही, सच्चाई को महाराष्ट्र और देश की जनता के सामने लाएं और इस घोटाले में शामिल लोगों को गिरफ्तार करें।”
गृह मंत्री को लिखे पत्र में राउत ने कहा, “आपके नेतृत्व में, ईडी भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच में सबसे आगे रही है। ईडी ने ऐसे मामलों की जांच करने के लिए अपनी एक पहचान बनाई है, जिनमें बहुत कम रकम शामिल होती है।”
शिवसेना-यूबीटी के सांसद ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “मार्च 2021 में, मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख ने उनसे हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करके उन्हें देने के लिए कहा था। यह परमबीर सिंह का सिर्फ एक आरोप था, जिसके समर्थन में कोई सबूत नहीं था। इसके बावजूद, ईडी ने बहुत तत्परता दिखाई और गृह मंत्री अनिल देशमुख को गिरफ्तार भी कर लिया।”
उन्होंने कहा, “इसकी तुलना में, मनोज जरांगे पाटिल की ओर से किए गए खुलासे कहीं अधिक गंभीर हैं, क्योंकि उन्होंने एक ऑडियो क्लिप के रूप में सबूत दिए हैं और इसमें शामिल रकम भी बहुत बड़ी है।” राउत ने कहा, “मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप महाराष्ट्र पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए) लागू करने का निर्देश दें।”
अपराध
मुंबई: गरबा खेलने जाने से नाराज पति ने पत्नी पर चाकू से किया हमला, आरोपी गिरफ्तार

मुंबई से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। दरअसल, पवई इलाके में गरबा खेलने जाने से नाराज पति ने अपनी पत्नी पर चाकू से हमला किया है। इस हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।
पुलिस के मुताबिक, यह घटना महात्मा फुले नगर, आईआईटी पवई इलाके में केडी अस्पताल के सामने समता मित्र मंडल के पास हुई। पीड़िता की पहचान वैशाली महेश रजत (30) के रूप में हुई है, जो गरबा खेलने गई थीं। इसी बात से नाराज होकर उसके पति महेश सुभाष रजत (35) ने उसके पेट में चाकू घोंप दिया और उसकी हत्या करने की कोशिश की।
पीड़िता की शिकायत के आधार पर पार्कसाइट पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धारा 109(1) और 352 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच जारी है।
चाकूबाजी की इसी प्रकार की एक दूसरी घटना नई दिल्ली से सामने आई, जहां मौर्य एनक्लेव पुलिस ने हत्या के मामले में चार नाबालिगों को हिरासत में लिया है। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद कर लिया है।
दरअसल, मंगलवार को मौर्य एनक्लेव पुलिस स्टेशन को एक पीसीआर कॉल मिली कि पीतमपुरा के क्यूयू ब्लॉक स्थित चौधरी डेयरी के पास किसी को चाकू मार दिया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। घायलों को बीएसए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने एक को मृत घोषित कर दिया, जिसकी पहचान अरुण के रूप में हुई है। वहीं, दूसरे मरीज की पहचान आशु के रूप में हुई है, जिसे चाकू लगने से चोटें आई हैं।
जांच के दौरान पता चला कि यह घटना कथित तौर पर एक लड़की से जुड़े विवाद के कारण हुई थी। इस मामले को लेकर हुई बहस के बाद आरोपियों ने दोनों पीड़ितों पर खंजर से हमला कर दिया।
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