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Tuesday,07-April-2026
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आरोपी को दुष्कर्म पीड़िता से शादी का सुझाव कभी नहीं दिया : सीजेआई

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 मुख्य न्यायाधीश एस.ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सोमवार को कहा कि ‘आरोपी को रेप पीड़िता से शादी करने’ संबंधी कथित सुझाव को लेकर मीडिया में जो खबरें आईं, या सामाजिक कार्यकर्ताओं के जो बयान सामने आए, वे सभी ‘संदर्भ से परे’ हैं। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि यह हमेशा महिलाओं को सर्वाधिक सम्मान और आदर देता है। बोबडे की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ में जस्टिस ए.एस. बोपन्ना और जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन भी शामिल हैं। बहरहाल, पीठ ने कहा कि कोर्ट ने मामले के संदर्भ में आरोपी से केवल यह पूछा था कि क्या वह शिकायतकर्ता (पीड़िता) से शादी करेगा। कोर्ट ने उससे यह कभी भी नहीं कहा कि “आप जाइए और उससे शादी कर लीजिए।”

मुख्य न्यायाधीश ने जोर देकर कहा कि मामले में अदालत की कार्यवाही को पूरी तरह से गलत रूप में पेश किया गया।

गौरतलब है कि पीठ ने 14-वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की थी। पीड़िता ने अधिवक्ता वी.के. बीजू के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और 26 माह के गर्भ को गिराने का अनुरोध किया था।

पिछले हफ्ते, नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी 23-वर्षीय शख्स की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान पीठ ने आरोपी से पूछा था, “क्या तुम उससे शादी करोगे?”

शादी करने के वादे से मुकरने के बाद लड़की ने आरोपी के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 5 फरवरी को, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करते हुए लड़की के आवेदन की अनुमति दी।

हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सोमवार को बीजू ने कहा कि वह पूरी तरह से उन रिपोटरें के खिलाफ हैं, जिसने अदालत की छवि को धूमिल किया। पीठ ने कहा कि अदालत महिलाओं को सबसे अधिक सम्मान देती है और यहां तक कि सुनवाई में कभी भी आरोपी को पीड़िता से शादी करने का सुझाव नहीं दिया।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 165 के अनुसार अदालत को तथ्यों की खोज के लिए या किसी भी उद्देश्य के लिए कोई भी प्रश्न पूछना अनिवार्य है।

मेहता ने कहा कि अदालत के बयानों को संदर्भ से बाहर कर दिया गया और समाज के एक वर्ग ने गलत तरीके से अदालत और न्यायाधीशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हमारे पास महिलाओं के लिए सर्वोच्च सम्मान है। हमारी प्रतिष्ठा बार के हाथों में है।”

सुप्रीम कोर्ट गर्भपात करवाने की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई जारी रखेगी।

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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

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मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।

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मुंबई : मलाड रेलवे स्टेशन पर नमाज़ का वीडियो वायरल होने के बाद 3 हॉकरों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज

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मुंबई : रेलवे पुलिस ने बताया कि मलाड रेलवे स्टेशन पर नमाज़ पढ़ते हुए तीन फेरीवालों का एक वीडियो ऑनलाइन वायरल होने के बाद उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तीनों हॉकरों की पहचान मुश्ताक बाबू लोन, सोहेब सदाकत साहा और बिस्मिल्लाह दीन अंसारी के रूप में हुई है। आरपीएफ ने अनाधिकार प्रवेश के लिए रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत मामला दर्ज किया, जबकि जीआरपी ने स्टेशन मास्टर की शिकायत के बाद बीएनएस की धारा 168 के तहत एक और मामला दर्ज किया। वीडियो वायरल होने के बाद, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि इस घटना के संबंध में एफ आई आर दर्ज की जाएगी। समाचार एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुंबई के मलाड रेलवे स्टेशन पर, स्टेशन के प्लेटफॉर्म के ऊपर, खुलेआम एक छोटे मंडप जैसी संरचना बना दी गई है, और वहाँ नमाज़ पढ़ी जाने लगी है… इस पूरे मामले को लेकर एक एफ आई आर दर्ज की जाएगी।”

वायरल वीडियो में कुछ लोग मलाड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 के ठीक बगल में बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज़ पढ़ते हुए दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, मलाड वेस्ट रेलवे स्टेशन पर विस्तार का काम चल रहा है और रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास एक बड़ी खुली जगह बनाई है। इस बीच, पिछले ही हफ़्ते बॉम्बे हाई कोर्ट ने टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को रमज़ान के दौरान शहर के हवाई अड्डे के भीतर एक अस्थायी शेड में नमाज़ अदा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि सुरक्षा धर्म से ऊपर है।

अदालत ने कहा कि रमज़ान मुस्लिम धर्म का एक अहम हिस्सा है, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि लोग किसी भी जगह पर नमाज़ पढ़ने के धार्मिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते, खासकर हवाई अड्डे के आस-पास, जहाँ सुरक्षा को लेकर काफ़ी चिंताएँ होती हैं। अदालत टैक्सी-रिक्शा ओला-ऊबर मेंस यूनियन की तरफ़ से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि जिस अस्थायी शेड में वे नमाज़ पढ़ते थे, उसे पिछले साल गिरा दिया गया था। याचिका में अदालत से यह गुज़ारिश की गई थी कि वह अधिकारियों को निर्देश दे कि वे उन्हें उसी इलाके में नमाज़ पढ़ने के लिए कोई जगह आवंटित करें।

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असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, विवादित वीडियो को लेकर दी शिकायत

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हैदराबाद, 9 फरवरी : एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर को औपचारिक शिकायत दी। यह शिकायत एक कथित विवादित और अब डिलीट किए जा चुके वीडियो को लेकर की गई है, जिसमें सीएम सरमा को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है।

पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य मंचों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान देते रहे हैं, जिनमें से कई अब भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।

पुलिस कमिश्नर के नाम पत्र में ओवैसी ने कहा, “मैं आपका ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहता हूं कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई सालों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं। ऐसे कई भाषण अभी भी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं। हाल के महीनों में मुख्यमंत्री ने जानबूझकर अपने नफरत भरे भाषणों को और तेज कर दिया है, जिसका साफ और सचेत इरादा मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी और नफरत को बढ़ावा देना है, यह जानते हुए भी कि ऐसे आरोप राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक हैं और सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करने वाले हैं।”

ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन अब्दुल्ला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य के मामले में साफ तौर पर कहा है कि मौलिक अधिकारों की रक्षा करना, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र, विशेष रूप से कानून के शासन की रक्षा करना राज्य और कानून लागू करने वाली एजेंसियों का संवैधानिक कर्तव्य है। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि पुलिस को औपचारिक शिकायत के अभाव में भी नफरत भरे भाषणों के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए और कोई भी निष्क्रियता या हिचकिचाहट कर्तव्य की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।

उन्होंने कहा, “मैं यह बताना चाहता हूं कि असम भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट द्वारा 7 फरवरी को पोस्ट किया गया एक हालिया वीडियो, जिसे एक दिन बाद हटा दिया गया था लेकिन अभी भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, उसमें हिमंत बिस्वा सरमा को हथियार से लैस दिखाया गया है और वे उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें साफ तौर पर मुसलमान दिखाया गया है और उन्हें गोली मार रहे हैं। उक्त पोस्ट और वीडियो, उसमें इस्तेमाल की गई तस्वीरों और ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ और ‘कोई दया नहीं’ जैसे बयानों के साथ, मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और दुर्भावना को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के इरादे से किया गया एक जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किया गया था और पूरे भारत में उपलब्ध था, जिसमें इस पुलिस स्टेशन का अधिकार क्षेत्र भी शामिल है। मैंने इसे इस पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में देखा है। उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप कानून के अनुसार श्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ तत्काल और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें।

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