अंतरराष्ट्रीय समाचार
विपक्ष के प्रोपेगेंडा के बावजूद बांग्लोदश आगे बढ़ता रहेगा : शेख हसीना
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया है कि वे उनकी सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रोपेगेंडा के बावजूद बांग्लादेश आगे बढ़ता रहेगा। हसीना ने इस बात पर जोर दिया कि वह लोगों के कल्याण के लिए काम करती रहेंगी। संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान उन्होंने कहा कि देश और विदेश में जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) हमारी सरकार के खिलाफ प्रोपेगेंडा चला रही है। लेकिन, दुश्मनों के चेहरे पर राख मलते हुए बांग्लादेश आगे बढ़ता रहेगा।
गौरतलब है कि संसद का 11वां सत्र 18 जनवरी को शुरू हुआ था और मंगलवार को संसद को भंग किए बगैर इसकी कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी।
प्रधानमंत्री ने संसद सदस्यों से यह याद रखने के लिए कहा कि अफवाह फैलाना ही बीएनपी का स्वभाव है। उन्होंने कहा, “उन्हें बोलने दीजिए, हम अपने काम के जरिए लोगों की सेवा करेंगे। कोरोना की वैक्सीन बांग्लादेश में पहुंचने से पहले काफी आलोचना हो रही थी। वैक्सीन यहां पहुंचना उन सारी आलोचनाओं का जवाब है।”
बांग्लादेश अवामी लीग की नेता ने दावा किया कि विपक्षी पार्टी बीएनपी नेतृत्व संकट से जूझ रही है और लोगों का ऐसी पार्टी में कोई भरोसा नहीं है, जिसमें भगोड़े और अपराधी भरे पड़े हों।
हसीना ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी ने लोगों का विश्वास जीता है। स्थानीय चुनावों में हमने यह देखा है। कोरोना वैक्सीन बांग्लादेश के सभी जिलों में पहुंच चुकी है और टीकाकरण अभियान 7 या 8 फरवरी को शुरू होगा। इस बाबत कोविड परीक्षण कराने के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं, जो लोग कोविड का टीका लगवाना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए अपना नाम पंजीकृत करवाना होगा।
कोविड महामारी से निपटने के लिए अपनी सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए हसीना ने कहा कि “हमारे प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र महासचिव सहित पूरी दुनिया ने सराहा है, लेकिन देश के अंदर कोई सराहना नहीं मिली।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने मार्को रुबियो से उठाई उइगरों की सुरक्षा की मांग

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (डब्ल्यूयूसी) ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अपील की है कि अगले सप्ताह उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान वह मध्य एशिया में रह रहे उइगर समुदाय की बढ़ती असुरक्षा और चीन की सीमाओं के बाहर होने वाले दबाव और दमन के मुद्दे को उठाएं।
डब्ल्यूयूसी के अनुसार, मध्य एशिया एक तरफ उन उइगरों के लिए शरणस्थली बनी है, जो चीन के शिनजियांग क्षेत्र में कथित उत्पीड़न से बचकर आए हैं, लेकिन दूसरी तरफ यहां भी वे निगरानी, धमकी, मनमानी हिरासत और चीन वापस भेजे जाने जैसे खतरों का सामना कर रहे हैं।
संगठन ने कहा कि उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों में रहने वाले उइगर लंबे समय से दबाव झेल रहे हैं। उनका कहना है कि बीजिंग इन देशों से उइगरों की राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के खिलाफ सहयोग की मांग करता रहा है।
डब्ल्यूयूसी ने याद दिलाया कि अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 2019 में मध्य एशियाई नेताओं के साथ बैठक के दौरान सार्वजनिक रूप से उइगरों का मुद्दा उठाया था और उनसे उइगरों को चीन वापस न भेजने की अपील की थी। उन्होंने 2020 में कजाकिस्तान की यात्रा के दौरान भी यही चिंता दोहराई थी।
संगठन का कहना है कि अब मार्को रुबियो के पास भी एक महत्वपूर्ण मौका है कि वह इसी तरह उइगरों के अधिकारों के समर्थन में अमेरिका की प्रतिबद्धता को दोहराएं।
डब्ल्यूयूसी ने रुबियो से मांग की कि वह मध्य एशियाई सरकारों से कहें कि उइगरों को जबरन चीन न भेजा जाए। संगठन का कहना है कि चीन लौटाए जाने पर उन्हें उत्पीड़न, मनमानी हिरासत, यातना और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ सकता है।
संगठन ने आग्रह किया कि अमेरिका मध्य एशिया के देशों पर दबाव डाले कि वे उइगरों की निगरानी करने, उन्हें डराने-धमकाने, हिरासत में लेने या उनकी आवाज दबाने से जुड़े चीनी अनुरोधों को स्वीकार न करें। खासकर तब, जब वे सिर्फ अपने राजनीतिक विचार, शांतिपूर्ण सामाजिक गतिविधियां, धार्मिक आस्था या विदेश में रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क बनाए रखते हों।
पिछले महीने डब्ल्यूयूसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन से भी अपील की थी कि 24 सितंबर को राष्ट्रपति शी चिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान शिनजियांग में उइगरों के कथित नरसंहार और विदेशों में रह रहे उइगर समुदाय पर चीनी अधिकारियों के दबाव का मुद्दा उठाया जाए।
डब्ल्यूयूसी के अध्यक्ष तुर्गुनजान अलाउडुन ने कहा, “शी चिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा केवल उइगर नरसंहार की निंदा करने तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने का एक अहम अवसर है। अमेरिका लंबे समय से उइगर लोगों का मजबूत और मुखर समर्थक रहा है, और डोनाल्ड ट्रंप को इस अवसर का उपयोग कर यह समर्थन जारी रखना चाहिए।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जी-20 बैठक में शामिल होना चाहता है रूस, पुतिन का स्वागत करूंगा : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस ने इस साल अमेरिका की मेजबानी में होने वाली जी20 बैठकों में शामिल होने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा।
व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या पुतिन जी20 बैठक में शामिल होने वाले हैं। इस पर ट्रंप ने कहा, “नहीं, उन्होंने सिर्फ शामिल होने इच्छा जताई है। मुझे नहीं पता कि पुतिन खुद आएंगे या नहीं लेकिन अगर वे आते हैं तो मैं जरूर उनका स्वागत करूंगा।”
ईंधन की कीमतों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने खुद जी20 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जी20 बैठकों में रूस के प्रतिनिधि पहले भी शामिल होते रहे हैं।
अमेरिका 2026 में जी20 की अध्यक्षता कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 30 और 31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेंगे। इसके बाद 14 और 15 दिसंबर को ट्रंप फ्लोरिडा के मियामी स्थित ट्रंप नेशनल डोरल में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।
रूस और भारत दोनों जी20 के सदस्य हैं। इससे पहले भारत ने सितंबर 2023 में नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी।
ट्रंप ने कहा कि वह चीन और रूस दोनों के साथ परमाणु समझौता करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने माना कि उन्हें नहीं लगता कि ऐसा इस साल हो पाएगा।
यूक्रेन युद्ध को लेकर जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह भूल गए हैं कि युद्ध की शुरुआत पुतिन ने की थी, तो उन्होंने कहा, “देखिए, मुझे सभी बातें पता हैं। किसी समय मैं सारी जानकारी सार्वजनिक करूंगा। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह युद्ध खत्म होना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “औसतन हर महीने करीब 25,000 सैनिक मारे जा रहे हैं। पिछले महीने यह संख्या 32,000 थी। मैं दोनों पक्षों से बात करता हूं। मुझे लगता है कि दोनों इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं और मेरा पूरा ध्यान इसी पर है कि यह युद्ध समाप्त हो।”
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका ने यूक्रेन की ओर से ‘स्टारशील्ड’ के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध लगाया है, तो उन्होंने साफ कहा, “नहीं, हमने ऐसा बिल्कुल नहीं किया है।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पाकिस्तान में महसूस हुए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.8 दर्ज की गई

पाकिस्तान में शनिवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.8 दर्ज की गई। भूकंप के चलते किसी तरह के नुकसान के बारे में फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
एनसीएस के अनुसार, शनिवार सुबह 10:37 बजे लोगों ने भूकंप के तेज झटके महसूस किए। भूकंप का केंद्र मध्य बलूचिस्तान के शहर खुजदार के पास जमीन से 15 किलोमीटर नीचे गहराई में बताया गया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.8 दर्ज की गई। भूकंप के झटकों के बाद लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। हलचल महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकलकर खुले स्थान की ओर भागे।
पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के आसपास के क्षेत्रों में भूकंप के कई दौर महसूस किए गए हैं। खासकर अफगानिस्तान के क्षेत्र में। इस महीने कई बार अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। एक अक्टूबर को भी अफगानिस्तान में 5.3 तीव्रता के तेज झटके महसूस किए गए थे। हालांकि, इस भूकंप में किसी तरह के नुकसान की जानकारी नहीं है।
इससे पहले 7 सितंबर को सुबह 5 बजकर 36 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.1 मापी गई थी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन से 130 किलोमीटर की गहराई पर था। भूकंप से किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं आई।
इससे पहले अगस्त में ही पूर्वी नंगरहार प्रांत में लोगों ने भूकंप के झटकों का सामना किया। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 मापी गई। इस दौरान तेज झटकों की वजह से 15 लोग घायल हुए थे।
इसी वर्ष जून महीने में भी अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। 27 जून को 7 बजकर 19 मिनट और 51 सेकेंड पर 6.2 तीव्रता के भूकंप के झटके लोगों ने महसूस किए। इसका असर दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और उत्तर भारत के कई अन्य राज्यों में भी पड़ा। यहां भी लोगों ने झटके महसूस किए।
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