अंतरराष्ट्रीय समाचार
सीमा पर नई क्रॉसिंग पॉइंट खोलेंगे ईरान-पाकिस्तान
ईरान और पाकिस्तान व्यापारिक आदान-प्रदान व गतिविधियां बढ़ाने के लिए शनिवार को सीमा पर एक नई क्रॉसिंग पॉइंट खोलने जा रहे हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खतीबजादेह ने दी।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने खतीबजादेह के शुक्रवार के ब्रीफिंग के हवाले से जानकारी दी कि, सीमा क्रॉसिंग पॉइंट ईरान के दक्षिणपूर्वी सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत और पाकिस्तान के गाब्द के बीच है।
प्रवक्ता के अनुसार, पिछले महीने ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ की पाकिस्तान यात्रा के दौरान तेहरान और इस्लामाबाद ने रिमदान-गाब्द सीमा-पार प्रवेश द्वार खोलने पर सहमति व्यक्त की।
प्रेस टीवी ने खतीबजादेह के हवाले से कहा, दो मैत्रीपूर्ण और पड़ोसी राज्यों के बीच इस सीमा प्रवेश द्वार का निर्माण और हाल ही में खाफ-हेरात रेलवे परियोजना के उद्घाटन से पता चलता है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान अपने पड़ोसियों के साथ बातचीत और सहयोग को विशेष प्राथमिकता देता है।
गौरतलब है कि पूर्वी ईरान को पश्चिमी अफगानिस्तान से जोड़ने वाली एक संयुक्त रेलवे परियोजना का उद्घाटन 10 दिसंबर को किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल: हेमलुंग बेस कैंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार, 12 लापता

नेपाल स्थित माउंट हिमलुंग के बेस कैंप इलाके में हिमस्खलन की चपेट में आए चार लोगों के मौत की पुष्टि कर दी गई है।12 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।
मनांग के चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर (प्रमुख जिलाधिकारी) मुक्ति प्रसाद खनल ने आईएएनएस को बताया, “अब तक घटना वाली जगह से चार शव बरामद किए गए हैं। बरामद किए गए दो शव काठमांडू भेजे गए हैं, जबकि दो अन्य को घटना वाली जगह से एयरलिफ्ट करके मनांग के जिला मुख्यालय, चामे लाया गया है।”
माना जा रहा है कि जब उस इलाके में बर्फीला तूफान (एवलांच) आया, तो 7,126 मीटर ऊंचे पहाड़ के बेस कैंप पर अलग-अलग अभियान कंपनियों के 24 से ज्यादा गाइड और कर्मचारी मौजूद थे। वे चढ़ाई शुरू होने से पहले रस्सियां लगाने और टेंट लगाने के लिए वहां गए थे।
खनल ने बताया कि आपदा के बाद 11 लोगों से संपर्क हो पाया है। हमारा अनुमान है कि पहाड़ के बेस कैंप पर कुल 27 लोग मौजूद थे।
सोमवार सुबह से ही बचाव कार्य जारी रहा और बेस कैंप पर बचाव अभियान चलाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए। खनल ने कहा कि मौसम में काफी सुधार हुआ है, जिससे बचाव कार्यों में मदद मिली है। इससे पहले कई दिनों तक लगातार बारिश हुई थी, जिसके कारण मनांग सहित देश के कई हिस्सों में भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई थी।
यह घटना नेपाल-चीन सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ के ठीक एक महीने बाद हुई है। उस बाढ़ की वजह एक बड़े ग्लेशियर का टूटना और भूस्खलन था, जिसमें 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 5,000 से अधिक लोग लापता बताए गए।
नेपाल की आय के मुख्य स्रोतों में से एक पर्यटन है। भोटेकोशी बाढ़ आपदा के बाद, देश पर्यटकों से नेपाल आने का आग्रह कर रहा है और कह रहा है कि देश के अन्य हिस्से सुरक्षित हैं।
इससे पहले, मनांग जिला प्रशासन कार्यालय ने हिमालय के ऊंचे इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश और बर्फबारी के पूर्वानुमान के कारण 25 से 27 सितंबर तक कई ऊंचाई वाले इलाकों में ट्रेकिंग पर रोक लगा दी थी।
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नेपाल में नारायणी नदी खतरे के निशान से ऊपर, गंडक ने भी बढ़ाई चिंता

नेपाल के दक्षिणी चितवन और नवलपरासी जिलों के कुछ हिस्सों में नारायणी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जलस्तर लगातार बढ़ने के बाद स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया है।
भारत में गंडक के नाम से जानी जाने वाली इस सीमा-पार नदी में बाढ़ आने से पड़ोसी देश के निचले इलाकों पर भी असर पड़ सकता है।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने रविवार सुबह बाढ़ की चेतावनी जारी की और नारायणी नदी के किनारे रहने वाले लोगों से अपील की कि वे जान-माल के खतरे को देखते हुए नदी से दूर और ऊंचे इलाकों में चले जाएं।
सेंटर ऑफ हाइड्रोलॉजी एंड वॉटर रिसोर्सेज रिसर्च (सीएचडब्ल्यूआरआर) द्वारा रविवार सुबह 7:45 बजे जारी बाढ़ फोरकास्ट (पूर्वानुमान) और एडवाइजरी बुलेटिन के अनुसार, नारायणी नदी का जलस्तर बढ़कर लगभग 11 मीटर हो गया था, जो 9 मीटर के तय खतरे के निशान से काफी ऊपर है।
सीएचडब्ल्यूआरआर ने कहा कि चितवन जिले के देवघाट बाढ़ निगरानी स्टेशन पर जलस्तर के रविवार दोपहर तक बढ़ते रहने की उम्मीद है और ये लगभग 13 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच सकता है।
सीएचडब्ल्यूआरआर ने कहा, “इस बात की आशंका है कि शाम तक जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना रहेगा।” साथ ही उन्होंने कहा कि दोपहर तक नारायणी की सहायक नदियों में भी तेज बहाव जारी रहने की उम्मीद है।
नारायणी की प्रमुख सहायक नदियों में से एक, काली गंडकी नदी में बहाव खतरे के निशान से काफी ऊपर दर्ज किया गया है, जबकि सेती, माडी, मर्स्यांगडी, डारौंडी और चेपे नदियां अपने चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही हैं और उनका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बूढ़ी गंडकी और त्रिशूली नदियां भी अपने चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गई हैं।
सीएचडब्ल्यूआरआर ने कहा कि तेज बहाव के कारण चितवन और नवलपरासी (पूर्व और पश्चिम) जिलों में नारायणी नदी के किनारे निचले और बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ गया है। ये तीनों जिले भारत की सीमा से लगे हैं।
नेपाल प्रशासन ने लोगों को नारायणी और उसकी सहायक नदियों के किनारे यात्रा करने से बचने और नदी के किनारों, पुलों, तटबंधों और अन्य संवेदनशील जगहों के पास अनावश्यक रूप से जाने से बचने की सलाह भी दी है। काली गंडकी, सेती, मादी, मर्स्यांगडी, दरौंदी, चेपे, बुढ़ी गंडकी और त्रिशूली नदियों और उनकी सहायक नदियों के किनारे रहने वाले लोगों से शाम तक हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है।
अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि वे स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी बाढ़ से जुड़ी जानकारी और निर्देशों का पालन करें।
हाल ही में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ झेल चुके नेपास में 24 सितंबर से देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है।
नेपाल पुलिस ने बताया कि पश्चिमी नेपाल के पाल्पा जिले की माथागढ़ी ग्रामीण नगर पालिका के भास्कट्टा में रविवार तड़के बारिश के कारण हुए भूस्खलन में एक घर दब गया, जिसके बाद से तीन लोग लापता हो गए। पुलिस ने बताया कि बचाव अभियान चलाने के लिए एक पुलिस टीम तैनात की गई है।
इस बीच, पुलिस के अनुसार, पर्वत जिले की जलजला ग्रामीण नगर पालिका-8 के फार्से इलाके में काली गंडकी नदी में आई बाढ़ 25 घरों को बहा ले गई। पुलिस ने कहा, “बस्ती में लगभग 80 घरों में से 25 बह गए हैं, जबकि बाकी घर खतरे में हैं।”
पुलिस ने आगे कहा, “किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और बस्ती के सभी निवासियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है।”
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यूएनजीए में जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार पर दिया जोर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान बड़े स्तर पर शांति की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने कहा कि गरीब और विकासशील देशों को उन युद्धों और फैसलों की कीमत नहीं चुकानी चाहिए, जिनमें उनकी आवाज या भूमिका बहुत कम होती है।
जयशंकर के भाषण में खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों से लेकर खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे कई मुद्दे शामिल थे।
इन सभी मुद्दों के बीच उनका मुख्य संदेश यह था कि शांति सिर्फ युद्ध खत्म करने से नहीं आती। इसके लिए स्थिरता और जरूरी संसाधनों तक सभी की बराबर और सही पहुंच भी जरूरी है।
जयशंकर के सबसे कड़े शब्द उस देश के लिए थे, जिसका उन्होंने नाम नहीं लिया, लेकिन उसे ‘बार-बार आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाला देश’ बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस देश ने एक दिन पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया था। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके नतीजों से बचने के लिए भी तर्क दिए गए।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा।
जयशंकर ने उस देश का नाम नहीं लिया और न ही यह बताया कि भारत इस दिशा में किस तरह की कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, उनके बयान से यह साफ था कि वह सीमा पार आतंकवाद को सामान्य संबंधों के साथ चलने वाली चीज नहीं मानते।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया में चल रहे संघर्ष विकास की रफ्तार धीमी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, लड़ाई से बहुत दूर मौजूद देश भी बिना अपनी किसी गलती के इसका असर झेल रहे हैं।
उन्होंने महासभा से कहा कि जो देश इन संकटों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, अक्सर फैसले लेने में उनकी आवाज ही सबसे कम सुनी जाती है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव को लेकर जयशंकर ने संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत चाहता है कि आम नागरिकों की सुरक्षा हो और ऊर्जा तथा व्यापार की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहे।
जयशंकर ने यूक्रेन में चल रही शांति की कोशिशों का समर्थन किया और खाद्य तथा ऊर्जा से जुड़े दबाव को कम करने में भारत की मदद की पेशकश की।
मध्य पूर्व के मुद्दे पर उन्होंने टू-स्टेट सॉल्यूशन, यानी इजरायल और फिलिस्तीन के लिए दो अलग देशों के समाधान को लेकर भारत का समर्थन दोहराया। भारत फिलिस्तीनियों को मानवीय सहायता भी दे रहा है।
इन मुद्दों से भारत की अपनी चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं, क्योंकि जहाजों की आवाजाही, अनाज और ऊर्जा की सप्लाई में रुकावट का भारत पर सीधा असर पड़ सकता है।
जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर से लेकर काला सागर तक हुए हमलों में भारतीय नाविक भी मारे गए हैं। जयशंकर ने विकासशील देशों के लिए, उन्होंने भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़े ‘4एफ संकट’ का जिक्र किया। जलवायु की स्थिति, उर्वरक की कमी और अनाज की आवाजाही में रुकावटों ने इस दबाव को और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु से जुड़ी समस्याएं, खाद की कमी और अनाज की आवाजाही में रुकावट इस संकट को और गंभीर बना रही हैं।
जयशंकर ने कहा कि बाजारों तक सीमित पहुंच और सामान्य बाजार के नियमों से अलग तरीके अपनाए जाने की वजह से ग्लोबल साउथ के देशों के लिए अपने उद्योगों को विकसित करना और मुश्किल हो रहा है।
जयशंकर ने उस स्थिति की भी आलोचना की, जिसे उन्होंने ‘हर चीज को हथियार की तरह इस्तेमाल’ करना बताया।
उन्होंने कहा कि फाइनेंस, सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी, संसाधन और कनेक्टिविटी जैसी चीजों का इस्तेमाल भी अब दूसरे देशों पर दबाव डालने के लिए किया जा रहा है।
उनके मुताबिक, देश इन जोखिमों को कम करने के लिए अपने संबंधों और सप्लाई के स्रोतों में बदलाव कर रहे हैं और अलग-अलग विकल्प तलाश रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही दुनिया में आपसी भरोसा भी कम हो रहा है।
जयशंकर ने भारत को एक उदाहरण और साझेदार, दोनों के तौर पर पेश किया। उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और देश के अंदर लोगों तक बुनियादी सेवाएं पहुंचाने की व्यवस्था का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 78 देशों में 600 बड़े विकास प्रोजेक्ट किए हैं। इनमें बुनियादी ढांचा, कृषि, सूचना तकनीक और ट्रेनिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
जयशंकर ने जलवायु से जुड़ी पहलों, आपात स्थिति में मेडिकल सहायता पहुंचाने और प्राकृतिक आपदाओं के बाद दूसरे देशों को दी गई मदद का भी जिक्र किया। उन्होंने खास तौर पर अफ्रीकी देशों और छोटे विकासशील द्वीपीय देशों के साथ भारत की साझेदारी पर जोर दिया।
यह बात ग्लोबल साउथ के लिए ज्यादा आवाज और भागीदारी की भारत की मांग से भी जुड़ी थी। भारत का कहना है कि वह दूसरे विकासशील देशों के साथ पहले से ही मिलकर काम कर रहा है।
अपने संबोधन के आखिर में जयशंकर ने इन सभी मुद्दों को इस बड़े सवाल से जोड़ा कि बदलती दुनिया के नियम आखिर कौन तय करेगा।
उन्होंने कहा, “1945 के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था अब नई वास्तविकताओं को जगह दे रही है।” उन्होंने वैश्विक फैसले लेते समय ज्यादा देशों से सलाह-मशविरा करने और फैसलों को ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग की। जयशंकर ने कहा कि दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से को अब वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता।
जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत की सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं को इस बड़े तर्क के साथ जोड़ा कि दुनिया में शांति और विकास के लिए एक ज्यादा समावेशी और बराबरी वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की जरूरत है।
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