खेल
कोहली, अश्विन ‘प्लेयर ऑफ द डेकेड’ अवॉर्ड के लिए नामित
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भारतीय कप्तान विराट कोहली और स्टार आफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को ‘प्लेयर ऑफ द डेकेड’ अवॉर्ड (दशक के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पुरस्कार) के लिए नामित करने की मंगलवार को घोषणा की। कोहली और अश्विन के अलावा इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान जोए रूट, न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन, आस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ, दक्षिण अफ्रीका के अब्राहम डिविलियर्स और श्रीलंका के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा को भी इसके लिए नामित किया गया है।
पुरुषों के दशक के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की सूची में कोहली, रूट, विलियम्सन, स्मिथ, जेम्स एंडरसन (इंग्लैंड), रंगना हेराथ (श्रीलंका) और यासिर शाह शामिल है।
पुरुषों की दशक की वनडे टीम में कोहली, लसिथ मलिंगा (श्रीलंका), मिशेल स्टार्क (ऑस्ट्रेलिया), डिविलियर्स, रोहित शर्मा (भारत), महेंद्र सिंह धोनी (भारत) और कुमार संगकारा शामिल है।
पुरुषों की टी20 प्लेयर ऑफ द डेकेड के लिए कोहली, रोहित, मलिंगा, राशिद खान (अफगानिस्तान), इमरान ताहिर (दक्षिण अफ्रीका), एरॉन फिंच (आस्ट्रेलिया) और क्रिस गेल (वेस्टइंडीज) को नामित किया गया है।
आईसीसी वुमन प्लेयर ऑफ द डेकेड के लिए एलिसा पैरी (आस्ट्रेलिया), मैग लेनिंग (आस्ट्रेलिया), सूजी बेट्स (न्यूजीलैंड), स्टेफनी टेलर (वेस्टइंडीज), मिताली राज (भारत) और सारा टेलर (इंग्लैंड) नामित की गई हैं।
आईसीसी वुमन वनडे प्लेयर ऑफ द डेकेड के लिए
राज, लैनिंग, पैरी, बेट्स, टेलर और झूलन गोस्वामी को जबकि वुमन टी20 प्लेयर के लिए लेनिंग, पैरी, सोफी डिवाइन, ड्रेंडा डॉटिन, एलीसा पैरी और अन्या शरुबसोल को शामिल किया गया है।
स्प्रिट ऑफ क्रिकेट अवॉर्ड ऑफ द डेकेड के लिए कोहली, धोनी, विलियम्सन, ब्रैंडन मैकुलम (न्यूजीलैंड), मिसबाह उल-हक (पाकिस्तान), अन्या शरुबसोल (इंग्लैंड), कैथरीन ब्रंट (इंग्लैंड), महेला जयवर्धने (श्रीलंका) और डेनियल विटोरी (न्यूजीलैंड) का नॉमिनेट किया गया है।
नामित किए गए खिलाड़ियों की पूरी सूची आईसीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की गई। विजेता का फैसला उन्हें मिलने वाले वोटों के आधार पर होगा।
राजनीति
ईरान युद्ध के बीच कुकिंग गैस पर निर्भरता घटाने की तैयारी, सरकार घरेलू इंडक्शन हीटर उत्पादन बढ़ाने पर कर रही फोकस

नई दिल्ली, 3 अप्रैल : केंद्र सरकार कुकिंग गैस की खपत कम करने के लिए अब इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की योजना बना रही है। इस दिशा में शुक्रवार को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव, विद्युत सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के महानिदेशक सहित शीर्ष अधिकारियों ने एक उच्चस्तरीय बैठक की।
इस बैठक में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए इंडक्शन हीटर और कुकिंग उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई, ताकि कुकिंग गैस की खपत कम की जा सके।
पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से इंडक्शन हीटर और अन्य इलेक्ट्रिक उत्पादों की मांग में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अगर यह युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो भारत को संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब सरकार लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की संभावना को देखते हुए आयात पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रही है। खासतौर पर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात में बाधा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
सरकार पहले ही कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क कम कर चुकी है, ताकि सप्लाई बनी रहे और लागत का दबाव कम किया जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मुख्य फोकस जरूरी उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयात पर निर्भरता कम करना है।
कतर में एक बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) प्लांट को नुकसान पहुंचने के बाद मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है।
भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाई है और अब रूस के साथ-साथ नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से ज्यादा कच्चा तेल खरीद रहा है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां अमेरिका से भी गैस की आपूर्ति ले रही हैं।
इस बीच, पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना अगले 2-3 हफ्तों तक ईरान पर ‘बेहद कड़ा प्रहार’ करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को ‘स्टोन एजेज यानी पाषाण युग’ (उनकी पुरानी स्थिति जहां वे असल में थे) में पहुंचा देगा।
इसके कुछ घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उस समय मध्य पूर्व में न तेल था और न ही गैस का उत्पादन होता था।”
ट्रंप ने यह चेतावनी ऐसे समय दोहराई है जब यह संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती जारी है। वहीं ईरान ने युद्धविराम और 15-सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए इसे ‘बेहद एकतरफा और अव्यवहारिक’ बताया है।
अंतरराष्ट्रीय
ऑस्ट्रेलिया ने दवाइयों पर शुल्क लगाने के मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत से किया इनकार

कैनबरा, 3 अप्रैल : ऑस्ट्रेलियाई सरकार अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क के दबाव के बावजूद दवाओं के लिए अपनी सब्सिडी योजना में कोई बदलाव नहीं करेगी। स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने शुक्रवार को सरकार का पक्ष रखा।
बटलर ने सेवन नेटवर्क को बताया कि ऑस्ट्रेलिया अमेरिकी प्रशासन के साथ फार्मास्युटिकल बेनेफिट्स स्कीम (पीबीएस) के “मूलभूत सिद्धांतों” पर कोई बातचीत नहीं करेगा। इस योजना के तहत केंद्रीय सरकार प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों में सब्सिडी देती है।
बटलर ने कहा, “हम अमेरिका को यह सबसे स्पष्ट संदेश लगातार भेज रहे हैं क्योंकि हम जानते हैं कि वहां बड़ी दवा कंपनियां अपने दबाव में हमारे पीबीएस और दुनिया के अन्य देशों की समान योजनाओं को कमजोर करने की कोशिश करती हैं। हम इन मूलभूत सिद्धांतों पर बातचीत नहीं कर रहे हैं।”
बटलर यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कुछ पेटेंट वाली दवाओं के आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद दे रहे थे।
मार्च के अंत में ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापारिक शिकायतों की अद्यतन सूची में अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि पीबीएस अमेरिकी नवाचार का मूल्य कम करके दिखाता है और अनुचित दवा मूल्य निर्धारण प्रथाओं के माध्यम से अमेरिकी उद्योग को प्रभावित करता है।
इस योजना के तहत, फार्मास्युटिकल निर्माता सीधे ऑस्ट्रेलियाई सरकार के साथ बिक्री पर बातचीत करते हैं ताकि वाणिज्यिक बोली युद्धों को रोका जा सके।
संयुक्त राष्ट्र के कॉमट्रेड डेटा के अनुसार, 2025 में ऑस्ट्रेलियाई दवा निर्यात अमेरिका में 1.3 बिलियन डॉलर का था।
बायोटेक्नोलॉजी कंपनी सीएसएल ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी है, लेकिन बटलर ने कहा कि सरकार को भरोसा है कि मेलबर्न स्थित इस कंपनी को नए शुल्क से छूट मिलेगी क्योंकि इसका अमेरिका में बड़ा उत्पादन आधार है।
व्यापार मंत्री डॉन फैरेल के प्रवक्ता ने आस्ट्रेलियन ब्राडकास्टिंग कार्पोरेशन को शुक्रवार को बताया कि सरकार अमेरिकी दवा शुल्क से निराश है और “अनुचित और गैर-जरूरी” शुल्क को हटाने के लिए दबाव डालना जारी रखेगी।
राष्ट्रीय
‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं’, आम आदमी पार्टी के नाम राघव चड्ढा का संदेश, लगाए गंभीर आरोप

raghav chadda
नई दिल्ली, 3 अप्रैल : आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी ही पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने कहा कि उन्हें जनता से जुड़े मुद्दे उठाने से रोका जा रहा है। हाल ही में पार्टी द्वारा उन्हें राज्यसभा में उपनेता (डिप्टी लीडर) पद से हटाए जाने के बाद यह बयान और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल 2022 से 2028 तक है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह आम आदमी के मुद्दों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में चड्ढा ने बताया कि उन्होंने हमेशा आम जनता से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एयरपोर्ट पर महंगे खाने का मुद्दा हो, या फिर ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जैसे स्विग्गी और जोमैटो के डिलीवरी कर्मचारियों से जुड़ी समस्याएं- इन सभी विषयों को उन्होंने गंभीरता से उठाया। इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर में आ रही दिक्कतें और टोल प्लाजा पर आम लोगों को हो रही परेशानियों को भी उन्होंने संसद में बार-बार उठाया।
राघव चड्ढा का आरोप है कि अब उनकी ही पार्टी उन्हें इन मुद्दों को उठाने से रोक रही है। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि आम आदमी के नाम पर राजनीति करने वाली पार्टी आखिर क्यों जनता की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उनका यह भी दावा है कि पार्टी की ओर से संसद में निर्देश दिए गए हैं कि उन्हें सवाल उठाने का मौका न दिया जाए और बोलने से रोका जाए।
राजनीतिक गलियारों में इस बयान के बाद हलचल तेज हो गई है। ‘आप’ के भीतर यह घटनाक्रम पार्टी के आंतरिक मतभेदों की ओर इशारा कर रहा है। हालांकि, इस मामले में पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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