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Monday,02-November-2026
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फ्रंटलाइन वर्कर्स के साथ टाउन हॉल में भावुक हुए बाइडेन

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Joe-Biden

अमेरिकी राष्ट्रपति चुने गए जो बाइडेन बुधवार को एक वर्चुअल टाउन हॉल के दौरान उस समय भावुक हो गए, जब स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें कई भावनात्मक कहानियां सुनाईं।

मिनेसोटा की एक नर्स मैरी टर्नर ने बाइडेन को बताया कि कैसे वह उन मरने वाले मरीजों का हाथ थामे रहती हैं, जो अपने परिवार और प्रियजनों के इंतजार में थे और अब वेंटिलेटर पर उनकी जिंदगी क्षीण होती जा रही थी।

इसके अलावा पीपीई किट की कमी भी फ्रंटलाइन वर्कर्स के बीच एक अहम मुद्दा रही। टर्नर ने बताया, “कई बार मास्क हमारे चेहरे से गिर जाते हैं क्योंकि हम एन-95 को तब तक उपयोग करते रहते हैं, जब तक वे गिरकर अलग न हों जाएं या लगाने लायक ही न रहें।”

टर्नर ने यह कहकर बाइडेन को आश्चर्य में डाल दिया कि उनका अभी तक कोविड-19 परीक्षण नहीं हुआ है। इसके बाद बाइडेन ने कहा, “आप मजाक तो नहीं कर रहे हैं।”

बता दें कि दुनिया का सबसे धनी देश अमेरिका महामारी का सबसे बुरा प्रकोप झेल रहा है और इसके फ्रंटलाइन वर्कर्स अपनी रक्षा के लिए कूड़े भरने वाले बैग पहन रहे हैं। चुनाव के बाद तो स्थिति और भी खराब हो गई है। चुनाव के दौरान स्विंग स्टेट्स में डॉक्टरों को एन-95 मास्क से भरे बड़े-बड़े बक्से दिए गए थे।

ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि अमेरिका ‘वेंटिलेटर्स का राजा’ है और उसने मास्क पहनने को अनिवार्य करने वाले नियम का मजाक उड़ाते हुए अपनी ही टास्क फोर्स के सदस्यों को ‘बेवकूफ’ कहा था।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

‘नियमों का उल्लंघन’ करने वाले तेल टैंकरों में विस्फोट, बारूदी सुरंग से टकराए थे दोनों: ईरान

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ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पिछले कुछ घंटों के दौरान दो “नियम उल्लंघन करने वाले” सुपरटैंकर समेत एक तेल टैंकर में धमाका हुआ। कथित तौर पर ये दोनों बारूदी सुरंगों (नेवल माइन्स) से टकराए जिससे विस्फोट हुआ और दोनों वहीं रुक गए।

रविवार (स्थानीय समय) को आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार आउटलेट ‘सिपाह न्यूज’ पर जारी एक बयान में, नौसेना ने कहा कि ये टैंकर जलडमरूमध्य में एक “अनधिकृत” (बिना अनुमति वाले) रास्ते से गुजर रहे थे।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, इसमें आगे कहा गया कि सुपरटैंकर में “एक जोरदार विस्फोट हुआ और वह धू-धू कर जल रहा है।” बताया गया कि दोनों जहाजों ने अपने नेविगेशन और पहचान प्रणालियों (आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) को बंद कर रखा था।

ईरान ने 28 फरवरी को इस स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली थी। उसने इजरायल और अमेरिका के जहाजों—या उनसे जुड़े जहाजों – के सुरक्षित आवागमन पर रोक लगा दी थी। यह कदम ईरानी क्षेत्र पर उनके संयुक्त हमलों के बाद उठाया गया था।

इससे पहले, आईआरजीसी के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने कहा कि ईरानी बलों ने “दुश्मन” को नुकसान पहुंचाने और रोकने के लिए एक विशाल युद्धक्षेत्र तय कर लिया है।

अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के हवाले से सिन्हुआ ने बताया कि रविवार (स्थानीय समय) को ईरान के दक्षिण-पूर्वी केरमान प्रांत में एक सम्मेलन में मोहेब्बी ने कहा कि ईरानी बल “दुश्मन को निर्णायक जवाब देने के लिए” पहले से कहीं अधिक तत्पर हैं।

उन्होंने सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई द्वारा वरिष्ठ सैन्य कमांडरों को दिए गए हालिया आदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम लीडर के इन निर्देशों ने “युद्ध का एक नया अध्याय” शुरू कर दिया है।

मोहेब्बी ने खामेनेई की उस बात का उल्लेख खासतौर पर किया जिसमें कहा गया कि “अमेरिका के साथ युद्ध में कोई भौगोलिक सीमा नहीं है।” उन्होंने कहा कि आईआरजीसी ने अपने एजेंडे में दुश्मन के नए ठिकानों की पहचान करना और नए भौगोलिक क्षेत्रों में अभियानों की योजना बनाना शामिल किया है।

शनिवार को एक बयान में बताया गया कि ईरान के सर्वोच्च नेता ने सशस्त्र बलों के वरिष्ठ कमांडरों को आदेश दिया है कि “दुश्मनों” की ओर से आने वाले किसी भी स्तर और प्रकार के खतरे का, बिना किसी भौगोलिक सीमा के, “तत्काल और प्रभावी” जवाब दिया जाना चाहिए।

ये चेतावनियां ऐसे समय में आई हैं जब ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई की धमकियां तेज हो गई हैं।

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (डब्ल्यूएसजे) के अनुसार, गुरुवार को अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान से जुड़े विकल्पों के बारे में जानकारी दी थी। डब्ल्यूएसजे के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी के कई देशों को सूचित किया है कि वे अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ एक संभावित, संक्षिप्त लेकिन तीव्र सैन्य अभियान के लिए तैयार रहें।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या घटी, 13.5 फीसदी गिरावट दर्ज: डीएचएस डेटा

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अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वहां रह रहे सक्रिय भारतीय छात्रों की संख्या एक साल में लगभग 13.5 प्रतिशत घटकर 3,16,893 रह गई है। इसमें सबसे बड़ी गिरावट ‘मास्टर्स’ (स्नातकोत्तर) स्तर पर देखी गई है, हालांकि इसके बावजूद भारत अभी भी अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।

स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (एसईवीआईएस) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में भारत से सक्रिय छात्रों की संख्या 316,893 थी, जो अक्टूबर 2025 में 366,258 थी यानी इसमें 49,365 की कमी आई है।

यह गिरावट कुल गिरावट के मुकाबले कहीं अधिक थी। एसईवीआईएस में कुल सक्रिय अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या 1,283,240 से घटकर 1,192,572 हो गई, जो लगभग 7.1 प्रतिशत की कमी है।

चीन से आने वाले छात्रों की संख्या में भी कमी आई है। ये दूसरा सबसे बड़ा समूह है, और इसमें लगभग 10.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ये 245,038 से घटकर 220,157 रह गईं।

सक्रिय अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारत की हिस्सेदारी लगभग 28.5 प्रतिशत से घटकर लगभग 26.6 प्रतिशत हो गई है।

भारतीय छात्रों में यह गिरावट मुख्य रूप से मास्टर्स (स्नातकोत्तर) प्रोग्राम में देखी गई, जहां भारतीय छात्रों का सबसे बड़ा हिस्सा नामांकित होता है। मास्टर्स प्रोग्राम में भारतीय छात्रों की संख्या 292,929 से घटकर 234,034 रह गई, जो लगभग 20 प्रतिशत की कमी है।

इसके विपरीत, डॉक्टोरल (पीएचडी) स्तर पर नामांकन में वृद्धि हुई है। डीएचएस के आंकड़ों के अनुसार, डॉक्टोरल स्तर पर भारतीय छात्रों की संख्या 28,609 से बढ़कर 41,729 हो गई।

अक्टूबर 2026 में स्नातक (बैचलर) स्तर पर भारतीय छात्रों की संख्या 36,011 थी, जबकि एक साल पहले यह 38,522 थी।

कुल भारतीय छात्रों में 195,341 पुरुष और 121,552 महिला छात्र शामिल थे।

एसईवीआईएस के आंकड़ों में उन छात्रों को गिना जाता है जिनके रिकॉर्ड सिस्टम में सक्रिय हैं, जिनमें ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (ओपीटी) वाले छात्र भी शामिल हैं। ये आंकड़े किसी एक महीने की स्थिति को दर्शाते हैं, न कि पूरे साल का कुल योग।

यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में छात्र वीजा की जांच-पड़ताल सख्त हो गई है, ओपीटी और स्टेम एक्सटेंशन पर नई फीस लगाने का प्रस्ताव है, और कानूनी आव्रजन (इमिग्रेशन) के रास्तों पर भी सख्ती बढ़ाई जा रही है।

भारतीय मूल के नेताओं के एक गैर-लाभकारी नेटवर्क, ‘इंडियास्पोरा’ ने 30 अक्टूबर को एक बयान में कहा कि “अमेरिका में पढ़ाई करने के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या कम हो रही है।” उन्होंने इस रुझान को मौजूदा चुनावी मौसम में चल रही “भारत-विरोधी बयानबाजी” से जोड़ा है।

दक्षिण एशिया के अन्य देशों से भी अमेरिका जाने वालों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। नेपाल से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों की संख्या 35,273 से घटकर 33,992 रह गई है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

दिसंबर के जी20 शिखर सम्मेलन तक साझा सहमति बनने की उम्मीद: जयशंकर

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भारत को उम्मीद है कि दिसंबर में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन तक सदस्य देश कुछ प्रमुख मुद्दों पर साझा सहमति बनाने में सफल होंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि यदि इसके लिए गंभीर प्रयास किए जाते हैं तो भारत इस दिशा में होने वाली कोशिशों का समर्थन करेगा।

अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के समापन पर भारतीय पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर से पूछा गया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान जी20 शिखर सम्मेलन में जिस तरह आम सहमति बनी थी, क्या इस बार भी वैसी ही सहमति की उम्मीद की जा सकती है?

इस पर उन्होंने कहा, “अभी दिसंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन का समय नहीं आया है, और उस समय की परिस्थितियों को देखकर ही कुछ कहा जा सकेगा।”

उन्होंने कहा, “जाहिर है, उम्मीद है कि जी20 साझा सहमति बनाने में सफल होगा।”

जयशंकर ने इस संदर्भ में ब्रिक्स का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग परिस्थितियों और अलग-अलग देशों की भागीदारी के बावजूद इस समूह में प्रमुख सदस्यों के बीच साझा बयान पर सहमति बन सकी थी। उन्होंने कहा कि दिसंबर करीब आने के साथ जी20 में भी इस तरह की सहमति बनाने के प्रयास किए जाएंगे और भारत इसमें सहयोग करेगा।

विदेश मंत्री ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहमति बनाना आसान नहीं होता, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया कई मुद्दों पर ध्रुवीकृत नजर आ रही है। इसके बावजूद भारत का मानना है कि संवाद और प्रयासों के जरिए साझा आधार तैयार किया जा सकता है।”

बातचीत के दौरान जयशंकर से अमेरिका को ‘अकेली महाशक्ति’ बताने वाली उनकी पहले की टिप्पणी के बारे में भी सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि क्या जी20 की बैठक में भी अन्य देशों के बीच इस तरह की भावना देखने को मिली।

इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी वह टिप्पणी एक बिल्कुल अलग संदर्भ में की गई थी। उन्होंने कहा, “म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने यह बात कही थी। वह कार्यक्रम जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक से अलग था।”

जयशंकर ने कहा, ” म्यूनिख में वह विश्लेषकों और नीति-निर्माताओं को संबोधित कर रहे थे, जबकि अटलांटा में विभिन्न देशों के विदेश मंत्री एक साथ मौजूद थे। इसलिए दोनों अवसरों पर कही गई बातों और चर्चाओं को एक ही संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि जी20 की बैठक में भारत की उस भूमिका की सामान्य रूप से सराहना देखने को मिली, जिसके तहत वह दुनिया के अलग-अलग पक्षों के साथ संवाद बनाए रखता है।

विदेश मंत्री के मुताबिक, बैठक में यह समझ और सराहना थी कि आज की ध्रुवीकृत दुनिया में भारत सभी पक्षों से बात करने की क्षमता रखता है। भारत संवाद में योगदान दे रहा है, देशों के बीच सेतु का काम कर रहा है और एक-दूसरे तक अपनी बात पहुंचाने में मदद कर रहा है।

जयशंकर ने कहा, “भारत के बारे में यह सामान्य समझ और सराहना थी कि आज की कुछ हद तक ध्रुवीकृत दुनिया में हम सभी पक्षों से बात कर सकते हैं। हम योगदान दे रहे हैं, सेतु बना रहे हैं और संवाद कायम कर रहे हैं।”

अटलांटा में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक पर भी उन्होंने बात की। जयशंकर ने बताया कि इस साल विदेश मंत्री स्तर पर क्वाड की यह तीसरी बैठक थी। इससे पहले दिल्ली और मनीला में भी इस स्तर की बैठकें हो चुकी हैं।

उन्होंने कहा, “भारत को लगता है कि क्वाड ने इस दौरान अच्छी प्रगति की है। अब उम्मीद है कि समूह की अगली बैठकें ऐसी होंगी, जिनमें भविष्य की दिशा तय करने और उसके एजेंडे का विस्तार करने पर विचार किया जा सके।”

जयशंकर ने बताया कि जी20 बैठक के दौरान उन्होंने लगभग सभी देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इनमें कुछ मुलाकातें अलग-अलग हुईं, जबकि कुछ देशों के प्रतिनिधियों के साथ समूह में चर्चा की गई।

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