व्यापार
गूगल ने चुनिंदा बाजारों में पिक्सल5 और पिक्सल 4ए 5जी लॉन्च किया
गूगल ने आखिरकार अपने बहुप्रतिक्षित स्मार्टफोन-पिक्सल 5 और पिक्सल 4ए 5जी को लॉन्च कर दिया है। दोनों स्मार्टफोन क्वॉलकॉम स्नैपड्रैगन 765जी एसओसी चिपसेट से लैस हैं। साथ ही इनमें डुअल रियल कैमरा और एक 8एमपी का सेल्फी कैमरा है, जो होल पंच डिस्प्ले डिजाइन में फिट किया हुआ है।
गूगल पिक्सल 5 की कीमत 699 डॉलर रखी गई है जबकि गूगल पिक्सल 4ए 5जी की कीमत 499 डॉलर है।
दोनों स्मार्टफोन सबसे पहले 5जी मार्केट्स अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, आयरलैंड, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ताइवान और आस्ट्रेलिया में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। सबसे पहले ये फोन जापान में उलपब्ध होगा और फिर बाकी के देशो में खरीदा जा सकेगा।
भारत में इन स्मार्टफोन्स कब उपलब्ध होंगे, इस बारे में गूगल ने अभी कुछ भी साफ नहीं किया है। भारत मे अभी 5जी सेवा शुरू नहीं हुई है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत ने यूएई को अनार और कीवी का किया निर्यात, किसानों की बढ़ेगी आय

भारत के अनार और कीवी फलों की ताजा खेप यूएई के दुबई के बाजार में पहुंच गई है, जिससे देश के किसानों के लिए नए बाजारों के रास्ते खुले हैं। यह केंद्र सरकार के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से संभव हुआ है। यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को दी।
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान के अनुसार, एपीडा ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से सिंदूरी किस्म के 1.3 मीट्रिक टन अनार और अरुणाचल प्रदेश के जीरो से 1.5 मीट्रिक टन कीवी के परीक्षण निर्यात को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई तक पहुंचाने में मदद की है।
अनार की इस खेप में 2-2 किलोग्राम के 650 बॉक्स शामिल थे, जिसका निर्यात उत्तर प्रदेश स्थित अमामा एक्सपोर्ट्स ने किया। इस पहल के तहत स्थानीय उत्पादकों और एक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को निर्यातक से जोड़ा गया है, जिससे हिमाचल प्रदेश के बागवानी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने के अवसर मिल रहे हैं।
बयान के अनुसार, अनार सीधे स्थानीय किसानों और भुंतर एफपीओ से खरीदे गए थे, जो लगभग 600 किसानों से जुड़ा हुआ है। कुल्लू जिला बागवानी प्रशासन ने खरीद और समन्वय में मदद करके इस पहल को समर्थन दिया।
यह पहल किसानों के लिए बाजार संपर्क मजबूत करने में प्रत्यक्ष खरीद और एफपीओ के माध्यम से सामूहिक भागीदारी की भूमिका को दर्शाती है। इस निर्यात में शामिल किसानों को घरेलू बाजार में प्रचलित कीमतों की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक मूल्य मिला।
सिंदूरी किस्म हिमाचल प्रदेश में उगाई जाने वाली अनार की प्रमुख किस्मों में शामिल है। इसके अलावा यहां भगवा और कंधारी किस्मों की भी खेती होती है। आकर्षक लाल छिलके, रसीले दानों और मीठे-खट्टे स्वाद के लिए पहचाने जाने वाले सिंदूरी अनार ताजा खपत के लिए उपयुक्त हैं और इनमें निर्यात बाजार की भी अच्छी संभावनाएं हैं।
अरुणाचल प्रदेश से 1.5 मीट्रिक टन कीवी की परीक्षण निर्यात खेप सफलतापूर्वक दुबई पहुंची और अल कुसैस स्थित लुलु हाइपरमार्केट में प्रदर्शित की गई। यह पहल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस फल की संभावनाओं का आकलन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) के तहत शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य ‘कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी’ ब्रांडिंग अभियान के अंतर्गत राज्य के कीवी क्षेत्र को बढ़ावा देना और मजबूत करना है। राज्य सरकार के सहयोग से लागू इस पहल का लक्ष्य राज्य के कीवी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पेश करना, उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया का आकलन करना और स्थानीय उत्पादकों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ाने हेतु मजबूत बाजार संपर्क विकसित करना है।
अरुणाचल प्रदेश की ऊंचाई वाले क्षेत्रों की जलवायु और प्राकृतिक वातावरण कीवी की खेती के लिए अनुकूल हैं। यहां उगने वाले कीवी की गुणवत्ता और स्वाद विशिष्ट हैं। राज्य के उत्पादों में प्रीमियम घरेलू बाजारों, निर्यात को बढ़ावा देने और मूल्यवर्धित उत्पादों के क्षेत्र में अच्छी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से हेवर्ड, मोंटी, एलिसन और ब्रूनो किस्मों की खेती की जाती है। इनमें हेवर्ड किस्म की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग है।
इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कीवी उत्पादकों को संभावित विदेशी बाजारों से जोड़ना भी है, ताकि भविष्य में होने वाली खेपों के माध्यम से बिक्री के अतिरिक्त माध्यम और किसानों को बेहतर आय के अवसर मिल सकें। उम्मीद है कि इस परीक्षण निर्यात से बाजार की प्रतिक्रिया का आकलन करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अरुणाचल प्रदेश के कीवी की पहुंच बढ़ाने के लिए जरूरी आवश्यकताओं की पहचान करने में मदद मिलेगी।
व्यापार
भारत-डेनमार्क ने नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर, ऑफशोर विंड और ग्रीन हाइड्रोजन पर हुई चर्चा

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 के दौरान डेनमार्क के व्यवसाय एवं प्रतिस्पर्धात्मकता मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने तथा स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े नए अवसरों पर चर्चा की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए जोशी ने बताया कि बैठक में ऑफशोर विंड एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण जैसे क्षेत्रों में भारत-डेनमार्क सहयोग को विस्तार देने पर विचार-विमर्श किया गया।
जोशी ने भारत के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक निवेश अवसरों को रेखांकित करते हुए डेनमार्क की कंपनियों को तकनीकी साझेदारी, संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) और स्थानीय विनिर्माण के माध्यम से अधिक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने भारत-डेनमार्क ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने तथा स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
इससे पहले डेनमार्क के मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड ने सोमवार को मुंबई का दौरा किया था, जहां उन्होंने समुद्री मामलों, हरित शिपिंग, प्रौद्योगिकी, व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डेनमार्क और महाराष्ट्र लगभग समान आकार की अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों के पास एक-दूसरे को देने के लिए काफी अवसर मौजूद हैं।
लिडेगार्ड ने बताया कि 60 से अधिक डेनिश कंपनियां पहले से महाराष्ट्र में काम कर रही हैं और प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बाद व्यावसायिक अवसरों में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि डेनमार्क की प्रमुख शिपिंग कंपनी मर्स्क भारत के समुद्री क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही है। मुंबई में कंपनी के टर्मिनल का दौरा करने के बाद उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र और डेनमार्क के बीच समुद्री सहयोग और निवेश संबंध और मजबूत होंगे।
यात्रा के दौरान लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के चेयरमैन एस.एन. सुब्रमण्यम को डेनमार्क का मानद वाणिज्य दूत नियुक्त किया गया। लिडेगार्ड ने महाराष्ट्र के राज्यपाल झिष्णु देव वर्मा से भी मुलाकात कर डेनिश निवेश, भारत-ईयू एफटीए और समुद्री क्षेत्र तथा बुनियादी ढांचे में उभरते आर्थिक अवसरों पर चर्चा की।
उन्होंने एपीएम टर्मिनल्स मुंबई का भी दौरा किया, जिसे मर्स्क ग्रुप संचालित करता है। यहां बंदरगाह संचालन, बुनियादी ढांचा विकास, हरित प्रौद्योगिकियों के उपयोग और भारत-डेनमार्क समुद्री सहयोग को बढ़ाने के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।
हाल के महीनों में डेनमार्क की कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाया है। सितंबर में नोवोनेसिस ने पातालगंगा संयंत्र के विस्तार के लिए 60 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। वहीं अक्टूबर 2026 में इम्पैक्ट फंड डेनमार्क ने भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक बस कंपनी ग्रीनसेल मोबिलिटी में 230 मिलियन डेनिश क्रोनर (डीकेके) के निवेश की घोषणा की थी।
व्यापार
भारत की बायोइकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए तेज मंजूरियां और आसान फंडिंग जरूरी: पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत की जैव अर्थव्यवस्था (बायोइकोनॉमी) को गति देने के लिए नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया तेज करने, स्टार्टअप्स के लिए वित्तपोषण को आसान बनाने और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया है।
‘भारत की बायोइकॉनॉमी का अवसर: नवाचार और विकास को बढ़ावा देने में स्टार्टअप्स की भूमिका’ विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक की अध्यक्षता करते हुए गोयल ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और उद्यमशील प्रतिभा का बेहतर उपयोग कर देश को वैश्विक बायोइकोनॉमी क्षेत्र में अग्रणी बनाया जा सकता है।
वाणिज्य मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि गोयल ने बैठक के दौरान सामने आए सुझावों पर समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। चर्चा का मुख्य फोकस बायोफार्मा स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए नियमों को सरल बनाना, मंजूरी प्रक्रियाओं को तेज करना, पूंजी तक पहुंच बढ़ाना और साझा बुनियादी ढांचे का विकास करना था।
डीपीआईआईटी द्वारा नीति आयोग और नीति फ्रंटियर टेक हब के सहयोग से आयोजित इस बैठक में प्रतिभागियों ने एक प्रस्तावित रेगुलेटरी सैंडबॉक्स, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम, वैश्विक नियामकीय मानकों के साथ बेहतर तालमेल और पेटेंट आवेदन प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे उपायों पर चर्चा की। इन कदमों का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स को तेजी से विस्तार करने में मदद करना है।
बैठक में केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित बायोफार्मा शक्ति पहल पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने साझा प्रयोगशालाओं, परीक्षण सुविधाओं और क्लीनिकल ट्रायल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बायोफार्मा स्टार्टअप्स की लागत कम हो सके और नवाचार को बढ़ावा मिले।
इस बीच, नीति आयोग की विशिष्ट फेलो ने कहा कि प्रतिस्पर्धी वैश्विक बायोइकोनॉमी के निर्माण के लिए स्टार्टअप्स, उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के बीच सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वहीं, नीति आयोग के सदस्य गोबर्धन दास ने अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने और वैज्ञानिक खोजों को व्यावसायिक रूप से उपयोगी उत्पादों में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया।
राउंडटेबल में जीवन विज्ञान क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण को मजबूत करने, प्रयोगशाला उपकरणों और रसायनों के आयात हेतु सीमा शुल्क मंजूरियों को तेज करने तथा सरकारी योजनाओं और नियामकीय समर्थन तक पहुंच को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, प्रतिभागियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि नीतिगत हस्तक्षेप अधिक प्रभावी हों और क्षेत्र विशेष की चुनौतियों का तेजी से समाधान किया जा सके।
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