अंतरराष्ट्रीय
कोविड के चलते अर्थव्यवस्था पर आए प्रभाव धीरे-धीरे कम होंगे: आरबीआई गवर्नर
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कहा है कि अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 महामारी के कारण आया असर धीरे-धीरे कम होगा। फिक्की की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय बैंक के प्रमुख ने कहा, “देश अभी भी कोविड -19 के प्रभाव में है और अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे सामान्य ग्रोथ पर वापस आएगी।”
उन्होंने कहा, “पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के बाद दूसरी तिमाही में चीजों में काफी सुधार हुआ है।”
दास ने विश्व बैंक द्वारा किए गए आकलन का हवाला देते हुए कहा कि विश्व स्तर पर इन प्रभावों से उबरने में अधिक समय लगेगा। आरबीआई ने लगातार बड़े पैमाने पर लिक्विडिटी इन्फ्यूजन किया है और इसने सरकार द्वारा कम दर पर और गैर-विघटनकारी तरीके से बड़ी उधारी पाने को सुनिश्चित किया है। इसके अलावा लिक्विडिटी इन्फ्यूजन ने अन्य क्षेत्रों में भी अच्छा काम किया है।
व्यापार
बर्नस्टीन ने निफ्टी का टारगेट घटाकर 25,000 किया; कहा- आय की चिंताओं से बढ़त सीमित

ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने निफ्टी के लिए इस साल के अंत तक का टारगेट प्राइस घटाकर 25,000 कर दिया है, जो कि पहले 26,000 था। इसकी वजह अमेरिका से ट्रेड डील पर अनिश्चितता और भारतीय इक्विटी की आय में सुधार को लेकर चिंताएं बने रहना है।
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि बाजार में कुछ सुधार की उम्मीद है, लेकिन बिगड़ते व्यापाक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कॉरपोरेट आय पर लगातार दबाव के बीच, इसमें लंबे समय तक बढ़त की गुंजाइश सीमित दिखती है।
बर्नस्टीन ने लगातार दूसरी बार निफ्टी के टारगेट प्राइस में कटौती की है। इससे पहले ब्रोकेरज फर्म ने इस साल की शुरुआत में निफ्टी के लिए 28,100 का लक्ष्य निर्धारित किया था। ब्रोकरेज फर्म को अपने पिछले साल के अंत के टारगेट से 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद थी।
हालांकि, लगातार खराब होते वैश्विक आर्थिक हालातों, ऊर्जा की महंगी कीमतों और कमजोर आय के आउटलुक के चलते ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी के लिए अपना टारगेट प्राइस घटाया है।
बर्नस्टीन ने अपनी भारत स्ट्रेटजी रिपोर्ट में कहा है कि सकारात्मक रिटर्न की उनकी उम्मीदें बाजार में गिरावट के बाद रिकवरी पर आधारित हैं, न कि भारतीय इक्विटी के दृष्टिकोण में किसी व्यापक सुधार पर।
भारतीय बाजार में गिरावट पर बर्नस्टीन ने कहा कि निफ्टी का आगामी 12 महीनों का ‘प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो’ (पीई रेशियो) गिरकर 16.6 पर आ गया है, जो पिछले छह वर्षों में इसका सबसे निचला स्तर है। जून 2022 के बाद पहली बार इस इंडेक्स का वैल्यूएशन 17 गुना से नीचे आ गया है। यह स्तर लगभग वैसा ही है, जैसा कोविड-19 के दौरान बाजार में आई गिरावट और 2022 में हुई गिरावट के समय देखा गया था।
बर्नस्टीन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, “पिछले दो वर्षों में कमाई में मामूली वृद्धि के बावजूद, निफ्टी का मूल्यांकन (वैल्यूएशन) छह साल के निचले स्तर पर होना एक आकर्षक विकल्प लग सकता है।” साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंडेक्स के अपने इतिहास से इसकी तुलना करना भ्रामक हो सकता है।
ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि हालिया गिरावट के बाद भी, कई एशियाई बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर अभी भी महंगे हैं। उन्होंने ऊंचे मूल्यांकन के कारणों के रूप में व्यापक बाजार की कमजोरी और घरेलू फंड के मजबूत प्रवाह का जिक्र किया है।
व्यापार
आईडीबीआई बैंक का मुनाफा वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही 39 प्रतिशत गिरा

आईडीबीआई बैंक ने शनिवार को कहा कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में उसका शुद्ध मुनाफा 39.2 प्रतिशत घटकर 2,206 करोड़ रुपए रह गया है, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह 3,627 करोड़ रुपए पर था।
इसमें आई भारी गिरावट का कारण पिछले साल का ऊंचा आधार था, जिसमें एनएसडीएल में रणनीतिक निवेश की बिक्री से हुआ 1,699 करोड़ रुपए का एकमुश्त लाभ शामिल था।
हालांकि, बैंक ने बताया कि इसे हटा दें तो शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
तिमाही आधार पर बैंक का शुद्ध मुनाफा 4 प्रतिशत बढ़कर 2,115 करोड़ रुपए हो गया है।
वित्त वर्ष 27 की सितंबर तिमाही में शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) सालाना आधार पर 28.7 प्रतिशत बढ़कर 4,227 करोड़ रुपए हो गई। तिमाही आधार पर इसमें 21 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।
इसके अलावा, शुद्ध ब्याज अंतर (एनआईएम) सालाना आधार पर 3.71 प्रतिशत से बढ़कर 4.11 प्रतिशत हो गया। यह पिछली तिमाही के 3.61 प्रतिशत से 50 आधार अंक अधिक है।
सितंबर तिमाही में बैंक का लागत से आय सुधारकर 48.17 प्रतिशत हो गया है, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 385 आधार कम है। वहीं, डिपॉजिट की लागत पिछले साल के 4.69 प्रतिशत से घटकर 4.55 प्रतिशत पर आ गई है।
कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 3,55,684 करोड़ रुपए हो गया है जो पहले 3,03,408 करोड़ रुपए था। वहीं, नेट एडवांस 18 प्रतिशत बढ़कर 2,30,220 करोड़ रुपए से 2,71,533 करोड़ रुपए हो गया। पिछली तिमाही के मुकाबले, डिपॉजिट में 9 प्रतिशत और एडवांस में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सीएएसए डिपॉजिट सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़कर 1,55,877 करोड़ रुपए हो गए। सीएएसए अनुपात 43.82 प्रतिशत रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 18 आधार अंक अधिक है।
इस हफ्ते की शुरुआत में, कैबिनेट ने फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को 52,878 करोड़ रुपए में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी है।
राष्ट्रीय समाचार
एयर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट को जयपुर में करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग, हाईजैक अलर्ट से मचा हड़कंप

फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को बुधवार सुबह सुरक्षा अलर्ट मिलने के बाद जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फ्लाइट में कथित हाईजैक खतरे से जुड़ा संकेत मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और विमान को दिल्ली के बजाय जयपुर डायवर्ट कर दिया गया।
एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-2030 फ्रैंकफर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। भारतीय हवाई क्षेत्र के करीब पहुंचने के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को एक सुरक्षा अलर्ट प्राप्त हुआ, जिसके बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग के लिए एहतियाती कदम उठाए गए। विमान को जयपुर के राजस्थान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारा गया, जहां उसे सुरक्षा जांच के लिए अलग-थलग (आइसोलेशन बे) क्षेत्र में ले जाया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सुबह करीब 9 बजे कुछ सेकंड के लिए इमरजेंसी सिग्नल प्राप्त हुआ। इसके बाद करीब 9:10 बजे विमान को जयपुर की ओर मोड़ने का फैसला लिया गया। विमान ने लगभग 9:45 बजे जयपुर हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की।
लैंडिंग के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने विमान की गहन जांच शुरू की। फिलहाल किसी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच प्रक्रिया जारी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान से कथित तौर पर “स्क्वॉड 7500” सिग्नल प्रसारित हुआ था। विमानन क्षेत्र में यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ट्रांसपोंडर कोड है, जिसका उपयोग पायलट किसी संभावित हाईजैकिंग या विमान में अवैध हस्तक्षेप की स्थिति की जानकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोल को गोपनीय तरीके से देने के लिए करते हैं।
इसी संकेत के मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं और विमान की प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान के सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालकर एयरपोर्ट टर्मिनल के निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में ले जाया गया। किसी के घायल होने या किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है।
घटना के बाद कुछ समय के लिए यात्रियों के बीच चिंता का माहौल जरूर बना, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और एयरपोर्ट प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखा।
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विमान से हाईजैक अलर्ट क्यों प्रसारित हुआ। यह तकनीकी त्रुटि थी, गलत संकेत था या फिर किसी अन्य कारण से यह कोड सक्रिय हुआ, इसकी जांच की जा रही है।
घटना के समय तक एयर इंडिया और जयपुर एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
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