अंतरराष्ट्रीय
18 महीने उमर अकमल पर प्रतिबंध घटा
पाकिस्तान के मध्य क्रम के बल्लेबाज उमर अकमल पर भ्रष्टाचार के कारण लगा प्रतिबंध डेढ़ साल कम कर दिया गया है। क्रिकेट पाकिस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश (सेवानिवृत) फकीर मुहम्मद खोखर ने स्वतंत्र अधिनिर्णायक के तौर पर उमर अकमल की अपील पर सुनवाई की और दोनों पक्षों की बात सुनकर अपना फैसला सुनाया।
फकीर ने 29 जुलाई को दिए अपने आदेश में कहा, “अपील करने वाले शख्स ने अपने इंटरव्यू में और कारण बताओ नोटिस में माना है कि उन्होंने मैच फिक्सिंग के दो प्रस्ताव संबंधी बहुत अहम जानकारी छुपाई इसलिए इसमें कोई शक नहीं है कि उनके ऊपर लगे आरोप सही हैं।”
उन्होंने कहा, “अपीलकर्ता ने जो कदम उठाया है वो विरोधाभासी हैं और भरोसा करने योग्य नहीं है। इसलिए अपीलकर्ता के खिलाफ जो मामले हैं वो सही है। अनुशासन समिति के चेयरमैन ने पूरे न्यायापूर्ण तरीके से अपीलकर्ता को दोषी बताया है।”
फकीर ने हालांकि सहानुभूति नजरिए से उमर अकमल के प्रतिबंध को एक साल छह महीने का कर दिया। उनके प्रतिबंध की सीमा 20 फरवरी, 2020 से लागू होगी जब वह अस्थायी तौर पर निलंबित किए गए।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने उमर को मैच फिक्सिंग के प्रस्ताव मिलने की जानकारी बोर्ड को न देने कारण अप्रैल में क्रिकेट संबंधी सभी गतिविधियों से तीन साल के लिए बैन कर दिया था।
अब जबकि उनका बैन 18 महीने की ही रह गया तो वह 19 अगस्त, 2021 से दोबारा क्रिकेट खेलने के योग्य हो जाएंगे।
उमर ने पाकिस्तान के लिए 16 टेस्ट, 121 वनडे और 84 टी-20 मैच खेले हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें भारत के खिलाफ मैच छोड़ने के प्रस्ताव के अलावा एक मैच में दो गेंदें छोड़ने का भी प्रस्ताव एक सट्टेबाज द्वारा मिला था।
अंतरराष्ट्रीय
ऑस्ट्रेलिया के पीएम की चेतावनी ‘आने वाले महीने आसान नहीं’, जनता से अपील ‘फ्यूल बचाएं’

कैनबरा, 1 अप्रैल : ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने जनता से खास अपील की है। चेतावनी भी दी कि मिडिल ईस्ट के वर्तमान हालात की वजह से तेल संकट गहराएगा और आने वाले महीने “आसान नहीं रहने वाले” हैं।
उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, “आने वाले महीने आसान नहीं हो सकते। मैं इस बारे में साफ-साफ कहना चाहता हूं। कोई भी सरकार इस युद्ध से पैदा हो रहे दबाव को खत्म करने का वादा नहीं कर सकती।
ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा कि वह देश से सीधे बात करना चाहते हैं कि सरकार “इस मुश्किल समय में ऑस्ट्रेलिया को बचाने के लिए” क्या कर रही है, और वे (जनता) देश की मदद के लिए क्या कर सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा, “पक्ष-विपक्ष सभी ऑस्ट्रेलिया को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। ताकि अगर दुनिया भर में हालात और खराब होते हैं और लंबे समय में हमारी फ्यूल सप्लाई में बहुत ज्यादा रुकावट आती है, तो हम अगले कदम मिलकर तय कर सकें।
अल्बनीज ने जनता को बताया कि वर्तमान स्थिति को ध्यान में रख फ्यूल एक्साइज आधा कर दिया गया है और अगले तीन महीनों के लिए हेवी रोड यूजर चार्ज जीरो कर दिया गया है। पीएम ने भरोसा दिलाया, “हम फ्यूल की कीमत कम करने के लिए काम कर रहे हैं। साथ ही यहां अधिक ईंधन लाने और अपने मजबूत ट्रेडिंग रिश्तों का इस्तेमाल कर ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा पेट्रोल, डीजल और फर्टिलाइजर लाने के लिए काम कर रहे हैं।
3 मिनट 17 सेकंड के संबोधन में अल्बनीज ने आगे कहा, “मैं वादा कर सकता हूं कि हम ऑस्ट्रेलिया को इसके सबसे बुरे असर से बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे।” उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई लोगों से अपील की कि वे घबराकर फ्यूल न खरीदें और जहां तक हो सके, कार की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें।
उन्होंने कहा, “अगर आप सड़क पर निकल रहे हैं, तो जरूरत से ज्यादा फ्यूल न लें—बस वैसे ही भरवाएं जैसे आप आम तौर पर भरवाते हैं। अपने समुदाय, दूरदराज के इलाके में रहने वाले लोग और जरूरी इंडस्ट्रीज से वास्ता रखने वालों के बारे में सोचें।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिकी पत्रकार का बगदाद में अपहरण, यूएस विदेश मंत्रालय बोला ‘रिहाई की कोशिश जारी’

वाशिंगटन/बगदाद, 1 अप्रैल : अमेरिकी पत्रकार शेली किटल्सन का मंगलवार को इराक की राजधानी बगदाद में अपहरण कर लिया गया। सूत्रों और उनके मीडिया आउटलेट ने बताया कि शेली को अगवा किया गया है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि वो उनकी रिहाई की कोशिश में जुटा है।
सउदी अरब के चैनल अल-अरबिया ने कथित अपहरण का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। बताया कि अज्ञात हमलावरों ने पत्रकार को अल-सादून स्ट्रीट स्थित बगदाद होटल के पास से अगवा किया, जिसमें एक वाहन में पत्रकार को जबरदस्ती गाड़ी में खींचकर बैठाया जा रहा है।
अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डायलन जॉनसन ने एक्स पोस्ट में कहा कि “ईरानी-गठबंधन वाले मिलिशिया ग्रुप कताइब हिजबुल्लाह से जुड़े एक व्यक्ति को इराकी अधिकारियों ने हिरासत में लिया है, जिसके किडनैपिंग में शामिल होने का शक है।”
अमेरिकी मीडिया सीएनएन के अनुसार, कताइब हिजबुल्लाह एक ईरानी-समर्थित मिलिशिया ग्रुप है जो कई बार अमेरिकियों को निशाना बनाता आया है। शेली को मिडिल ईस्ट और अफगानिस्तान की रिपोर्टिंग का काफी अनुभव प्राप्त है। उनकी रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय, अमेरिकी और इतालवी आउटलेट्स में प्रकाशित हुई हैं।
इराक के गृह मंत्रालय ने भी घटना की पुष्टि की है, हालांकि उसने पत्रकार की पहचान सार्वजनिक नहीं की। वहीं अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डायलन ने अपनी पोस्ट में दावा किया है कि स्टेट डिपार्टमेंट ने पहले ही उन्हें खतरों की चेतावनी देकर अपनी ड्यूटी पूरी की, साथ ही कहा कि मंत्रालय एफबीआई के साथ कोऑर्डिनेट करते रहेगा ताकि उनकी जल्द से जल्द रिहाई पक्की हो सके।
डायलन के अनुसार, “इराक अभी भी लेवल 4 ट्रेवल एडवाइजरी पर है और अमेरिकियों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी वजह से इराक न जाएं और अभी इराक छोड़ दें।”
स्टेट डिपार्टमेंट सभी अमेरिकियों को, प्रेस के सदस्यों सहित, सभी ट्रैवल एडवाइजरी का पालन करने की पक्की सलाह देता है।
वहीं, बतौर स्वतंत्र पत्रकार न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर ने बयान जारी कर अपनी फिक्र जाहिर की और उनके ‘जल्द और सुरक्षित वापसी’ की उम्मीद जताई।
बयान में आगे कहा गया, “हम उनकी सुरक्षित और तुरंत रिहाई की मांग करते हैं। हम उनकी रिपोर्टिंग के कायल हैं और उनके उनकी जल्द वापसी की मांग करते हैं।”
सोशल मीडिया प्रोफाइल के अनुसार शेली किटल्सन दुनिया के सबसे खतरनाक संघर्ष क्षेत्रों से ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मिडिल ईस्ट खासकर इराक और सीरिया पर बहुत काम किया है। रिपोर्टिंग का मुख्य विषय युद्ध और संघर्ष, मिलिशिया समूह, स्थानीय आबादी पर असर और मानवीय संकट रहा है।
अंतरराष्ट्रीय
हम भारतीय तेल बाजार पर अमेरिका के ‘दबाव’ को खारिज करते हैं, भारत की विदेश नीति स्वतंत्र : रूसी राजदूत

नई दिल्ली, 1 अप्रैल : भारत के तेल बाजार को लेकर अमेरिका के दबाव के आरोपों पर रूस ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने साफ कहा कि रूस अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी भी तरह के ‘अमेरिकी दबाव’ को पूरी तरह खारिज करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि नई दिल्ली अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है।
मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में डेनिस अलिपोव ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत के बाजार में रूस के लिए बाधाएं खड़ी करने की कोशिशें वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से बिल्कुल सही तरीका नहीं हैं।
जब उनसे इस बारे में पूछा गया कि क्या टैरिफ विवाद के बीच भारत रूसी तेल का आयात कम कर रहा है, तो उन्होंने कहा, “मैं अमेरिका-भारत व्यापार पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हूं। लेकिन हम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी भी तरह के दबाव को सख्ती से खारिज करते हैं। यह व्यापार करने का सही तरीका नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा, “हम साफ तौर पर देख रहे हैं कि अमेरिका भारत के बाजार में रूस के लिए बाधाएं खड़ी करने की कोशिश कर रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और व्यापार के लिए सही तरीका नहीं है। हम भारतीय तेल बाजार पर अमेरिकी दबाव को खारिज करते हैं। भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और हम ऐसे दबाव को ठुकराने के उसके रुख का स्वागत करते हैं।”
रूस के राजदूत ने यह भी बताया कि मॉस्को और नई दिल्ली के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि हाल के समय में भारत ने रूस से तेल आयात काफी बढ़ा दिया है।
डेनिस अलिपोव ने कहा, “हम दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों का विस्तार कर रहे हैं। हाल ही में भारत को रूस से तेल की आपूर्ति में काफी बढ़ोतरी हुई है। हम इस दिशा में लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे दोनों देशों को लाभ हो।”
मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। उन्होंने इसे ‘अमेरिकी ऑयल डिसरप्शन डिप्लोमेसी’ का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा, “मध्य पूर्व की परिस्थितियों के बीच ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। लेकिन रूस और भारत के बीच व्यापार, खासकर तेल के क्षेत्र में, तेजी से आगे बढ़ रहा है और हम इसे जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित रूस यात्रा को लेकर अलिपोव ने कहा कि मॉस्को इस साल उनकी यात्रा का दिल से स्वागत करेगा।
उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच हर साल शिखर बैठक का एक तंत्र है और पिछले साल दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति ने भारत का दौरा किया था।
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