राजनीति
कानपुर के अपहृत पैथोलॉजी कर्मी संजीत यादव की हत्या पर विपक्ष ने उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक महीने पहले लैब टेक्नीशियन का अपहरण और हत्या को लेकर विपक्ष ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा है। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्विटर के माध्यम से लिखा, “उप्र में कानून व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। आम लोगों की जान लेकर अब इसकी मुनादी की जा रही है। घर हो, सड़क हो, ऑफिस हो कोई भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करता। विक्रम जोशी के बाद अब कानपुर में अपहृत संजीत यादव की हत्या। खबरों के मुताबिक।”
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि “पुलिस ने किडनैपर्स को पैसे भी दिलवाए और अब उनकी हत्या कर दी गई। एक नया गुंडाराज आया है। इस जंगलराज में कानून-व्यवस्था गुंडों के सामने सरेंडर कर चुकी है।”
समाजवादी पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा, “कानपुर से 22 जून को अपहृत युवक संजीत यादव की हत्या समूची कानून व्यवस्था की हत्या है! 1 महीने से निष्क्रिय सरकार का भ्रष्ट तंत्र सिर्फ विपक्षियों को फंसाने के लिए? अपराधियों को पकड़ने के लिए मुख्यमंत्री ने क्या रणनीति बनायी? एकलौते पुत्र को खोने वाले पीड़ित परिवार को मिले मुआवजा।”
ज्ञात हो कि कानपुर के बर्रा से 22 जून को लैब टेक्नीशियन संजीत यादव का अपहरण फिरौती के लिए उसके दोस्त ने साथियों के साथ मिलकर किया था। 26 जून को उसकी हत्या कर लाश पांडु नदी में फेंक दी थी। बृहस्पतिवार रात पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोस्त कुलदीप, रामबाबू समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
लैब टेक्नीशियन के रिश्तेदार का दावा है कि उन्होंने अपहरणकतार्ओं को 30 लाख रुपये की फिरौती दी है। लेकिन आईजी कानपुर रेंज मोहित अग्रवाल का कहना है कि अब तक की जांच के अनुसार हमने पाया कि कोई फिरौती की राशि नहीं दी गई है, फिर भी हम सभी एंगल से मामले की जांच कर रहे हैं।
एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि बर्रा से अपहरण किए गए युवक की 23 जून को गुमशुदगी लिखी गई थी। इसके बाद 26 जून को उसे एफआईआर में तब्दील किया गया था। परिजनों के पास 29 जून को फिरौती के लिए कॉल आया था। सर्विलांस और क्राइम ब्रांच की टीमों को लगाया गया था।
पुलिस टीम के द्वारा कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। संजीत के दो खास दोस्त थे, ये दोस्त संजीत के साथ अन्य पैथोलॉजी में काम कर चुके हैं। उनके द्वारा कबूला गया है कि 26 या 27 जून को ही मर्डर किया है, इसके बाद पांडू नदी में शव को फेंक दिया गया है। शव की तलाश की जा रही है।
राष्ट्रीय समाचार
ओवैसी ने यूपी में विपक्षी गठबंधन पर कहा-‘हम 2 अक्टूबर तक अपने गठबंधन का ऐलान करेंगे’

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन पर अपने फैसले की घोषणा 2 अक्टूबर तक करेगी। साथ ही, उन्होंने साफ किया कि पार्टी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है और राज्य में मुसलमानों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विपक्षी दलों को मिलकर काम करने पर विचार करना चाहिए।
मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि एआईएमआईएम चुनावों की तैयारी कर रही है और उन्हें भरोसा है कि पार्टी के उम्मीदवार उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचेंगे।
ओवैसी ने कहा, “हम 2 अक्टूबर तक यह बता देंगे कि हम किसके साथ गठबंधन करेंगे।” उन्होंने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने के मकसद के बारे में भी बताया और कहा कि मुस्लिम समुदाय के पास ज्यादा राजनीतिक ताकत होनी चाहिए और समुदाय के भीतर से ही नेतृत्व उभरना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम पूरी तरह तैयार हैं और तैयारियां कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि इस बार, ईश्वर ने चाहा तो हमारे उम्मीदवार जीतेंगे और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचेंगे। हमारी कोशिश है कि यहां बड़ी संख्या में रहने वाले मुसलमानों के पास राजनीतिक ताकत हो और समुदाय के भीतर से ही नेतृत्व उभरे। यहां हर समुदाय का अपना राजनीतिक नेतृत्व है लेकिन इतने बड़े समुदाय को राजनीतिक रूप से पूरी तरह किनारे कर दिया गया है।”
ओवैसी के ये बयान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले आए हैं, जिनके लिए एआईएमआईएम ने अपने संगठन और लोगों तक पहुंचने की गतिविधियों को तेज कर दिया है।
पार्टी ने संकेत दिया है कि वह ‘एक जैसी सोच वाले’ राजनीतिक समूहों के साथ काम करने को तैयार है। ओवैसी ने कहा कि कोई भी एक राजनीतिक दल अकेले भारतीय जनता पार्टी को नहीं रोक सकता और सुझाव दिया कि विपक्षी दलों को मिलकर काम करने पर विचार करना चाहिए।
इससे पहले कानपुर रैली में बोलते हुए ओवैसी ने आने वाले चुनावों के लिए एआईएमआईएम की तैयारियों पर जोर दिया और कहा कि पार्टी राज्य में मजबूत राजनीतिक मौजूदगी बनाने के लिए काम करती रहेगी।
एआईएमआईएम प्रमुख की 2 अक्टूबर की समय-सीमा पार्टी की अगली घोषणा के लिए एक निश्चित समय बताती है, जो संभावित चुनावी गठबंधनों के बारे में हो सकती है।
उन्होंने पहले संकेत दिया है कि पार्टी उत्तर प्रदेश में गठबंधन करना चाहती है, हालांकि ऐसी किसी भी व्यवस्था की जानकारी, जिसमें शामिल पार्टियां और सीटों का बंटवारा शामिल है, अभी घोषित नहीं की गई है।
एआईएमआईएम पूरे उत्तर प्रदेश में अपने प्रचार अभियान की गतिविधियों को तेज कर रही है और पार्टी लोगों तक पहुंचने और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर ध्यान केंद्रित कर रही है। ओवैसी ने बार-बार मुसलमानों के राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेले जाने का मुद्दा उठाया है और चुनावी राजनीति में समुदाय की ज्यादा भागीदारी की मांग की है।
गठबंधन पर बातचीत का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक दल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहे हैं। ओवैसी के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि एआईएमआईएम की चुनावी रणनीति, जिसमें यह भी शामिल है कि पार्टी गठबंधन करेगी या नहीं और किसके साथ करेगी, 2 अक्टूबर तक और साफ हो जाएगी।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु के कृष्णगिरि में गणेश विसर्जन के दौरान नदी में डूबने से छात्र की मौत

तमिलनाडु के जनपद कृष्णगिरि में गणेश विसर्जन के दौरान एक कॉलेज छात्र की डूबने से मौत हो गई। कड़ी मशक्कत के बाद नदी से युवक को बाहर निकाला गया था। अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
यह घटना कृष्णगिरि जनपद के पोचमपल्ली के पास मंजामेडु इलाके में हुई। मृतक की पहचान 21 वर्षीय दिलीप के रूप में हुई है, जो एक प्राइवेट कॉलेज से बीई के आखिरी साल की पढ़ाई कर रहा था। वह तिरुपत्तूर जिले के मोलंगारामपट्टी गांव का रहने वाला था।
अलग-अलग इलाकों से लोग ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के साथ गणेश प्रतिमाएं थेनपेन्नईयार नदी में विसर्जित करने के लिए पहुंचे थे। सुबह से नदी के कई हिस्सों में मूर्तियां विसर्जित की जा रही थीं। इसी बीच छात्र अपने कुछ दोस्तों के साथ मूर्ति विसर्जन के लिए नदी में उतरा, लेकिन वह अचानक कंक्रीट की छड़ों और सीमेंट के मलबे में फंस गया।
उस जगह से ठीक से मलबे को नहीं हटाया गया था। वहां एक पुराना पुल पहले गिरा दिया गया था। नतीजतन, छात्र नदी में डूब गया। उसके साथ आए लोगों ने तुरंत उसे बचाने का प्रयास किया। काफी देर बाद उसे बाहर निकाला गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां जांच करने वाले डॉक्टरों ने दिलीप को मृत घोषित कर दिया।
घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने छात्र के पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा और मामले की जांच शुरू की।
वहीं, स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जो पुराना पुल गिराया था, वहां मौजूद सीमेंट की छड़ों और लोहे की नुकीली छड़ों को ठीक से नहीं हटाया था। अधिकारियों की इसी लापरवाही के कारण एक कॉलेज छात्र की मौत हो गई।
राष्ट्रीय समाचार
सीएम विजय आज तमिलनाडु में उत्तर-पूर्वी मानसून की तैयारियों की समीक्षा करेंगे

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय सोमवार दोपहर चेन्नई में सचिवालय में एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे। इस मीटिंग में नॉर्थ-ईस्ट मानसून के लिए तमिलनाडु की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी और बारिश के मौसम में जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का जायजा लिया जाएगा।
पूर्वोत्तर मानसून, जो आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर तक रहता है, राज्य की सालाना बारिश का एक बड़ा हिस्सा लाता है।
इस दौरान तटीय और डेल्टा जिलों में चक्रवात, बाढ़, जल-जमाव और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान का खतरा ज्यादा रहता है।
सरकार हर साल मानसून शुरू होने से पहले एहतियाती काम करती है। समीक्षा बैठक में मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और मुख्य विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
तटीय और डेल्टा जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होंगे और मुख्यमंत्री को अपने-अपने जिलों में पूरी की गई तैयारियों और तुरंत ध्यान देने की जरूरत वाले इलाकों के बारे में जानकारी देंगे।
बातचीत राजस्व, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, बिजली और परिवहन विभागों के बीच तालमेल से की जाने वाली कार्रवाई पर केंद्रित होगी।
अधिकारियों से जिला-स्तरीय आपातकालीन योजनाओं, मैनपावर की उपलब्धता और तमिलनाडु में भारी बारिश, बाढ़ या चक्रवाती मौसम के दौरान तेज़ी से कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री अधिकारियों को बचाव कर्मियों, नावों, पंपों, आपातकालीन वाहनों और अन्य जरूरी उपकरणों को तैनाती के लिए तैयार रखने का निर्देश दे सकते हैं।
भारी बारिश के बाद बाढ़, भूस्खलन या अलग-थलग पड़ने के खतरे वाले इलाकों में पहले से ही बचाव दल तैनात किए जा सकते हैं।
बैठक में राहत केंद्रों पर की गई व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी, जहां बिना रुकावट बिजली, सुरक्षित पीने का पानी, भोजन, दवाएं, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विभागों को पहले से ही उपयुक्त इमारतों की पहचान करने और उन्हें निचले और ज्यादा जोखिम वाले इलाकों से निकाले गए लोगों को रखने के लिए तैयार करने का निर्देश दिया जा सकता है।
जलाशयों, पानी के चैनलों और जल निकासी नेटवर्क से गाद हटाने जैसे तैयारी के कामों की भी समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।
सरकार जलकुंभी, अन्य रुकावटों और अतिक्रमणों को तेजी से हटाने के लिए कह सकती है, जो बारिश के पानी के बहाव में बाधा डाल सकते हैं और बाढ़ की स्थिति को और खराब कर सकते हैं।
अधिकारियों को क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों, ट्रांसमिशन टावरों और बिजली के अन्य कमजोर बुनियादी ढांचे की पहचान करने और उन्हें बिना देरी के ठीक करने का निर्देश भी दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री से विभाग-वार निर्देश जारी करने, अधूरे कामों के लिए समय-सीमा तय करने और जिला प्रशासन से मानसून के दौरान करीबी तालमेल बनाए रखने और चौबीसों घंटे निगरानी करने के लिए कहने की उम्मीद है।
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