राजनीति
पायलट कैंप के दो विधायक निलंबित, शेखावत के खिलाफ एफआईआर की मांग
कांग्रेस ने सचिन पायलट खेमे के दो विधायकों को शुक्रवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। साथ ही कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को हॉर्स-ट्रेडिंग में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार करने की मांग की है। विधायक भंवरलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री शेखावत और जयपुर निवासी संजय जैन के बीच हुई कथित बातचीत के एक ऑडियो के आने के तुरंत बाद कांग्रेस ने ये कदम उठाया।
जयपुर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कई मांगें कीं।
उन्होंने कहा, “हम एसओजी द्वारा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हैं। साथ ही स्थिति का दुरुपयोग करने के सबूत (जो पहली बार में ऐसा लगता है) मिलने पर उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।”
सुरजेवाला ने आगे कहा,”दूसरी बात, पायलट खेमे के विधायक भंवरलाल शर्मा और भाजपा नेता संजय जैन के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।”
तीसरा जांच की मांग उन्होंने राज्य में आने वाले काले धन को लेकर की। उन्होंने कहा, “यह पैसा किसने और कहां से भेजा, क्या यह हवाला के जरिए आया है। ऐसे कई मुद्दे हैं, जिनकी जांच की जरूरत है।”
चौथी मांग करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि जांच करके उन सभी वरिष्ठ नेताओं, अधिकारियों और एजेंसियों को बेनकाब करना चाहिए जो वरिष्ठ पद पर रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर रहे थे।
पांचवीं मांग को लेकर उन्होंने कहा कि पायलट को भी आगे आकर “विधायकों की सूची” के मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, जिनके बारे में गुरुवार शाम को ऑडियो टेप में चर्चा की गई है। इसके अलावा अगर अशोक गहलोत सरकार को गिरवी रखने के लिए पैसे का लेन-देन करने वाला कोई अन्य व्यक्ति या विधायक है, तो इसकी भी जांच होनी चाहिए।
राजनीति
उत्तराखंड चुनाव 2027 : हरिद्वार जिले की छह सीटों पर कांग्रेस का कब्जा, पिछली बार तीन सीट ही जीत सकी थी भाजपा

देवभूमि उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां राजनीतिक दलों ने शुरू कर दी हैं। हिंदुओं की आस्था के केंद्र हरिद्वार में भी सियासी हलचल शुरू हो गई है। यह जिला राज्य की सत्ता की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। जिले में हरिद्वार, भेल रानीपुर, ज्वालापुर (सुरक्षित), भगवानपुर (सुरक्षित), झबरेड़ा (सुरक्षित), पिरान कलियर, रुड़की, खानपुर, मंगलौर, लक्सर और हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीटें हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के 3, कांग्रेस के 5, बसपा के 2 और 1 निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे।
हालांकि, उपचुनाव में मंगलौर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत हासिल की। वर्तमान में जिले में कांग्रेस के 6 विधायक हैं।
हरिद्वार विधानसभा सीट पर 2002 से लगातार भाजपा का कब्जा है। भाजपा से मदन कौशिक लगातार पांच बार से विधायक हैं। 2022 के चुनाव में मदन कौशिक ने कांग्रेस उम्मीदवार सतपाल ब्रह्मचारी को 15,237 वोटों से हराया था। मदन कौशिक को 53,147, सतपाल ब्रह्मचारी को 37,910, बसपा उम्मीदवार चरण सिंह को 2,142 और ‘आप’ उम्मीदवार संजय सैनी को 1,248 वोट मिले थे। इस विधानसभा क्षेत्र में 64.23 फीसदी मतदान हुआ था।
भेल रानीपुर विधानसभा सीट से भी भाजपा उम्मीदवार आदेश चौहान लगातार तीन बार से विधायक हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में आदेश चौहान ने 57,544 वोट पाकर कांग्रेस उम्मीदवार राजबीर सिंह चौहान को 13,862 वोटों से हराया था। राजबीर सिंह चौहान को 43,682, बसपा उम्मीदवार ओमपाल सिंह को 5,880, ‘आप’ उम्मीदवार प्रशांत राय को 3,355 और एएसपी (केआर) उम्मीदवार प्रवीण सूर्या को 1,480 वोट मिले थे। इस विधानसभा क्षेत्र में 69.32 फीसदी मतदान हुआ था।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित ज्वालापुर सीट 2022 के चुनाव में भाजपा के हाथों से निकल गई थी। इस सीट से 2012 और 2017 में भाजपा उम्मीदवार विजयी हुए थे। वहीं, 2022 के चुनाव में कांग्रेस से रवि बहादुर ने भाजपा उम्मीदवार सुरेश राठौड़ को 13,343 वोटों से हराया था। रवि बहादुर को 42,372, सुरेश राठौड़ को 29,029 और बसपा उम्मीदवार शीशपाल सिंह को 14,760 वोट मिले थे। इस विधानसभा के 92,757 (79.30 फीसदी) मतदाताओं ने मतदान किया था।
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित भगवानपुर सीट पर 2015 में हुए उपचुनाव से कांग्रेस का कब्जा है। भगवानपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर वर्ष 2015 में विधायक सुरेंद्र राकेश के निधन के कारण उपचुनाव हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ममता राकेश विधायक बनी थीं। 2022 के चुनाव में भी कांग्रेस के टिकट पर ममता राकेश ने बसपा उम्मीदवार सुबोध राकेश को 4,811 वोटों से हराया था। भाजपा उम्मीदवार सत्यपाल सिंह 12,067 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। ममता राकेश को 44,808 और सुबोध राकेश को 39,997 वोट मिले थे। इस सीट पर 79.91 फीसदी मतदान हुआ था।
झबरेड़ा (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर 2022 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस उम्मीदवार वीरेंद्र कुमार ने भाजपा उम्मीदवार राजपाल सिंह को 8,216 से हराया था। बसपा उम्मीदवार आदित्य को 22,458 वोट मिले थे। यहां 78.40 फीसदी मतदान हुआ था।
पिरान कलियर विधानसभा सीट पर लगातार तीन बार से कांग्रेस का कब्जा है। कांग्रेस उम्मीदवार फुरकान अहमद 2012 से लगातार विधायक चुने जा रहे हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में फुरकान अहमद ने भाजपा उम्मीदवार मुनीश कुमार सैनी को 15,743 वोटों से हराया था। फुरकान अहमद को 43,539, मुनीश कुमार सैनी को 27,796, बसपा उम्मीदवार सुरेंद्र सिंह को 11,716 और एएसपी (केआर) के अब्दुल वाहिद को 11,441 वोट मिले थे। इस विधानसभा में 77.47 फीसदी मतदान हुआ था।
रुड़की विधानसभा सीट से लगातार तीन बार से प्रदीप बत्रा विधायक हैं। 2012 में कांग्रेस के टिकट पर प्रदीप बत्रा विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2017 में भाजपा में शामिल हो गए और विधायक चुने गए। 2022 विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2022 में प्रदीप बत्रा को 36,986 और कांग्रेस प्रत्याशी यशपाल राणा को 34,709 वोट मिले थे। जीत-हार का अंतर सिर्फ 2,277 वोटों का था। इस चुनाव में बसपा उम्मीदवार तनवीर अहमद को 2,932 और आप उम्मीदवार नरेश कुमार को 753 वोट मिले थे।
खानपुर विधानसभा सीट से 2022 विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार उमेश कुमार को जीत मिली थी। उमेश कुमार ने अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले 28 अक्टूबर 2026 को इस्तीफा दे दिया। 2022 के चुनाव में उमेश कुमार ने बसपा उम्मीदवार रविंद्र सिंह को 6,852 वोटों से हराया था। उमेश कुमार को 38,767, रविंद्र सिंह को 31,915, भाजपा उम्मीदवार रानी देवयानी को 30,834 और कांग्रेस उम्मीदवार सुभाष सिंह चौधरी को 6,289 वोट मिले थे। इस सीट पर 76.65 फीसदी मतदान हुआ था।
बहुजन समाज पार्टी की गढ़ मानी जाने वाली मंगलौर विधानसभा सीट पर 2022 में बसपा उम्मीदवार सरवत करीम अंसारी ने जीत हासिल की थी। सरवत करीम अंसारी के निधन के बाद 2024 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार काजी मुहम्मद निजामुद्दीन ने जीत हासिल की। उपचुनाव में काजी मुहम्मद निजामुद्दीन को 31,727, भाजपा उम्मीदवार करतार सिंह भडाना को 31,305 और सरवत करीम अंसारी के बेटे ओबेदुर रहमान को 19,559 वोट मिले थे।
लक्सर विधानसभा सीट से 2022 में बसपा उम्मीदवार शहजाद ने जीत हासिल की थी। शहजाद ने तत्कालीन विधायक भाजपा उम्मीदवार संजय गुप्ता को 10,440 वोटों से हराया था। शहजाद को 34,899, संजय गुप्ता को 24,459 और कांग्रेस उम्मीदवार अंतरिक्ष सैनी को 11,584 वोट मिले थे। इस विधानसभा में 79.51 फीसदी मतदान हुआ था।
हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट पर 2022 में कांग्रेस ने कब्जा जमाया था। कांग्रेस उम्मीदवार अनुपमा रावत ने तत्कालीन भाजपा विधायक यतीश्वरानंद को 4,472 वोटों से हराया था। अनुपमा रावत को 50,028, यतीश्वरानंद को 45,556 और बसपा उम्मीदवार मुहम्मद यूनुस को 4,547 वोट मिले थे। इस सीट पर जिले में सबसे अधिक 81.95 फीसदी मतदान हुआ था।
राजनीति
दीया मिर्जा के दीपावली वीडियो पर सियासी घमासान, शिवसेना ने किया विरोध तो एनसीपी आई सपोर्ट में

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा अभिनेत्री दीया मिर्जा का पर्यावरण-अनुकूल और पटाखा-मुक्त दीपावली को बढ़ावा देने वाला जागरूकता वीडियो हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। एक ओर शिवसेना के नेता आनंद दुबे ने वीडियो का विरोध किया है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो अभिनेत्री दीया मिर्जा के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं।
शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि कलाकार लोगों को ज्ञान देने के बजाय टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा, “देखिए, सनातन इतना महान है कि उसे दीया मिर्जा या किसी से जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। दीपावली का पावन पर्व सभी हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा त्योहार होता है। हमें दीपावली का पर्व कैसे और किस तरह से मनाना है, ये किसी और से जानने की जरूरत नहीं है। हमें अच्छी तरह से अपनी संस्कृति के बारे में पता है और यह भी पता है कि पर्यावरण की किस तरह से रक्षा करनी है।”
उन्होंने कहा कि कलाकार टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें, हम अपना काम कर लेंगे। हम अपनी परंपरा, आदर्शों और मूल्यों को हमेशा आगे रखकर चलते हैं। तो हमें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है कि किस तरह से त्योहार मनाना चाहिए।”
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र परिवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो का कहना है कि दीया मिर्जा ने हाई कोर्ट के आदेशों का पालन किया है। उन्होंने कहा, “दीया मिर्जा ने खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर वीडियो जारी नहीं किया है, बल्कि बीएमसी के किसी इंचार्ज ने उन्हें वीडियो बनाने के लिए अप्रोच किया था और दीया मिर्जा ने वीडियो बना दी, तब कहीं जाकर बीएमसी के हैंडल पर वीडियो डाली गई। जब दीया मिर्जा को अप्रोच किया जा रहा था, तब बीएमसी की मेयर ऋतु रावडे को इस बात की जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने उस समय कुछ भी क्यों नहीं कहा था? इसका मतलब है कि बीएमसी में भी अलग-अलग ग्रुप बन रहे हैं, जो मेयर को कुछ बताते नहीं हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “इसी तरह का वीडियो माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे ने भी बनाया था। दोनों ने भी वही बात कही थी। इस वीडियो को लेकर बेवजह विवाद बढ़ाया जा रहा है। देखिए, दीपावली का त्योहार हम सभी मनाते हैं। यह खुशी का पर्व है, तो जब भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस तरह की बातें कही जाती हैं, तो यह गलत है। दीया मिर्जा ने कोई गलती नहीं की, उन्हें सिर्फ बताया गया था कि ये हाई कोर्ट के आदेश हैं। बीएमसी ने वही बात दीया मिर्जा समेत सभी कलाकारों से कहलवाई, लेकिन भाजपा बात का बतंगड़ बना रही है।”
राजनीति
तमिलनाडु में नई तमिल फिल्मों को बड़ी राहत, रिलीज के पहले हफ्ते में रोजाना 6 शो की मंजूरी

तमिलनाडु सरकार ने फिल्म उद्योग को बड़ी राहत देते हुए नई तमिल फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य के सभी सिनेमाघरों में नई रिलीज होने वाली तमिल फिल्मों के लिए रिलीज की तारीख से एक सप्ताह तक प्रतिदिन छह शो (सुबह 6:00 बजे से अगले दिन सुबह 2:30 बजे के बीच) चलाने की अनुमति देने के आदेश जारी किए हैं।
यह फैसला तमिल फिल्म एक्टिव प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, तमिल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन और तमिलनाडु थिएटर एवं मल्टीप्लेक्स ओनर्स एसोसिएशन की मांगों पर विचार करने के बाद लिया गया। संगठनों ने सरकार से नई फिल्मों के प्रदर्शन के लिए शो की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया था।
वर्तमान में तमिलनाडु सिनेमा (विनियमन) नियम, 1957 के तहत सिनेमाघरों को जारी ‘सी’ फॉर्म लाइसेंस की शर्तों के अनुसार प्रतिदिन चार शो प्रदर्शित करने की अनुमति है, हालांकि राज्य सरकार पहले से ही नई तमिल फिल्मों को रिलीज के बाद सात दिनों तक प्रतिदिन पांच शो चलाने की विशेष अनुमति दे रही थी। इसके अलावा स्थानीय त्योहारों, सार्वजनिक अवकाशों तथा सप्ताहांत पर भी पांच शो के प्रदर्शन की व्यवस्था लागू थी।
फिल्म उद्योग की मांग पर विचार-विमर्श के बाद मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु सिनेमा (विनियमन) नियमों में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया। इसके तहत अब नई तमिल फिल्मों को रिलीज की तारीख से सात दिनों तक प्रतिदिन सुबह 6 बजे से अगले दिन सुबह 2:30 बजे तक अधिकतम छह शो प्रदर्शित किए जा सकेंगे।
इससे पहले तमिलनाडु की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री विजय ने उच्चस्तरीय समिति के गठन का आदेश दिया। यह समिति पूर्व पुलिस महानिदेशक जेके त्रिपाठी, आईपीएस (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना और उसे और अधिक मजबूत बनाने के लिए सिफारिशें देना है। यह फैसला थेनी जिला जेल से हाल ही में 17 कैदियों के फरार होने की घटना के बाद लिया गया है।
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