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आप देश की रक्षा पर कब बोलेंगे : कांग्रेस नेता राहुल गाांधी

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New Delhi: Congress leader Rahul Gandhi addresses a special party briefing via video conferencing in New Delhi during the fourth phase of the nationwide lockdown imposed to mitigate the spread of coronavirus, on May 26, 2020. (Photo: IANS)

New Delhi: Congress leader Rahul Gandhi addresses a special party briefing via video conferencing in New Delhi during the fourth phase of the nationwide lockdown imposed to mitigate the spread of coronavirus, on May 26, 2020. (Photo: IANS)

चीनी घुसपैठ को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर एलएसी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। इससे पहले भाजपा ने कांग्रेस के स्वामित्व वाली राजीव गांधी फाउंडेशन(आरजीएफ)को चीनी कंपनियों द्वारा डोनेशन दिए जाने पर निशाना साधा था, जिसके बाद राहुल गांधी ने एक बार फिर पलटवार किया है।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा, “कब राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा की बात की जाएगी।”

इससे पहले, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा पर शनिवार को निशाना साधा था। सुरजेवाला ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ पार्टी के संबंधों पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी इस विवाद में घसीटा था।

सुरजेवाला ने पूछा, “संघ ने क्यों जनवरी 2009 में चीन का दौरा किया था।”

प्रवक्ता ने यह भी कहा कि पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी भी 19 जनवरी 2011 को सीसीपी के आमंत्रण पर पांच दिन के लिए चीन गए थे।

सुरजेवाला ने कहा, “तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने नवंबर 2014 में सांसद/विधायकों के प्रतिनिधिमंडल को सीसीपी के ‘द पार्टी स्कूल’ के अध्ययन के लिए क्यों भेजा था। कांग्रेस गुजरात के मुख्यमंत्री रहते चार बार और प्रधानमंत्री रहते हुए पांच बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन जाने के कारण भी जानना चाहती है।”

राजनीति

पंजाब की महिलाओं को 1 जुलाई को मिलेंगे तीन महीने के पैसे, अरविंद केजरीवाल के दावे पर कांग्रेस ने घेरा

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आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ के तहत पंजाब की महिलाओं को 1 जुलाई को सम्मान राशि के पैसे मिलेंगे। वहीं, कांग्रेस के नेता अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस योजना को लेकर सवाल उठाया है।

अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर लिखा, “पंजाब की सभी मां, बहनों और बेटियों को बहुत-बहुत बधाई। 1 जुलाई को उनके खाते में तीन महीने के पैसे एक साथ आयेंगे। हर सामान्य वर्ग की महिला को तीन हजार और हर अनुसूचित जाति की महिला को 4500 रुपए मिलेंगे। एक परिवार में यदि एक से अधिक महिला हैं तो हर महिला को ये सम्मान राशि मिलेगी। पूरी दुनिया का ये सबसे बड़ा महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम है।”

कांग्रेस के नेता अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने एक्स पर पोस्ट किया है, “1 जुलाई में बस आठ दिन बचे हैं। क्या पंजाब की महिलाओं को पिछले 51 महीनों के बकाया 51,000 रुपये मिलेंगे? बात 3,000 रुपये की नहीं है। बात उन 51,000 की है, जिनका वादा पंजाब की हर पात्र महिला से आप सरकार के सत्ता में आने पर किया गया था। विज्ञापन और प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन पंजाब की महिलाएं अभी भी 2022 में किए गए वादे के पूरा होने का इंतज़ार कर रही हैं। 3,000 रुपये देकर गुमराह न करें। बकाया पूरे 51,000 रुपये का भुगतान करें। पंजाब की महिलाएं जवाबदेही की हकदार हैं, बहाने की नहीं।”

गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने महिलाओं के लिए ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ के तहत सम्मान राशि का ऐलान किया है। इस योजना के माध्यम से राज्य की सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिलाओं को 1,500 प्रति माह दिए जाएंगे। इसकी पहली किस्त के रूप में महिलाओं के बैंक खातों में सीधे तीन महीने (अप्रैल, मई और जून) का एक साथ पैसा 1 जुलाई को ट्रांसफर किया जाएगा।

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राजनीति

ब्राह्मणों का बसपा की ओर बढ़ता रुझान, सपा की बढ़ी बेचैनी : मायावती

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने कहा उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच ब्राह्मण समाज सहित अन्य सवर्ण वर्गों का रुझान तेजी से बसपा की ओर बढ़ रहा है, जिससे विरोधी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि 2007 की तरह इस बार भी ब्राह्मण समाज के सहयोग से बसपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच सकती है, क्योंकि सवर्ण समाज को बसपा की नीतियों और नेतृत्व पर सबसे अधिक भरोसा है।

बसपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर जब से सवर्ण समाज और उसमें से खासकर ब्राह्मण समाज को उनके बीएसपी में जुड़ने को ध्यान में रखकर, पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है, तबसे सभी विरोधी पार्टियों में खासकर समाजवादी पार्टी में नींद उड़ा देने वाली बेचैनी देखने को मिल रही है। यह वर्ष 2007 की तरह ब्राह्मण समाज के योगदान से बीएसपी को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जैसा ही इस बार के आगामी चुनाव परिणाम के रिपीट होने की संभावना के तहत स्वाभाविक ही प्रतीत होता है।

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि वैसे भी यह सर्वविदित है कि यूपी जैसे विशाल आबादी वाले प्रदेश में अपरकास्ट में से खासकर ’ब्राह्मण समाज का हित बीएसपी में ही सुरक्षित है’। बसपा की ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त, नीयत व नीति को बहुजन समाज पार्टी ने पहले पार्टी स्तर पर अमल करके और फिर सरकार बनने पर भी उन्हें भरपूर आदर-सम्मान के साथ-साथ उन्हें हर स्तर पर पूरी-पूरी भागीदारी देकर यह साबित भी कर दिया है जबकि दूसरी पार्टियों की सरकारों में इस वर्ग के लोग पिछले काफी समय से अपने आपको काफी उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि ’ब्राह्मण समाज द्वारा सामाजिक भाईचारा के आधार पर बीएसपी से जुड़ने की इनकी तैयारियों को ध्यान में रखकर इन्हें पार्टी उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया जारी है तथा इन्हें बीएसपी की आयरन लेडी नेतृत्व पर यकीन भी है कि बीएसपी की सरकार बनने पर उन्हें पहले की तरह ही हर स्तर पर भरपूर आदर-सम्मान ज़रूर दिया जायेगा, जो कि इनकी वास्तविक चिंता व दूसरी पार्टियों से मुंह मोड़ने का कारण है।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही अपरकास्ट में से क्षत्रिय, वैश्य आदि व अन्य समाज के लोगों को भी उनकी बीएसपी से जुड़ने की तैयारी अर्थात् ’जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी भागीदारी’ के आधार पर चुनाव में उम्मीदवार भी जरूर बनाया जायेगा, जिसकी तैयारी हर स्तर पर लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि बीएसपी दूसरी पार्टियों की तरह कुछ लोगों को ’लॉलीपाप’ थमाने की संकीर्ण व स्वार्थ की राजनीति नहीं करती है बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण की चिन्ता करना अपना संवैधानिक कर्तव्य समझती है। इसलिए भी बीएसपी की नीति व कार्यक्रम जनहित व जनकल्याण तथा अपराध नियंत्रण व कानून व्यवस्था के मामले में भी देश व जनहित में बेहतरीन होते हैं।

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महाराष्ट्र

मुंबई: बेस्ट कर्मचारियों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, सरकार से तत्काल वार्ता की मांग

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बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बेस्ट) उपक्रम के कर्मचारियों, अधिकारियों और श्रमिकों का आंदोलन शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। संयुक्त श्रमिक कृती समिति ने दावा किया कि 18 जून की मध्यरात्रि से शुरू हुए इस आंदोलन में सभी यूनियनों ने अपने झंडे-बैनर अलग रखकर एकजुटता दिखाई है और कर्मचारियों ने 100 प्रतिशत भागीदारी की है। समिति ने कहा कि यह आंदोलन बेस्ट उपक्रम के अस्तित्व और कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान के लिए किया जा रहा है।

समिति ने आंदोलन से मुंबईवासियों को हो रही असुविधा के लिए खेद जताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित मांगों का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।

संयुक्त श्रमिक कृती समिति के अनुसार, 19 जून को महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की पहल पर समिति के नेताओं के साथ सकारात्मक चर्चा हुई थी। बैठक में कर्मचारियों की ओर से कई प्रमुख मांगें रखी गईं।

इन मांगों में बेस्ट कर्मचारियों के मासिक वेतन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण (लीव एन्कैशमेंट) और अन्य अंतिम भुगतान की जिम्मेदारी मुंबई महानगरपालिका द्वारा लेने या बेस्ट के बजट के विलय जैसे विकल्पों पर निर्णय, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित एवं भविष्य के बकाये का भुगतान, वर्ष 2016 से 2026 की वेतन समझौता अवधि के लिए अंतरिम वेतन वृद्धि और बकाया राशि का भुगतान, परिवहन विभाग के संविदा व मजदूरी आधारित कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य सेवा सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल हैं।

इसके अलावा रिक्त पदों पर भर्ती, पदोन्नति, यात्रा भत्ता, प्रोत्साहन बोनस, शैक्षिक सहायता, कोविड भत्ता और अन्य कर्मचारी कल्याण संबंधी मांगें भी समिति ने सरकार के समक्ष रखीं।

कृती समिति का दावा है कि परिवहन मंत्री ने इन मांगों को न्यायसंगत बताते हुए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से चर्चा कर आवश्यक निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। हालांकि, समिति का आरोप है कि बेस्ट प्रशासन की ओर से जारी बैठक के कार्यवृत्त (मिनट्स) में इन सकारात्मक बिंदुओं और आश्वासनों का उल्लेख नहीं किया गया।

समिति ने आरोप लगाया कि संभवतः कुछ राजनीतिक हस्तक्षेप या दबाव के कारण मंत्री द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासनों को कार्यवृत्त से हटा दिया गया। ऐसे में कर्मचारियों को आंदोलन समाप्त करने के लिए मनाना संभव नहीं है।

संयुक्त श्रमिक कृती समिति ने कहा कि वर्ष 2019 से कर्मचारियों को केवल आश्वासन ही मिलते रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसलिए कर्मचारी अब बेस्ट उपक्रम के अस्तित्व और उसकी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं।

समिति ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से अपील की है कि वे जल्द से जल्द, चाहे दिन हो या रात, कृती समिति के साथ बैठक बुलाकर कर्मचारियों की मांगों पर ठोस फैसला लें, ताकि बेस्ट उपक्रम के भविष्य और कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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