खेल
कस्र्टन ने बताया कैसे बने थे भारतीय टीम के कोच
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व सलामी बल्लेबाज गैरी कस्र्टन ने बताया कि वह 2008 में कैसे भारतीय टीम के कोच बने। भारत का कोच बनने से पहले उनके पास कोई कोचिंग अनुभव नहीं था लेकिन वह अपनी कोचिंग में भारत को विश्व विजेता बनाने में सफल रहे।
कस्र्टन ने कहा कि भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने उन्हें ई-मेल के जरिए टीम का कोच बनने के बारे में पूछा था।
कस्र्टन ने स्पोटीफाई के क्रिकेट कलेक्टिव पोडकास्ट पर कहा, “मुझे सुनील गावस्कर का ईमेल आया था। उन्होंने पूछा था कि क्या मैं भारतीय टीम का कोच बनना चाहूंगा।”
उन्होंने कहा, “मुझे लगा यह मजाक है। मैंने इसका जवाब भी नहीं दिया। उन्होंने मुझे एक और मेल भेजा और कहा कि क्या आप इंटरव्यू के लिए आ सकते हो। मैंने यह अपनी पत्नी को दिखाया उन्होंने कहा कि वह कुछ गलत समझ रहे हैं। इसलिए यह काफी अजीब था। मुझे तो उस समय कोचिंग का अनुभव भी नहीं था।”
बाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज ने कहा, “खैर मैं इंटरव्यू के लिए पहुंच गया। यह कई मायनों में अजीब अनुभव था क्योंकि जब मैं वहां पहुंचा तो अनिल कुंबले मिल गए जो उस समय भारत की टेस्ट टीम के कप्तान थे। उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम यहां क्या कर रहे हो। मैंने कहा, “मैं आपको कोचिंग देने के लिए इंटरव्यू देने के लिए आया हूं। हम दोनों हंसे। यह वाकई हंसने वाली बात है।”
कस्र्टन ने फिर इस पूरी प्रकिया के बारे में बताया और यह भी बताया कि वह इसके लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने साथ ही बताया कि उस समय समिति के सदस्य रवि शास्त्री ने किस तरह उनकी मदद की।
कस्र्टन ने कहा, “दस मिनट बाद, मैं बीसीसीआई अधिकारियों के साथ बैठक में था। वातारवरण काफी डरावना था। बोर्ड के सचिव ने मुझसे कहा- कस्र्टन आप भारतीय क्रिकेट के लिए अपने विजन को बता सकते हैं? मैंने कहा कि मेरे पास नहीं है क्योंकि किसी ने मुझसे यह तैयार करने को नहीं कहा था। मैं बस आया हूं।”
उन्होंने कहा, “शास्त्री जो उस समय समिति में थे, उन्होंने मुझसे कहा कि गैरी आप बताइए कि एक दक्षिण अफ्रीकी टीम के तौर पर आप भारत को हराने के लिए क्या करते थे। मुझे लगा यह अच्छी शुरुआत है क्योंकि मैं इसका जवाब दे सकता हूं, मैंने दो-तीन मिनट में इसका जवाब भी दिया, लेकिन मैंने ऐसी कोई रणनीति का जिक्र नहीं किया जिसे हम उस दिन उपयोग में ले सकते थे।”
कस्र्टन ने इसी मामले से जुड़ा एक और किस्सा सुनाया जिसमें ग्रेग चैपल का जिक्र है।
उन्होंने कहा, “शास्त्री और बोर्ड के अन्य सदस्य मुझसे काफी प्रभावित हुए। मेरा इंटरव्यू सात मिनट चला और तीन मिनट बाद बोर्ड के सचिव ने मुझे अनुबंध के कागज दिए। मैं उसे उठाया और पहला पेज देखा, मैं अपना नाम ढूंढ़ रहा था लेकिन मिला नहीं, लेकिन ग्रेग चैपल का मिला।”
उन्होंने कहा, “इसलिए मैंने वो अनुबंध वापस कर दिया और कहा कि सर मुझे लगता है कि आपने मुझे पुराने कोच के अनुबंध के कागज दे दिए हैं। उन्होंने मेरी तरफ देखा और जेब से कलम निकालते हुए चैपल का नाम हटा मेरा नाम लिख दिया और मुझे वापस दे दिया। अच्छी बात यह थी कि मुझे नहीं पता था कि मुझे कितना पैसा दिया जाएगा। लेकिन चैपल को जो पैकेज दिया जा रहा था तो मुझे लगा कि यही सही है मैं इससे खुश था।”
राष्ट्रीय
मध्य प्रदेश में दुर्लभ कछुए के अंतरराष्ट्रीय तस्कर रहेंगे जेल में

भोपाल, 11 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में दुर्लभ कछुआ की तस्करी करने वाले आरोपी जेल में ही रहेंगे, क्योंकि सागर के अपर सत्र न्यायालय ने दोनों आरोपियों की अपील खारिज करते हुए सजा और अर्थ दंड को बरकरार रखा है। दरअसल, स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने अत्यंत दुर्लभ जलीय जीव रेड-क्राउंड रूफ कछुओं की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी के मामले में शेखर दास और मोहम्मद सुल्तान को गिरफ्तार किया था, जिस पर उन्होंने अपील की थी।
इस अपील को विशेष न्यायालय द्वारा खारिज किया गया है। सजा एवं अर्थदंड को बरकरार रखा है। न्यायालय ने आरोपियों की अपील को निरस्त करते हुए उन दोनों को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल सागर भेजने के आदेश जारी किए हैं। दोनों आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग की संयुक्त टीम ने वर्ष 2017 में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य एवं उसके पारिस्थितिकी क्षेत्र से दुर्लभ लाल तिलकधारी कछुओं तथा पैंगोलिन शल्क की तस्करी का पर्दाफाश किया था। जांच में सामने आया कि आरोपी एक अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा थे, जो चंबल नदी से इन दुर्लभ कछुओं को एकत्र कर कोलकाता तथा भारत-बांग्लादेश सीमा के माध्यम से विदेशों में अवैध रूप से भेजता था। गिरोह द्वारा वन्यजीव तस्करी के साथ हवाला के जरिये अवैध वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क भी संचालित किया जा रहा था।
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्य प्रदेश द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, बयानों और जांच रिपोर्ट के आधार पर विशेष न्यायालय सागर ने 29 मार्च 2022 को दोनों आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधन 2022) के उल्लंघन का दोषी पाते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध आरोपियों ने अपील की थी।
अपीलीय न्यायालय ने एसटीएसएफ द्वारा की गई विवेचना और प्रस्तुत साक्ष्यों को तथ्यपरक मानते हुए कहा कि विशेष न्यायालय के निर्णय में कोई वैधानिक त्रुटि नहीं है। अपीलीय न्यायालय ने दोनों आरोपियों की अपीलें निरस्त कर उन्हें सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल सागर भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं।
खेल
बार्सिलोना ने जॉर्ज मेसी के निधन पर शोक जताया, लियोनेल के पिता को दी श्रद्धांजलि

बार्सिलोना ने क्लब के दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी के पिता जॉर्ज मेसी को श्रद्धांजलि दी है। शनिवार को अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में लंबी बीमारी के बाद 68 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।
बार्सिलोना ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बयान के जरिए मेसी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और लियोनेल के शानदार करियर में पिता जॉर्ज की अहम भूमिका को याद किया। “बार्सिलोना के प्रेसिडेंट और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, बार्सिलोना के खिलाड़ी और दिग्गज लियोनेल मेसी के पिता जॉर्ज मेसी के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और सभी बार्सिलोना समर्थकों की ओर से मेसी परिवार के प्रति अपनी संवेदना भेजते हैं।”
बार्सिलोना ने जॉर्ज का उस भरोसे के लिए भी शुक्रिया अदा किया जो उन्होंने अपने बेटे के करियर की शुरुआत में क्लब पर जताया था, जब लियोनेल कम उम्र में अर्जेंटीना से स्पेन आए थे। क्लब ने कहा, “बार्सिलोना, जॉर्ज मेसी का हमारे क्लब के प्रति उनके समर्पण और उनके बेटे लियो के फुटबॉल करियर की शुरुआत में और उनके करियर के सबसे शानदार स्तर तक पहुंचने के दौरान हम पर भरोसा करने के लिए धन्यवाद करता है। उनकी आत्मा को शांति मिले।”
जॉर्ज उन सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक थे जिन्होंने लियोनेल मेसी को अब तक के सबसे महान फुटबॉलरों में से एक बनने में मदद की। उन्होंने कम उम्र से ही अपने बेटे के खेल और प्रोफेशनल जीवन का ध्यान रखा और अर्जेंटीना से बार्सिलोना में लियोनेल के ट्रांसफर में अहम भूमिका निभाई, जहां यह युवा फॉरवर्ड आखिरकार क्लब की सबसे सफल टीमों में से एक का मुख्य खिलाड़ी बन गया।
जॉर्ज का निधन रोसारियो में हुआ, जहां उनका इलाज चल रहा था। जानकारी के अनुसार सुबह लगभग 2 बजे (स्थानीय समय) उनका निधन हुआ और परिवार की गोपनीयता का सम्मान करते हुए कोई अतिरिक्त मेडिकल जानकारी नहीं दी गई। इससे पहले, लियोनेल मेसी ने बताया था कि वे अपने पिता की सेहत को लेकर चिंता के कारण मुश्किल दौर से गुजर रहे थे।
अर्जेंटीना के लिए गोल करने के बाद उनकी भावुक प्रतिक्रिया से जॉर्ज की हालत के बारे में अटकलें लगाई जाने लगीं। इसके बाद मेसी परिवार ने उनकी गोपनीयता का सम्मान करने की अपील की थी। जॉर्ज के निधन के बाद रियल मैड्रिड ने भी संवेदना व्यक्त की और उन्हें बार्सिलोना में अपने पूर्व प्रतिद्वंद्वी और इतिहास के सबसे मशहूर फुटबॉलरों में से एक के पिता के तौर पर सम्मान दिया।
खेल
चेस: आर प्रज्ञानानंद ने जीता सेंट लुइस रैपिड और ब्लिट्ज का खिताब

भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंद ने एक राउंड बाकी रहते हुए ही ग्रैंड चेस टूर सेंट लुइस रैपिड और ब्लिट्ज का खिताब अपने नाम किया।
प्रज्ञानानंद और उज्बेकिस्तान के जावोखिर सिंदारोव के बीच आखिरी मुकाबले का अंत ड्रॉ पर होने के साथ ही भारतीय ग्रैंडमास्टर का खिताब पक्का हो गया। 20 साल के भारतीय खिलाड़ी ने कुल 35 में से 23 प्वाइंट हासिल करके चैंपियनशिप को अपने नाम किया। शानदार टूर्नामेंट के बाद सिंदारोव ने 22 प्वाइंट के साथ दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि वेस्ली सो 20.5 प्वाइंट के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
लेवोन अरोनियन 19 प्वाइंट के साथ चौथे स्थान पर रहे, और फैबियानो कारुआना, लीनियर डोमिंग्वेज और जॉर्डन वैन फॉरेस्ट 17 प्वाइंट के साथ संयुक्त रूप से पांचवें स्थान पर रहे। प्रज्ञानानंद को बिना किसी प्लेऑफ के सीधे जीत हासिल करने पर 50,000 अमेरिकी डॉलर और 13 ग्रैंड चेस टूर प्वाइंट मिले। इस नतीजे से प्रज्ञानानंद सिंकफील्ड कप से पहले ग्रैंड चेस टूर स्टैंडिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। हालांकि फैबियानो अभी भी ओवरऑल ग्रैंड चेस टूर स्टैंडिंग में सबसे आगे हैं।
प्रज्ञानानंद ने पांच दिन के इस इवेंट में शुरू से आखिर तक बढ़त बनाए रखी। सिंदारोव ने आखिरी दौर में कड़ी चुनौती पेश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए और 1.5 प्वाइंट के अंतर से उपविजेता रहे। जून में, प्रज्ञानानंद प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच चुके हैं।
सेंट लुइस रैपिड और ब्लिट्ज टूर्नामेंट में 31 जुलाई से 7 अगस्त तक सेंट लुइस चेस क्लब में दस बेहतरीन ग्रैंडमास्टर शामिल हुए। पांच दिनों के खेल में, खिलाड़ियों ने 9 रैपिड राउंड और 18 ब्लिट्ज राउंड खेले। इस दौरान कुल मिलाकर 135 गेम हुए, जिनमें सिंकफील्ड कप और जीसीटी ग्रैंड फाइनल से पहले महत्वपूर्ण टूर प्वाइंट दांव पर थे।
इस टूर्नामेंट में दो तेज गति वाले फॉर्मेट शामिल रहे। 9-राउंड का सिंगल राउंड-रॉबिन रैपिड टूर्नामेंट (जो 25 मिनट के टाइम कंट्रोल और पहली चाल से ही 10-सेकंड के इंक्रीमेंट के साथ खेला जाता है) और 18-राउंड का डबल राउंड-रॉबिन ब्लिट्ज टूर्नामेंट (जो 5 मिनट के टाइम कंट्रोल और पहली चाल से ही 2-सेकंड के इंक्रीमेंट के साथ खेला जाता है)। रैपिड में जीत पर 2 पॉइंट और ड्रॉ पर 1 प्वाइंट मिलता है, जबकि ब्लिट्ज में जीत पर 1 प्वाइंट और ड्रॉ पर 0.5 प्वाइंट मिलता है।
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