राजनीति
गुजरात में भाजपा के सबसे अधिक 85 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति
गुजरात विधानसभा चुनावों में भाजपा करोड़पति उम्मीदवारों के मामले में सबसे आगे है। पार्टी के 85 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति हैं। चुनाव में घोषित संपत्ति वाले शीर्ष तीन उम्मीदवारों में से दो भाजपा के हैं। जयंतीभाई सोमाभाई पटेल (भाजपा) ने जहां 661 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है, वहीं बलवंतसिंह चंदनसिंह राजपूत (भाजपा) ने 372 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। शीर्ष तीन में तीसरे उम्मीदवार अजीतसिंह परसोत्तमदास ठाकोर (आप) हैं, जिन्होंने 343 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट से पता चला है कि करोड़पति उम्मीदवारों की हिस्सेदारी पांच वर्षों में बढ़ी है। इन चुनावों में 1,621 उम्मीदवारों में से 456 (28 प्रतिशत) करोड़पति हैं।
हमारे चुनावों में धन बल की भूमिका इस तथ्य से स्पष्ट है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दल धनी उम्मीदवारों को टिकट देते हैं। प्रमुख दलों में भाजपा के 182 उम्मीदवारों में से 154 (85 प्रतिशत), कांग्रेस के 179 में से 142 (79 प्रतिशत) और आप के 181 उम्मीदवारों में से 68 (38 प्रतिशत) ने 1 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है।
गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 में चुनाव लड़ने वाले प्रति उम्मीदवार की औसत संपत्ति 3.58 करोड़ रुपए है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव में 1,815 उम्मीदवार खड़े थे और प्रति उम्मीदवार औसत संपत्ति 2.22 करोड़ रुपये थी। भाजपा के प्रति उम्मीदवार औसत संपत्ति 16.56 करोड़ रुपये, कांग्रेस के 7.99 करोड़ रुपये, आप के 3.68 करोड़ रुपये है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और गुजरात इलेक्शन वॉच ने उन सभी 1,621 उम्मीदवारों के स्व-शपथ पत्रों का विश्लेषण किया है, जो गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण में चुनाव लड़ रहे हैं। 1,621 उम्मीदवारों में से, 476 राष्ट्रीय दलों से हैं, 219 राज्य दलों से हैं, 302 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दलों से हैं और 624 उम्मीदवार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर 2.0 को समर्थन देने वाले संगठनों के नेताओं की जल्द हो सकती है गिरफ्तारी: सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने जंतर-मंतर 2.0 आंदोलन को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने सूत्रों के हवाले से आशंका जताई है कि आंदोलन का समर्थन कर रहे विभिन्न संगठनों के नेताओं को जल्द ही कथित तौर पर झूठे मामलों में गिरफ्तार किया जा सकता है। भारद्वाज ने कहा कि यदि ऐसी स्थिति सामने आती है तो भी 10 अक्टूबर को प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हर हाल में जारी रखा जाना चाहिए।
सौरभ भारद्वाज के इस बयान के बाद जंतर-मंतर 2.0 आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उन्होंने आंदोलन से जुड़े नेताओं और संगठनों से संभावित गिरफ्तारियों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही वैकल्पिक नेतृत्व तैयार रखने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी एक नेता की गिरफ्तारी की स्थिति में आंदोलन की गतिविधियां रुकनी नहीं चाहिए और संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारियां संभालने के लिए दूसरी पंक्ति का नेतृत्व तैयार रहना जरूरी है।
भारद्वाज ने आंदोलन से जुड़े संगठनों के बीच संचार व्यवस्था को लेकर भी विशेष तैयारी करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए प्लान-बी फॉर कम्युनिकेशन तैयार किया जाना चाहिए। इसके तहत ऐसी वैकल्पिक संचार व्यवस्था होनी चाहिए, जिसके माध्यम से किसी भी विपरीत परिस्थिति में आंदोलन से जुड़े नेताओं, संगठनों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच संपर्क बना रहे।
उन्होंने कहा कि किसी आंदोलन की ताकत केवल उसके नेतृत्व में नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े लोगों की सामूहिक भागीदारी और उद्देश्य में होती है। इसी बात पर जोर देते हुए भारद्वाज ने कहा, “यह आंदोलन किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक पार्टी से बड़ा है।” उन्होंने आंदोलन से जुड़े लोगों से अपील की कि वे किसी भी दबाव या संभावित कार्रवाई के बावजूद शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहें।
सौरभ भारद्वाज ने विशेष रूप से 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने की बात कही। उन्होंने आंदोलन से जुड़े संगठनों से संभावित परिस्थितियों के लिए पहले से रणनीति तैयार करने और नेतृत्व की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि कुछ प्रमुख नेताओं के खिलाफ कार्रवाई होती है, तब भी आंदोलन की निरंतरता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
राजनीति
दुर्गा पूजा से पहले फंड जारी करने की मांग, ममता गुट ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल-जज बेंच का रुख किया। उन्होंने कोर्ट द्वारा नियुक्त उस स्पेशल ऑफिसर के खिलाफ यह कदम उठाया है, जो उन्हें पार्टी के तीन बैंक अकाउंट्स को ऑपरेट करने की इजाजत नहीं दे रहा है।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल जज बेंच के सामने दायर अपनी याचिका में ममता गुट ने स्पेशल जज सुब्रत तालुकदार पर आरोप लगाया कि दुर्गा पूजा के त्योहार से पहले पैसे निकालने की इजाजत नहीं दी। याचिका में कहा गया है कि इस वजह से गुट त्योहार के मौसम से पहले घर का किराया और ऑफिस के कर्मचारियों की सैलरी भी नहीं दे पा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने कोर्ट से तीन बैंक अकाउंट से पार्टी फंड का इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी है और इस मामले में तुरंत सुनवाई की भी मांग की है। याचिका स्वीकार करने के बावजूद जस्टिस भट्टाचार्य ने तुरंत सुनवाई की अपील खारिज कर दी। त्योहारों की छुट्टियों के बाद कोर्ट खुलने पर इस मामले पर सुनवाई होने की संभावना है।
याचिका में तृणमूल कांग्रेस गुट ने दावा किया कि कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर ने जानकारी मांगी है कि क्या इस गुट को दिया गया नया नाम और चुनाव चिह्न सिर्फ नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों के लिए था, जो मंगलवार को होने हैं।
पश्चिम बंगाल पुलिस ने अवैध लेन-देन के आरोपों के कारण एक प्राइवेट बैंक में तृणमूल कांग्रेस के तीन अकाउंट फ्रीज कर दिए थे। इस कदम को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया।
इसके बाद जस्टिस भट्टाचार्य की बेंच ने उन बैंक अकाउंट को मैनेज करने के लिए एक स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया। इस साल 9 जुलाई को जस्टिस भट्टाचार्य ने आदेश दिया कि तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का फिलहाल उन बैंक अकाउंट पर कंट्रोल रहेगा।
हालांकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने यह भी आदेश दिया कि गुट बेतहाशा पैसे खर्च नहीं कर पाएगा और कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर तृणमूल कांग्रेस को उसके रोजमर्रा के कामकाज और सैलरी के लिए भुगतान करेगा। जस्टिस भट्टाचार्य ने यह भी आदेश दिया कि यह आदेश अगले साल 29 जनवरी तक लागू रहेगा।
पिछले महीने इस मामले पर फिर से सुनवाई हुई थी। चूंकि खाते ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम पर थे, इसलिए तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट को उन्हें ऑपरेट करने का अधिकार नहीं होना चाहिए, खासकर तब जब भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने हाल ही में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के असली चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ दोनों को फ्रीज कर दिया हो।
हालांकि जस्टिस भट्टाचार्य ने राज्य सरकार के वकील की दलील को यह कहते हुए नहीं माना कि ईसीआई का फैसला पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़ा था और आयोग का फैसला अंतिम नहीं था।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर के जरिए खाते का इस्तेमाल करने का अधिकार 29 जनवरी, 2027 तक बना रहेगा।
राजनीति
सत्ताधारी पार्टी ने खो दिया है अपना मानसिक संतुलन : संजय राउत

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला किया। राउत ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है।
संजय राउत ने भाजपा की मौजूदा हालत की तुलना 1942 में ब्रिटिश साम्राज्य के पतन से ठीक पहले की घबराहट और हताशा से की।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि लाखों नागरिकों का वोट देने का अधिकार छीना जाना गलत है। जनता के गुस्से के आगे भाजपा का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।
सीएम फडणवीस के राजनीतिक करियर पर तंज कसते हुए संजय राउत ने कहा कि हम उन्हें यह कहकर ऊर्जा देने की कोशिश करते हैं कि दिल्ली में उनका भविष्य है लेकिन वे खुद को नुकसान पहुंचाते रहते हैं। वे राष्ट्रीय स्तर की बड़ी भूमिका के लिए कतार में हैं। जब उन्हें यह समझ आ जाएगा कि लाखों लोगों का सड़कों पर उतरना शिकायत नहीं बल्कि एक क्रांति है, तभी वे शीर्ष पर पहुंच पाएंगे।
मंत्री आशीष शेलार की टिप्पणी पर संजय राउत ने कहा कि वे खुद सियार हैं, इसलिए उन्हें हर तरफ हुआं-हुआं ही सुनाई देता है। यह हुआं-हुआं नहीं थी, यह ‘गर्जना’ थी। चुनाव में हेरफेर के खिलाफ देश का अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है।
विपक्ष के लामबंद होने के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर बन रहे माहौल का जिक्र करते हुए राउत ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से से केंद्रीय अधिकारी बुरी तरह घबराए हुए हैं।
राउत ने बताया कि दिल्ली किसी सैन्य छावनी जैसी लग रही है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आवासों के आसपास भारी सुरक्षा बल, बीएसएफ और हथियारबंद जवान तैनात किए गए हैं ताकि संभावित विरोध प्रदर्शनों को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकील सड़कों पर उतर आए हैं देशभर में विपक्षी ताकतें संस्थागत ईमानदारी की विफलता के खिलाफ एकजुट हो रही हैं।
राउत ने घोषणा की कि पूरे भारत से विपक्षी दल संसद के मकर द्वार पर इकट्ठा होंगे और ठोस सबूत सौंपने के लिए सीधे चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे। उन्होंने मांग की कि सीईसी ज्ञानेश कुमार छिपे रहने के बजाय जनता के सवालों का जवाब देने के लिए सामने आएं।
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की आलोचना करते हुए राउत ने कहा कि महाराष्ट्र सूखे और बढ़ते भ्रष्टाचार से जूझ रहा है, फिर भी उपमुख्यमंत्री दिल्ली में गृह मंत्री के घर के लॉन में एक पेइंग गेस्ट की तरह बैठे हैं। सूखे से प्रभावित तालुकाओं की सूची की घोषणा करना और दिल्ली भाग जाना बेशर्मी की हद है।
पार्टी बदलने वाले विधायकों का जिक्र करते हुए राउत ने कहा कि पैसे से सम्मान नहीं खरीदा जा सकता। आपको 50 करोड़ रुपए या आगे-पीछे दो पुलिस एस्कॉर्ट गाड़ियां मिल सकती हैं, लेकिन जनता की भावनाएं नहीं खरीदी जा सकतीं। जब छात्र ‘गद्दार’ कहते हैं, तो यह लोगों की सच्ची आवाज होती है।
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