राष्ट्रीय समाचार
जम्मू-कश्मीर के रामबन में सड़क दुर्घटना में 4 की मौत, 3 घायल
जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में सोमवार को एक सड़क दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। हादसा तब हुआ जब उनका वाहन सड़क से फिसल कर नीचे खाई में गिर गया।
पुलिस ने मरने वालों की पहचान अब्दुल वाहिद बाली, अनायतुल्ला, मोहम्मद अयूब बाली और ड्राइवर सज्जाद अहमद के रूप में की है।
पुलिस ने कहा, रामबन जिले में मालीगाम से उखरॉल जा रहा एक वाहन सड़क से फिसल गया। वाहन चालक के नियंत्रण से बाहर हो गया और गहरी खाई में गिर गया।
पुलिस ने कहा कि बचाव अभियान शुरू किया गया और दुर्घटनास्थल से चार शव बरामद किए गए।
पुलिस ने कहा, तीन घायलों को उखरॉल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
राष्ट्रीय समाचार
गुजरात में यूसीसी को राष्ट्रपति की मंजूरी, विवाह से लेकर उत्तराधिकार तक बदलेंगे नियम

गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो गया है। गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद राज्य सरकार ने राजपत्र अधिसूचना भी जारी कर दी है और राज्य में कानून को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।
गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित किया था। यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के लिए धर्म की परवाह किए बिना एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रावधान करता है। विधेयक के अनुसार कानून को प्रभावी करने की तारीख राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर तय करेगी।
यूसीसी के लागू होने के बाद विवाह और उससे जुड़े कानूनी मामलों में कई महत्वपूर्ण बदलाव होंगे। इसमें विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है। इसी तरह लिव-इन रिलेशनशिप को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा। कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करना है।
यूसीसी में उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों को लेकर बेटियों और बेटों के बीच समानता का प्रावधान किया गया है। यानी पैतृक और अन्य उत्तराधिकार संबंधी मामलों में बेटी को भी बेटे के समान अधिकार मिलेगा। बिना वसीयत के किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में उसके जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के अधिकार भी कानून के तहत निर्धारित किए गए हैं।
इसके अलावा सरोगेसी और गोद लेने से जुड़े बच्चों को भी कानूनी अधिकारों के मामले में समान सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों के अधिकारों को भी कानून के तहत संरक्षित किया गया है।
गुजरात यूसीसी में एकविवाह का नियम लागू किया गया है। इसके तहत पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करने पर प्रतिबंध रहेगा। विवाह और तलाक से जुड़े मामलों के लिए भी एक समान कानूनी प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
यूसीसी की प्रमुख व्यवस्थाओं में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण भी शामिल है। राज्य में ऐसे संबंधों को निर्धारित समय-सीमा और प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा। इससे संबंधित कानूनी अधिकारों और दायित्वों को भी कानून के तहत निर्धारित किया गया है।
गुजरात यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को इसके प्रावधानों से छूट दी गई है। इसके पीछे आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और वैवाहिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना बताया गया है।
गुजरात में यूसीसी की दिशा में पहल 2022 में शुरू हुई थी। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावनाओं पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की थी।
इसके बाद फरवरी 2024 में गुजरात सरकार ने यूसीसी की जरूरत और उसके संभावित स्वरूप का अध्ययन करने के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की। समिति ने राज्य में व्यक्तिगत नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों का अध्ययन किया और यूसीसी के स्वरूप को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की।
मार्च 2026 में समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे जाने के बाद विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया गया। गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को विधेयक पारित किया। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से भी विधेयक के पारित होने के बाद गुजरात सरकार और विधायकों को बधाई दी गई थी।
राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ गुजरात उत्तराखंड के बाद यूसीसी कानून को अपनाने वाला दूसरा राज्य बन गया है। अब राज्य सरकार द्वारा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी अधिसूचनाओं और नियमों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
अपराध
पंजाब : अमृतसर में 10 किलो हेरोइन और 10 अवैध पिस्तौल के साथ 4 तस्कर गिरफ्तार

अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वाले दो नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इसके साथ ही 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 10 किलो हेरोइन व 10 अवैध पिस्तौलें बरामद की हैं। यह जानकारी पंजाब पुलिस के महानिदेशक के सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर शुक्रवार को दो गई।
डीजीपी के मुताबिक, शुरुआती जांच से पता चला है कि आरोपी कथित तौर पर विदेश में बैठे तस्करों से जुड़े हैं और अवैध हथियार व नशीले पदार्थ हासिल करने में शामिल हैं। अमृतसर के थाना घरिंडा में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। पूरे नेटवर्क का पता लगाने और इसके पीछे और आगे के कनेक्शन का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।
पंजाब पुलिस लगातार इस तरह के गिरोहों पर कार्रवाई कर रही है। सीमा से सटे जिलों में पुलिस हथियारों और ड्रग्स के साथ आरोपी लगातार पकड़े जा रहे हैं।
डीजीपी ने गुरुवार को एक्स पोस्ट के जरिए बताया था, “गुरदासपुर पुलिस ने हथियारों की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से सात पिस्तौल (जिनमें एक ग्लॉक और छह .30 कैलिबर की पिस्तौलें शामिल हैं) और आठ मैगजीन बरामद की हैं।”
डीजीपी ने बताया, “शुरुआती जांच से पता चला है कि गिरफ्तार आरोपियों के दुबई में मौजूद एक व्यक्ति से ‘बैकवर्ड लिंकेज’ (पीछे के संपर्क) और अमेरिका में मौजूद एक व्यक्ति से ‘फॉरवर्ड लिंकेज’ (आगे के संपर्क) थे। माना जा रहा है कि इन्हीं लोगों ने उन्हें अवैध हथियार इकट्ठा करने के निर्देश दिए थे। कलानौर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी है।”
डीजीपी ने दोहराया कि नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों के नेटवर्क को खत्म करने तथा पंजाब को एक सुरक्षित और नशामुक्त राज्य बनाने के अपने संकल्प पर पंजाब पुलिस अडिग है।
राष्ट्रीय समाचार
गया जी के देवघाट पर विदेशी तीर्थयात्रियों ने किया पिंडदान, पितरों की मोक्ष की कामना

मोक्ष की भूमि के रूप में विख्यात गया में चल रहे पितृ पक्ष मेले का आकर्षण अब सात समुंदर पार तक पहुंच गया है। इस वर्ष पितृ पक्ष 2026 के पावन अवसर पर रूस, जर्मनी, इटली, स्पेन, पुर्तगाल नीदरलैंड समेत कई देशों से आए 48 विदेशी तीर्थयात्रियों ने देवघाट पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पूरे विधि-विधान के साथ पिंडदान किया।
विदेशी तीर्थयात्रियों के साथ आए पुरोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पावन तिथि पर विदेश से आए श्रद्धालु गया के वातावरण और यहां की व्यवस्थाओं से अत्यंत संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि इटली, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल और नीदरलैंड जैसे देशों से आए लोग यहां के पवित्र माहौल में आनंद की अनुभूति कर रहे हैं। सरकार और प्रशासन की ओर से सुरक्षा और सहयोग की जो व्यवस्था की गई है, उससे भी संतुष्ट हैं। पुरोहित ने कहा कि गया की यह धरती ही इतनी पवित्र और शक्तिशाली है कि यहां आकर हर किसी को आध्यात्मिक शांति मिलती है।
उन्होंने बताया कि इस बार कुल 48 विदेशी श्रद्धालु पिंडदान के लिए आए हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पिंडदान कराना संभव नहीं होने के कारण उन्हें तीन समूहों में बांटा गया है। पहले दिन 22 लोगों ने, दूसरे दिन 8 लोगों ने और तीसरे दिन बाकी के लोग पिंडदान करेंगे। ये सभी श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों – किसी ने अपने पति को खोया है, किसी ने अपने बच्चों को, तो किसी ने अपनी बहन या मां को – उनकी आत्मा की शांति के लिए इस मोक्ष भूमि पर आए हैं।
पुरोहित ने बताया कि आने वाले समय में अफ्रीका से भी श्रद्धालुओं के जत्थे के गया आने की उम्मीद है।
पिंडदान करने आई रूस की एक महिला श्रद्धालु क्सेनिया ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, “मैं इस विशेष अनुभव के लिए गया आई हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि यह अनुष्ठान मेरे दिवंगत माता-पिता, दादी और दादाजी की आत्मा के लिए बहुत फलदायी होगा। गया में यह मेरा पहला अनुभव है और मैं पहली बार यहां आई हूं। मुझे विश्वास है कि सब कुछ बहुत अच्छा होगा।”
एक अन्य विदेशी महिला श्रद्धालु एलेक्जेंड्रा, जो जर्मनी के बर्लिन में रहती हैं, ने कहा कि गया एक बेहद पवित्र भूमि है। उन्होंने कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। हम देखते हैं कि यहां लोग अपनी परंपराओं का कितना सम्मान करते हैं। हमें यहां बहुत ही स्वागत और सुरक्षित महसूस हो रहा है। हम यहां आने का अवसर मिलने के लिए बहुत आभारी हैं।”
एलेक्जेंड्रा ने बताया कि वह हिंदू परंपराओं के बारे में अध्ययन कर चुकी हैं और यह उनका दूसरी बार गया आना है। तीन साल पहले भी वह पिंडदान के लिए आई थीं। इस बार वह अपने साथ और भी लोगों को लेकर आई हैं, जो हिंदू परंपरा और पूर्वजों को सम्मान देने वाले इस अनुष्ठान में गहरी रुचि रखते हैं।
उन्होंने कहा, “लोग समझते हैं कि पितरों को सम्मान देने से न केवल उनके जीवन में बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन में भी सकारात्मक लाभ होता है, इसलिए वे इसे करना चाहते हैं। दुनिया में बहुत से लोग हर जगह घूमते हैं, लेकिन गया की इस पवित्र भूमि पर आने का सौभाग्य बहुत कम समूहों को ही मिलता है। इसलिए हम सभी यहां आकर खुद को बहुत विशेष और धन्य महसूस कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि भले ही यह उनके लिए एक अलग संस्कृति है और शुरुआत में वे थोड़ा असहज थीं, लेकिन यहां के लोगों का व्यवहार बहुत ही अच्छा रहा। उन्होंने कहा, “यहां के लोग बहुत स्वागत करने वाले हैं, हमें देखकर मुस्कुराते हैं और उत्सुकता से सवाल पूछते हैं, इसलिए अब हम यहां बहुत सहज महसूस कर रहे हैं।”
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