राजनीति
2024 लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा: 19 अप्रैल से 7 चरणों में मतदान, 4 जून को नतीजे।

भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने शनिवार को लोकसभा और कुछ राज्य विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा की। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने कहा कि 18वीं लोकसभा के लिए चुनाव सात चरणों में होंगे. चुनाव 19 अप्रैल को शुरू होंगे और मतगणना 4 जून को होगी.
देश भर में 543 लोकसभा क्षेत्रों के लिए लगभग 97 करोड़ मतदाता मतदान करने के पात्र होंगे। तारीखों की घोषणा के साथ ही नैतिक आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो जाती है। राष्ट्रीय चुनावों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, सिक्किम में विधानसभा चुनाव। अरुणाचल, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में होनी है बैठक
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीखों का खुलासा करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
लोकसभा चुनाव 2024 शेड्यूल
चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें
सीईसी कुमार ने हर चुनाव को संविधान द्वारा सौंपी गई एक पवित्र जिम्मेदारी के रूप में जोर दिया, जिसे ईसीआई विनम्रता और परिश्रम के साथ लेता है, जिसमें शालीनता के लिए कोई जगह नहीं होती है। निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव के प्रति प्रतिबद्धता अटल है।
भारत में 97 पंजीकृत मतदाता
10.5 लाख मतदान केंद्र
1.5 करोड़ मतदान अधिकारी और सुरक्षा कर्मचारी
55 लाख ईवीएम
4 लाख वाहन
चुनाव आयोजित:
17 आम चुनाव
400+ राज्य विधानसभा चुनाव
16 राष्ट्रपति चुनाव
16 उपराष्ट्रपति चुनाव
सीईसी राजीव कुमार ने पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण बाधाओं को रेखांकित किया, जिसे उन्होंने “4एम” कहा: भौतिक शक्ति, वित्तीय संसाधन, गलत सूचना का प्रसार, और आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन। उन्होंने कहा कि ईसीआई प्रतिबद्ध है और उसने इन विघटनकारी चुनौतियों से निपटने के लिए उपाय किये हैं।
मिथक बनाम वास्तविकता
2019 लोकसभा परिणाम
2019 के लोकसभा चुनावों में, भाजपा ने शानदार जीत हासिल की, 543 में से 303 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया। उनके गठबंधन, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने कुल 353 सीटें हासिल कीं, जिससे नरेंद्र मोदी को प्रधान मंत्री के रूप में फिर से नियुक्त किया गया। लगातार दूसरा कार्यकाल. विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा, वह केवल 52 सीटें हासिल करने में सफल रही।
2024 लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय पार्टियों का प्रदर्शन
राष्ट्रीय समाचार
राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर खूब चले जुबानी तीर : सत्ता पक्ष ने गिनाए फायदे, विपक्ष ने बताया संविधान विरोधी

नई दिल्ली, 4 अप्रैल। लोकसभा से पारित होने के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसके जरिए धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का सवाल ही नहीं है। विधेयक पेश होने के बाद चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसके फायदे गिनाए और विपक्ष पर देश के मुसलमानों को गुमराह करने के आरोप लगाए। दूसरी ओर, विपक्ष के नेताओं ने इसे संविधान के खिलाफ बताया।
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में बिल पेश करते हुए कहा, “वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन में छोटे-बड़े एक करोड़ सुझाव मिले हैं। संयुक्त संसदीय समिति ने 10 शहरों में जाकर विधेयक को लेकर लोगों की राय जानी और 284 संगठनों से बातचीत की गई। आज की स्थिति में, 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं। 2006 में, अगर सच्चर समिति ने 4.9 लाख वक्फ संपत्तियों से 12,000 करोड़ रुपए की कमाई का अनुमान लगाया था, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि ये संपत्तियां अब कितनी आय उत्पन्न कर रही होंगी। आज आप मार्केट रेट के हिसाब से अनुमान लगा सकते हैं।”
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना है। उन्होंने कहा कि इस सदन के माध्यम से देश की जनता को बताना चाहता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार पूरी तरह से लोकतांत्रिक नियमों का पालन करके आगे बढ़ रही है। वक्फ संपत्तियों के सही रखरखाव और जवाबदेही तय करने की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 70 साल तक किसने मुस्लिम समुदाय को डर में रखा? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक इस नीति को अपनाया, लेकिन अब जनता ने इसका परिणाम देख लिया है।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह वक्फ विधेयक कोई सामान्य कानून नहीं है। इस कानून को राजनीतिक फायदे के लिए हथियार बनाया जा रहा है। यह देश की विविधता को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने के लिए मोदी सरकार द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। लोकसभा में देर रात यह विधेयक पारित हुआ तो इसके पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े। इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि विभिन्न दलों के विरोध के बाद भी मनमानी से यह विधेयक लाया गया। भाजपा सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण की काफी बात कर रही है। सशक्तिकरण की बातें हो रही हैं। लेकिन सच्चाई सरकार के पांच साल के अल्पसंख्यक विभाग के बजट आवंटन से साफ है। वित्त वर्ष 2019-20 में इस विभाग का बजट आवंटन 4,700 करोड़ रुपये था जो घटकर 2023-24 में 2,608 करोड़ रह गया। वित्त वर्ष 2022-23 में बजट आवंटन 2,612 करोड़ रुपये था, जिसमें से 1,775 करोड़ रुपये का खर्च मंत्रालय नहीं कर पाया। कुल मिलाकर पांच साल में बजट मिला 18,274 करोड़ रुपये, जिसमें से 3,574 करोड़ खर्च नहीं हो पाए।
भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इस विधेयक को तैयार करने में पूरी गंभीरता से काम किया गया है, लेकिन इसके प्रावधानों को लेकर कुछ लोग गलतफहमी फैला रहे हैं। त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा, “नया मुल्ला प्याज ज्यादा खाता है, लेकिन यहां तो पुराना मुल्ला ज्यादा माल खा रहा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि देश में सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड अलग-अलग क्यों हैं? इतना ही नहीं, ताज महल तक पर वक्फ बोर्ड ने दावा ठोक दिया। उन्होंने कहा कि सरकार मुस्लिम समाज के कल्याण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “यह मुकाबला उन लोगों के बीच है जो समाज के विकास में विश्वास रखते हैं और उन लोगों के बीच जो सिर्फ अपना हित साधते हैं। हमारी सरकार गरीब मुस्लिम समाज के साथ है, न कि कट्टरपंथी वोटबैंक की राजनीति करने वालों के साथ।”
निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि वह अपनी संपत्ति जिसे चाहें, दान दे सकते हैं; उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। मान लीजिए मैं हिंदू हूं, मुस्लिम हूं, सिख हूं या ईसाई हूं और मेरे पास कोई संपत्ति है जिसे मैं दान में देना चाहता हूं, तो मुझे कौन रोक सकता है, कोई भी नहीं रोक सकता। 1954 और 1995 में जो प्रावधान किए गए, उनमें कहा गया था कि केवल मुसलमान वक्फ बना (दान दे) सकते हैं। कोई और व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी यहां वक्फ बोर्ड को दान नहीं दे सकता। साल 2013 में जो संशोधन लाया गया, उसने इस प्रतिबंध को समाप्त कर दिया। अब इस नए संशोधन विधेयक में यह कहा गया है कि केवल मुसलमान ही वक्फ दे सकते हैं। उन्होंने ऐसे अदालती फैसलों का जिक्र किया, जहां हिंदुओं ने अपनी जमीनें विभिन्न परियोजनाओं जैसे कि कब्रिस्तान आदि के लिए दान में दी हैं।
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “इस विधेयक में क्या ही स्वायत्तता बची है। इसमें सिर्फ सरकारी नियंत्रण बचा है। पुराने कानून में वक्फ बोर्ड के सीईओ का मुसलमान होना आवश्यक था। साथ ही, जिन दो व्यक्तियों के नाम बोर्ड देता था, उनमें से एक को नियुक्त करना आवश्यक था। वर्तमान विधेयक में ये प्रावधान शामिल नहीं हैं। कर्नाटक हिंदू रिलीजियस इंस्टीट्यूशन चैरिटेबल एंडोमेंट एक्ट, माता वैष्णो देवी श्राइन एक्ट, जगन्नाथ मंदिर एक्ट, सिख गुरुद्वारा एक्ट और उत्तर प्रदेश काशी विश्वनाथ टेंपल एक्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “मैं इस सम्मानित सभा से पूछना चाहूंगा कि क्या इनमें से एक में भी संबंधित समुदाय के अलावा किसी और को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया गया है? नए नवेले दोस्त” और तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि तिरुपति बोर्ड में गैर-हिंदू कैसे आ सकता है?”
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने कहा कि गाहे-बगाहे किसी पुरानी मस्जिद के नीचे कुछ चीजें ढूंढी जा रही हैं। इस तरह के माहौल में वक्फ संशोधन विधेयक लाने से सरकार की नीयत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। देश का माहौल कैसा है, इस पर एक नजर डालिए। कभी आर्थिक बहिष्कार की बात की जाती है, पूजा स्थल अधिनियम पर सवाल उठाया जाता है। इस तरह के माहौल में आपके विधेयक के मसौदे और नीयत दोनों पर सवालिया निशान लग जाता है। कई बार लगता है कि यह विधेयक बुलडोजर के लिए एक कानूनी कवर है।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसिर हुसैन ने कहा कि वक्फ का मायना दान है। कोई भी किसी को भी दान कर सकता है। उन्होंने कहा कि दान का कॉन्सेप्ट सिर्फ हमारे धर्म में नहीं है बल्कि हर धर्म में है। हमारे दान के मकसद से बनाए गए इदारों की देखरेख करने के लिए वक्फ बोर्ड बनाया गया है। सोशल मीडिया पर यह फैलाया जा रहा है कि मुस्लिमों के तुष्टीकरण के लिए वक्फ बोर्ड बनाया गया है। शायद इनको पता नहीं और शायद ये बोलना भी नहीं चाहते कि इस देश में एंडोमेंट बोर्ड है, इस देश में हिंदू रिलिजियस प्लेसिस एक्ट है, इस देश में एसजीपीसी है, टेंपल भी ट्रस्ट है, क्रिश्चियन के लिए काउंसिल और कॉरपोरेशन है। हर धर्म के मामलों के नियमन के लिए अलग-अलग एक्ट बनाए गए हैं।
महाराष्ट्र
न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक गबन के आरोपियों की संपत्ति जब्त

मुंबई: न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक से करोड़ों रुपये के गबन के मामले में मुंबई आर्थिक शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भी संपत्ति जब्ती की कार्यवाही शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने बताया कि गबन की रकम से प्राप्त संपत्तियों की पहचान करने के बाद उसे कुर्क कर जब्त कर लिया गया है। इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और इन आरोपियों की 21 अचल संपत्तियां पाई गई हैं, जिन्हें कुर्क करने की अनुमति दी गई है।
मुंबई शहर में 107 बीएनएसएस के तहत यह पहली कार्रवाई है जिसमें आरोपियों की संपत्ति जब्त की गई है। मुंबई एओडब्ल्यू ने कहा कि जब्त संपत्तियों से बरामद राशि का भी अनुमान लगाया जाएगा। मुंबई में हुए बैंक घोटाले के बाद ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई की है और आरोपियों की अन्य संपत्तियों का ब्योरा भी खंगाला जा रहा है।
राजनीति
मध्य प्रदेश के विभाग चुका रहे हैं पुरानी देनदारियां : मोहन यादव

भोपाल, 3 अप्रैल। मध्य प्रदेश का वित्तीय प्रबंधन सुधर रहा है और सरकार के तमाम विभाग अपनी पुरानी वर्षों से लंबित देनदारियों को चुकाने में लगे हैं। यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार के कुशल वित्तीय प्रबंधन के फलस्वरूप तमाम विभाग अपनी पुरानी देनदारियों को चुका रहे हैं। इससे सरकार ने बजट का जो पैमाना तय किया है, उसके अनुसार विभाग काम कर रहे हैं। दो दिन पहले ही उद्योग विभाग ने लगभग 5,225 करोड़ की धनराशि देते हुए पूरी देनदारी चुका दी है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने अपनी पुरानी देनदारियों को चुका दिया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में औद्योगिक विकास का सरकार ने जो संकल्प लिया है, कि जो भी उद्योग हमसे जुड़ेगा और उससे जो वादा किया है, उसे पूरा किया जाएगा। इसी क्रम में नए वित्तीय वर्ष, 1 अप्रैल 2025 को मध्य प्रदेश के ऊर्जा विभाग द्वारा सभी केंद्रीय कोयला कंपनियों की बकाया देनदारी का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। साथ ही हमने पावर जनरेशन कंपनी के चारों ताप विद्युत गृह द्वारा कुशल प्रबंधन के फलस्वरूप अब तक का सर्वाधिक 11.73 लाख मीट्रिक टन कोयले का भंडारण किया गया है, जिसका अग्रिम भुगतान कर दिया गया है।
इसी तरह राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मंत्रालय में सभी विभागों की समीक्षा बैठक की। मुख्य सचिव ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभागीय योजनाओं के लक्ष्य पूरा होने की जानकारी ली। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 की लक्ष्यपूर्ति के लिए दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने विजन 2047 के अंतर्गत विभागीय कार्य योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की और संकल्प पत्र में सभी विभागों से जुड़े संबंधित बिंदुओं पर चर्चा करते हुए उनकी वर्तमान स्थिति का भी आकलन किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले विषयों के क्रियान्वयन की समय-सीमा में सुनिश्चित की जाए। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए, केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले उपयोगिता प्रमाण पत्र एवं मांग स्थिति की भी जानकारी ली।
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