राजनीति
‘भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने वाले लोग जमानत पर बाहर हैं’: विपक्षी नेताओं पर बरसे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मध्य प्रदेश के शहडोल में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने सिकल सेल एनीमिया मुक्ति मिशन अभियान का उद्घाटन किया और आदिवासी समुदायों के जीवन में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। अपने भाषण के दौरान, पीएम मोदी ने विपक्षी दलों की एकता की भी आलोचना की और कहा कि जमानत पर बाहर आए भ्रष्ट लोग एक मंच पर एकजुट हो गए हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे व्यक्तियों, जो जमानत पर बाहर थे, के सहयोग के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की, जिसका अर्थ था कि उनके एक साझा मंच पर एक साथ आने से सार्वजनिक सेवा और नैतिक शासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठते हैं। प्रधानमंत्री ने आदिवासी समाज के महत्व को स्वीकार करते हुए रानी दुर्गावती की पवित्र भूमि पर उनके बीच उपस्थित होने के अवसर के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने रानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित की और सिकल सेल एनीमिया मुक्ति मिशन अभियान शुरू करने में उनकी प्रेरणा के महत्व पर जोर दिया। पीएम मोदी ने घोषणा की कि मध्य प्रदेश में एक करोड़ लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए जाएंगे, जिसमें गोंड और भील समाज सहित आदिवासी समुदाय इन पहल के प्राथमिक लाभार्थी होंगे। प्रधान मंत्री ने सिकल सेल एनीमिया, एक आनुवंशिक बीमारी, जो हर साल हजारों बच्चों और उनके परिवारों को प्रभावित करती है, से निपटने की तात्कालिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने पिछले 70 वर्षों से उपेक्षित इस बीमारी से निपटने की चुनौती स्वीकार की है। पीएम मोदी ने प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त की और इस बात पर जोर दिया कि सिकल सेल एनीमिया न केवल अत्यधिक दर्द का कारण बनता है बल्कि इसके महत्वपूर्ण सामाजिक और भावनात्मक प्रभाव भी होते हैं। भारत में सिकल सेल एनीमिया के उच्च प्रसार की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए, प्रधान मंत्री ने आदिवासी समुदायों के कल्याण को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। उन्होंने बीमारी से निपटने और आदिवासी समाज के समग्र कल्याण में सुधार के लिए ठोस योजनाओं और रणनीतियों को लागू करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्रः बीड में बस और कार की भीषण टक्कर, 5 लोगों की घटनास्थल पर मौत

महाराष्ट्र के बीड जिले के माजलगांव में रविवार को भीषण सड़क हादसा हो गया। तुलजापुर दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की कार और एसटी बस में टक्कर हो गई। इस दर्दनाक हादसे में कार सवार पांच लोगों की मौके पर ही मौत होने की प्राथमिक जानकारी सामने आई है, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, यह हादसा सुबह करीब 11 बजे खामगांव-पंढरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर माजलगांव तालुका के शिंदेवाड़ी फाटा के पास हुआ। हादसे में कार में सवार माजलगांव शहर के गजानन नामदास समेत 5 लोगों की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। इस हादसे से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खामगांव-पंढरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर माजलगांव-तेलगांव-धारूर मार्ग का निर्माण कार्य घटिया गुणवत्ता का होने के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। सड़क पर कई जगह ऊबड़-खाबड़ हिस्से हैं और बीच में दरारें भी पड़ गई हैं। स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है।
इसी तरह मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भीषण सड़क हादसा हुआ है। धान की बोरियों से लदा एक ट्रक पहाड़ी से नीचे उतरते समय अनियंत्रित होकर ऐतिहासिक शीतला माता मंदिर के पास दुकानों से जा टकराया। इस हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई और 25 लोग घायल हैं। हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने घायलों को अस्पताल के लिए भेजा।
वहीं, मध्य प्रदेश में जबलपुर-कटंगी रोड पर शनिवार को एक तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा पाटन थाना क्षेत्र में सैयद बाबा दरगाह के पास हुआ, जब जबलपुर से दमोह की ओर जा रहे एक ट्रक ने दो लोगों को ले जा रही एक मोटरसाइकिल और सड़क पर चल रहे एक पैदल यात्री को टक्कर मार दी। मृतकों की पहचान नरेंद्र यादव और मनीष बर्मन के रूप में हुई है, जबकि घायल व्यक्ति का नाम राहुल यादव है।
राष्ट्रीय समाचार
सीईसी को कोई नहीं बचा सकता, चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत: जयराम रमेश

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने रविवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) पर राजनीतिक दलों को आठ साल तक खोजने योग्य (सर्च करने लायक) मतदाता सूची न देकर ‘वोट चोरी’ में मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) को तुरंत रोकने की भी मांग की।
जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में कहा, “पिछले दो वर्षों से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार और दृढ़ता से यह मांग कर रहे हैं कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) सभी राजनीतिक दलों को खोजने योग्य (सर्च करने योग्य) प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराए। ईसीआई ने बार-बार इस मांग को ठुकरा दिया और 2018 में सर्च करने योग्य मतदाता सूची देना बंद कर दिया था, जब कांग्रेस को मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाता मिले थे। ‘वोट चोरी’ को संभव बनाने के लिए 8 वर्षों तक इस मांग को खारिज किया गया।”
कांग्रेस नेता ने कहा, “15 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने एक आदेश जारी किया कि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दो साल के अंतराल के बाद फिर से शुरू हुए ‘विशेष सारांश पुनरीक्षण’ (एसएसआर) के लिए राजनीतिक दलों को सर्च करने योग्य प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाएगी। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि पूरा देश ‘वोट चोरों’ के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है।”
जयराम रमेश ने आरोप लगाया, “हर बार जब ‘वोट चोरी’ पकड़ी जाती है, तो केंद्र सरकार कोई नया हथकंडा अपनाती है, जैसे कि सर्च करने योग्य मतदाता सूची को रोकना, फर्जी मतदाताओं को जोड़ना या एसआईआर का इस्तेमाल करना लेकिन इस बार ऐसा नहीं चलेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को कोई नहीं बचा सकता, जिन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करते हुए चुनाव आयोग में जनता के भरोसे और विश्वास को खत्म कर दिया है। उन्हें पद से हटना ही होगा। हालांकि सिर्फ इतना ही काफी नहीं होगा। भारतीय चुनाव आयोग और उसके आईटी सिस्टम में पूरी तरह से बदलाव (ओवरहॉल) करने की जरूरत है। एसआईआर की वजह से 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के संवैधानिक मताधिकार को खतरे में डाल दिया है, इसे तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय समाचार
सिरसा थाना ग्रेनेड हमला मामला: एनआईए ने 4 और आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया आरोप-पत्र

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने हरियाणा के पंचकूला स्थित विशेष अदालत में 4 आरोपियों के खिलाफ एक पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया है। एजेंसी ने रविवार को बताया कि आरोप-पत्र में साजिश और इन 4 आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं का विवरण दिया गया है।
एजेंसी ने बताया कि यह मामला 25 नवंबर 2025 को हरियाणा के सिरसा में महिला पुलिस स्टेशन के पास हुए ग्रेनेड हमले से जुड़ा है। इसमें पंचकूला स्थित विशेष एनआईए अदालत में शनिवार को आरोपी राजबीर सिंह उर्फ फौजी, वेद प्रकाश उर्फ पम्मा, जीवनजोत सिंह ग्रेवाल उर्फ ज्योति और चिराग ठकराल के खिलाफ पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया गया।
एनआईए के अनुसार, यह मामला मूल रूप से 26 नवंबर 2025 को हरियाणा के सिरसा स्थित सिविल लाइन पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। बाद में, 30 दिसंबर 2025 को एनआईए ने इसे फिर से दर्ज किया।
मामले में इसी साल 24 मई को एनआईए ने पंचकूला की विशेष अदालत में 9 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जिनमें पाकिस्तानी नागरिक शहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच भी शामिल थे।
एजेंसी ने कहा कि पूरक आरोप-पत्र में इस साजिश और इन 4 आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं का विवरण दिया गया है। साथ ही, आगे की जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों को भी इसमें शामिल किया गया है। इन लोगों पर भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 61(2) (धारा 109 के साथ पठित) और 238, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम-1908 की धारा 5 और 6, तथा यूए(पी) अधिनियम-1967 की धारा 18, 18बी और 20 के तहत आरोप लगाए गए हैं।
एजेंसी के अनुसार, जांच से पता चला है कि आरोपी राजबीर सिंह उर्फ फौजी कोऑर्डिनेटर के रूप में काम कर रहा था। वह भारत में हथियारों, हैंड ग्रेनेड और नशीले पदार्थों को इकट्ठा करने और उनकी आवाजाही के लिए विदेशों में बैठे हैंडलरों के साथ मिलकर काम करता था। आरोपी चिराग ठकराल, जीवनजोत सिंह ग्रेवाल उर्फ ज्योति और वेद प्रकाश उर्फ पम्मा ने आरोपी राजबीर सिंह उर्फ फौजी के निर्देशों पर काम करते हुए सिरसा के महिला पुलिस स्टेशन पर हुए ग्रेनेड हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
यह हमला शहजाद भट्टी नेटवर्क के सदस्यों की ओर से एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया था। इसका मकसद पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुंचाना और आम जनता के बीच दहशत और डर पैदा करना था। एनआईए की जांच में इस साजिश के तार विदेशों में बैठे उन हैंडलरों से जुड़े पाए गए हैं, जो सीमा पार से आतंकी नेटवर्क चला रहे हैं।
एजेंसी ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच जारी है, ताकि साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जा सके और इस हमले के पीछे के पूरे सीमा पार आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
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