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Friday,02-October-2026
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ओपनएआई ने एआई एजेंट से जुड़ी घटनाओं को लेकर 100 से अधिक संगठनों को किया अलर्ट

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अमेरिका स्थित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ओपनएआई ने कहा है कि उसने अपने एआई एजेंट्स से जुड़ी अनधिकृत गतिविधियों की घटनाओं के बारे में 100 से अधिक संगठनों को सूचित किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब स्वायत्त एआई सिस्टम से जुड़े जोखिमों को लेकर एआई लैब्स पर निगरानी बढ़ रही है।

चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी के अनुसार, वह अपने एआई मॉडलों से जुड़ी गतिविधियों की व्यापक समीक्षा कर रही है। यह समीक्षा हगिंग फेस से जुड़ी एक घटना के बाद की जा रही है।

कंपनी ने आगे बताया कि इस समीक्षा के तहत वह करीब 50 पेटाबाइट डेटा का भी विश्लेषण कर रही है, ताकि इस गतिविधि के पूरे दायरे का पता लगाया जा सके।

यह कदम एआई उद्योग में एआई एजेंट्स से जुड़ी घटनाओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। इन घटनाओं में एआई एजेंट्स ने अपने निर्धारित उपयोग से आगे बढ़कर कुछ कार्रवाई की थीं।

ओपनएआई ने कहा, “कुछ मामलों में मॉडलों ने इंटरनेट एक्सेस का अनपेक्षित तरीकों से इस्तेमाल किया या बाद में देखने पर ऐसा लगा कि उन पर आदर्श प्रतिबंध लागू नहीं थे।”

इसके अलावा, कंपनी ने कहा कि उसने पिछले कई महीनों में ऐसी घटनाओं को रोकने या शुरुआती चरण में उनकी पहचान करने के लिए नए तकनीकी और परिचालन उपाय लागू किए हैं।

ओपनएआई ने इससे पहले कहा था कि डेटा के बड़े पैमाने और समीक्षा में शामिल काम को देखते हुए इस प्रक्रिया को पूरा होने में कई महीने लग सकते हैं।

कंपनी ने कहा कि हगिंग फेस से जुड़ी घटना अब तक उसके द्वारा पहचानी गई उसके एआई मॉडलों की अनधिकृत गतिविधि का सबसे गंभीर मामला है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब एआई कंपनियां तेजी से ऐसे मॉडल तैनात कर रही हैं जो इंटरनेट से जुड़े टूल्स का इस्तेमाल करने और सीमित मानवीय हस्तक्षेप के साथ कार्य करने में सक्षम हैं। इससे इस बात को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं कि ऐसे सिस्टम की निगरानी और नियंत्रण किस तरह किया जा सकता है।

इससे पहले सितंबर में आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि एआई कंपनी ने एक नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल की योजनाबद्ध रिलीज रद्द कर दी थी। परीक्षणों में पाया गया था कि मॉडल यूजर के निर्देशों से आगे जाकर कार्रवाई कर सकता था और अपने द्वारा किए गए कार्यों का सटीक विवरण देने में विफल हो सकता था।

हालांकि, बाद में कंपनी ने अपने प्रमुख मॉडल की तुलना में पांचवें हिस्से की लागत पर मिड-रेंज एआई मॉडल ‘जीपीटी-6.1 एसओएल’ लॉन्च किया।

व्यापार

गांधी जयंती के चलते भारतीय शेयर बाजार बंद, एनएसई और बीएसई पर नहीं होगा कारोबार

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भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को गांधी जयंती के चलते बंद रहेगा। इस दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के सभी सेगमेंट में कारोबार नहीं होगा।

दोनों एक्सचेंजों पर इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी), करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग आज बंद रहेगी।

कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट भी सुबह और शाम दोनों सत्र में बंद रहेगा।

भारतीय शेयर बाजार 3 और 4 अक्टूबर को शनिवार और रविवार होने के चलते 5 अक्टूबर को खुलेगा।

इसके अलावा, भारतीय शेयर बाजार में अगली छुट्टी दशहरा के अवसर पर 20 अक्टूबर को होगी। वहीं, 10 नवंबर को दिवाली-बलिप्रतिपदा, 24 नवंबर को प्रकाश गुरपर्व ​​और 25 दिसंबर को क्रिसमस पर शेयर बाजार बंद रहेगा।

भारतीय शेयर बाजार ऊंची ऊर्जा की कीमतें और बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में वृद्धि के चलते गुरुवार को लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान निफ्टी 198.50 अंक या 0.88 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,421.95 पर बंद हुआ।

निफ्टी में बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, श्रीराम फाइनेंस, टाटा स्टील, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, आयशर मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई लाइफ, मैक्स हेल्थ और टीसीएस के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली।

जानकारों के मुताबिक, बाजार में गिरावट की मुख्य वजह बाहरी कारण रहे हैं; बॉन्ड यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं, जिससे 2026-27 के आर्थिक आउटलुक को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं, देश के भीतर भी निवेशक दूसरी तिमाही के नतीजों और अगले हफ्ते आने वाली आरबीआई की पॉलिसी को लेकर सतर्क हैं।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि उम्मीद है कि दूसरी तिमाही की कमाई पहली तिमाही के मुकाबले कमजोर रहेगी, क्योंकि पहली तिमाही में ऑपरेटिंग कॉस्ट के असर का फायदा मिला था, जो इस बार शायद वैसा न हो।

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व्यापार

बड़ी आईटी कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं मिड-साइज आईटी कंपनियां, चुनौतियों के बावजूद मजबूत संभावनाएं: रिपोर्ट

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वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितताओं और जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जेन-एआई) के प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बावजूद, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मिड-साइज आईटी कंपनियों के अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना है। यह बात ब्रोकरेज फर्म नुवामा की एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही के दौरान आईटी सेवाओं की कुल मांग का माहौल व्यापक रूप से स्थिर बना रहा। हालांकि सितंबर में वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बिगड़ने से कारोबारी भावना पर कुछ असर जरूर पड़ा है।

नुवामा का मानना है कि आगामी तिमाही नतीजों के दौरान आईटी कंपनियों का प्रबंधन वैश्विक तनाव, कमजोर व्यापक आर्थिक वातावरण और जेन-एआई के बदलते प्रभाव को लेकर सतर्क रुख अपनाएगा। हाल के महीनों में इन कारकों ने निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले नौ महीनों में आईटी इंडेक्स में लगभग 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे प्लेटफॉर्म आधारित जेन-एआई से संभावित व्यवधान और खाड़ी क्षेत्र से जुड़ी अनिश्चितताओं को प्रमुख वजह माना गया है।

हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद नुवामा ने आईटी सेवा क्षेत्र को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जेन-एआई आईटी कंपनियों के मौजूदा बिजनेस मॉडल के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इससे नए अवसर पैदा होने की संभावना अधिक है।

ब्रोकरेज ने कहा, “हम लगातार मानते हैं कि आईटी सर्विसेज मॉडल आगे भी मजबूत बना रहेगा और जेन-एआई का प्रभाव इस उद्योग के लिए बड़े अवसरों का रास्ता खोलेगा।”

रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि अधिकांश आईटी कंपनियों के मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है। परिचालन दक्षता बढ़ाने और लागत नियंत्रण उपायों का लाभ कंपनियों को मिलने की उम्मीद है।

हालांकि कुछ कंपनियां अपनी राजस्व वृद्धि के अनुमान में बदलाव कर सकती हैं, लेकिन नुवामा का मानना है कि मार्जिन संबंधी मार्गदर्शन में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।

ब्रोकरेज ने डॉलर-रुपया विनिमय दर को लेकर भी अपना अनुमान संशोधित करते हुए 93 रुपए प्रति डॉलर से बढ़ाकर 95 रुपए प्रति डॉलर कर दिया है। साथ ही मूल्यांकन के लिए वित्त वर्ष 2028 से वित्त वर्ष 2029 के औसत प्राइस-टू-अर्निंग (पी/ई) मल्टीपल्स को आधार बनाया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन मध्यम और लंबी अवधि में आईटी सेवा क्षेत्र की संभावनाएं मजबूत दिखाई देती हैं। स्थिर मांग, डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं में बढ़ता निवेश और एआई-आधारित समाधान आने वाले वर्षों में उद्योग के लिए नए विकास अवसर पैदा कर सकते हैं।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत और फ्रांस ने व्यापार और निवेश सहयोग को नई गति देने को लेकर की चर्चा, एफटीए से लेकर यूपीआई तक पर हुई अहम बातचीत

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने अमेरिका में आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान फ्रांस के विदेश व्यापार और आर्थिक आकर्षण मामलों के मंत्री निकोलस फोरिसिएर के साथ मुलाकात कर दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री गोयल ने बताया कि बैठक में भारत और फ्रांस के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। चर्चा का मुख्य फोकस भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (इंडिया-ईयू एफटीए) को आगे बढ़ाने, भारत में एयरोस्पेस विनिर्माण सहयोग का विस्तार करने, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के एकीकरण और संयुक्त नवाचार पहलों को बढ़ावा देने पर रहा।

उन्होंने कहा कि वह इस वर्ष के अंत में फ्रांसीसी मंत्री के भारत दौरे का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं, जहां दोनों देश द्विपक्षीय आर्थिक एजेंडा को आगे बढ़ाने पर और विस्तार से चर्चा करेंगे।

फ्रांस के अलावा पीयूष गोयल ने कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनींदर सिद्धू के साथ भी बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच प्रस्तावित कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) पर चल रही वार्ताओं की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने बातचीत को तेज करने और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

गोयल ने सऊदी अरब के वाणिज्य मंत्री माजिद बिन अब्दुल्ला अल-कसाबी के साथ भी मुलाकात की। इस बैठक में प्रस्तावित भारत-गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) मुक्त व्यापार समझौते और व्यापार एवं निवेश सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई।

इसके अलावा, दक्षिण कोरिया के व्यापार मंत्री पार्क जंग-सुंग के साथ हुई बैठक में भारत-दक्षिण कोरिया सीईपीए को अपग्रेड करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया। वार्ता के दौरान संतुलित व्यापार वृद्धि, भारतीय कृषि, फार्मास्यूटिकल और समुद्री उत्पादों की बेहतर बाजार पहुंच तथा भारत में दक्षिण कोरियाई विनिर्माण निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

ये बैठकें जी20 सम्मेलन के दौरान गोयल की अन्य प्रमुख वैश्विक नेताओं के साथ हुई चर्चाओं के बाद हुईं। उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर, यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त मारोस शेफचोविच, ब्राजील के विदेश मंत्री मॉरो विएरा, मेक्सिको के अर्थव्यवस्था सचिव मार्सेलो एब्रार्ड और पोलैंड के वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमांस्की सहित कई नेताओं से भी मुलाकात की।

इन बैठकों में मुक्त व्यापार समझौते, निवेश प्रवाह, बाजार पहुंच, डब्ल्यूटीओ सुधार, तकनीकी सहयोग और वैश्विक आर्थिक साझेदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इससे स्पष्ट है कि भारत प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और क्षेत्रीय समूहों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

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