राजनीति
भाजपा उम्मीदवारों की पहली सूची पर जेपी नड्डा ने किया दावा – प्रचंड बहुमत के साथ विजयी होंगे भाजपा के सभी उम्मीदवार
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उत्तर प्रदेश के हर वर्ग के विकास एवं उनके कल्याण के लिए कृत संकल्पित होने का दावा करते हुए कहा है कि जनता के आशीर्वाद व समर्थन से भाजपा के सभी उम्मीदवार, प्रचंड बहुमत के साथ विधान सभा चुनाव में जीत हासिल करेंगे।
शनिवार को भाजपा द्वारा जारी की गई उम्मीदवारों की पहली सूची में टिकट पाने वाले नेताओं को बधाई देते हुए नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता ने समाज के हर वर्ग के लिए 24 घंटे तत्परता से काम किया है और चुनाव में पार्टी को जनता का आशीर्वाद मिलेगा।
शनिवार को पार्टी राष्ट्रीय मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा 107 उम्मीदवारों की पहली सूची को जारी करने के बाद घोषित उम्मीदवारों को बधाई देते हुए नड्डा ने ट्वीट कर कहा , आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रथम एवं द्वितीय चरण के लिए आज जिन उम्मीदवारों का नाम घोषित हुआ है, उन सभी को बधाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता ने समाज के हर वर्ग के लिए 24 घंटे तत्परता से काम किया है।
नड्डा ने उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने का दावा करते हुए अगले ट्वीट में कहा , भाजपा, उत्तर प्रदेश के हर वर्ग के विकास एवं उनके कल्याण के लिए कृत संकल्पित है। मुझे ये पूर्ण विश्वास है कि जनता के आशीर्वाद व समर्थन से भाजपा के सभी उम्मीदवार, प्रचंड बहुमत के साथ विजयी होंगे।
आपको बता दें कि , भाजपा ने अपनी पहली सूची में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर शहर और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को सिराथू से चुनावी मैदान में उतारा है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल: भारी बारिश का अलर्ट, टूरिज्म बोर्ड ने यात्रा संबंधी चेतावनी जारी की

नेपाल टूरिज्म बोर्ड (एनटीबी) ने पर्यटकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। मौसम विभाग के हवाले से चेतावनी दी गई है कि 25 से 27 सितंबर के बीच देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
26 अगस्त को ही नेपाल में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई थी। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, मंगलवार शाम तक इस बाढ़ में 1,451 लोगों की मौत हो गई थी और 5,705 लोग लापता हो गए थे, इनमें 636 विदेशी भी शामिल हैं।
मंगलवार को ही जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग (डीएचएम) ने शुक्रवार से रविवार तक पूर्वी कोशी, दक्षिणी मधेश, मध्य बागमती और पश्चिमी सुदूरपश्चिम प्रांतों के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। कर्णाली, गंडकी और लुंबिनी समेत पश्चिमी प्रांतों में भी गरज-चमक के साथ बौछार पड़ने का अनुमान लगाया है। इन्हीं सब हालात को देखते हुए एनटीबी ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।
एनटीबी ने अपनी एडवाइजरी में कहा, “नदी घाटियों के पास पहाड़ी और ज्यादा ऊंचे इलाकों में जाने वाले पर्यटकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, क्योंकि वहां मौसम तेजी से बदल सकता है और ऊंचे इलाकों में बर्फबारी भी हो सकती है।”
भोटे कोशी और त्रिशूली नदी बेसिन इलाके में कई पर्यटक 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ का शिकार हुए थे।
बोर्ड ने यात्रियों को सलाह दी कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की ताज़ा जानकारी और आधिकारिक सलाह देख लें और सड़क, फ़्लाइट और ट्रेकिंग-रूट की स्थितियों के बारे में अपडेट रहें।
इसने यात्रियों को यह भी सलाह दी कि वे खराब मौसम से प्रभावित या ज़्यादा जोखिम वाले इलाकों में जाने से बचें। सलाह में कहा गया है, “नदियों, झरनों, खड़ी ढलानों और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की आशंका वाले इलाकों के पास खास सावधानी बरतें।”
पर्यटन बोर्ड ने यात्रियों से यह भी कहा कि वे असुरक्षित मौसम में ट्रेकिंग, पर्वतारोहण और दूसरी आउटडोर गतिविधियों से बचें।
उन्होंने कहा, “स्थानीय अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों, पर्यटन पेशेवरों और अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और मौसम की स्थिति व टूर ऑपरेटरों की सलाह के आधार पर पहले से ही सुरक्षित जगहों पर रहें या वहां चले जाएं।”
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र यूसीसी कमेटी से पूर्व जज के इस्तीफे पर जयराम रमेश बोले-‘हर राज्य का अलग यूसीसी संविधान की भावना के खिलाफ’

महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित समिति से हाईकोर्ट के एक पूर्व जज के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संचार) और सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि इस इस्तीफे ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और समिति के कामकाज पर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि क्या संविधान सभा ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें हर राज्य अपना अलग-अलग समान नागरिक संहिता बनाए? इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। क्या डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान निर्माताओं ने कभी सोचा था कि एक राजनीतिक दल की राजनीतिक चालों के हिसाब से राज्य अलग-अलग यूसीसी बनाने की होड़ करेंगे? इसका जवाब भी नहीं है।
कांग्रेस नेता ने 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 17 जून 2016 को मोदी सरकार ने ही यूसीसी के सवाल को विस्तृत अध्ययन के लिए विधि आयोग के पास भेजा था। आयोग ने व्यापक रिसर्च के बाद 31 अगस्त 2018 को अपना कंसल्टेशन पेपर प्रकाशित किया था। इसके पेज 7 के पैराग्राफ 1.15 में स्पष्ट कहा गया था कि “इस स्तर पर समान नागरिक संहिता बनाना न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।” आयोग ने अलग-अलग पारिवारिक कानूनों में मौजूद भेदभाव को दूर करने की सिफारिश की थी।
रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने उसी आयोग की सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया, जिसे उसने खुद जिम्मा सौंपा था क्योंकि तथ्य उसके राजनीतिक एजेंडे से मेल नहीं खाते थे। पिछले तीन वर्षों में भाजपा शासित राज्यों ने यूसीसी के अपने-अपने वर्जन जबरन पारित कराए हैं। उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू हो गया जबकि गुजरात में 24 मार्च 2026, असम में 27 मई 2026 और मध्य प्रदेश में 21 जुलाई 2026 को विधानसभा में विधेयक पारित किया गया।
उन्होंने कहा कि ये राज्यस्तरीय यूसीसी एक जैसे भी नहीं हैं। इनमें अलग-अलग प्रावधान, अलग-अलग दंड और कई छूट हैं। उत्तराखंड का यूसीसी कई पितृसत्तात्मक परंपराओं को आज भी जारी रखे हुए है और कानून का पालन करने वाले निवासियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर रहा है।
जयराम रमेश ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। एनडीए के बाकी दलों की आवाज को दबा दिया गया है। कांग्रेस के अनुसार, मोदी सरकार के लिए यूसीसी कोई कानूनी सुधार नहीं बल्कि विभाजन, व्यवधान और ध्यान भटकाने का औजार है, जो समाज को स्थायी ध्रुवीकरण में बनाए रखने का साधन है।
राजनीति
अखिलेश का दावा, एसआईआर पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक

चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर सामने आए मतभेद ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों को अपनी जानकारी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए हैं। इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े किए और सर्वोच्च न्यायालय से मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले।”
ज्ञात हो कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों के दौरान तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग के भीतर ही एसआईआर से जुड़े कई अहम फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे। ये आपत्तियां आयोग के दो चुनाव आयुक्तों-सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज कराई गईं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की देशव्यापी प्रक्रिया तीनों चुनाव आयुक्तों की निगरानी में चल रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई। इनमें एक ही दिन चार बार आपत्ति दर्ज किए जाने का भी उल्लेख है। दोनों चुनाव आयुक्तों का कहना था कि संबंधित फैसले या आदेश उनकी जानकारी अथवा सहमति के बिना लिए या जारी किए गए। इन आपत्तियों का दायरा निर्वाचन आयोग के उन महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़ा है, जिनका सीधा संबंध मतदाता के अधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से है।
इनमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाना और हटाए गए नामों को दोबारा बहाल करना, एसआईआर के दौरान नाम बहाल किए जाने के आदेशों के खिलाफ अपील की प्रक्रिया तथा पूरी मतदाता सूची के डेटा की कस्टडी और सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों में दर्ज आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त को भी भेजी गई थीं।
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